यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2023 (संस्कृत)

Total Questions: 100

41. वीररसप्रधानौ ग्रन्थौ स्तः -

(A) अभिज्ञानशाकुन्तम्  (B) मुद्राराक्षसम् (C) वाल्मीकिरामायणम् (D) शिशुपालवधम्
उपर्युक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत -

Correct Answer: (c) B, D केवलम्
Solution:

वीररस प्रधानौ ग्रन्थौ मुद्राराक्षसम्, शिशुपालवधम् ग्रन्थौ स्तः । वीर रस प्रधान ग्रन्थ मुद्राराक्षसम् एवं शिशुपालवधम् है। मुद्राराक्षस विशाखदत्त की रचना है जो सात अंगों में विभक्त है।

शिशुपालवधम् महाकवि माघ की एकमात्र रचना है जो 20 सर्गों में विभक्त है इसकी गणना बृहत्त्रयी में की जाती है। अभिज्ञान शाकुन्तलम् शृंगार रस प्रधान नाटक है। वाल्मीकि रामायणम् करुण रस प्रधान महा काव्य है।

42. 'वाच्य एव वाक्यार्थः इति मतं प्रतिपादयन्ति -

Correct Answer: (d) अन्विताभिधानवादिनः
Solution:

'वाच्य एव वाक्यार्थः' इति मतं प्रतिपादयन्ति-
अन्विताभिधानवादिनः
'वाच्य एव वाक्यार्थः' यह मत 'अन्विताभिधानवाद' के द्वारा प्रतिपादित है।
कुमारिल भट्ट के शिष्य प्रभाकर ने अपने गुरु के अभिहितान्वयवाद' के विरुद्ध सबसे पहले इस मत का प्रतिपादन किया। 'प्रभाकर मीमांसा' में माना गया है कि अर्थ का ज्ञान केवल शब्द से नहीं, विधिवाक्य से होता है।

जो शब्द किसी आज्ञापरक वाक्य में आया हो उसी शब्द की सार्थकता है। वाक्य से बहिष्कृत शब्द का कोई अर्थ नहीं। 'घड़ा' शब्द का तब तक कोई अर्थ नहीं है। जब तक इसका वाक्य में प्रयोग नहीं हुआ है। इसी सिद्धान्त को 'अन्विताभिधानवाद' कहते हैं।

43. बौद्धदर्शनस्य प्रतीत्यसमुत्पादे परिगणितौ निदानौ स्तः

(A) उपादानम् (B) निमित्तम् (C)विज्ञानम् (C) निदानम्
उपर्युक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत -

Correct Answer: (b) A, C केवलम्
Solution:

बौद्धदर्शनस्य प्रतीत्यसमुत्पादे परिगणितौ निदानौस्त : उपादानम्, विज्ञानम्। उपादान सांसारिक विषयों की उत्कृष्ट अभिलाषा।

विज्ञान यह व्यक्ति पूर्व जन्म के कर्मानुसार माता के गर्भ में आकर सर्वप्रथम चैतन्य अवस्था को प्राप्त करता है। इस चैतन्य की अवस्था में ही उसे इन्द्रियों तथा विषयों की जानकारी प्राप्त होती है।

भोग के विषयों की जानकारी प्रारम्भ हो जाती हो, जो सबसे पहली चेतना है।

44. विश्वनाथानुसारं गुणीभूतव्यङ्ग्यस्य कति भेदाः सन्तिघ

Correct Answer: (a) अस्टौ
Solution:

विश्वनाथानुसारं गुणीभूतव्यङ्ग्यस्य अष्टौ भेदाः सन्ति । विश्वनाथ के अनुसार 'गुणीभूतव्यङ्ग्य' के आठ भेद हैं। जहाँ पर वाच्यार्थ की तुलना में व्यंग्यार्थ प्रधान या अधिक महत्वपूर्ण न होकर गौण होता है, वहाँ पर 'गुणीभूत व्यंग्य' माना जाता है।
गुणीभूत व्यंग्य के आठ भेद हैं -
1. अगूढ़ व्यंग्य 3. अस्फुट व्यंग्य 2. अपरांग व्यंग्य 4. असुन्दर व्यंग्य 5. संदिग्धप्राधान्य 6. तुल्यप्राधान्य 7. काक्वाक्षिप्त व्यंग्य 8. वाच्यसिद्ध्यंग व्यंग्य

45. अद्वैतवेदान्तमते अज्ञानमस्ति -

(A) भावरूपम् (B) अभावरूपम्  (C) त्रिगुणात्मकम् (D) चिदात्मकम्
उपर्युक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत -

Correct Answer: (c) A, C केवलम्
Solution:

अद्वैतवेदान्तमते अज्ञानम् अस्ति -
भावरूपम्, त्रिगुणात्मकम्।
अज्ञान - अज्ञान तो सत् और असत् दोनों से विलक्षण होने से अनिर्वचनीय, त्रिगुणात्मक, ज्ञान का विरोधी तथा भाव रूप से 'यत्किञ्चित्' ऐसा कहते हैं।
'अज्ञानं तु सदसद्भयामनिर्वचनीयं त्रिगुणात्मकं ज्ञानविरोधि भावरूपं यत्किञ्चिदिति ।
अज्ञान के दो भेद है। समष्टि और व्यष्टि 

समष्टि - यह अज्ञान समष्टि के अभिप्राय से एक है और व्यष्टि के अभिप्राय से अनेक कहा जाता है। समष्टि शब्द का प्रयोग यहाँ समुदाय, समूह या संघात अर्थ की अभिव्यक्ति के लिए हुआ है।

व्यष्टि - यह एक का सूचक है। व्यष्टि का अभिप्राय वृक्ष है। इसी प्रकार एक जीव में स्थित अज्ञान का कथन उसके व्यष्टिरूप को प्रकट करता है।

46. यथोचितं मेलनं कुरुत -

सूची-I (सम्प्रदाय)सूची-II (आचार्य)
A. रससम्प्रदायःI.भामहः
B. रीतिसम्प्रदायःII.आनन्दवर्द्धनः
C. अलङ्कारसम्प्रदायःIII.भरतमुनिः
D. ध्वनिसम्प्रदायःIV.वामनः
Correct Answer: (a)-(III), (B)-(IV), (C)-(I), (D)-(II)
Solution:

यथोचित मेलनं-

सूची-I (सम्प्रदाय)सूची-II (आचार्य)
A. रससम्प्रदायःIII.भरतमुनिः
B. रीतिसम्प्रदायःIV.वामनः
C. अलङ्कारसम्प्रदायःI.भामहः
D. ध्वनिसम्प्रदायःII.आनन्दवर्द्धनः

47. याज्ञवल्क्यस्मृत्यनुसारं व्यवहारस्य चतुष्पादान् यथाक्रमं योजयत -

(A) साध्यसिद्धिपादः (B) भाषापादः (C) उत्तरपादः (C) क्रियापादः
समुचितं विकल्पं चिनुत -

Correct Answer: (c) (B), (C), (D), (A)
Solution:

याज्ञवल्क्य स्मृत्यनुसारं व्यवहारस्य चतुष्पादान् यथाक्रमं अस्ति-भाषापादः उत्तरपादः क्रियापादः साध्यसिद्धिपादः ।
याज्ञवल्क्य स्मृति में तीन काण्ड हैं।
1. आचार काण्ड - इसमे तेरह प्रकरण है।
2. व्यवहारकाण्ड इसमें पच्चीस प्रकरण है।
3. इसमें छः प्रकरण है।
स्मृतियों में याज्ञवल्क्य स्मृति प्रसिद्ध स्मृति है। इसमें 1003 श्लोक है इस प्रकार विश्वरूप कृत बालक्रीड़ा, अपरार्क कृत याज्ञवल्कीय धर्मशास्त्र निबन्ध और विज्ञानेश्वर कृत मिताक्षरा टीका प्रसिद्ध है।

48. कौटिलीयार्थशास्त्रानुसारेण राज्यस्य द्वे अङ्गे स्तः -

(A) दूतः (B) अमात्यः (C) कोषः (D) पुरोहितः
उपर्युक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत -

Correct Answer: (a) B, C केवलम्
Solution:

कौटिलीयार्थशास्त्रानुसारेण राज्यस्य द्वे अङ्गे स्तः अमात्यः कोषः कौटिल्य अर्थशास्त्र के अनुसार अमात्य और कोष राज्य के दो अङ्ग हैं।

अमात्य- 'विभज्यामात्यविभवं देशकालौ च कर्म च। अमात्याः सर्व एवैते कार्याः स्युर्न तु मन्त्रिणः ।।'

कौटिल्य के अनुसार राजा को चाहिए कि वह सहपाठी आदि की भी सर्वथा अवहेलना न करे। उसके लिए वह परमावश्यक है कि वह विद्या, बुद्धि, साहस, गुण, दोष, देश, काल और पात्र का विचार करके ही अमात्यो की नियुक्ति करे 'किन्तु उन्हें अपना मंत्री कदापि न बनाये।

कोष- 'कोशमकोशः प्रत्युत्पन्नार्थकृच्छ्रः संगृह्णीयात्।' अर्थात् खजाने के कम हो जाने या अकस्मात् ही अर्थसङ्कट उपस्थित हो जाने पर राजा को कोष सञ्चय करना चाहिए।

49. अशोकशिलालेखेषु 'गिरनारशिलालेखाः कुत्र प्राप्यन्ते?

Correct Answer: (b) सौराष्ट्रे
Solution:

अशोकशिलालेखेषु 'गिरनारशिलालेखाः ।' सौराष्ट्र प्राप्यन्ते। अशोक शिला लेखों में 'गिरनार शिलालेख' सौराष्ट्र प्रान्त में है। गिरनार अभिलेख राजा रूद्रदामन का है जो जूनागढ़ (गुजरात राज्य) में स्थित है।

इनका शिलालेख उच्च कोटि के संस्कृत गद्य का स्वरूप प्रकट करता है जिसमें सुबन्धु, दण्डी और बाण की गद्यशैली का पूर्वरूप देखा जा सकता है। इसकी भाषा सरल और प्रवाहपूर्ण है।

50. असम्प्रज्ञातसमाधिः कतिविधः?

Correct Answer: (a) द्विविधः
Solution:

असम्प्रज्ञातसमाधिः द्विविधिः ।
समाधि दो प्रकार की होती है- सम्प्रज्ञात और असम्प्रज्ञात
असम्प्रज्ञात- 'विरामप्रत्ययाभ्यासपूर्वः संस्कार
शेषोऽन्यः ।'- सभी वृत्तियों के अस्त हो जाने पर चित्त का निरोध संस्कारमात्र शेष निरोध असम्प्रज्ञात समाधि है।
असम्प्रज्ञात समाधि के दो भेद