Solution:कौटिलीयार्थशास्त्रानुसारेण राज्यस्य द्वे अङ्गे स्तः अमात्यः कोषः कौटिल्य अर्थशास्त्र के अनुसार अमात्य और कोष राज्य के दो अङ्ग हैं।
अमात्य- 'विभज्यामात्यविभवं देशकालौ च कर्म च। अमात्याः सर्व एवैते कार्याः स्युर्न तु मन्त्रिणः ।।'
कौटिल्य के अनुसार राजा को चाहिए कि वह सहपाठी आदि की भी सर्वथा अवहेलना न करे। उसके लिए वह परमावश्यक है कि वह विद्या, बुद्धि, साहस, गुण, दोष, देश, काल और पात्र का विचार करके ही अमात्यो की नियुक्ति करे 'किन्तु उन्हें अपना मंत्री कदापि न बनाये।
कोष- 'कोशमकोशः प्रत्युत्पन्नार्थकृच्छ्रः संगृह्णीयात्।' अर्थात् खजाने के कम हो जाने या अकस्मात् ही अर्थसङ्कट उपस्थित हो जाने पर राजा को कोष सञ्चय करना चाहिए।