यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2020/जून 2021 (इतिहास)

Total Questions: 100

21. चोखामेला के बारे में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

(A) चोखामेला एक वारकरी संत थे।
(B) उनकी कविताओं में विठ्ठल के प्रति भक्ति व्यक्त की गई है।
(C) विठ्ठल के महान् उपासक होने के कारण उनकी मृत्यु के बाद उनकी समाधि का निर्माण पंढरपुर स्थित विठ्ठल मंदिर के अंदर किया गया।
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल (A) और (B)
Solution:

चोखामेला 14 वीं शताब्दी के महाराष्ट्र के वारकरी सम्प्रदाय के प्रसिद्ध संत थे। इनका जन्म महार जाति में हुआ था, इन्होंने कई अभंगों की रचना किया था। ये संत नामदेव के शिष्य थे, चोखामेला बचपन से ही बिठोबा के भक्त थे उनकी कविताओं में बिठ्ठल के प्रति भक्ति भावना व्यक्त की गई है। इनकी रचनाओं में दलित समाज पर भी प्रकाश पड़ता है। ये अपनी पत्नी सोयरा बाई एवं पुत्र कर्मामेला के साथ पंढरपुर के समीप मंगलबोध नामक स्थान पर रहते थे। इनकी मृत्यु पंढरपुर में हुई मृत्यु के उपरान्त इन्हें बिठ्ठल मंदिर के सामने दफनाया गया और मंदिर के सामने ही इनकी समाधि बनाई गई न कि मंदिर के अन्दर अतः विकल्प (c)गलत है।

22. गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण के पश्चात् उनके शरीर धातु (अवशेष) के वितरण में किसने प्रमुख भूमिका निभाई?

Correct Answer: (b) द्रोण
Solution:

बौद्ध धर्म के प्रतिपादक महात्मा गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई. पूर्व कपिलवस्तु के समीप लुम्बिनी नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता शुद्धोधन कपिलवस्तु के शाक्यगण के प्रधान थे एवं माता मायादेवी कोलिय गणराज्य की कन्या थी। इन्हें बोधगया (बिहार) में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। 483 ई. पूर्व कुशीनारा में 80 वर्ष की आयु में इनकी मृत्यु हुई, मृत्यु के उपरान्त इनके अस्थि अवशेषों को लेकर विवाद हो गया जिसके 8 दावेदार थे। अतः द्रोण नामक विद्वान ने इनके अवशेषों का बंटवारा किया। आजातशत्रु मगध साम्राज्य का शासक था जिसने कुणिक की उपाधि धारण किया था। महाकश्यप प्रथम बौद्ध संगीति (483 ई. पू.) का अध्यक्ष था जबकि उपालि नामक विद्वान ने वियनपिटक नामक ग्रंथ का संकलन किया था।

23. यह कथन किसने लिखा है: 'पूरा इतिहास विचारों का इतिहास है?

Correct Answer: (b) आर.जी. कॉलिंगवुड
Solution:

'पूरा इतिहास विचारों का इतिहास है' कथन रॉबिन जॉर्ज कॉलिंगवुड का है। इनका जन्म 22 फरवरी 1889 एवं मृत्यु 9 जनवरी 1943 ई. को हुआ था। यह एक दार्शनिक, इतिहासकार और पुरातत्वविद् थे। इनकी प्रमुख पुस्तकों में 'प्रिंसिपल ऑफ आर्ट (1938) एवं मरणोपरान्त प्रकाशित पुस्तक 'द आइडिया ऑफ हिस्ट्री' (1946) है।

इतिहास की महत्ता को देखते हुए कॉलिंगवुड ने कहा था - "हम ऐसे दहलीज पर खड़े हैं जिसमें दुनियाँ के लिए इतिहास उतना ही महत्वपूर्ण होगा जितना की 1600 - 1900 ई. के बीच “प्राकृतिक विज्ञान था। जी.आर.एल्टन का कथन है कि "जाँच से स्वतंत्र मृत वास्तविकता है" इनकी प्रमुख पुस्तक "इतिहास का अभ्यास" है। रांके की प्रसिद्ध कृति 'द सीक्रेट ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री" है।

इन्होंने कहा है कि “इतिहास व्यक्तिगत, पुरुषों और राज्यों के अलग-अलग विकास में विकसित होता है।" जी.एम. ट्रेवेलियन ने “हिस्ट्री ऑफ इंग्लैण्ड" में कहा है कि “पूर्वाग्रह के बिना कुछ भी नहीं लिखना चाहिए।

24. निम्नलिखित ऐतिहासिक कानूनी मामलों को पूर्व से बाद के कालक्रम में रखें :

(A) फूलमनी केस
(B) विजयलक्ष्मी केस
(C) महाराजा अभियोग केस
(D) रुक्माबाई केस
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) (C), (B), (D), (A)
Solution:

सही कालानुक्रम इस प्रकार है -(A) महाराजा अभियोग केस - 1862 ई.
(B) विजय लक्ष्मी केस - 1881 ई.
(C) रूक्माबाई केस - 1885 ई.
(D) फूलमनी केस - 1889 ई.

25. निम्नलिखित में से किस सिख गुरु ने सिखों के लिए प्रथम प्रतीक तीर्थ केन्द्र की स्थापना की जिसमें स्नान करने के लिए पानी तक पहुँचने के लिए 84 सीढ़ियों वाले कुएँ,जो सिखों के लिए पवित्र स्थल हो गया था, का निर्माण किस स्थान पर किया था?

Correct Answer: (b) गुरु अमरदास - गोइंदवाल
Solution:

गुरू अमरदास (1552 - 1574 ई.) सिक्खों के तीसरे गुरू थे। ये वैष्णव धर्म अनुयायी एवं अकबर के समकालीन थे। इन्होंने अपनी गद्दी गोइन्दवाल में स्थापित की इन्होंने यहाँ पर एक बावड़ी का निर्माण करवाया था। यहीं पर 84 सीढ़ियों वाले कुएँ का भी निर्माण करवाया था।

ऐसी मान्यता हैं कि बावड़ी में स्नान करने से सारे रोग दूर हो जाते हैं। इन्होंने सिक्खों में नई विवाह पद्धति 'लवन' का प्रारम्भ किया था। गुरू नानक सिक्ख धर्म के संस्थापक थे, इनका जन्म तलवण्डी (पाकिस्तान) में 1469 ई. एवं मृत्यु करतारपुर में 1539 ई. में हुआ था।

गुरू अंगद सिक्खों के दूसरे गुरू थे, इनकी उपाधि अन्य नाम लहना था। इन्होंने लंगर व्यवस्था का प्रतिपादन किया था। गुरू रामदास सिक्खों के चौथे गुरू थे तथा अकबर द्वारा इन्हें 500 बीघा भूमि प्रदान की गई थी जिस पर अमृतसर शहर बसाया गया।

26. मुगल वित्त प्रणाली के संदर्भ में निम्न में से कौन से कथन सही हैं ?

(A) मुगल भारत में एक विकसित वित्तीय और साख प्रणाली मौजूद थी।
(B) हुंडियो का प्रयोग बहुप्रचलित था।
(C) बीमा की कोई प्रणाली नहीं थी, इसलिए परिवहन के दौरान सामान की क्षति का जोखिम बहुत ज्यादा बना रहता था।
(D) सामान दुलाई अपने आप में महंगी थी, जो स्वायत्त सरदारों और बागियों की मांगों के संदर्भ में उसे और जोखिम वाला बना देती थी।
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल (A), (B) और (D)
Solution:

मुगल काल में एक विकसित वित्तीय और साख प्रणाली मौजूद थी। शरीफ, महाजन, बनियों द्वारा ऋण देने एवं सूद प्राप्त करने की जानकारी प्राप्त होती है। इनका मुख्य कार्य हुंडियों को जारी करना था जो उस समय की बैंकिग व्यवस्था में बहुत उपयोग सिद्ध हुआ।

सामान ढुलाई अपने आप में महंगी थी, जो स्वायत्त सरदारों और बागियों की माँगों के सन्दर्भ में उसे जोखिम वाला बना देती थी। विकल्प (c) गलत है क्योंकि मुगल काल में व्यापारिक गतिविधियों में बीमा-प्रणाली प्रचलित थी।

अंग्रेजी फैक्ट्रियों के कागज एवं सुजान राय द्वारा लिखित खुलासात-उत तवारीख में इसका विवरण मिलता है। यह कार्य भी सर्राफों द्वारा किया जाता था जो माल की सुरक्षा एवं परिवहन के दौरान जोखिम का पूरा ख्याल रखते थे।

27. निम्नलिखित में से कौन से राजवंश अपनी उत्पत्ति असुर नरक से जोड़ते हैं?

(A) उड़ीसा के भंज
(B) बंगाल के पाल
(C) उड़ीसा के शैलोद्भव
(D) असम के वर्मन
नीचे दिएगए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल (D)
Solution:

असम के वर्मन राजवंश अपनी उत्पत्ति असुर नरक से जोड़ते हैं। महाभारत में यहाँ के शासक नरकासुर का श्रीकृष्ण द्वारा वध किये जाने का विवरण मिलता है। कालिदास ने रघुवंश में प्राग्ज्योतिषपुर (कामरूप) के शासक के ऊपर रघु की विजय का उल्लेख किया है। गुप्तों के बाद यहाँ वर्मन वंश का शासन था। जिसका प्रसिद्ध शासक भास्करवर्मन् हर्ष का मित्र एवं सहायक था। उड़ीसा के भंज शासक अपनी उत्पत्ति मयूरी के अण्डे से बताते है तथा स्वयं को 'अण्डजवंश प्रभव' कहते हैं।
बंगाल के पाल वंश का संस्थापक गोपाल नामक व्यक्ति था। पाल वंश के प्रमुख शासकों में धर्मपाल, देवपाल और विग्रहपाल आदि ने शासन किया।
छठीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में उड़ीसा के कोंगद क्षेत्र (आधुनिक पुरी तथा गंजाम जिला) में शैलोद्भव वंश की उत्पत्ति हुई। इस वंश के अधिकांश शासकों को उनके लेखों में 'परम माहेश्वर' कहा गया है।

28. निम्नलिखित गुर्जर प्रतीहार राजाओं को कालानुक्रम में व्यवस्थित कीजिए:

(A) महेन्द्रपाल - I
(B) मिहिरभोज
(C) नागभट्ट - II
(D) वत्सराज
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) (D), (C), (B), (А)
Solution:

गुर्जर प्रतिहार राजाओं का कालानुक्रम इस प्रकार है-
वत्सराज - (775 - 800 ई.)
नागभट्ट द्वितीय - (800 - 833ई.)
रामभद्र - (833-836 ई.)
मिहिर भोज प्रथम (836 - 885 ई.)
महेन्द्रपाल प्रथम (885 - 910 ई.)
महीपाल (912 - 944 ई.)
महेन्द्रपाल द्वितीय - (945 - 948)
देवपाल - (948 - 949 )

29. औपनिवेशिक नगरों के संदर्भ में निम्न में से कौन-से कथन सही हैं?

(A) दिल्ली, आगरा और लाहौर ने अपना बहुत सारा वैभव खो दिया।
(B) ढाका, मुर्शिदाबाद और पटना ब्रिटिश काल में महत्वपूर्ण हो गए।
(C) बंबई का विक्टोरिया टर्मिनल स्टेशन मुगल वास्तु शैली के आधार पर बनाया गया था।
(D) सी.ए.बेली के अनुसार 1720 के दशक के बाद मध्य-गंगा क्षेत्र में छोटे कस्बों का काफी विस्तार हुआ। नीचे दिए गए विकल्पों में सबस उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल (A) और (D)
Solution:

औपनिवेशिक नगरों के संदर्भ में निम्न कथन सही हैं- राजनीतिक तथा व्यापारिक पुनर्गठन के साथ पुराने नगर जैसे - आगरा, लाहौर, दिल्ली, ढाका, मुर्शिदाबाद और पटना पतनोन्मुख हो गये.साथ ही नये शहरों जैसे मद्रास, मुम्बई, कलकत्ता का उदय हुआ, जो शिक्षा, व्यापार, प्रशासन, वाणिज्य आदि के महत्वपूर्ण केन्द्र बन गए। सी.ए. बेली के अनुसार 1720 के दशक के बाद मध्य-गंगा क्षेत्र में छोटे कस्बों का काफी विस्तार हुआ।

बंबई का विक्टोरिया टर्मिनल स्टेशन इंडो - सरसेनिक शैली (नवगाँधिक शैली) के आधार पर बनाया गया था। एफ. डब्ल्यू. स्टीवन्स द्वारा इसका डिजाइन किया गया।

30. कुख्यात जलियांवाला. बाग हत्याकांड में शामिल सर माइकल ओ' डायर की हत्या करने के लिए 1940 में ब्रिटिश सरकार द्वारा किस सिख देशभक्त पर मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी दी गई?

Correct Answer: (c) सरदार उधम सिंह
Solution:

13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियाँवाला बाग में आयोजित सभा स्थल में उपस्थित भीड़ पर अंग्रेज जनरल सर माइकल ओ' डायर ने बिना कोई पूर्व सूचना या चेतावनी के गोली चलवा दीं जिसमें करीब 1000 लोग मारे गये। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार 10 मिनट तक हुई गोलीबारी में करीब 379 व्यक्ति मारे गये और 1200 घायल हुए।

हण्टर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर माइकल ओ' डायर को निर्दोष साबित कर दिया गया। सरकार ने उसे सेना से निकाल दिया तथा ब्रिटिश अखबारों ने माइकल ओ' डायर को 'साम्राज्य का शेर' कहकर सम्मानित किया गया। ओ' डायर जब स्वदेश (लंदन) गए, तो उधम सिंह ने अपना नाम 'राम मोहम्मद सिंह आजाद' रखा और माइकल ओ' डायर की मार्च 1940 में लंदन में हत्या कर दीं।

इस जुर्म में उधम सिंह को फाँसी दे दी गई। वर्ष 1974 ई. में उधम सिंह की अस्थियों को भारत लाया गया। मंजीत सिंह कशीद क्रांतिकारी सरदार उधम सिंह के मित्र एवं सहयोगी थे।