Solution:नाट्यशास्त्रानुसारं नाट्यमण्डपः त्रिविधिः भवति। अर्थात् नाट्यशास्त्र के अनुसार नाट्य मण्डप तीन प्रकार के हैं। नाटकों के संबंध में शास्त्रीय जानकारी को नाट्यशास्त्र कहते हैं। नाट्यशास्त्र के रचयिता भरतमुनि हैं। संगीत, नाटक, और अभिनय के सम्पूर्ण ग्रन्थ के रूप में भरतमुनि के नाट्यशास्त्र का आज भी बहुत सम्मान है
उनका मानना है कि नाट्यशास्त्र में केवल नाट्य रचना के नियमों का आकलन नहीं होता बल्कि अभिनेता रंगमंच और प्रेक्षक इन तीनों तत्वों की पूर्ति के साधनों का विवेचन होता है। 36 अध्यायों में भरतमुनि ने रंगमंच, अभिनेता, अभिनय, नृत्यगीतवाय, दर्शक, सम्बन्धित सभी तथ्यों का विवेचन किया है।
उपर्युक् कथन के अनुसार भरतमुनि ने तीन प्रकार के नाट्य मण्डप बताये हैं- (1) विकृष्ट (2) चतुरस्त्र (3) त्रयत्र। इनके भी भेद बताए गये हैं। मंच पर रंगपीठ, रंगशीर्ष, नेपथ्य मन्तवारिणी, जवनिका तिरस्करणी आदि की व्यवस्था एक पूरी प्रस्तुति परिकल्पना को, सौन्दर्य बोध को व्यंजित करती है।