Solution:ए. पॅक ने ढाल प्रतिस्थापन सिद्धांत को प्रतिपादित किया। पॅक ने बहिर्जात प्रक्रमों (अपक्षय, नदी, हिमनदी, वायु, समुद्री तरगें तथा स्थल रूपों के भूआकृतिक प्रक्रमों में सह-संबंध स्थापित करने का प्रयास किया इस प्रकार पेंक ने स्थल रूपों के निर्माण में दो तथ्यों के योगदान को माना-
1. प्रक्रमों की कार्यविधि
2. ढालों की विकास का निगनिक आनुमानिक मॉडल
पेंक के अनुसार बहिर्जात प्रक्रमों की कार्य प्रणाली पर रिगोलिथ की विशेषताओं तथा अपक्षय एवं धरातलीय प्रक्रम की क्रिया विधि पर आधारित होती है। धरातलीय प्रक्रमों में सर्वाधिक महत्त्व द्रव्यमान स्थानान्तरण को दिया गया है।
प्रक्रमों की क्रिया विधि आकार की विशेषताओं से प्रभावित होती हैं। पेंक ने आकार की सात विशेषताओं तथा प्रक्रमों के कार्य की तीन दरों का उल्लेख किया है। डेविस ने ढालों के विकास में चक्रिय व्यवस्था का प्रतिपादन किया है।
अपरदन चक्र की युवावस्था में नदी द्वारा निम्नवर्ती अपरदन तथा अपक्षय के कारण तीव्र उत्तल ढाल का विकास होता है। इस अवस्था में ढाल का निवर्तन कम होता है तथा पतन बिल्कुल नही होता है। प्रौढ़ावस्था में नदी द्वारा पार्श्ववर्ती अपरदन अधिक सक्रिय हो जाता है,
परन्तु जलविभाजकों के शीर्ष का भी अपदन होता है इस प्रकार जलविभाजकों के नाश के कारण ढाल के कोण में कमी होने लगती है जिसके कारण ढाल के कोण में कमी आती है तथा निष्कोण वाली परिच्छेदिका का विकास हो जाता है।
इस अवस्था में ढाल प्रवणित हो जाता है, क्योंकि समस्त ढाल इतना होता है कि अपक्षय से प्राप्त मलवा का परिवहन आसानी से हो जाता है। जीर्णावस्था में ढाल का पत्तन इतना अधिक हो जाता है कि उनका कोण कही भी 50 से अधिक नही रहता है। समस्त भाग एक समप्राय मैदान में बदल जाता है जिसे पर अवतल ढाल का विकास होता है।