Solution:यूरोप के बाहर, मुगल वास्तुकला में बैलस्टर स्तंभ का प्रयोग शाहजहाँ के शासनकाल में दिखाई पड़ता है। शाहजहाँ के समय में तीन किला-महलों में बैलस्टर स्तंभ प्राप्त होते हैं जिससे एक दिल्ली के लाल किले में, दो आगरा के किले में पेश किया गया था।
'मुगल आर्किटेक्चर' नामक अपनी पुस्तक में एब्बा कोच का यह मानना है कि प्राकृतिक तरीके से सजावट करने की प्रेरणा यूरोप से मिली थी। शाहजहाँ ने संगमरमर के भवनों में यूरोपीय मोटिफों का प्रयोग किया था।
इन मोटिफों से बागों का आभास होता है। शाहजहाँ का काल स्थापत्य कला का स्वर्णयुग माना जाता है। शाहजहाँ ने दिल्ली में लाल किला, जामा मस्जिद, दीवाने आम/दीवाने खास, रंगमहल तथा आगरा में दीवाने आम, दीवाने खास, मोती मस्जिद, जामा मस्जिद, नगीना मस्जिद और ताजमहल का निर्माण करवाया था।
अकबर ने आगरा, लाहौर और इलाहाबाद के किले बनवाये थे। फतेहपुर सीकरी के नगर और उसमें अनेक इमारतों का निर्माण किया गया जिसमें लाल बालुआ पत्थर का प्रयोग हुआ था। जहाँगीर के समय में नूरजहाँ ने एतमा उद्दौला का मकबरा बनवाया जिसमें पित्रादुरा शैली का प्रयोग किया गया है। औरंगजेब ने औरंगाबाद में अपनी पत्नी 'राबिया उद दौरानी' का मकबरा बनवाया जिसे दक्षिण का ताजमहल कहा जाता है।