Solution:डार्विन की प्रसिद्ध पुस्तक 'आंरिजिन ऑफ स्पीसीज' में जीवों की उत्पत्ति का सिद्धांत दिया। इस सिद्धान्त में प्राकृतिक चयन योग्यतम की उत्तर जीविता तथा अनुकूलन के आधार पर प्रतिपादित किया गया है। प्रजातियों की उत्पत्ति से संबंधित डार्विन का सिद्धान्त उल्लेखनीय है।
डार्विन का सिद्धान्त प्रजातियों के क्रमिक प्रगामी विकास की संकल्पना से संबंधित है। डार्विन ने अपने सिद्धान्त का प्रस्तुतीकरण सर्वप्रथम एक शोधपत्र के रूप में 1 जुलाई, 1858 को लंदन में Linean Society की सभा में किया था।
डार्विन ने प्राकृतिक चयन तथा योग्यतम की उत्तरजीविता द्वारा प्रजातियों का उद्भव तथा विकास बताया है। डार्विन के सिद्धान्त के मुख्य पहलु निम्न है:-
1. एक प्रजाति के कुछ सदस्यों में कुछ ऐसे खास या विशिष्ट गुण होते हैं जो उन्हें जीवन के संघर्ष में विभिन्न पारिस्थितियों का मुकाबला करने तथा उन्हें सहन करने में सक्षम बना देती हैं।
2. इस तरह किसी जीव में अतिरिक्त अनुकूल विशिष्ट गुण उसे उत्तरजीविता तथा जनन के अच्छे एवं अनुकूल अवसर प्रदान करते हैं।
3. इन विशिष्ट गुणों का जब जनक द्वारा उसकी सन्ततियों में स्थानान्तरण होता है तो आने वाली क्रमिक पीढ़ियों में अस्तित्व में संघर्ष के लिए श्रेष्ठतम आ जाता है।
4. इस तरह यदि जनक द्वारा अपनी सन्ततियों में प्रतिकूल गुणों का स्थानान्तरण होता है तो ऐसे जीव अपनी ही प्रजाति के विशिष्ट अनुकूल गुणों वाले जीव की तुलना में कमजोर हो जाते हैं तथा अस्तित्व और जीवन के संघर्ष में पिछड़ जाते हैं।