यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2020/जून 2021 (भूगोल-Shift-II)

Total Questions: 100

91. Note: Q. No. 91 to 95 : जलवायु परिवर्तन में आन्तरिक और बाह्य कारक दोनों सम्मिलित हैं। बाह्य कारकों के अन्तर्गत सौर परिवर्तनशीलता, पृथ्वी के कक्ष पर खगोलीय प्रभाव और ज्वालामुखीय गतिविधि आती हैं जबकि आन्तरिक कास्कों के अन्तर्गत तंत्र की प्राकृतिक परिवर्तनशीलता तथा वायुमण्डल, महासागर और भूपटल की प्रतिक्रियाएँ आती हैं। हाल के वर्षों में वैश्विक और स्थानीय स्तर पर मानव जनित जलवायु परिवर्तन सच्चाई बनकर सामने आई है, जिसमें मुख्यतः वायुमण्डलीय संघटन और भू-पटल के गुणों में होने वाले परिवर्तन सम्मिलित हैं। जलवायु परिवर्तनों में महाद्वीपीय प्रवाह, ज्वालामुखीय गतिविधि और सौर निर्गम सम्मिलित हैं।

हिमनदीय अन्तरहिमनदीय चक्रों को खगोलीय परिवर्तन नियंत्रित करते आए हैं। भूमण्डलीय तापमान 0.5°C बढ़ा और तापन में यह वृद्धि सबसे अधिक मध्य अक्षांशों में हुई है यहाँ भी तापन विशेषता 1920 से 1940 की अवधि तथा 1990 के दशक के दौरान कई वर्ष सबसे अधिक गरम रहे हैं। दीर्घकालीन परिवर्तनों का कारण खगोलीय शक्तियों को माना जाता है।

जबकि अल्पकालिक परिवर्तनों का सम्बन्ध उन मानवजन्य कारकों से है जो वायुमण्डलीय संघटन में परिवर्तन लाते हैं, जैसे ऐरोसॉल भारण ओजोन स्तर में कभी, वनस्पति का विनाश इत्यादि।

अगले 100 वर्षों के लिए जीसीएम के साथ जलवायु परिवर्तन की भविष्यवाणियाँ की जा रही हैं। ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन तथा ऐरोसॉल के आधार पर गले 100 सालों में औसत भूमण्डलीय तापमान के परिसर में 1.4 से 5.8°C वृद्धि होने के साथसाथ समुद्र सतह में भी वृद्धि होने की संभावना है।

निष्कर्ष के तौर पर हम कह सकते हैं कि जलवायु परिवर्तन के सन्दर्भ में मेघावरण, विकिरण, महासागरीय प्रक्रियाओं, वायुमण्डलीय युग्मन और फीडबैक प्रक्रियाओं से सम्बन्धित शोध के लिए महत्त्वपूर्ण आँकड़ों की आवश्यकता है।

निम्नलिखित में कौन-सा अवयव जलवायु परिवर्तन से सम्बन्धित नहीं है?

Correct Answer: (b) जल के ऊपर आने की पारस्परिक क्रियाएँ
Solution:

जल के ऊपर आने की पारस्परिक क्रियाएँ जलवायु परिवर्तन सम्बन्धी कारक नहीं हैं, जबकि सौर परिवर्तनशीलता, ज्वालामुखी उभेदन तथा खगोली आवर्तन जलवायु परिवर्तन के कारक हैं। जलवायु परिवर्तन में आन्तरिक और बाह्य कारक दोनों सम्मिलित हैं।

बाह्य कारकों के अन्तर्गत सौर परिवर्तनशीलता, पृथ्वी के कक्ष पर खगोलीय प्रभाव ज्वालामुखी गतिविधि जबकि आन्तरिक कारकों में प्राकृतिक परिवर्तनशीलता तथा वायुमण्डल, महासागर और भूपटल की प्रतिक्रियाएँ आती हैं।

92. वर्ष 2100 तक औसत भूमण्डलीय तापमान में वृद्धि का परिसर (range) निम्नलिखित में से कौन-सा होगा?

Correct Answer: (c) 1.4-5.8°C
Solution:

अगले 100 वर्षों (वर्ष 2100) के लिए जीसीएम के साथ जलवायु परिवर्तन की भविष्यवाणियाँ की जा रही हैं। ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन तथा ऐरोसाल के आधार पर अगले 100 सालों (वर्ष 2100) में औसत भूमण्डलीय तापमान के परिसर में 1.4 से 5.8 °C वृद्धि होने के साथ-साथ समुद्र सतह में भी वृद्धि होने की संभावना है।

93. वायुमण्डलीय संघटन में अल्पकालिक परिवर्तनों को निम्नलिखित में से कौन-सी गतिविधि बल प्रदान नहीं करती है?

Correct Answer: (b) खगोली बल-क्रिया
Solution:

वायुमण्डलीय संघटन में अल्पकालिक परिवर्तनों में खगोली बल क्रिया, गतिविधि बल प्रदान नहीं करती है। इसे दीर्घकालीन परिवर्तनों का कारण खगोलीय शक्तियों को माना जाता है, जबकि अल्पकालिक परिवर्तनों का सम्बन्ध उन मानवजन्य कारकों से हैं, जो वायुमण्डलीय संगठन में परिवर्तन लाते हैं। जैसे- ऐरोसॉल भारण, ओजोन स्तर में कमी, वनस्पति का विनाश आदि।

94. हाल के समय में भूमण्डलीय तापमान में निम्नलिखित में से कौन-सी वृद्धि दर देखी गई है?

Correct Answer: (c) 0.5° C
Solution:

भूमण्डलीय तापमान में 0.5°C में वृद्धि हुई और तापमान में यह वृद्धि सबसे अधिक मध्य अक्षांशों में हुई है, यहाँ भी तापन विशेषत 1920 से 1940 की अवधि तथा 1990 के दर्शक के दौरान कई वर्ष सबसे अधिक गरम रहे हैं।

ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन तथा ऐरोसॉल के आधार पर अगले 100 सालों में औसत भूमण्डलीय तापमान के परिसर में 1.4 से 5.8° C वृद्धि होने के साथ-साथ समुद्र सतह में भी वृद्धि होने की संभावना है।

95. जलवायु परिवर्तन से सम्बन्धित भविष्य के शोध के लिए निम्नलिखित में से कौन-सी शर्त अनिवार्य है?

Correct Answer: (d) वायुमण्डलीय निदर्शीकरण
Solution:

जलवायु परिवर्तन से सम्बन्धित भविष्य के शोध के लिए वायुमण्डलीयर निदर्शीकरण की शर्त अनिवार्य है। अगले 100 वर्षों के लिए जीसीएम के साथ जलवायु परिवर्तन की भविष्यवाणियाँ की जा रही हैं।

निष्कर्षतः जलवायु परिवर्तन के सन्दर्भ में मेघावरण, विकिरण, महासागरीय, प्रक्रियाओं, वायुमण्डलीय युग्मन और फीडबैक प्रक्रियाओं से सम्बन्धित शोध के लिए महत्वपूर्ण आँकड़ों की आवश्यकता है।

96. Note: Q. No.,96 to 100: जनसंख्या भूगोल, भूगोल का एक उपक्षेत्र, धरातल पर जनसंख्या वितरण, प्रवसन, उसकी संरचना और वृद्धि के स्थानिक विभेदों का अध्ययन करता है। एक प्रकार से यह जनसांख्यिकी को भौगोलिक सन्दर्भ शामिल करता है।

यह ऐसे प्रश्नों पर बल देता है, यथा कहाँ जनसंख्या पायी जाती है और इन जनसंख्याओं का आकार और संरचना किस प्रकार से प्रजनन, मृत्यु और प्रवसन की जनसांख्यिकीय प्रक्रियाओं से विनियमित होती है।

जनसंख्या भूगोल में योगदान अन्तर विषयक है। जनसंख्या भूगोल में योगदान देने वाले विषयों में भूगोल के अलावा जनसांख्यिकी, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र है। जनसंख्या भूगोल अपने प्रारम्भ से कम से कम तीन अलग-अलग रूप ले चुका है।

सबसे पहले उन्नीस सौ पचास के दशक में इस विषय के उद्भव के समय इसमें समग्रत जनसंख्या वितरण तथा जनसंख्या की परिवर्तनात्मक विशेषताओं में स्थानिक भिन्नता के आधार पर अध्ययन पर बल दिया गया।

अमेरिका से ट्रिवार्थ, जैलिन्स्की, डब्ल्यू.ए.वी. क्लार्क और अन्य विद्वानों तथा फ्रांस में जे.बी. गार्नियर और पियरे जॉर्ज ने इस चरण में अग्रणी भूमिका निभायी। समय के साथ जनसंख्या भूगोल का क्षेत्र विभिन्न विषयवस्तुओं को शामिल करते हुए विस्तरित हुआ है।

यह जनसंख्या की विशेषताओं को राजनीतिक और प्रशासनिक सीमाओं में समूहन करने माध्यम से लिंग, धर्म, आयु, अक्षमता, प्रजाति और सहित विभिन्न जनसंख्या सम्बन्धी विशेषताओं का अध्ययन करता है।

ऐसे सभी चर जन्म, मृत्यु और विवाह अथवा प्रवसन के जीवन सम्बन्धी आँकड़ों से कहीं बहुत आगे जाते हैं। भूगोलवेत्ताओं ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जनसांख्यिकीय वृद्धि, विस्थापन और संसाधनों तक पहुँच के बीच के सम्बन्धों का अध्ययन किया है। उदाहरण के तौर पर वर्णमात्री, सममानरेखा और बिन्दुओं के प्रयोग से तैयार घनत्व मानचित्र हैं।

निम्नलिखित में से कौन-सी जनसंख्या विशेषता जीवन-सम्बन्धी आँकड़ों से सम्बन्धित नहीं है?

Correct Answer: (c) आयु और लिंग
Solution:

आयु और लिंग जनसंख्या विशेषता जीवन-सम्बन्धी आँकड़ों से सम्बन्धित नहीं है। जनसंख्या भूगोल धरातल पर जनसंख्या वितरण, प्रवसन, उसकी संरचना और वृद्धि के स्थानिक विभेदों का अध्ययन करता है तथा जनसंख्याओं का आकार और संरचना से प्रजनन, मृत्यु और प्रवसन की जनसांख्यिकीय प्रक्रियाओं से विनियमित होती है।

97. भूगोल के अलावा निम्नलिखित में किस विषय-समूह ने जनसंख्या भूगोल के अध्ययनमें महत्त्वपूर्ण योग दिया है?

Correct Answer: (c) समाजशास्त्र, जनसांख्यिकी और अर्थशास्त्र
Solution:

भूगोल के अतिरिक्त जनसंख्या भूगोल के अध्ययन में समाजशास्त्र, जनसांख्यिकीय और अर्थशास्त्र विषय ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

98. निम्नलिखित में से एक को जनसंख्या के जीवन सम्बन्धी आँकड़ों वाली जनसांख्यिकीय विशेषताओं का अध्ययन जनसंख्या भूगोल के अन्तर्गत किया जाता है?

Correct Answer: (c) जन्म, मृत्यु, विवाह प्रवसन
Solution:

जन्म, मृत्यु, विवाह प्रवसन को जनसंख्या के जीवन सम्बन्धी आँकड़ों वाले जनसांख्यिकीय विशेषताओं का अध्ययन जनसंख्या भूगोल के अन्तर्गत किया जाता है।

99. निम्नलिखित में से कौन विद्वान है जिसने स्थानिक विज्ञान के भाग के रूप में जनसंख्या भूगोल को आगे बढ़ाया परन्तु वह अमरीकी भूगोलवेत्ता नहीं थे-

Correct Answer: (b) पियरे जॉर्ज
Solution:

फ्रांस में जे.बी. गार्नियर और पियरे जॉर्ज तथा अमेरिका में ट्रिवार्था, जैलिस्की, डब्ल्यू.ए.वी. क्लार्क ने स्थानिक विज्ञान के भाग के रूप में जनसंख्या भूगोल को आगे बढ़ाया।

100. निम्नलिखित में से किस दशक में जनसंख्या भूगोल में जनसंख्या वितरण तथा जनसंख्या की विशेषताओं के विभिन्न लक्षणों में स्थानिक अन्तर के व्यवस्थित अध्ययन पर अधिक बल दिया गया?

Correct Answer: (a) 1950 के दशक में
Solution:

जनसंख्या भूगोल अपने प्रारम्भ से कम-से-कम तीन अलग-अलग रूप ले चुका है, सबसे पहले 1950 के दशक में इस विषय के उद्धभव के समय इसमें समग्रत जनसंख्या वितरण तथा जनसंख्या की परिवर्तनात्मक विशेषताओं में स्थानिक भिन्नता के आधार पर अध्ययन पर बल दिया।