Solution:महात्मा गाँधी (1869 - 1948) भारतीय राजनैतिक मंच 1919 ई. से 1948 ई. तक इस प्रकार छाए रहे कि इस युग को भारतीय इतिहास का गाँधी युग कहा जाता है। गाँधी जी ने अपनी संपूर्ण अहिंसक कार्य पद्धति को सत्याग्रह का नाम दिया। उनके लिए सत्याग्रह का अर्थ सभी प्रकार के अन्याय अत्याचार और शोषण के खिलाफ शुद्ध आत्मबल का प्रयोग करने से था।
निर्भिकता उनके सत्याग्रह के आवश्यक अंग था, उनके अनुसार, “सत्याग्रह और असहयोग गरजने वाले और डींग मारने वालों के अस्त्र नहीं है यह तो आपकी ईमानदारी की कसौटी है।" सत्याग्रह एक प्रतिकार पद्धति ही नहीं है, एक विशिष्ट जीवन पद्धति भी है जिसके मूल में अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, अस्तेय, निर्भयता, ब्रह्मचर्य, सर्वधर्म समभाव आदि एकादश वृत्त है, किन्तु आलोचनात्मक रूप से गाँधी के राजनैतिक यथार्थ बोध उनके नैतिक आदर्शों पर भारी पड़ा और इसके दावे के उलट उनके सत्याग्रह हमेशा शुद्ध रूप से आध्यात्मिक प्रकृति के नहीं रहे।
उनका संवैधानिक प्राधिकरण में अवज्ञा का कोई अच्छा परिणाम नहीं मिला, जो कि समाज विरोधी तत्वों के द्वारा सत्याग्रह के नाम पर सरकार का विरोध करते हैं। आर्थर मोर ने इसे "मानसिक पीड़ा" कहकर इसकी आलोचना की। आलोचकों द्वारा सत्याग्रह के रूप में उपवास को आंतकवाद और राजनीतिक दबाव की संज्ञा दी गयी है। गाँधी जी ने स्वयं कहा था 'कि "सत्याग्रह बड़ा भयानक शस्त्र है इसका प्रयोग बड़ी-सावधानी पूर्वक करनी चाहिए।
" इन आलोचनाओं के बावजूद यह कहा जा सकता है कि इस सिद्धान्त की सफलता प्रयोगकर्ता पर निर्भर करती है। आज व्यक्तिगत स्वार्थों को तिलांजलि देकर इस सिद्धान्त को सफल बनाया जा सकता है। अतः सत्याग्रह का सिद्धान्त गाँधी जी का एक महत्वपूर्ण व्र शाश्वत देन है।