Solution:मापनी के आधार पर मानचित्रों को बड़े से छोटे मापक के रूप में व्यवस्थित क्रम :- भू-कर मानचित्र, स्थलाकृतिक मानचित्र, दीवाल मानचित्र तथा ग्लोब (एटलस) मानचित्र है। मापनी के आधार पर मानचित्रों को बृहत मापनी तथा लघु मापनी में वर्गीकृत किया जाता है। बृहत मापनी मानचित्रों में छोटे क्षेत्रों को अपेक्षाकृत बृहत मापनी द्वारा मापा जाता है,
जैसे- 1: 2,50,000, 1:50,000 तथा लघुमान मानचित्र का उपयोग बृहत क्षेत्र को दर्शाने के लिए किया जाता है। जैसे- एटलस मानचित्र एवं भिति मानचित्र इत्यादि । बृहत मापनी को भूसम्पत्ति मानचित्र तथा स्थलाकृतिक मानचित्र में वर्गीकृत किया जाता है तथा लघुमान् मानचित्र को एटलस मानचित्र एवं भित्ति मानचित्र में विभाजित किया जाता है।
पूरे देश के तत्कालीन मानचित्रों को बनाने के लिए गहन स्थलाकृतिक सर्वेक्षण 1767 में सर्वे ऑफ इण्डिया की स्थापना के साथ किया गया, जिसके चरम बिन्दु के रूप में 1785 में हिन्दुस्तान का मानचित्र बनकर तैयार हुआ।