Solution:न्यायमतानुसारं प्रमेयेषु परिगणितौ आत्मा, बुद्धिः स्तः । न्यायमत के अनुसार प्रमेयों में परिगणित आत्मा, बुद्धि है। प्रमा का विषय प्रमेय होता है। जिसके 'ज्ञान' से निःश्रेयस (मोक्ष) की प्राप्ति में सहायता प्राप्त होता है। प्रमेय की संख्या 12 हैं- (1) आत्मा (2) शरीर (3) इन्द्रिय (4) अर्थ (5) बुद्धि (6) मन (7) प्रवृत्ति (8) दोष (9) प्रेत्यभाव (10) फल (11) दुःख (12) अपवर्ग।
आत्मा- 'तत्रात्मत्वसामान्यवानात्मा' आत्मत्व जाति (सामान्य) जिसमें रहती है वह आत्मा है। आत्मा देह, इन्द्रिय से भिन्न है, प्रत्येक शरीर में पृथक-पृथक है, विभु और नित्य है। उस आत्मा का मानस प्रत्यक्ष होता है। 'स च मानसप्रत्यक्षः'।
बुद्धि- अर्थप्रकाशो बुद्धिः अर्थ का ज्ञान बुद्धि है। बुद्धि के दो भेदअनुभव तथा स्मरण ।