यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2020/जून 2021 (इतिहास)

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ें और उसके नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर देंः

प्राचीन भारत ने हमें ग्रन्थों का एक विशाल भंडार प्रदान किया है, जो दो हजार वर्षों से भी अधिक समय से बौद्धिक एवं साहित्यिक गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और जिनका क्षेत्र अत्यन्त व्यापक हैं। प्राचीनतम साहित्य ऋग्वेद संहिता कम से कम तीन हजार वर्ष पुरानी है अथवा यह उससे भी काफ़ी प्राचीन हो सकती है। भारत की प्राचीन सभ्यता पर प्रकाश डालने वाले साहित्य की धारा निरन्तरता के साथ शताब्दियों तक प्रवाहमान रही, जिसने राजनैतिक इतिहास के अलावा मानवीय क्रिया कलाप के सभी क्षेत्रों को समाविष्ट किया। ऐसी स्थिति दुनिया की अन्य संस्कृतियों में दिखाई नहीं देती। साहित्य के इस विशाल भण्डार में धर्म और दर्शन, नीति शास्त्र, कर्मकांड एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ सृष्टिशास्त्र, ब्रह्मांड विद्या, भूगोल, खगोलशास्त्र एवं आनुषंगिक विज्ञान, राजनीतिक एवं आर्थिक सिद्धांत एवं व्यवहार अर्थात् संक्षेप में लौकिक जीवन के समस्त क्षेत्र समाहित हैं। इसमें विशद धार्मिक ग्रन्थों के अलावा शुद्ध साहित्यिक परम्परा के ग्रन्थ जैसे महाकाव्य, गीतिकाव्य, काव्य, नाटक, गद्य, चरित ग्रन्थ और लोक कथाएँ सम्मिलित है। यह साहित्य अपने स्वरूप की दृष्टि से जितना भारी-भरकम थी, उतना ही अपनी विषय-वस्तु की दृष्टि से समृद्ध भी है। यद्यपि यह भारत के राजनैतिक इतिहास के पुनर्निर्माण में अधिक सहायक नहीं हैं किन्तु यह भारतीय सभ्यता और संस्कृति के विविध चरणों के विकास के अध्ययन की दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी है। प्राचीन मिस्त्र, पश्चिम एशिया, चीन और यहाँ तक कि ग्रीक एवं रोम की सभ्यताओं के अध्ययन हेतु ऐसे संसाधन उपलब्ध नहीं है।
प्राचीन भारतीय नाटकों की लोकप्रिय विषयवस्तु मुख्यतः रामायण, महाभारत, दरबारी प्रेम और लोक कथाओं पर आधारित हैं। भास द्वारा लिखित माने गए निम्नलिखित नाटकों में किसका कथानक रामायण से लिया गया है ?

Correct Answer: (a) अभिषेक
Solution:

प्राचीन भारत ने हमें ग्रन्थों का एक विशाल भंडार प्रदान किया है, जो दो हजार वर्षों से भी अधिक समय से बौद्धिक एवं साहित्यिक गतिविधियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और जिनका क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है। प्राचीन भारतीय नाटकों का लोकप्रिय विषयवस्तु मुख्यतः रामायण, महाभारत, दरबारी-प्रेम और लोक कथाओं पर आधारित है। नाटककार भास द्वारा लिखित नाटक 'अभिषेक' का कथानक रामायण से लिया गया है।

अभिषेक छः अंक का नाटक है। इसमें रामायण के किष्किंधाकाण्ड में युद्धकाण्ड की समाप्ति तक की कथा अर्थात् बालिवध से राम राज्यभिषेक तक की कथा वर्णित है। अविमारक, बालचरित तथा पंचरात्र भी भास के महत्वपूर्ण नाटक है। जिसमें अविमारक में, राजा कुन्तीभोज की पुत्री कुरंगी का राजकुमार अविमारक (नायक) से प्रणय एवं विवाह का वर्णन है। बालचरित्र, नाटक भगवान् श्री कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित है। पंचरात्र, नाटक महाभारत के विराट पर्व पर आधारित है।

92. भारत के महान् दार्शनिक वेदान्त-देशिक ने एक संदेश काव्य (गीति काव्य का एक प्रकार) लिखा था, जिसका नाम है :

Correct Answer: (c) हंस-संदेश
Solution:

वेदांत -देशिक को दक्षिण भारत के श्री वैष्णव परंपरा में एक महत्वपूर्ण आचार्य के रूप में जाना जाता है।, जिसने विशिष्टाद्वैत के दार्शनिक सिद्धांत को प्राख्यापित किया। वेदांत देशिक ने एक संदेश काव्य (गीतिकाव्य का एक प्रकार) 'हंस-संदेश' लिखा।

यह 13वीं शताब्दी में लिखा गया संस्कृत भाषा में एक प्रेम कविता है। इसमें रामायण महाकाव्य के नायक, राम अपनी पत्नी सीता को हंस के माध्यम से एक संदेश भेजते हैं। जिसे रावण ने अपहरण कर लिया है। मेघदूत, पवनदूत तथा शीलदूत तीनों दूतकाव्य है जो क्रमशः कालिदास, धोयी, तथा चरित्र सुंदर द्वारा लिखा गया है।

93. निम्नलिखित में से कौन से ऐतिहासिक ग्रन्थ बिल्हण द्वारा रचित है ?

(A) विक्रमांकदेव-चरित
(B) भुवनाभ्युदय
(C) कवि-रहस्य
(D) कर्णसुन्दरी
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिएः

Correct Answer: (d) केवल (A) और (D)
Solution:

बिल्हण मूलतः कश्मीर के निवासी थे। ये सर्वप्रथम कलचुरी नरेश लक्ष्मीकर्ण के दरबार में कुछ वर्ष रहे। अन्त में कल्याणी चले गये। बिल्हण, विक्रमादित्य षष्ठ (1076-1126) के राजकवि थे। विक्रमादित्य षष्ठ ने इन्हें 'विद्यापति' की उपाधि दी थी। इनके (बिल्हण) महत्वपूर्ण ग्रन्थ विक्रमांकदेवचरित, कर्णसुन्दरी, शान्तिशतक, चौरपंचाशिका आदि हैं।

इसमें से विक्रमांकदेव चरित्र 11 वीं शताब्दी में संस्कृत में लिखी गयी। इस पुस्तक में बिल्हण ने कल्याणी के चालुक्य नरेश विक्रमादित्य षष्ठ के जीवन चरित्र का वर्णन किया। भुवनाभ्युदय, गुप्तकालीन चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के नवरत्न शंकु द्वारा लिखा गया।

94. वैदिक कर्मकांड एवं अनुष्ठानों पर ब्राह्मण ग्रंथ विशद प्रकाश डालते हैं। निम्नलिखित में से कौन सा ब्राह्मण ग्रंथ एवं वैदिक संहिता युग्म सही सुमेलित नहीं है ?

Correct Answer: (c) कौषितकी ब्राह्मण यजुर्वेद संहिता
Solution:
( वैदिक संहिता )( ब्राह्मण )
ऋग्वेद संहिताऐतरेय एवं कौषीतकी ब्राह्मण
सामवेद संहिताताण्ड्य संहिता (पंचविश ब्राह्मण)
यजुर्वेद संहिताशतपथ एवं तैत्तिरीय ब्राह्मण
अथर्ववेद संहितागोपथ ब्राह्मण

95. ऋग्वेद का सातवां मण्डल किस वंश (परिवार) से संबंधित है ?

Correct Answer: (c) वसिष्ठ
Solution:
ऋग्वेद एक संहिता है जिसमें 10 मण्डल हैं। जिसमें दो से सात तक के मण्डल सबसे पुराने माने जाते हैं। पहला, आठवाँ, नौवाँ और दसवाँ मण्डल परवर्ती काल का है। दसवाँ मण्डल, जिसमें पुरुष सूक्त भी है, जो सबसे बाद का है। इनमें से सांतवा मण्डल ऋषि वशिष्ठ से सम्बन्धित है।
ऋग्वेद के सातवें मण्डल में दशराज्ञ युद्ध का वर्णन है जो रावी (परुष्णी) नदी के तट पर लड़ा गया। यह युद्ध भरत वंश (त्रित्सु राजवंश) के राजा सुदास तथा दस अन्य जनों के राजाओं के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध का कारण राजा सुदास द्वारा अपने पुरोहित विश्वामित्र को हटाकर उनकी जगह वशिष्ठ को नियुक्त करना था। इसमें विजय सुदास की हुई। पाँचवे मंडल में अत्रि का, छठें मण्डल में भारद्वाज का तृतीय मण्डल विश्वामित्र से सम्बन्धित है।

96. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़ें और उसके नीचे दिये गये प्रश्नों के उत्तर देंः

इंडियन नेशनल कांग्रेस सिर्फ एक दल नहीं, बल्कि एक आंदोलन था। इसमें व्यापक रूप से अलग-अलग राजनैतिक तथा वैचारिक दृष्टि रखने वाले व्यक्ति और समूह शामिल थे। यह मुख्यधारा का संगठन था, लेकिन एकमात्र धारा नहीं था। स्पष्ट है कि गैर-कांग्रेसी आंदोलनों को कभी समानांतर धाराओं के रूप में नहीं देखा गया, जैसा कि कुछ लोगों ने कहा है। हालांकि वे कांग्रेस के बाहर थे, उनमें से ज्यादातर उससे सचमुच अलग नहीं थे और किसी भी चरण में वे कांग्रेस का विकल्प नहीं बने। सिर्फ एक जिसके बारे में कहा जा सकता है कि उसने राजनीति की वैकल्पिक धारा बनाई, वह थी सांप्रदायिक और जातिवादी आंदोलनों की धारा, जो न राष्ट्रीय थी और न साम्राज्यवाद विरोधी। 1919 से 1942 के बीच अनगिनत जन आंदोलनों के अलावा अनेक सत्याग्रह अभियान चलाए गए। यह आंदोलन अनेक रूपों और चरणों में नए किस्म की राजनीति लोगों के सामने ले आया इसने उनके धर्म, जाति और स्थान आधारित आधुनिकता पूर्व चेतना या पारंपरिक शासक के प्रति निष्ठा को नहीं झकझोरा। हालांकि कुछ मामलों में गांवों में कुछ आंदोलनों में अनुशासन लाने के लिए जातिगत ढाँचे का इस्तेमाल किया गया, जबकि आंदोलन के लक्ष्य और उसकी माँगों का जाति से कोई लेना-देना नहीं था। भारतीय संस्कृति के उपनिवेशीकरण से बचाव के लिए 19वीं शताब्दी में जो सामाजिक और धार्मिक सुधार आंदोलन खड़े हुए, वे भी राष्ट्रीय आंदोलन में समाहित हो गए। जन आंदोलन के रूप में भारत का राष्ट्रीय आंदोलन एक तरफ जहाँ ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने के लिए विविध प्रतिभाओं, ऊर्जाओं और व्यापक रूप से लोगों की क्षमताओं का इस्तेमाल कर पाया, वहीं रचनात्मक कार्यक्रमों पर भी बल दिया गया।
निम्न में से कौन आंदोलन की वैकल्पिक धारा नहीं थे, पर उसके समानांतर अवश्य थे?
(A) गदर आंदोलन
(B) सविनय अवज्ञा आंदोलन
(C) इंडियन नेशनल आर्मी
(D) रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह
नीचे दिए गए विकल्पों में सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (A), (C) और (D)
Solution:

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसम्बर, 1885ई. को बम्बई (मुम्बई) के गोकुल दास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुई। यह एक राजनीतिक संगठन नहीं बल्कि जन आंदोलन भी था। जिसमें अलग-अलग राजनैतिक और वैचारिक दृष्टि रखने वाले व्यक्ति और समूह शामिल थे।

कांग्रेस मुख्य धारा का संगठन था, लेकिन एक मात्र धारा नहीं था। सविनय अवज्ञा आंदोलन भी मुख्य धारा का संगठन था कुछ विद्वानों का मानना था कि गैर कांग्रेसी आंदोलन कभी समानांतर धारा में नहीं शामिल थे हालाँकि वे कांग्रेस के बाहर थे और विचारधारा के स्तर पर भी कांग्रेस का विकल्प नहीं बने।

सिर्फ साम्प्रदायिक और जातिवादी आंदोलन ने राजनीति की वैकल्पिक धारा बनाई जो न राष्ट्रीय और न साम्राज्यवाद विरोधी बल्कि अपने अधिकारों के हनन के खिलाफ किये गये आंदोलन थे, परन्तु बाद के कुछ आंदोलन जैसे गदर आंदोलन नेशनल आर्मी आंदोलन, रॉयल इण्डियन नेवी आंदोलन आदि वैकल्पिक धारा के नहीं थे लेकिन समानांतर अवश्य थे क्योंकि इनका विरोध भी औपनिवेशिक शासन के खिलाफ था।

97. निम्न में से कौन गैर-कांग्रेसी आंदोलन था ?

Correct Answer: (c) ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लासेज मिशन सोसायटी ऑफ इंडिया
Solution:

ऑल इण्डिया डिप्रेस्ड क्लासेज मिशन सोसायटी ऑफ इंडिया एक गैर-कांग्रेसी आंदोलन था। जिसका मुख्य उद्देश्य दलित जातियों में अपने अधिकारों के प्रति जागृति पैदा करना था। यह सोसायटी महाराष्ट्र में वी आर शिन्दे (विठ्ठल रामजी शिन्दे) ने 1906 ई. में स्थापित किया। इस सोसायटी का प्रथम अध्यक्ष एन.जी. चन्द्रावरकर को बनाया गया था।

इनके प्रयास से 1918 में प्रथम अखिल भारतीय दलित वर्ग सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमे सर्वप्रथम अखिल भारतीय अस्पृश्यता विरोधी घोषण-पत्र जारी किया गया था। चरमपंथी कांग्रेस से सम्बन्धित थे। 1907 में कांग्रेस के सूरत अधिवेशन दो हिस्सों-नरमपंथियों और अतिवादियों, (चरमपंथी) में विभाजित हो गया। चरमपंथियों के सबसे प्रमुख नेता बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, विपिन चन्द्र पाल और अरविन्द घोष थे।

ऑल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना एन. एम. जोशी द्वारा 1920 ई. में बम्बई में हुआ। इसके प्रथम अध्यक्ष लाला लाजपत राय थे। 1936 को प्रथम अखिल भारतीय किसान सभा का गठन लखनऊ में किया गया। 11 अप्रैल, 1936 के अखिल भारतीय किसान सभा का सम्मेलन हुआ जिसके अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती थे। इससे पूर्व बंगाल, पंजाब, उ.प्र. तथा आन्ध्र प्रदेश में किसान सभाओं का गठन किया गया था।

98. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन से किस प्रकार के लोग नहीं जुड़े थे ?

Correct Answer: (a) साम्राज्यवादी
Solution:

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का आरम्भ 1885 ई. में कांग्रेस के गठन से माना जाता है। भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में व्यापक रूप से अलग-अलग राजनैतिक तथा वैचारिक दृष्टि रखने वाले व्यक्ति और समूह शामिल थे, किन्तु साम्राज्यवादी लोग इस आंदोलन से नहीं जुड़े थे।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में मध्यममार्गियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन्होंने अपने भाषणों में ब्रिटिश सरकार की निदां की और जनमत संग्रह के लिए देश के विभिन्न भागों में अपने प्रतिनिधि भेजे। 1920 में एम.एन. राय तथा ताशकन्द में रहने वाले कुछ अन्य भारतीय उत्प्रवासियों ने भारतीय साम्यवादी दल का गठन किया जो राष्ट्रीय आंदोलन में लगातार सक्रिय रहे।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में स्वराजियों की भी प्रमुख भूमिका रही। । जनवरी 1923 में देशबन्धु चितरंजन दास तथा मोतीलाल नेहरू ने स्वराज पार्टी का गठन किया इन्होंने स्वशासन तथा राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए अनेक कार्य किये।

99. निम्नलिखित में से कौन-सा सत्याग्रह आंदोलन, इंडियन नेशनल कांग्रेस के कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था?

Correct Answer: (a) रौलेट सत्याग्रह
Solution:

महाद स्वीट टैंक (मीठा जलाशय) सत्याग्रह 'भीमराव अम्बेडकर की अगुवाई में 1927 को महाराष्ट्र राज्य के रायगढ़ जिले के महाद नामक स्थान पर दलितों को सार्वजनिक चबदार तालाब से पानी पीने और इस्तेमाल करने का अधिकार दिलाने के लिए किया गया एक प्रभावी सत्याग्रह था।

यह सत्याग्रह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था। मार्च 1919 में रौलेट एक्ट पास किया गया भारतीयों ने इसे 'काला कानून' कहा और इसका विरोध किया। इस एक्ट में एक व्यवस्था की गई थी कि मजिस्ट्रेट किसी भी संदेहास्पद व्यक्ति को गिरफ्तार करके जेल में डाल सकता था।

अगस्त 1920 में असहयोग आंदोलन गाँधी जी द्वारा शुरु किया गया। अगस्त 1942 ई. में भारत छोड़ो आंदोलन हुआ, इसे 'अगस्त क्रांति' भी कहते हैं।

100. इंडियन नेशनल कांग्रेस की कार्यवाहियों में महिलाओं ने किस वर्ष भाग लिया ?

Correct Answer: (b) 1889
Solution:भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कार्यवाहियों में महिलाओं ने सबसे पहले 1889 में पाँचवे अधिवेशन में भाग लिया। इस अधिवेशन की अध्यक्षता सर विलियम बैडरबर्न द्वारा बम्बई में किया गया। इसी अधिवेश में 21 वर्षीय मताधिकार का प्रस्ताव पारित हुआ। इसके बाद 1890 में छठें अधिवेशन में कलकत्ता विश्वविद्यालय की पहली महिला स्नातक "कादम्बिनी गांगुली" ने भी संबोधित किया। श्रीमती ऐनी बेसेण्ट, सरोजनी नायडू तथा नेल्ली सेनगुप्ता ने क्रमशः 1917 (कलकत्ता), 1925 (कानपुर) तथा 1933 (कलकत्ता) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षता की।