यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2020/जून 2021 (इतिहास)

Total Questions: 100

81. ईश्वरकृष्ण थे

Correct Answer: (c) षड्-दर्शन में से एक के दार्शनि
Solution:

वैदिक दर्शनों में षड्दर्शन (छः दर्शन) अधिक प्रसिद्ध और प्राचीन है। षड्दर्शन इस प्रकार है- सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा, वेदान्त हैं। इसके प्रणेता क्रमशः कपिल, पतंजलि, गौतम, कणाद, जैमिनि और वादरायण थे। सांख्य दर्शन का सबसे प्राचीन और प्रमाणिक ग्रंथ 'सांख्यकारिका' है जिसकी रचना ईश्वरकृष्ण द्वारा किया गया। ईश्वरकृष्ण साख्य दर्शन के महत्वपूर्ण दार्शनिक थे।

82. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची-I (लेखक)सूची-II (पुस्तक)
(A) जॉन विलियम काये(I) इंडिया ओल्ड एंड न्यू
(B) मैरी कारपेंटर(II) द इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया अंडर अर्ली ब्रिटिश
(C) रोमेश चंद्र दत्त(III) अ हिस्ट्री ऑफ द सिपोय वार इन इंडिया
(D) वैलेंटाइन चिरोल(IV) सिक्स मंथ्स इन इंडिया

नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए:

ABCD
(a)IIIIVIII
(b)IVIIIIII
(c)IIIIVIII
(d)IIIIIIIV
Correct Answer: (a)
Solution:सही सुमेल इस प्रकार है-
क्रमलेखक - पुस्तक
(a)जॉन विलियम काये — अ हिस्ट्री ऑफ द सिपोय वार इन इंडिया
(b)मैरी कारपेंटर — सिक्स मंथ्स इन इंडिया
(c)रोमेश चन्द दत्त — द इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इण्डिया अंडर अर्ली ब्रिटिश
(d)वैलेंटाइन चिरोल — इण्डिया ओल्ड एडं न्यू

83. 1962 के भारत-चीन युद्ध के बारे में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के रूख के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है ?

Correct Answer: (a) पार्टी की एक शाखा ने चीनी आक्रमण के विरुद्ध भारत सरकार का समर्थन किया।
Solution:

चीन ने 1962 ई. में भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्र (अरूणांचल प्रदेश) पर आक्रमण किया जिसके सन्दर्भ में वामपंथी विचारकों का अलग-अलग मत प्राप्त होता है। हमले के तुरन्त बाद वामपंथी पार्टी का एक शाखा ने जिसमें मुख्य रूप से अमृत डांगे ने चीनी आक्रमण की अवहेलना की उन्होंने भारत के समर्थन में कहा कि "चीनियों ने न सिर्फ भारत पर हमला किया है बल्कि भारत की जमीन पर भी कब्जा कर लिया है। इन्होंने सोवियत कम्युनिट पार्टी (USSR) और दुनिया की अन्य पार्टियों से बात करके चीन के नेतृत्व की घोर आलोचना किया।

कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के कुछ नेताओं जैसे श्रीपद डांगे, एस.जी. सरदेसाई ने कम्युनिस्ट नेताओं द्वारा चीन की सार्वजनिक रूप से आलोचना न किये जाने के रूख का विरोध किया। पार्टी की एक शाखा ने भारत के बारे में कहा कि भारत की बुर्जआ सरकार साम्राज्यवादियों का.समर्थन लेने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है, न की चीन की सरकार।

84. एलोरा के निम्नलिखित में से कौन से गुफा मंदिर ब्राह्मण धर्म से संबंधित हैं ?

(A) धूमेर लेण
(B) इन्द्र सभा
(C) जगन्नाथ सभा
(D) रावण की खाई
नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल (A) और (D)
Solution:

एलोरा को राष्ट्रकूट वंश के शासकों द्वारा बनवाया गया। यह स्थल महाराष्ट्र के औरंगाबाद में स्थित है। एलोरा पहाड़ी पर अठारह ब्राह्मण मंदिर एवं चार जैन गुहा मंदिरों का निर्माण करवाया गया। एलोरा के मंदिरों में 'कैलाश मंदिर' अपनी आश्चर्यजनक शैली के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसका निर्माण कृष्ण प्रथम द्वारा करवाया गया।

एलोरा में 'रावण की खाई' और 'धूमेर लेण' गुफा मंदिर ब्राह्मण धर्म से सम्बन्धित है। 'रावण की खाई' गुफा मंदिर में नृत्य करते हुए शिव तथा कैलाश पर्वत उठाए हुए रावण सुन्दर के दृश्य है। एलोरा की कुछ गुफायें जैन मत से भी संबंधित हैं जिसमें इन्द्रसभा तथा जगन्नाथ गुफा उल्लेखनीय है।

85. निम्नलिखित में से राजतरंगिणी में वर्णित वह कौन सा राजा है जिसने स्वयं एक चर्मकार के घर जाकर त्रिभुवनस्वामी का मन्दिर बनवाने के लिए उसकी कुटिया की ज़मीन मांगी ?

Correct Answer: (b) चन्द्रापीड
Solution:

सातवीं शताब्दी में दुर्लभवर्द्धन् नामक व्यक्ति ने कश्मीर में कार्कोट राजवंश की स्थापना की। दुर्लभवर्द्धन का पुत्र तथा उत्तराधिकारी दुर्लभक हुआ जिसने प्रतापादित्य की उपाधि ग्रहण किया। प्रतापादित्य के तीन पुत्र हुए चन्द्रापीड, तारापीड तथा मुक्तापीड जिन्हें क्रमशः वज्रादित्य; उदयादित्य तथा ललितादित्य भी कहा जाता था। दुर्लभक ने 50 वर्षों तक शासन किया। उसके बाद चन्द्रापीड शासक बना जो एक पवित्र एवं नेक शासक था।

राजतरंगिणी में वर्णित है किं चन्द्रापीड स्वयं चर्मकार के घर जाकर त्रिभुवनस्वामी का मंदिर बनवाने के लिए उसकी कुटिया की जमीन मांगी। तत्पश्चात तारापीड़ राजा बना जिसे कल्हण ने क्रूर तथा निर्दयी राजा बताता है। कश्मीर के शासकों में ललितादित्य मुक्तापीड सर्वाधिक शक्तिशाली शासक सिद्ध हुआ। वह एक साम्राज्यवादी शासक था।

86. 27 दिसंबर 1891 को पंजाब के कादियान' में किस सामाजिक-धार्मिक सुधारवादी आंदोलन की पहली आम सभा हुई ?

Correct Answer: (b) अहमदिया
Solution:

अहमदिया आंदोलन का प्रारम्भ 1889 ई. मिर्जा गुलाम अहमद द्वारा गुरदासपुर (पंजाब) जिले के कादियान नामक स्थान से हुआ। इसीलिए इस आन्दोलन को कादियानी आंदोलन भी कहा जाता है। यह एक सामाजिक-धार्मिक सुधारवादी आंदोलन था। अहमदिया आंदोलन उदारवादी सिद्धांतों पर आधारित था, जो मूलतः इस्लाम धर्म का ही एक आन्तरिक विद्रोह था।

27 दिसम्बर, 1891 को पंजाब के कादियान में अहमदिया आंदोलन की पहली आम सभा हुई। आर्य समाज तथा देव समाज हिन्दू सुधारवादी आंदोलन था जिसको क्रमशः स्वामी दयानन्द सरस्वती (1875) तथा शिवनारायण अग्निहोत्री (1887) में प्रारम्भ किया गया। निरंकारी 1851 में पंजाब में बाबा दयालदास द्वारा स्थापित एक सुधारवादी आंदोलन था। यह सिख धर्म का एक संप्रदाय है।

87. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

Correct Answer: (d) घोंदो केशव कर्वे उच्च वर्ण की हिंदू विधवाओं की शिक्षा के खिलाफ थे।
Solution:

स्त्रियों की दशा में सुधार करने के लिए ईश्वरचन्द्र विद्यासागर, धोदों केशव कर्वे (मद्रास) एवं विष्णु शास्त्री का महत्वपूर्ण स्थान था। धोदों केशव कर्वे जो फर्ग्यूसन कॉलेज के प्रोफेसर थे, 1893 में स्वयं एक विधवा ब्राह्मणी से विवाह किया। उन्होंने हिन्दू विधवाओं के उद्धार के लिए विशेष प्रयत्न किया और विधवा पुनर्विवाह संघ के सचिव बन गए। उन्होंने 1893 ई. में विधवा विवाह मण्डली तथा 1899 ई. में पूना (पुणे) में 'विधवा आश्रम' की स्थापना की। यह उच्च वर्ण की हिन्दू विधवाओं की शिक्षा के समर्थक थे न की विरोधी।

88. 1724 में हैदराबाद के स्वायत्तशासी राज्य की स्थापना किसने की ?

Correct Answer: (b) आसफ झा
Solution:

दक्कन में 1724 में हैदराबाद के स्वतंत्र राज्य का संस्थापक चिनकिलिच खाँ अथवा निजामुलमुल्क था। हैदराबाद के सूबेदार मुबारिंज खाँ को मुहम्मदशाह ने निजाम के विरुद्ध कार्यवाही करने का आदेश दिया। 1724 में मुबारिज खॉ और निजामुलमुल्क के बीच शूकरखेड़ा का युद्ध हुआ।

जिसमें निजामुलमुल्क विजयी हुआ तथा दक्कन का स्वामी बन बैठा। विवश होकर मुहम्मदशाह ने निजामुलमुल्क को दक्कन का वायसराय नियुक्त किया तथा आसफजाह की उपाधि प्रदान की। अलीवर्दी खाँ और शौकत जंग का सम्बन्ध बंगाल से था।

89. ऐतिहासिक लेखन में व्याख्या के संदर्भ में निम्न में से कौन से कथन सही हैं ?

(A) ऐतिहासिक पद्धति के आवश्यक चरण के रूप में व्याख्या का स्थान आलोचना तथा उ‌द्घाटन के परे जान पड़ता है।
(B) विवेचनात्मक निर्णय के लिए यह जानना जितनी बड़ी चुनौती है कि किसी दस्तावेज का क्या अर्थ है, उतनी ही बड़ी यह भी है कि उसे कब और किसने लिखा और क्या उस पर विश्वास किया जा सकता है।
(C) ऐतिहासिक आंकड़ों का साहित्यिक प्रतिपादन बहुत हद तक इस बात से निर्धारित होता है कि कोई उसकी व्याख्या कैसे करता है।
(D) तथ्यात्मक व्याख्या का संबंध दस्तावेज के तथ्यों से होता है, शब्दों से नहीं।
नीचे दिए गए विकल्पों में सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (B), (C) और (D)
Solution:

ऐतिहासिक लेखन में विवेचनात्मक निर्णय के लिए यह जानना जितनी बड़ी चुनौती है कि 'किसी दस्तावेज का क्या अर्थ है, उतनी ही बड़ी यह भी है कि उसे कब और किसने लिखा और क्या उस पर विश्वास किया जा सकता है।

' ऐतिहासिक आँकड़ों, का साहित्यिक प्रतिपादन बहुत हद तक इस बात से निर्धारित होता है। कि कोई उसकी व्याख्या कैसे करता है। इतिहास लेखन में तथ्यात्मक व्याख्या का संबंध दस्तावेज़ के तथ्यों से होता है, शब्दों से नहीं।

90. वह वाद-विवाद तथा शास्त्रार्थ में गहरी दिलचस्पी रखता था, और जब श्रीनाथ ने उसके राजकवि डिंडिमा को एक शास्त्रार्थ में परास्त कर दिया तो उसने उसे (श्रीनाथ को) 'कवि सार्वभौम' की उपाधि से सम्मानित किया और उसे 'सोने के सिक्कों से नहलाया'। विजयनगर के उस शासन की पहचान करेंः

Correct Answer: (b) देवराय II
Solution:

देवराय द्वितीय संगम वंश (विजयनगर) का महानतम शासक था। इसे गजबेटकर, इम्मादि देवराय/प्रौढ़ देवराय तथा पौराणिक आख्यानों में इसे इन्द्र का अवतार मानते थे। यह विद्या तथा विद्वानों दोनों का संरक्षक था। वह स्वयं संस्कृत का एक विद्वान था। उसने दो संस्कृत ग्रंथों महानाटक सुधानी एवं बादरायण के ब्रहासूत्र पर एक टीका की रचना की। इसके संरक्षण में चौतीस कवि फले फूले। जिसमें से डिंडिमा उसका दरबारी कवि था। जब तेलुगु कवि श्रीनाथ ने डिंडिमा को शास्त्रार्थ में पराजित कर दिया तो देवराय द्वितीय ने श्रीनाथ को 'कवि सार्वभौम' की उपाधि से सम्मानित किया और उसे सोने के सिक्के से नहलाया। हरिहर द्वितीय, मल्लिकार्जुन तथा विरूपाक्ष द्वितीय भी विजयनगर के महत्वपूर्ण शासक थे।