Solution:अधस्तनषु विकृतिपाठान् यथाक्रम योजयत् जटा, माला, शिखा, रेखा।
अपौरुषेय एवं ईश्वरोक्त वाणी वेद-शब्द राशि को सुरक्षित तथा पूर्णतः अपरिवर्तित रूप में मानव समाज के कल्याण के लिए अक्षुण्ण रखने हेतु ऋषियों ने इसकी पाठ विधियों का उपदेश किया है।
ये सभी पाठ ऋषियों के द्वारा दृष्ट हैं। अतः अपौरुषेय हैं। इनमें तीन प्रकृति पाठ तथा आठ विकृति पाठ हैं। संहितापाठ, पदपाठ तथा क्रमपाठ ये तीन प्रकृतिपाठ हैं। आठ विकृतिपाठ जटा, माला, शिखा, रेखा, ध्वज, दण्ड, रथ और घन ।