Solution:औपनिवेशिक भारत में ईसाई मिशनरियों की शिक्षा के प्रसार के कारण 19वीं सदी के अंतिम दशक एवं 20वीं सदी की शुरूआत से देश के विभिन्न भागों में फैले हुए दलित समुदाय ने संगठित होकर आर्थिक, धार्मिक व राजनीतिक क्षेत्र में समुचित भागीदारी प्राप्त करने के उद्देश्य से जातिगत आंदोलन प्रारम्भ किया था।
लेकिन अखिल भारतीय दलित आंदोलन की शुरूआत अखिल बहिष्कृत वर्ग के नेताओं के द्वारा 1926ई. में नागपुर में 'ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लास एसोसिएशन' की स्थापना की गयी। जिसके प्रथम निर्वाचित अध्यक्ष मद्रास के दलित नेता एम.सी. राजा थे और उनके उपाध्यक्षों में से एक उपाध्यक्ष डॉ, भीमराव अम्बेडकर को बनाया गया था, लेकिन डॉ. अम्बेडकर इस सम्मेलन में शामिल नहीं हुये थे और बाद में उन्होंने इस संगठन से इस्तीफा दे दिया।
आगे चलकर 1930 ई.में डॉ. अम्बेडकर ने नागपुर में कांग्रेस-विरोधी 'ऑल इण्डिया डिप्रेस्ड कलास कांग्रेस' नाम से संगठन की स्थापना की, जिसका पहला अधिवेशन 8 अगस्त 1930 को नागपुर में आयोजित किया गया।
विशेष तथ्य
डॉ. अम्बेडकर द्वारा कुछ अन्य संगठन की स्थापना की गई जिसका विवरण इस प्रकार है-
1. ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लास फेडरेशन 1930
2. डिप्रेस्ड क्लासेज एसोसिएशन 1930
3. बहिष्कृत हितकारणी सभा 1924 (आगे चलकर इसके स्थान पर 'डिप्रेस्ड क्लास एजुकेशनल सोसायटी 1928 की स्थापना की')।