यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 (भूगोल)

Total Questions: 100

41. जेफरसन द्वारा 'प्राइमेट सिटी' की संकल्पना कब दी गई थी?

Correct Answer: (c) 1939
Solution:

मार्क जेफरसन का नगरीय भूगोल में विशिष्ट योगदान है। उन्होंने नगरों के विकास से सम्बन्धित प्रधान नगर (Primate City) की संकल्पना प्रस्तुत किया था और इसे एक नियम का स्वरूप प्रदान करते हुए 1939 ई. में 'प्रधान नगर का नियम' (Law of Primate City) की संज्ञा दी थी।

जेफरसन के अनुसार किसी देश में जब कोई नगर एक बार अन्य नगरों से वृहत्तम बन जाता है, तो उसका विकास तीव्रगति से होता है और भविष्य में भी उसकी प्रमुखता कायम रहती है। जैफरसन ने 'मानव केन्द्रित अध्ययन' (Man Centred Study) की विचारधारा भी प्रस्तुत की थी।

42. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए।

सूची-I (लेखक का नाम)सूची-II (पुस्तक का नाम)
(A) ए. वेबर(I) इंडस्ट्रियल लोकेशन: एन इकोनॉमिक जियोग्राफिकल एनालिसिस
(B) ई. एम. हूवर(II) बिहेवियर एंड लोकेशन: फाउंडेशन फोर ए जियोग्राफिक एंड डायनमिक थ्योरी
(C) ए. प्रेड(III) द लोकेशन ऑफ इकोनॉमिक एक्टिविटि
(D) डी. एम. स्मिथ(IV) थ्योरी ऑफ द लोकेशन ऑफ इंडस्ट्रीज

दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) (A)-(IV), (B)-(III), (C)-(II), (D)-(I)
Solution:

सही सुमेलित युग्म इस प्रकार है-

सूची-I (लेखक का नाम)सूची-II (पुस्तक का नाम)
ए. प्रेडबिहेवीयर एडं लोकेशन फाउंडेशन फोर ए जिओग्राफिक एडं डायनमिक थ्योरी
डी. एम.स्मिथइंडस्ट्रियल लोकेशनः एन इकोनोमिक जिओग्राफिकल एनालिसिस
ए. वेबरथ्योरी आफ द लोकेशन ऑफ इंडस्ट्रीज डी. एम. हूबर द लोकेशन आफ इकोनॉमिक एक्टिविटि
ई.एम. हूवरद लोकेशन ऑफ इकोनॉमिक एक्टिविटि

अतः विकल्प (d) सही सुमेलित है।

43. ढाल प्रतिस्थापन का प्रतिपादन किया थाः

Correct Answer: (b) ए.पॅक ने
Solution:

ए. पॅक ने ढाल प्रतिस्थापन सिद्धांत को प्रतिपादित किया। पॅक ने बहिर्जात प्रक्रमों (अपक्षय, नदी, हिमनदी, वायु, समुद्री तरगें तथा स्थल रूपों के भूआकृतिक प्रक्रमों में सह-संबंध स्थापित करने का प्रयास किया इस प्रकार पेंक ने स्थल रूपों के निर्माण में दो तथ्यों के योगदान को माना-

1. प्रक्रमों की कार्यविधि
2. ढालों की विकास का निगनिक आनुमानिक मॉडल

पेंक के अनुसार बहिर्जात प्रक्रमों की कार्य प्रणाली पर रिगोलिथ की विशेषताओं तथा अपक्षय एवं धरातलीय प्रक्रम की क्रिया विधि पर आधारित होती है। धरातलीय प्रक्रमों में सर्वाधिक महत्त्व द्रव्यमान स्थानान्तरण को दिया गया है।

प्रक्रमों की क्रिया विधि आकार की विशेषताओं से प्रभावित होती हैं। पेंक ने आकार की सात विशेषताओं तथा प्रक्रमों के कार्य की तीन दरों का उल्लेख किया है। डेविस ने ढालों के विकास में चक्रिय व्यवस्था का प्रतिपादन किया है।

अपरदन चक्र की युवावस्था में नदी द्वारा निम्नवर्ती अपरदन तथा अपक्षय के कारण तीव्र उत्तल ढाल का विकास होता है। इस अवस्था में ढाल का निवर्तन कम होता है तथा पतन बिल्कुल नही होता है। प्रौढ़ावस्था में नदी द्वारा पार्श्ववर्ती अपरदन अधिक सक्रिय हो जाता है,

परन्तु जलविभाजकों के शीर्ष का भी अपदन होता है इस प्रकार जलविभाजकों के नाश के कारण ढाल के कोण में कमी होने लगती है जिसके कारण ढाल के कोण में कमी आती है तथा निष्कोण वाली परिच्छेदिका का विकास हो जाता है।

इस अवस्था में ढाल प्रवणित हो जाता है, क्योंकि समस्त ढाल इतना होता है कि अपक्षय से प्राप्त मलवा का परिवहन आसानी से हो जाता है। जीर्णावस्था में ढाल का पत्तन इतना अधिक हो जाता है कि उनका कोण कही भी 50 से अधिक नही रहता है। समस्त भाग एक समप्राय मैदान में बदल जाता है जिसे पर अवतल ढाल का विकास होता है।

44. भू-अभिनति के चारों ओर स्थित प्राचीन दृढ़ भूखण्ड को कोबर ने निम्नलिखित नाम दिया था-

Correct Answer: (a) क्रैटोजेन
Solution:

प्रसिद्ध जर्मन विद्वान कोबर ने वलित पर्वतों की उत्पत्ति की व्याख्या के लिए 'भूसन्नति सिद्धांत' का प्रतिपादन किया। जर्मन विद्वान कोबर ने सन् 1925 में पर्वतों के निर्माण से संबंधी अपना भू-अभिनति सिद्धान्त प्रस्तुत किया।

इनका सिद्धान्त संकुचन शक्ति पर आधारित है। पृथ्वी में संकुचन होने से उत्पन्न बल से अग्रदेशों में गति उत्पन्न होती है, जिससे प्रेरित होकर सम्पीडनात्मक बल के कारण भूसन्नति का मलवा वलित होकर पर्वत का रूप धारण करता है।

जहाँ पर आज पर्वत है वहाँ पर पहले भूसन्नतियाँ थीं जिन्हें कोबर ने पर्वत निर्माण स्थल कहा। इन भूसन्नतियों के चारों ओर प्राचीन दृढ़ भूखण्ड थें, जिन्हें 'क्रेटोजेन' बताया है। भू-अभिनतियों को 'पर्वतों का पालना' (Cradle of Mountain) कहा जाता है। कोबर के अनुसार भूसन्नतियाँ लम्बे तथा चौड़े जलपूर्ण गर्त थीं।

45. निम्नलिखित में से 'नोडल क्षेत्र' का उदाहरण कौन सा है?

Correct Answer: (b) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र
Solution:

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली नोडल क्षेत्र का उदाहरण है। दिल्ली को 1 फरवरी, 1992 से नया नाम राष्ट्रीय राजधानी, क्षेत्र दिल्ली (NCR) कर दिया गया। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ जिले सम्मिलित हैं

जिसमें 55083 वर्ग किमी. क्षेत्र आता है। एनसीआर में हरियाणा के 14 जिले, उत्तर प्रदेश के 8 जिले, राजस्थान के दो जिले तथा सम्पूर्ण दिल्ली सम्मिलित हैं। प्रस्तावित प्रति चुंबकीय क्षेत्र में उ.प्र. के बरेली एवं कानपुर, म.प्र. के ग्वालियर, हरियाणा के हिसार एवं अंबाला, राजस्थान के कोटा, उत्तराखण्ड के देहरादून एवं पंजाब के पटियाला नगर को सम्मिलित किया गया है।

46. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए।

List I - (Settelment)

सूची-II (List-II) अधिवास प्रतिरूप
(I) एकरुप
(II) यादृच्छिक
(III)एकरूप की अपेक्षा अधिक गुच्छित
(IV)गुच्छित
नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए

Correct Answer: (a) (A)-(II), (B)-(I), (C)-(IV); (D)-(III)
Solution:

सही सुमेलित युग्म इस प्रकार हैं-

सूची-I (चित्र संख्या)सूची-II (अधिवास प्रतिरूप)
Aयादृच्छिक
Bएकरूप
Cगुच्छित
Dएकरूप की अपेक्षा अधिक गुच्छित

अतः विकल्प (a) सही सुमेलित है।

47. नीचे दो कथन दिए हैं:

कथन (I) :सतत पुंज (मास) के किसी तंत्र में ऊर्जा न तो उत्पन्न की जाती है न ही समाप्त हो जाती है।
कथनं (II) : पारिस्थिकी तंत्र में ऊर्जा प्रवाह एकदिशीय नही है।

उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) कथन (I) सही है, किंतु कथन (II) सही नहीं है।
Solution:

पारिस्थिति तंत्र की ऊर्जा का प्रमुख स्रोत सूर्य है जो प्रकाश संश्लेषण क्रिया द्वारा सौर या प्रकाश ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा (ग्लूकोज) में परिवर्तित करते है। इस बायोमास से ऊर्जा का एक स्तर के जीवों से दूसरे स्तर के जीवों में स्थानान्तरण होता रहता है। इस तरह पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह एक दिशोन्मुख होता है।

जीवमंडल या परिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रधान स्त्रोत सूर्य है। पारिस्थितिक तंत्र में सौर्यिक ऊर्जा का निवेश होता है तथा पुनः उसके संघटकों द्वारा ऊर्जा का विभिन्न विधियों में निर्गम होता है।

सामान्य दशा में ऊर्जा के इस निवेश तथा निर्गम में समस्थिति स्थापित रहती है। पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह या गमन पोषण स्तरों से होकर होता है तथा यह प्रवाह ऊष्मागतिकी के दो नियमों से नियंत्रित होता है।

नियम-1 स्थिर द्रव्यमान (Constant Mass) वाले तंत्र में न तो ऊर्जा का सृजन होता है और न ही उसका विनाश होता है। इसका एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तन हो सकता है। इसे ऊर्जा संरक्षण का नियम कहते हैं।

नियम-2 ऊर्जा का जब एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तन होता है या जब एक स्थान से दूसरे स्थान में स्थानान्तरण होता है तो उसके कुछ भाग का विसरण हो जाता है जो पुनः सुलभ नही हो जाती है। ऊर्जा का पारिस्थितिक तंत्र में प्रवाह एकदिशी होता है अर्थात ऊर्जा का जब पारिस्थितिक तंत्र से बहिर्गमन होता है तो वह पुनः पारिस्थितिक तंत्र को सुलभ नही हो पाती हैं।

अतः स्पष्ट है कि कथन (1) सही है तथा कथन (II) गलत है। अतः विकल्प (c) सही है।

48. नीचे दो कथन दिए हैं:

कथन (I): डार्विन के सिद्धान्त जीवों की उत्पत्ति अधिकांशत एकरूपतावाद के नियम के सदृश है।
कथन (II):वैयक्तिक जीवों में वंशागत विभिन्नताएं है। उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (a) कथन (I) और (II) दोनों सही हैं।
Solution:

डार्विन के सिद्धांत जीवों की उत्पत्ति अधिकांशत एकरूपतावाद के नियम के सदृश होता है। वैयक्तिक जीवों में वंशागत विभिन्नताए पायी जाती है। जीवों की विकासीय वृद्धि मुख्य रूप, से गुण परिवर्तन, जननिक पुनः संयोग प्राकृतिक चयन तथा पृथक्करण की प्रक्रियाओं द्वारा होता है।

डार्विन का सिद्धान्त प्रजातियों के क्रमिक प्रगामी विकास की संकल्पना से सम्बन्धित है। डार्विन ने प्राकृतिक चयन तथा योग्यता की उत्तरजीविता द्वारा प्रजातियों का उद्भव तथा विकास बताया है। अतः स्पष्ट है कि कथन I और II दोनों सही हैं।

49. नीचे दो कथन दिए गए हैः एक को कथन (A) और दूसरे को वर्क (R) कहा गया है।

अभिकथन (A): एल्यूशियन द्वीप ज्वालामुखी विस्फोट का स्थल होता है।
तर्क (R) : अभिसरण पट्टिका उपांत ज्वालामुखीय विस्फोट का स्थल होता है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या है।
Solution:

विनाशात्मक प्लेट किनारों के सहारे विस्तृत इस पेटी में विश्व के सर्वाधिक 2/3 ज्वालामुखी पाये जाते है। ये ज्वालामुखी प्लेटों के अभिसरण क्षेत्र में स्थित है। इसी पेटी में एल्यूशियन द्वीप स्थित है।

अभिसरण प्लेटें (convergent plates) एक-दूसरे के निकट आती हैं और आपस में टकराती हैं। जब एक महासागरीय प्लेट किसी महाद्वीपीय प्लेट से टकराती हैं तो महासागरी प्लेट भारी होने के कारण हल्की महाद्वीपीय प्लेट के नीचे धंस जाती है।

अधिक गइराई पर जाने से इसका कुछ भाग पिघल जाता है और यह मैंटल में विलीन हो जाता है। इसे प्रतिष्ठन कहते हैं। ऊपर की चट्टानों के दबाव के कारण भी ऊष्मा पैदा होती है, जिससे धंसी हुई प्लेटे पिघल जाती हैं।

पिघला हुआ मैग्मा महाद्वीपीय किनारे के निकट ऊपर को उठता है जिससे ज्वालामुखी पर्वतों का निर्माण होता है। प्रशान्त महासागरी पेटी अभिसरण प्लेटों के सहारे स्थित है। एल्यूशियन द्वीप ज्वालामुखी परिप्रशान्त' महासागरी मेखला में ही स्थित है। अतः स्पष्ट है कि कथन (A) और कारण (R) दोनों सही है तथा कारण (R), कथन (A) की सही व्याख्या कर रहा है।

50. नीचे दो कथन दिए हैं:

कथन (I): सभी गतिशील वस्तुएं अपनी गति के कारण किसी कार्य को करने में सक्षम हैं।
कथन (II) :स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर चुनेंः

Correct Answer: (c) कथन (I) सत्य है, किंतु कथन (II) गलत है।
Solution:

सभी गतिशील वस्तुओं में अपनी गति होने के कारण गतिज ऊर्जा होती है। जिससे वे अपना कार्य करने में सक्षम होती है। स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा नहीं हो सकती है। किसी गतिशील वस्तु में उसकी गति के कारण निहित ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं। किसी वस्तु की गतिज ऊर्जा उसकी चाल के साथ बढ़ता है। m द्रव्यमान की तथा एक समान वेग v से गतिशील वस्तु की गतिज
ऊर्जा का मान Eₖ = 1/2mv² होगा। किसी वस्तु द्वारा इसकी स्थिति अथवा विन्यास में परिवर्तन के कारण प्राप्त ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा कहते हैं। स्थितिज ऊर्जा Ep = mgh
अतः स्पष्ट है कि कथन I सही है तथा कथन II गलत है। अतः विकल्प (c) सही है।