Solution:जहाँगीर स्वयं एक कुशल चित्रकार था एवं उसके शासनकाल में मुगल चित्रकला अपने चर्मोत्कर्ष पर पहुँच गई। जहाँगीर ने अपने शाहजादा काल में अकारिजा के नेतृत्व में आगरा में एक चित्रशाला की स्थापना की। जहाँगीर के दरबार के प्रसिद्ध चित्रकारों में अबुल हसन, बिशनदास, मंसूर, गोवर्धन, मनोहर, माधव, मुहम्मद मुराद, दौलत, फारूख बेग आदि प्रमुख थे।
इनमें से कुछ चित्रकारों ने मुगल चित्रकारी के क्षेत्र में विशेष शैलियों में निपुणता हासिल कर ली थी, जैसे उस्ताद मंसूर, जहाँगीर ने इसे नादिर-उल-अन की उपाधि प्रदान की थी। मंसूर जानवरों और फूलों के चित्र बनाने में निपुण था। इसकी महत्वपूर्ण कृत्यों में 'साइबेरिया का एक विरला सारस' तथा बंगाल का एक अनोखा पुष्प उल्लेखनीय है।
अबुल हसन, बादशाह जहाँगीर ने इसे नादिर-उजजमाँ की उपाधि प्रदान की थी। अबुल हसन को व्यक्ति चित्रों (छवि चित्रों) में महारत हासिल थी। गोवर्धन साधु-संतों, संगीतज्ञों और फकीरों के चित्र बनाने में निपुण था।