Solution:प्लाया, शिखरिका, जलजक गर्तिका इन सभी स्थल आकृतियों का निर्माण अपरदन के कारण होता है। ड्रमलिन हिमनद के निक्षेप द्वारा निर्मित स्थल राज्यों में ड्रमलिन गोलाश्म, मृतिका द्वारा निर्मित एक प्रकार के ढेर या टीले होते है,
जिनका आकार उल्टी नौका या कटे हुए उल्टे अण्डे के समान होता है। केम-हिमनद के अग्रभाग पर हिम के पिघलने के कारण कुछ मलवा का निक्षेप ढेर के रूप में या टीले के रूप में हो जाता है। इस तरह के टीले को केम कहा जाता है।
जलगर्तिका पहाड़ी क्षेत्रों में नदी तल में अपरदित छोटे चट्टानी टुकड़े छोटे गर्तों में फंसकर वृताकार रूप में घूमते हैं जिन्हें जलगर्तिका कहते हैं। शिखरिका भूमिगत जल के अपरदन से निर्मित होने वाली स्थलाकृतिहै।
लाइमस्टोन की खुली सतह पर जल चट्टान की संधियों को अपनी घुलन क्रिया द्वारा विस्तृत करने लगती है, जिस कारण छोटी- छोटी शिखरिकाओं का निर्माण हो जाता है। प्लाया- इसका निर्माण पवनों द्वारा अपरदन से होता है।
मरुस्थलीय भूमि में मैदान प्रमुख स्थलरूप हैं। पर्वतों व पहाड़ियों से घिरे बेसिन में अपवाह मुख्यतः बेसिन के मध्य में होता है तथा बेसिन के मध्य में लगभग समतल मैदान की रचना हो जाती है। पर्याप्त जल उपलब्ध होने पर यह मैदान उथले जल क्षेत्र में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रकार की उथली जल झील को प्लाया कहते हैं।