यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2023 (संस्कृत)

Total Questions: 100

51. संस्कृतनाटकेषु एतौ विदूषकौ स्तः-

(A) माधवः (B) मैत्रेयः (C) माधव्यः (D) चन्द्रापीडः
उपर्युक्तकथनस्यालोके अधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत -

Correct Answer: (a) B, C केवलम्
Solution:

संस्कृतनाटकेषु माधव्यः मैत्रेयः एतौ विदूषकौ स्तः । संस्कृतनाटको में माधव्य और मैत्रेय विदूषक है। माधव्य और मैत्रेय विदूषक की कोटि है। अभिज्ञान शाकुन्तलम् नाटक में 'माधव्य' नाम का विदूषक है।

→ मृच्छकटिकम् में 'मैत्रेय' नाम का विदूषक है।
→ चन्द्रापीड कादम्बरी का, माधव मालतीमाधव नाटक का नायक है।

नाटक विदूषक 
अभिज्ञान शाकुन्तलम् माढव्य / माधव्‍य 
विक्रमोर्वशीयम् माणवक
मालविकाग्निमित्रम् गौतम
मृच्छकटिकम् मैत्रेय 
रत्नावली वसन्तक

52. संस्कृतस्य 'शतम्' इति पदस्य कृते 'सतम्' इति पदं कस्यां भाषायां प्रयुज्यते ?

Correct Answer: (d) अवेस्ताभाषायाम्
Solution:

संस्कृतस्य 'शतम्' इति पदस्य कृते 'सतम्' इति पदं अवेस्ताभाषायाम् प्रयुज्यते ।
पूर्वी ईरानी भाषा को अवेस्ता कहा जाता है। इसका प्रतिनिधि साहित्य ग्रन्थ 'अवेस्ता' है। इसके रचयिता 'जरथुष्ट' हैं। कुछ लोग इसे 'अवेस्ती' या 'अवेस्तन' भी कहते हैं। वस्तुतः 'अवेस्ता' शब्द का अर्थ है- 'शास्त्र'।

संस्कृत के 'शतम्' पद को अवेस्ता भाषा में 'सतम्' लिखा जाता है।

53. अत्र कथनद्वयमस्ति। एकम् अभिकथनम् (A) अपरञ्च तस्य कारणम् (R) इति ।

अभिकथनम् (A): केनोपनिषदि हैमवती उमोपाख्यानां वर्णितमस्ति ।
कारणम् (R): 'न तत्र चक्षुर्गच्छति' इति केनोपनिषद्वचनमस्ति। उपर्युक्तम् अभिकथनं कारणञ्चाश्रित्य समुचितं विकल्पं चिनुत।

Correct Answer: (b) अभिकथनम् (A), कारणम् (R) उभयं सत्यम् । किन्तु कारणम् (R), अभिकथनम् (A) इत्यस्य समुचिता व्याख्या अस्ति ।
Solution:

अभिकथनम् केनोपनिषदि हैमवती उमोपाख्यानं वर्णितमस्ति । कारणम्-'नं तत्र चक्षुर्गच्छति' इति केनोपनिषिद्वचनमस्ति ।
अभिकथनम् (A) कारणम् (R) उभयं सत्यं किन्तु कारणम् (R),
अभिकथन (A) कारण (R) दोनों सत्य हैं किन्तु कारण (R) है।

54. निम्नलिखितेषु शब्दप्रादुर्भावस्योदाहरणमस्ति-

Correct Answer: (b) इतिहरि
Solution:

शब्दप्रादुर्भावस्योदाहरणम्-इतिहरि अस्ति। अर्थात् शब्दप्रादुर्भाव का उदाहरण इति हरि है।

55. तैत्तिरीयारण्यके कति प्रपाठकाः सन्तिः

Correct Answer: (b) 10
Solution:

तैत्तिरीयारण्यके 10 प्रपाठकाः सन्ति । तैत्तिरीयारण्यक में 10 प्रपाठक हैं। प्रत्येक प्रपाठकों का नाम उनके प्रथम पद के आधार पर किया गया है। इसमें कुल 170 अनुवाक हैं

सप्तम से नवम प्रपाठक को 'तैत्तिरीयोप-निषद्' कहते हैं। इसमें जल के चार रूप बनाया गया है- मेघ, विद्युत, गर्जन, वृष्टि। तैत्तिरीय आरण्यक में कुरूक्षेत्र, खाण्डव, पाञ्चाल, मत्स्य, काशी आदि के भौगोलिक नामों का उल्लेख है।

56. यथोचितं मेलनं कुरुत -

सूची Iसूची II
A. ज्ञानम्I. वचनमात्रे
B. तटीII. परिमाणमात्रे
C. द्रोणो व्रीहिःIII. लिङ्गमात्राद्याधिक्ये
D. बहवःIV. प्रातिपदिकार्थमात्रे
Correct Answer: (b) (A)-(IV), (B)-(III), (C)-(II), (D)-(I)
Solution:
क्रमपदसंबंधित सूत्र/अवस्था
(a)ज्ञानम्प्रातिपदिकार्थमात्रे
(b)तटीलिङ्गमात्राधिक्ये
(c)द्रोणोव्रीहिःपरिमाणमात्रे
(d)बहवःवचनमात्रे

अतः विकल्प (b) सही है।
'प्रातिपदिकार्थलिङ्ग परिमाणवचनमात्रे च प्रथमा ।' प्रथमा विभक्ति का उपयोग केवल शब्द का अर्थ बतलाने के लिए अथवा केवल लिङ्ग बतलाने के लिए अथवा परिमाण या वचन बतलाने के लिए होता है।

57. अधोलिखितं कथनद्वयम् आश्रित्य समुचितम् उत्तरं चिनुत।

अभिकथनम् (I): 'व्रीहीन् अवहन्ति' इत्यत्र प्रयोगविधिरस्ति।
अभिकथनम् (II): 'दध्ना जुहोति' इत्यत्र विनियोगविधिरस्ति ।
उपर्युक्तकथनस्यालोके आधोलिखितेषु विकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-

Correct Answer: (d) प्रथमं कथनम् (I) असत्यं किन्तु द्वितीयं कथनम् (II) सत्यम् अस्ति।
Solution:

अभिकथनम् (I) 'व्रीहीन् अवहन्ति' इत्यत्र प्रयोगविधिरस्ति। अभिकथनम् (II) 'दध्ना जुहोति' इत्यत्र विनियोगविधिरस्ति। प्रथमं कथनम् (I) असत्यं किन्तु द्वितीय कथनम् (II) सत्यम् अस्ति ।
इस प्रश्न में पहला कथन असत्य और दूसरा कथन सत्य है।
प्रयोगविधि- 'प्रयोगप्राशुभावबोधको विधिः प्रयोगविधिः जिस विधिवाक्य से प्रयोग को शीघ्र करने का बोध होता है उसे प्रयोगविधि कहते हैं। 'दध्ना जुहोति' प्रयोगविधि का उदाहरण है।

विनियोग विधि - 'अङ्गप्रधानसम्बन्धबोधको विधिर्विनियोगविधिः ।' अर्थात् अङ्गों के साथ सम्बन्ध बोधक विधि को विनियोगविधि कहते हैं। उदाहरण- दध्ना जुहोति ।

58. अधस्तनेषु विकृतिपाठान् यथाक्रमं योजयत-

(A) माला (B)शिखा (C) जटा (D) रेखा
समुचितं विकल्पं चिनुत -

Correct Answer: (c) (C), (A), (B), (D)
Solution:

अधस्तनषु विकृतिपाठान् यथाक्रम योजयत् जटा, माला, शिखा, रेखा।

अपौरुषेय एवं ईश्वरोक्त वाणी वेद-शब्द राशि को सुरक्षित तथा पूर्णतः अपरिवर्तित रूप में मानव समाज के कल्याण के लिए अक्षुण्ण रखने हेतु ऋषियों ने इसकी पाठ विधियों का उपदेश किया है।

ये सभी पाठ ऋषियों के द्वारा दृष्ट हैं। अतः अपौरुषेय हैं। इनमें तीन प्रकृति पाठ तथा आठ विकृति पाठ हैं। संहितापाठ, पदपाठ तथा क्रमपाठ ये तीन प्रकृतिपाठ हैं। आठ विकृतिपाठ जटा, माला, शिखा, रेखा, ध्वज, दण्ड, रथ और घन ।

59. अत्र कथनद्वयमस्ति। एकम् अभिकथनम् (A) अपरञ्च तस्य कारणम् (R) इति ।

अभिकथनम् (A): उच्चैः नीचैः कृष्णः श्रीः ज्ञानम् इत्यत्र प्रथमा विभक्तिः जायते ।
कारणम् (R): लिङ्गमात्राद्याधिक्यात्।
उपर्युक्तम् अभिकथनं कारणञ्चाश्रित्य समुचितं विकल्पं चिनुत।

Correct Answer: (c) अभिकथनम् (A), सत्यम्, कारणम् (R) असत्यम्।
Solution:

अभिकथनम् (A), उच्चैः नीचेः कृष्णः श्रीः, ज्ञानम् इत्यत्र प्रथमा विभक्तिः जायते।
कारणम् (R) लिङ्गमात्राद्याधिक्यात्।
अभिकथनम् (A), सत्यम्, कारणम् (R) असत्यम्
अभिकथन (A) सत्य है कारण (R) असत्य है।

'प्रातिपदिकार्थलिङ्गपरिमाणवचनमात्रे प्रथमा।' अर्थात् प्रथमा विभक्ति का उपयोग केवल शब्द का अर्थ बतलाने के लिए अथवा केवल लिङ्ग बतलाने के लिए अथवा परिमाण या वचन बतलाने के लिए होता है। अभिकथन (A), प्रथमा वि. के उदा. हैं।

कारण (R) सत्य नहीं है क्योंकि 'लिङ्गमात्र' केवल तटः, तटी, तटम उदाहरण की पुष्टि करता है।

60. भारतस्य सिंहमूर्तियुतस्य अशोकचिह्नस्य ग्रहणं कुतः ?

Correct Answer: (a) सारनाथाभिलेखात्
Solution:

भारतस्य सिंहमूर्तियुतस्य अशोकचिह्ननस्य ग्रहणं सारनाथाभिलेखात्।
सारनाथ अभिलेख का निर्माण अशोक ने करवाया था। इस स्तम्भ पर भारत का राष्ट्रीय चिह्न अंकित है। यह अभिलेख सिंहमूर्तियुक्त है। गिरनार अभिलेख रूद्र दामन का है, जो जूनागढ़ में स्थित है।