Solution:निम्नलिखित दो स्रोत दार्शनिक सिद्धांतों के स्रोत हैं-1. अन्तर्दृष्टि (Insight)
2. अनुभव (Experience)
अन्तर्दृष्टि या सूझ वह कार्य है जिसे हम बिना बताये अपने आप ही सीख लेते हैं। वैसे सीखने के मुख्यतः दो नियम होते हैं। पहला व्यक्ति द्वारा कार्यों को करके सीखना और दूसरा कार्यों को दूसरे के द्वारा करते हुए देखकर सीखना। परन्तु कुछ कार्य हम बिना बताये अपने आप ही सीख लेते हैं।
इस प्रकार के सीखने को ही सूझ या अन्तर्दृष्टि द्वारा सीखना कहा जाता है। इसे दार्शनिक सिद्धांतों का सबसे प्रमुख स्रोत माना जाता है। प्रयोग अथवा परीक्षण द्वारा प्राप्त ज्ञान अनुभव कहलाता है। तर्क संग्रह के अनुसार ज्ञान के दो भेद हैं- स्मृति और अनुभव । संस्कार मात्र से उत्पन्न ज्ञान को स्मृति और इससे भिन्न ज्ञान को अनुभव कहते हैं।