Solution:'वास्तव्यः' इत्यत्र वस्-धातौ: 'तव्यत्-प्रत्ययः कर्तरि अर्थ भवति । अर्थात् 'वास्तव्यः' यहाँ वस्धातु का तव्यत् प्रत्यय कर्ता अर्थ में होता है।
तव्यत्, तव्य, अनीयर, केलिमर्, यत्, क्यप् और ण्यत् ये सात कृत्य प्रत्यय कर्मवाच्य और भाववाच्य में ही प्रयुक्त होते हैं, कर्तृवाच्य में नहीं। 'तव्यत्तव्यानीयरः' सूत्र से चाहिए अर्थ में तव्यत् तव्य और अनीयर प्रत्यय होता है। वस् धातु से चाहिए अर्थ में तव्यत् प्रत्यय कर्म अर्थ में होता है।
अतः कर्म अर्थ में वास्तव्यः, गन्तव्यः, पठितव्यः आदि तथा भाव अर्थ में नित्य नपुंसकलिङ्में शब्द प्रयुक्त होते हैं-वास्तव्यम्, पठितव्यम् आदि।
Note : यहाँ पर विकल्प (b) सही है परन्तु आयोग ने (d) सही माना है।