Solution:स्मृतियों को धर्म शास्त्र की संज्ञा दी जाती है। भारतीय इतिहास में ईसा पूर्व द्वितीय शताब्दी से लेकर मध्यकाल तक विभिन्न स्मृति ग्रन्थों का प्रणयन हुआ है। याज्ञवल्क्य स्मृति (पाँचवी सदी) गुप्तकाल तक की रचनायें हैं, यह श्लोकों में लिखी गयी है तथा इसकी भाषा 'लौकिक संस्कृत' है।
याज्ञवल्क्य स्मृति के टीकाकार विश्वरुप, विज्ञानेश्वर, अपरार्क आदि है, अपरार्क शिलाहार (कोंकण) राजवंश के राजा थे। सेन राजवंश यह वंश 11-12 वीं शताब्दी में बंगाल में हिंदू राजवंश था तथा इसके संस्थापक-सांमत सेन थे। इसके प्रमुख शासक बल्लाल सेन, लक्ष्मण सेन इत्यादि थे।
काकतीय राजवंश यह एक दक्षिण भारतीय राजवंश था, जो कि 12वीं-14वीं शताब्दी में शासन किया। इनकी राजधानी वारंगल थी। काकतीय लोग अपने को चोल करिकाल का वंशज मानते है, इस वंश का प्रतापी राजा गणपति हुआ, बाद में उनकी पुत्री- रूद्राम्बा भी राज्य की शासिका बनी।
1323 ई.में मुहम्मद तुगलक ने इसे अपने राज्य में विलय किया। शैलोद्भव राजवंश यह वंश 6-8वीं शताब्दी के दौरान पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों पर शासन किया, इसके मूल क्षेत्र में कोंगोद मण्डल के रूप में जाना जाता है। इसमें वर्तमान उड़ीसा के गंजाम,खोरथा और पूरी जिले के कुछ हिस्से शामिल हैं। इनकी राजधानी कोंगोद थी। जिसे आधुनिक वाणपुर नाम से पहचाना जाता है।