यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 (भूगोल)

Total Questions: 100

31. निम्नलिखित अक्षांशों में कौन से एक पर उत्तरी गोलार्ध से ऊष्मा बजट में न अधिकता और न ही, कमी होती?

Correct Answer: (c) 38°N
Solution:

'38° उत्तरी अक्षांश' में ऊष्मा बजट एक समान रहता है। इसमें ऊष्मा का बजट में हमेशा एक जैसा रहता है। विषुवत रेखा से 38° उत्तरी तथा दक्षिणी अक्षाशों तक सूर्य से प्राप्त होने वाला सूर्यातप अधिक तथा उसकी तुलना में भौमिक विकिरण द्वारा अन्तरिक्ष में खो गई ऊष्मा कम होती है।

38° उत्तरी तथा दक्षिणी अक्षांशों से ध्रुवों तक प्राप्त ऊष्मा की तुलना में खोई जाने वाली ऊष्मा अधिक होती है। अतः विषुवत रेखा से 38° उत्तरी तथा दक्षिणी अक्षांशों तक ऊष्मा ऊर्जा की कमी रहती है।

32. नीचे दो कथन दिए गए हैः एक कथन (A) और दूसरे को तर्क (R) कहा गया है।

अभिकथन (A): लैटेराइट मृदा का निर्माण उस स्थिति में होता है जब उच्च तापमान और अच्छी बारिश हो तथा क्रम से आर्द्र और शुष्क समयावधि आती है।

तर्क (R) : लैटेराइट मृदा काफी फूल जाती है और वर्षा ऋतु, में गीली होने के बाद लिसमिसी हो जाती है और 'स्वतः जुती हुई' के रूप में जानी जाती है।

उपयुक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) (A) सही है, परन्तु (R) सही नहीं है।
Solution:

लेटराइट मृदा का निर्माण उष्णकटिबंधीय तथा उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु क्षेत्र में आर्द्र तथा शुष्क ऋतुओं के एक के बाद आने के कारण होता है। यह भारी वर्षों से अत्यधिक निक्षालन का परिणाम है। लेटराइट मृदा अधिकतर गहरी एवं अम्लीय (pH6.0) होता है।

लेटराइट शब्द ग्रीक शब्द लेटर (Later) से लिया गया है। जिसका अर्थ होता है ईट। काली मृदा बहुत ही महीन कणों अर्थात मृतिका से बनी हैं। इसकी नमी धारण करने की क्षमता बहुत होती है। गर्म एवं शुष्क मौसम में इन मृदाओं में गहरी दरारें पड़ जाती हैं।

गीली होने पर ये मृदायें चिपचिपी हो जाती हैं और इनको जोतना मुश्किल होता है। काली मृदा को 'रेगर' मृदा भी कहते हैं। काली मृदा में कैल्शियम कार्बोनेट, मैग्नीशियम, पोटाश और चूना की अधिकता पायी जाती है तथा फास्फोरस की कमी होती है। अतः स्पष्ट है कि कथन (A) सही है, कारण (R) गलत है। अतः विकल्प (c) सही है।

33. सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी विषयों घरेलू राजनीतिक और सुरक्षा मामले तथा अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति राजनीतिक भूगोल में एक नया रूझान है, जिसे कहा जाता है-

Correct Answer: (b) वृहत् भू राजनीति (मेदा जियोपॉलिटिक्स)
Solution:

राजनीतिक भूगोल के साथ ही जर्मनी में एक नवीन विचारधास का विकास हुआ जिस मेटा,जियोपोलिटिक्स का नाम दिया गया। वृहत - भू राजनितिक  भूगोल को सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी विषयों, घरेलू राजनीति और सुरक्षा मामले तथा अंतर्राष्ट्रीय से सम्बन्धित मामलों का अध्ययन किया जाता है।

34. किस ऊर्ध्वगामी क्रमव्यवस्था अनुसार निम्नलिखित प्रकार के बादल पाए जाते है

(A) अल्टोस्टेंट्स, (B) स्ट्रेटोक्युमुलस, (C) स्ट्रेट्स, (D) साइरस

Correct Answer: (b) C,B,A,D
Solution:

ऊँचाईगाई के आधार पर बादलों को तीन वर्गों में बांटा गया है-
1. निम्न मेघ (2500 से 3000 मीटर)
2. मध्यम ऊँचाई के बादल (2500 मीटर से 6000 मीटर)
3. उच्च बादल (6000 मीटर से 20000 मीटर तक)
1932 में किए गये अतंराष्ट्रीय विभाजन के अनुसार बदलों को चार प्रमुख तथा 10 उप- प्रकारों में बांटा गया है। मुख्य प्रकारों के नाम हैं- पक्षाभ मेघ (Cirrus, Clouds) स्तरी मेघ (Stratus clouds), कपासी मेघ (Cumulus Clouds), तथा वर्षा मेघ (Nimbus clouds) |

ऊँचाई के आधार पर बादलों का क्रम इस प्रकार है
(1) उच्च बादलं (6000 मीटर से 2000 मीटर तक)
a. पक्षाभ मेघ (Cirrus clouds)- 8000-12000 मी. तक
b. पक्षाभ कपानी बादल (Cirro status clouds)-
c. पक्षाभ कपासी बाहूल (Cirro Cumulus Clouds)- 7500 मीटर की उँचाई पर

(2) मध्यम ऊँचाई के बादल (2500 से 6000 मीटर)
d. उच्च स्तरी बादल - 5400 से 7500 मीटर की ऊँचाई पर
e. उच्च कपासी बादल (Alto-cumulus clouds)- 3000 ka 7500 मी. ऊँचाई पर

(3) निम्न बादल (2500 मीटर)
f. स्तरी कपासी बादल (Stato-cumulus clouds)-
g. स्तरी बादल (Stratus clouds)- 2100 मीटर की ऊँचाई पर
h. वर्षा स्तरी बादल (Nimbo-stratus clouds)
i. कपासी बादल (Cumulus cloud)
j.कपासी वर्षा बादल (Cumulo Nimbus Clouds)

35. निम्नलिखित स्रोतों में से कौन सा दो कार्बन मुक्त करता है?

(A) ज्वालामुखी विस्पोटन
(B) जीवाश्म ईंधनों का दहन
(C) भू-स्खलन
(D) खुला (ओपेन) खनन
नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर चुनियेः

Correct Answer: (a) केवल (A) और (B)
Solution:

ज्वालामुखी तथा जीवाश्म ईंधनों का दहन दोनों प्रक्रिया से कार्बन निकलती है। भू-स्खलन तथा खुला खनन से कोई भी कार्बन का उत्सर्जन नहीं होता है। ज्वालामुखी, उद्‌गार के समय कई प्रकार की गैसे निकलती हैं

जिनमें बहुत ही प्रज्ज्वलित गैसें (हाइड्रोजन सल्फाइड व कार्बन डाई-सल्फाइड) तथा अन्य गैसें हाड्रोक्लोरिक एसिड व अमोनिया क्लोराइड आदि सम्मिलित हैं। ज्वालामुखी से बाहर निकलने वाली गैस में 60 से 90% अंश जलवाष्प का होता है।

कोयला पेट्रोलियम तथा प्राकृतिक गैस ये जीवाश्म ईंधन के रूप में जाने जाते हैं। ये ऊर्जा के परंपरागत स्त्रोत हैं। जीवाश्म ईंधन के जलने पर कार्बन, नाइट्रोजन तथा सल्फर के ऑक्साइड, अम्लीय ऑक्साइड मुक्त होते हैं। जीवाश्म ईंधन के दहन से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड ग्रीन हाउस प्रभाव के लिए उत्तरदायी हैं।

जीवाश्म ईधन में नाइट्रोजन एवं सल्फर की भी कुछ मात्र होती है। इनके जलने से नाइट्रोजन और सल्फर के विभिन्न ऑक्साइड उत्पन्न होते हैं।

36. निम्नलिखित प्रक्रियाओं में कौन सा एक पौधों की जड़ों द्वारा अकार्बनिक लवणों और पानी के अशोषण से संबंधित है?

Correct Answer: (b) रसाकर्षण (ऑसमोसिस)
Solution:

पेड़- पौधों की जड़ों द्वारा अकार्बनिक लवणों तथा पानी का अवशोषण रसाकर्षण की प्रक्रिया के द्वारा होता है। पादपों में मृदा से जल और पोषक तत्वों के परिवहन के लिए पाइप जैसी वाहिकाएँ विशेष कोशिकाओं की बनी होती हैं जो संवहन ऊतक की बनी होती हैं। जल और पोषक तत्वों के परिवहन के लिए जो पादपों में जो संवहन ऊतक होते है उसे 'जाइलम' कहते हैं।

ऑक्सीकरण (आक्सीडेशन)- वायु की ऑक्सीजन का संयोग जब जल से होता है, तो जल से मिली ऑक्सीजन की क्रिया चट्टानों के खनिजों पर होती है। इस कारण खनिजों में आक्साइड बन जाता है जिससे चट्टानों में वियोजन होने लगता है। आक्सीजन की इस क्रिया को आक्सीकरण कहते हैं। जिन चट्टानों में लोहे के खनिज अधिक होते हैं उनमें आक्सीकरण का प्रभाव सर्वाधिक होता है।

जलयोजन या हाइड्रेशन - चट्टानों का सम्पर्क जब जल से होता है। तो जल की हाइड्रोजन से चट्टानों की खनिजों में हाइड्रेशन की क्रिया होती है अर्थात चट्टाने जल को सोख लेती हैं तथा इस वजह से उनके आयतन में वृद्धि हो जाती है।इस प्रकार चट्टानों के आयतन में विस्तार के कारण उनके कणों तथा खनिजों में तनाव कि स्थिति पैदा हो जाती है, जिस कारण चट्टानें फैलकर टूट जाती हैं। आग्नेय चट्टान पर हाइड्रेशन की क्रिया का प्रभाव अधिक पड़ता है।

37. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक को अभिकथन (A) और दूसरे को 'तर्क (R) कहा गया है।

अभिकथन (A): 'निर्माण, प्रचालन और हस्तांरण' (बी.ओ.टी) एक योजना है, जिसके अंतर्गत सड़कों और पुलो के निर्माण के लिए सार्वजनिक प्रचोलको 'को आमंत्रित किया जाता है।

तर्क (R): बी.ओ.टी. योजना के अंतर्गत निजी निवेश को सुगम बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम में संशोधन किया गया है।

उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) (A) सही है, परन्तु (R) सही नहीं है।
Solution:

बी. ओ. टी. (Build-operate transfer) एक योजना है जो बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य करती है। जिसके अंतर्गत सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए सार्वजनिक प्रचालको को आमंत्रित करते है।

बी. ओ. टी. योजना के अंतर्गत निजी निवेश को सुगम बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम में कोई संशोधन किया गया है। अतः स्पष्ट है कि कथन (A) सही है, परन्तु कारण (R) सही नहीं है।

38. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में तीन पूर्ण स्पष्ट दौर हैं। दूसरा दौर जो उत्पादन के कारकों की गतिशीलता का सूचक रहा किस दौर के दौरान बना रहा?

Correct Answer: (c) 1970s और 1990s
Solution:

अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार 1970 और 1990 के दौर में विश्व में सर्वाधिक उत्पादन के कारणों की गतिशीलता को बनाये रखा। दूसरे दौर में उत्पादन सर्वाधिक मात्रा में हुआ।

39. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए।

Correct Answer: (a) (A)-(III), (B)-(I), (C)-(II), (D)-(IV)
Solution:

40. फसल संयोजन के बारे में वीवर की पद्धति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

(A) उन्होंने दिए गए एक क्षेत्र में उपक्रमों के सापेक्षिक महत्व के साधारण निरीक्षण से बेहतर विश्लेषण पद्धति प्रस्तावित की।
(B) उन्होंने इस धारणा में समय का आयाम जोड़ा कि पिछली शताब्दी के दौरान ब्रिटेन की सर्वोत्तम और सबसे खराब कृषि-भूमि में परिवर्तन नहीं हुआ है।
(C) उन्होंने उन उपक्रमों की संख्या का पता लगाने का प्रयास किया, जिन्होंने वास्तविक और सैद्धान्ति उपक्रमों के संयोजन में अंतर को न्यूनतम किया।
(D) उन्होंने उपज के एक मापन को अपनाया, जिसको अच्छे प्रबंधन के अंतर्गत एक एकड़ के औसत अच्छे कृषि- खेत के संभाव्य उत्पादन के रूप में परिभाषित किया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिएः 

Correct Answer: (d) केवल (A) और (C)
Solution:

वीवर के फसल संयोजन में उन्होंने एक क्षेत्र में उपक्रमों के सापेक्षिक महत्व के साधारण निरीक्षण से बेहतर विश्लेषण पद्धति को प्रस्तुत किया। उन्होंने उपज के एक माप को अपनाया, जिसको अच्छे प्रबंधन के अंतर्गत एक एकड़ के औसत कृषि खेत के संभाव्य उत्पादन के रूप में परिभाषित किया।