यह ऐसे प्रश्नों पर बल देता है, यथा कहाँ जनसंख्या पायी जाती है और इन जनसंख्याओं का आकार और संरचना किस प्रकार से प्रजनन, मृत्यु और प्रवसन की जनसांख्यिकीय प्रक्रियाओं से विनियमित होती है।
जनसंख्या भूगोल में योगदान अन्तर विषयक है। जनसंख्या भूगोल में योगदान देने वाले विषयों में भूगोल के अलावा जनसांख्यिकी, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र है। जनसंख्या भूगोल अपने प्रारम्भ से कम से कम तीन अलग-अलग रूप ले चुका है।
सबसे पहले उन्नीस सौ पचास के दशक में इस विषय के उद्भव के समय इसमें समग्रत जनसंख्या वितरण तथा जनसंख्या की परिवर्तनात्मक विशेषताओं में स्थानिक भिन्नता के आधार पर अध्ययन पर बल दिया गया।
अमेरिका से ट्रिवार्थ, जैलिन्स्की, डब्ल्यू.ए.वी. क्लार्क और अन्य विद्वानों तथा फ्रांस में जे.बी. गार्नियर और पियरे जॉर्ज ने इस चरण में अग्रणी भूमिका निभायी। समय के साथ जनसंख्या भूगोल का क्षेत्र विभिन्न विषयवस्तुओं को शामिल करते हुए विस्तरित हुआ है।
यह जनसंख्या की विशेषताओं को राजनीतिक और प्रशासनिक सीमाओं में समूहन करने माध्यम से लिंग, धर्म, आयु, अक्षमता, प्रजाति और सहित विभिन्न जनसंख्या सम्बन्धी विशेषताओं का अध्ययन करता है।
ऐसे सभी चर जन्म, मृत्यु और विवाह अथवा प्रवसन के जीवन सम्बन्धी आँकड़ों से कहीं बहुत आगे जाते हैं। भूगोलवेत्ताओं ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जनसांख्यिकीय वृद्धि, विस्थापन और संसाधनों तक पहुँच के बीच के सम्बन्धों का अध्ययन किया है। उदाहरण के तौर पर वर्णमात्री, सममानरेखा और बिन्दुओं के प्रयोग से तैयार घनत्व मानचित्र हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सी जनसंख्या विशेषता जीवन-सम्बन्धी आँकड़ों से सम्बन्धित नहीं है?
Correct Answer: (c) आयु और लिंग
Solution:आयु और लिंग जनसंख्या विशेषता जीवन-सम्बन्धी आँकड़ों से सम्बन्धित नहीं है। जनसंख्या भूगोल धरातल पर जनसंख्या वितरण, प्रवसन, उसकी संरचना और वृद्धि के स्थानिक विभेदों का अध्ययन करता है तथा जनसंख्याओं का आकार और संरचना से प्रजनन, मृत्यु और प्रवसन की जनसांख्यिकीय प्रक्रियाओं से विनियमित होती है।