यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2020/जून 2021 (इतिहास)

Total Questions: 100

1. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

 सूची-I  (स्मारक) सूची-II  (सुलेखकार)
Aबुलंद दरवाजा, फतेहपुर सीकरी1बाकी मुहम्मद
Bअतगा खान का मकबरा, दिल्ली2अब्द अल नबी अल कुरैशी
C शाह बेगम का मकबरा, इलाहाबाद3अहमद अल चिश्ती
D इत्मादुद्दौला का मकबरा, आगरा4मीर अब्दुल्ला मुश्किन कलम

नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिये-

ABCD
(a)3142
(b)2431
(c)4213
(d)1324
Correct Answer: (a)
Solution:सुमेलित सूची इस प्रकार है-
सूची-I (स्मारक)सूची-II (सुलेखकार)
बुलंद दरवाजा, फतेहपुर सीकरीअहमद अल चिश्ती
अतर्गा खान का मकबरा, दिल्लीबाकी मुहम्मद
शाह बेगम का मकबरा, इलाहाबादमीर अब्दुल्ला मुश्किन कलम
इत्मादुद्दौला का मकबरा, आगराअब्द अल नबी अल कुरैशी

2. निम्नलिखित ईरानी चित्रकारों में से पिता पुत्र का कौन-सा जोड़ा हुमायूँ के दरबार में था?

Correct Answer: (a) मीर मुसविर और सैय्यद अली
Solution:

मुगल चित्रकला की नींव हुमायूँ के समय में ही पड़ी। शेरशाह से पराजित होने के पश्चात जब हुमायूँ ईरान में निवास कर रहा था तब वह कुछ चित्रकारों से परिचित हुआ, उनके कामों से प्रभावित होकर, उनमें से दो को अपनी सेवा में आमंत्रित किया। ये कलाकार थे अब्दुस्समद और मीर मुसव्विर । हालांकि, किसी कारण से मीर मुसविर हुमायूँ के दरबार में उपस्थित नहीं हो सका। उसके जगह पर मुगल सेवा में उसका बेटा मीर सैय्यद अली उपस्थित हुआ जिसे हुमायूँ ने नादिर-उल-अस्त्र की उपाधि प्रदान की तथा अब्दुस्समद को 'शीरी कलम' की उपाधि प्रदान की थी।

3. जहाँगीर के शासनकाल में कुछ चित्रकारों ने मुगल चित्रकारी के क्षत्र में विशेष शैलियों में निपुणता हासिल कर ली थीं। इस संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

(A) मंसूर जानवरों और फूलों के चित्र बनाने में निपुणथा।
(B) अबुल हसन एक छवि चित्रकार था।
(C) गोवर्धन साधू-संतों, संगीतज्ञों और फकीरों केचित्र बनाने में निपुण था।
नीचे दिए गए विकल्पों में सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल (A), (B) और (C)
Solution:

जहाँगीर स्वयं एक कुशल चित्रकार था एवं उसके शासनकाल में मुगल चित्रकला अपने चर्मोत्कर्ष पर पहुँच गई। जहाँगीर ने अपने शाहजादा काल में अकारिजा के नेतृत्व में आगरा में एक चित्रशाला की स्थापना की। जहाँगीर के दरबार के प्रसिद्ध चित्रकारों में अबुल हसन, बिशनदास, मंसूर, गोवर्धन, मनोहर, माधव, मुहम्मद मुराद, दौलत, फारूख बेग आदि प्रमुख थे।

इनमें से कुछ चित्रकारों ने मुगल चित्रकारी के क्षेत्र में विशेष शैलियों में निपुणता हासिल कर ली थी, जैसे उस्ताद मंसूर, जहाँगीर ने इसे नादिर-उल-अन की उपाधि प्रदान की थी। मंसूर जानवरों और फूलों के चित्र बनाने में निपुण था। इसकी महत्वपूर्ण कृत्यों में 'साइबेरिया का एक विरला सारस' तथा बंगाल का एक अनोखा पुष्प उल्लेखनीय है।

अबुल हसन, बादशाह जहाँगीर ने इसे नादिर-उजजमाँ की उपाधि प्रदान की थी। अबुल हसन को व्यक्ति चित्रों (छवि चित्रों) में महारत हासिल थी। गोवर्धन साधु-संतों, संगीतज्ञों और फकीरों के चित्र बनाने में निपुण था।

4. 1859-60 में दिगंबर बिस्वास और विष्णु बिस्वास ने किस आंदोलन का नेतृत्व किया था?

Correct Answer: (c) नील विद्रोह
Solution:

नील विद्रोह बंगाल के नदियाँ जिले में स्थित गोविन्दपुर गाँव में 1859-60 ई. तक चला। इस आन्दोल का नेतृत्व दिगम्बर बिस्वास और विष्णु बिस्वास ने किया था। इस प्रथा को स्थानीय भाषा में 'ददनी प्रथा' भी कहा जाता था। इस आंदोलन का समर्थन हिन्दू पैट्यिाट के संपादक हरीश चन्द्र मुखर्जी ने भी किया था।

1859 ई.में नील दर्पण में दीनबंधु मित्र ने नील विद्रोह का समर्थन किया। यह भारतीय किसानों का प्रथम सफल आंदोलन था। विकल्प में उल्लेखित अन्य आंदोलन कुका विद्रोह, फरायज़ी विद्रोह राजनीतिक धार्मिक आन्दोलन थे वहीं पर मुंडा विद्रोह जनजातीय विद्रोह था। कूका विद्रोह का नेतृत्व भगत जवाहर मल, फरायज़ी विद्रोह का नेतृत्व हाजी शरीयत उल्ला एवं उनके पुत्र दादू मियाँ तथा मुण्डा विद्रोह का नेतृत्व बिरसा मुण्डा द्वारा किया गया।

5. निम्नलिखित में से किस अभिलेख में भारत-युद्ध की काल-गणना का उल्लेख मिलता है?

Correct Answer: (a) पुलकेशिन् द्वितीय के ऐहोल अभिलेख में
Solution:

पुलकेशिन द्वितीय, चालुक्य वंश का शक्तिशाली शासक था। पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख में चालुक्य वंश के विषय में विस्तृत जानकारी मिलती है। इस अभिलेख के रचयिता 'रवि कीर्ति' है। इस अभिलेख में भारत युद्ध (महाभारत युद्ध) की घटना (3102-1 ई. पू.) से काल गणना का उल्लेख किया गया है।
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के घोषी तहसील से मधुबन ताम्रपत्र (631 ई.) प्राप्त हुआ है। इसमें हर्ष द्वारा श्रावस्ती भुक्ति के सोमकुण्डा गाँव के सावर्णिगोत्री भट्ट वातस्वामी तथा विष्णुवृद्ध गोत्री भट्ट शिवदेवस्वामी को अग्रहार (भूमि अनुदान) का उल्लेख है। प्रभावती गुप्ता, गुप्त सम्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री थी। उसका विवाह वाकाटक नरेश रूद्रसेन द्वितीय के साथ सम्पन्न हुआ था। प्रभावती गुप्ता का एक महत्वपूर्ण अभिलेख पूना ताम्रपत्र अभिलेख है। हरहा अभिलेख उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से प्राप्त हुआ है। यह लेख मौखरि नरेश ईशानवर्मा के पुत्र सूर्यवर्मा द्वारा खुदवाया गया था। इसके अध्ययन से हमें इस वंश के प्रथम चार राजाओं के शासनकाल की घटनाओं का ज्ञान प्राप्त होता है।

6. निम्नलिखित में से कौन-से अधिकारी अपने प्रांत में जल-व्यवस्था के लिए जाने जाते हैं?

(A) सुय्य
(B) पुष्यगुप्त
(C) तुषास्प
(D) सुविशाख
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) (A), (B), (C), (D)
Solution:

सभी विकल्प सत्य हैं। कल्हण कृत राजतरंगिणी में कश्मीर के इतिहास का उल्लेख मिलता है। कश्मीर के शासक अनन्त वर्मन के समय सूय या सुय्य नामक अधिकारी ने झेलम नदी पर बाँध बनाकर नहरें निकलवायी थी।

पुष्यगुप्त, चन्द्रगुप्त मौर्य का राज्यपाल था जिसने सौराष्ट्र प्रांत में सुदर्शन झील पर जल व्यवस्था के लिए बाँध का निर्माण करवाया था। तुषास्प ने इस झील से नहरें निकालकर सिंचाई के लिए जल व्यवस्था का प्रबन्ध किया, जो मौर्य सम्राट अशोक का प्रांतपति था।

प्रांतपति सुविशाख ने रूद्रदामन के समय इस बाँध का मरम्मत करवाया और उसे तीन गुना अधिक मजबूत बनवाकर जल प्रबन्ध की व्यवस्था की।

7. उपनिवेशवाद की आर्थिक आलोचना के संबंध में निम्न में से कौन से कथन सही हैं?

(A) ब्रितानी प्रशासकों ने रेल मार्गों के तेज निर्माण और भारत के विदेश व्यापार को भारत की समृद्धि के साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया।
(B) राष्ट्रवादियों के लिए घरेलू उद्योग, विदेशी व्यापार और रेलवे पर नकारात्मक प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था के अल्पविकास को दर्शाता है।
(C) राष्ट्रवादियों ने इस तथ्य पर जोर दिया कि व्यय ब्रिटिश साम्राज्य की आवश्यकताएं पूरी कर रहा था, लेकिन परिणामस्वरूप वह भारतीय लोगों में समृद्धि भी ले आया।
(D) 1905 तक धन निर्गमन (ड्रेन थ्योरी) का सिद्धांत इंडियन नेशनल कांग्रेस के कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बना था।
नीचे दिए गए विकल्पों में सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल (A) और (B)
Solution:

उपनिवेशवाद की आर्थिक आलोचना के सन्दर्भ में ब्रितानी शासकों ने रेलमार्गों के निर्माण और विदेशी व्यापार को भारत की समृद्धि के रूप में देखा। उनके अनुसार रेलमार्ग के निर्माण से माल के आवागमन में सुगमता आई फलतः व्यापार-वाणिज्य में बढ़ावा मिला जिससे देश की प्रगति हुई जबकि राष्ट्रवादियों ने ब्रिटिश सरकार के इस विचारधारा का तर्कपूर्ण खण्डन किया। राष्ट्रवादियों के अनुसार विदेशी व्यापार, रेलवे पर नकारात्मक प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था के अल्पविकास को दर्शाता है क्योंकि इस व्यापार ने भारतीय बाजार को कच्चे माल एवं तैयार माल का निर्यातक एवं आयातक बना दिया। विकल्प (c) गलत है कि व्यय ब्रिटिश सरकार की आवश्यकताएँ पूरी कर रहा था और परिणाम स्वरूप भारतीय लोगों में समृद्धि भी कर रहा था, विकल्प (d) भी गलत है, क्योंकि धन निष्कासन (ड्रेन थ्योरी) का सिद्धांत कांगेस के 1896 ई. के कलकत्ता अधिवेशन (अध्यक्ष - एम.रहीमतुल्ला सयानी) में पेश किया गया था।

8. निम्नलिखित में से किस इतिहासकार के अनुसार 1592 में अकबर के साम्राज्य में लगभग 120 नगर और 3,200 कस्बे थे?

Correct Answer: (a) जामुद्दीन अहमद
Solution:

अकबर मुगल काल का एक महान शासक था। इसका जन्म 15 अक्टूबर 1542 ई. अमरकोट (सिंध) में राणा वीरसाल नामक राजपूत सरदार के घर में हमीदा बानो बेगम के गर्भ से हुआ था। इनके पिता का नाम हुमायूँ था।

अकबर के समय मुगल साम्राज्य का विस्तार तेजी से हुआ, इस दौरान शहरीकरण और शहरों की आबादी में भी वृद्धि हुई। निजामुद्दीन अहमद के अनुसार 1592 ई. में अकबर के साम्राज्य में लगभग 120 नगर और 3200 कस्बे थे। आइन-ए-अकबरी से पता चलाता है कि नगर का प्रशासन कोतवाल नामक पदाधिकारी करता था जिसका कार्य आधुनिक नगरपालिकाओं और पुलिस अधिकारियों के समान था।

9. निम्नलिखित संधियों का कालक्रमानुसार रखें:

(A) श्रीरंगपट्टनम की संधि
(B) लाहौर की संधि
(C) वसई की संधि
(D) इलाहाबाद और कड़ा की संधि
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) (D), (A), (C), (B)
Solution:

सही कालानुक्रम इस प्रकार है -
(i) इलाहाबाद और कड़ा की संधि – 16 अगस्त 1765
(ii) श्री रंगपट्टनम की संधि - 18 मार्च 1792
(iii) वसई (बसीन) की संधि - 31 दिसम्बर 1802
(iv) लाहौर की संधि – 9 मार्च 1846

10. नीचे दो कथन दिए गए है :

कथन (I): फावड़ा और हंसिया, छोटे शस्त्र एवं घोड़ों के लौह उपकरण महापाषाण युग के स्थलों से मिले हैं। कथन (II): मास्की और नागार्जुनकोण्ड महापाषाण युग के स्थल हैं।
उपरोक्त कथन के आलोक, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) कथन (1) और कथन (II) दोनों सत्य हैं
Solution:

नव पाषाण युग की समाप्ति के पश्चात् दक्षिण में जिस संस्कृति का उदय हुआ, उसे वृहत अथवा महापाषाण संस्कृति कहा जाता है। इस संस्कृति के लोग अपने मृतकों के अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए बड़े-बड़े पत्थरों का प्रयोग किया करते थे। वृहतपाषाण को मेगालिथ कहा जाता है। ये कृषि कर्म से भली-भाँति परिचित थे। उनके द्वारा उत्पादित प्रमुख अनाज चावल, जौ, चना, रागी आदि थे। गाय, बैल, भेड़, बकरी, घोड़े आदि इनके पालतू पशु थे। वे लोहे के उपकरणों का प्रयोग करते थे। समाधियों की खुदाई विविध प्रकार के लौह उपकरण जैसे तलवार, कटार, त्रिशूल, चपटी कुल्हाड़ियाँ, फावड़े, छेनी, हंसिया, चाकू, भाला आदि पाये गये। साथ ही छोटे शस्त्र एवं घोड़ों के लौह उपकरण भी मिले हैं। महापाषाण युग से संबंधित बहुत से महापाषणिक स्थल मिले हैं जिसमें कर्नाटक में स्थित मास्की, ब्रह्मगिरी, हल्लूर तथा आन्ध्र प्रदेश में स्थित नागार्जुनीकोण्ड, कदम्बरपुर आदि महत्वपूर्ण है। अतः दिया गया कथन I और II दोनों सही हैं।