Solution:प्रभाकरमते अष्टी पदार्थाः ।
प्रभाकर मत में आठ पदार्थ हैं। द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, समवाय, (परतन्त्रता) शक्ति, सादृश्य एवं संख्या। तैत्तिरीय ब्राह्मण, शतपथ ब्राह्मण आदि ग्रन्थ तथा श्रीत सूत्रों की समीक्षा से विदित होता है कि वैदिक वाक्यों में प्रतीयमान विरोध का परिहार करने के लिए ऋषि-महर्षियों ने जो छानबीन की वही विचारधारा मीमांसा के रूप में परिणत हुई। मीमांसा । कर्मकाण्ड विषयक वाक्यों के विरोध का परिहार करती है।
मीमांसा संम्प्रदाय तथा मीमांसा दर्शन का सूत्र के रूप में संकलन भगवान् जैमिनी ने किया है। इसके सम्बन्ध में दो बातें हैं- 1. भगवान् जैमिनि के समय में महर्षियों की जो विचार धारा थी
उसको लेकर किसी को पूर्वपक्ष में किसी को सिद्धान्त के रूप में रखवाकर तथा अपने अभिप्राय को मिलाकर मीमांसा दर्शन बनाया सभी दर्शन शास्त्रों की यही रीति है। 2. ब्रह्मा से लेकर व्यास तक संक्रान्त गुरु परम्परा को जैमिनि ने प्राप्त किया। यह न्यायरत्नाकर में उद्धृत है।