Solution:भारतीय मानसून की दो शाखाएं है एक अरब सागर शाखा और दूसरी बंगाल की खाड़ी शाखा दोनों अलग-अलग चलती है लेकिन दोनों भारत में वर्षा करती हुई पंजाब और हिमालय से लगा हुआ क्षेत्र पर एक-दूसरे से मिल जाती है।
अरब सागर से उत्पन्न होने वाली मानसून पवनें तीन शाखाओं में बँटती हैं। (i)इसकी एक शाखा को पश्चिमी घाट रोकते हैं। ये पवनें पश्चिमी घाट की ढलानों पर 900 से 1200 मीटर की ऊँचाई तक चढ़ती है। ये शाखा पश्चिमी तटीत मैदान पर 250 से 400 से.मी. के बीच भारी वर्षा करती हैं।
पश्चिमी घाट के पूर्व में इन पवनों से नाममात्र की वर्षा होती है। कम वर्षा का यह क्षेत्र वृष्ट छाया क्षेत्र कहलाता है। अरब सागर से उठने वाली दूसरी शाखा मुम्बई के उत्तर में नर्मदा और तापी नदियों की घाटियों से होकर मध्य भारत में दूर तक वर्षा करती है।
यहाँ यह गंगा के मैदान में प्रवेश कर जाती है और बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसून की शाखा से मिलता है। इस मानसून की तीसरी शाखा सौराष्ट्र प्रायद्वीप और कच्छ से टकराती है। यहाँ यह अरावली के समानांतर चलती हैं तथा राजस्थान में कम वर्षा करती हैं।
यह शाखा पंजाब और हरियाणा में भी बंगाल की खाडी से आने वाली मानसून की शाखा से मिल जाती हैं। बंगाल की खाड़ी की मानसून पवनों की शाखा को म्यांमार के तट पर स्थित अशकान पहाड़ियाँ भारतीय उपमहाद्वीप की ओर विक्षेपित कर देती है।
इस प्रकार मानसून पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में दक्षिणपश्चिमी दिशा की अपेक्षा दक्षिण व दक्षिण-पूर्वी दिशा से प्रवेश करती है। यहाँ से यह शाखा दो भागों में बट जाती है, इसकी एक शाखा गंगा के मैदान के साथ-साथ पश्चिम की ओर बढ़ती है और पंजाब के मैदान तक पहुँचती है।
इसकी दूसरी शाखा उत्तर व उत्तर-पूर्व में ब्रह्मपुत्र घाटी में बढ़ती जाती है तथा वहाँ वर्षा करती है। इसकी एक उपशाखा मेघालय में स्थित गारो और खासी की पहाड़ियों से टकराती है तथा मॉसिनराम में सर्वाधिक वर्षा करती है।