यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2020/जून 2021 (भूगोल-Shift-II)

Total Questions: 100

11. निम्नलिखित में से वनस्पति की कौन-सी जाति उष्ण कटिबंधीय कंटीले वनों से सम्बन्धित नहीं है?

(A) निर्मली (B) खेजड़ा (C) तेंदू (D) हल्दू (E) बबूल
नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिये-

Correct Answer: (b) केवल (C) और (D)
Solution:

तेंदू तथा हल्दू वनस्पति उष्ण कटिबंधीय पतझड़ वन वाले क्षेत्रों में पाये जाते हैं, जबकि निर्मली, खेजड़ा तथा बबूल शुष्क मरुस्थलीय काँटेदार वनस्पति में पाये जाते हैं। भारत में वन वर्षा का अनुसरण करते हैं। अतः सामान्य रूप से भारतीय वनों का वर्गीकरण इस प्रकार हैं-

क्रमवन के प्रकारप्रमुख वनस्पतियाँ
(1)उष्ण कटिबंधीय सदाबहार वनताड़, महोगनी, नारियल, एबनी, आबनूस, बाँस, रोजवुड, बेंत आदि।
(2)उष्ण कटिबंधीय पतझड़ वाले (मानसूनी) वनसाल, सागौन, शीशम, चन्दन, आम, साखू, आँवला, हरड़-बहेड़ा आदि।
(3)शुष्क मरुस्थलीय काँटेदार वनस्पतिखजूर, रीठा, केर, बेर, करील आदि।
(4)डेल्टाई वनमैंग्रोव, कैसूरिना, फोनिक्स, नीपा तथा सुन्दरी आदि।
(5)पर्वतीय वनफर, स्प्रूस, चीड़, सनोवर, ब्लूपाइन आदि।

12. भारत की पर्वतीय जलवायु के बारे में निम्नलिखित से कौन-सा कथन सही नहीं है?

(A) सूर्य के अभिमुख और विमुख ढालों के तापमान में भारी अन्तर
(B) दिन के तापमान का प्रसार (रेंज) अधिक होता है।
(C) वर्षा की अनिश्चितता, जिसमें सूखा पड़ने और फसल खराब होने की संभावना होती है।
(D) उच्च तापमान के साथ-साथ उच्च आर्द्रता।
नीचे दिये गये विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिये -

Correct Answer: (c) केवल (A) और (B)
Solution:

भारत की पर्वतीय जलवायु जम्मू एवं कश्मीर से लेकर अरूणाचल प्रदेश तक सम्पूर्ण हिमालय क्षेत्र में विस्तृत है। इस जलवायु प्रदेश में सूर्य के अभिमुख ओर विमुख ढालों के तापमान में कम अन्तर पाया जाता है क्योंकि यहाँ जून का औसत तापमान 15° से 17°C के मध्य पाया जाता है।

परन्तु शीत ऋतु में यह 8°C से भी कम हो जाता है। वर्षा की मात्रा पूर्व से पश्चिम को घटती जाती है। और अधिक ऊँचाई के भागों में यह हिमपात के रूप में होती है। इस क्षेत्र में वर्षा की अनिश्चितता, जिससे सूखा पड़ने और फसल खराब होने की संभावना बनी रहती है।

यह पर्वतीय क्षेत्र बंगाल की खाड़ी के करीब होने के कारण पूर्वोत्तर क्षेत्र में महासागरीय प्रभाव बना रहने के कारण उच्च तापमान तथा उच्च आर्द्रता बना रहता है। अतः स्पष्ट है कि कथन A और B. असत्य है जबकि C और D सही है।

13. निम्नलिखित में से कौन पछुआ पवन से अधिक सम्बन्धित है-

(A) प्रचण्ड पचासा (फ्यूरियस फिफ्टीज)
(B) बॉयल का गैस नियम
(C) वाकर परिसंचरण
(D) रॉस्बी तरंग
नीचे दिये गये विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिये-

Correct Answer: (d) केवल (A) और (D)
Solution:

प्रचण्ड पचासा एवं रॉसबी तरंग पछुआ पवन से सम्बन्धित है। पछुआ हवाएँ उपोष्ण उच्च वायुदाब (300-35) अक्षांशों से उप वीय निम्न वायुदाब (600-650) अक्षांशोंके बीच दोनों गोलाद्धों में चलने वाली स्थायी पवन को 'पछुआ हवा' कहते हैं।

इनकी प्रचण्डता के कारण ही दक्षिण गोलार्द्ध में इन्हें 400-50° अक्षांशों पर गरजती चालीसा, 50° दक्षिण अक्षांश के पास भयंकर पचासा तथा 60° के पास चीखती साठा आदि नामों से पुकारते हैं। विशिष्ट पूर्व-पश्चिम पवन संचरण को वाकर संचरण कहते हैं।

जेट स्ट्रीम की स्थिति तथा विस्तार (ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर) में प्रायः परिवर्तन होता रहता है जिसके अन्तर्गत जेट स्ट्रीम का पारूप लगभग पश्चिम से पूर्व दिशा में प्रवाह से लेकर विसर्जित तक हो जाता है। लहरनुमा जेट स्ट्रीम को रासबी तरंग कहते हैं।

वाकर परिसंचरण तथा एल निनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) से सम्बन्धित है तथा इसका नामकरण वैज्ञानिक जी.टी. वाकर के नाम के आधार पर किया गया है। अतः विकल्प (d) सही है।

14. किसे सामान्यतया इस विचार की वैधता को स्थापितकरने का श्रेय दिया जाता है कि एक हिमयुग था, जिसके दौरान उत्तरी यूरोप का अधिकांश भाग बर्फ की चादर से ढका था?

Correct Answer: (b) अगासिज़
Solution:

उत्तरी यूरोप का अधिकांश भाग बर्फ की चादर से ढका होने सम्बन्धी विचार की वैधता को स्थापित करने का श्रेय लुईअगासिज़ को जाता है। फेंक तथा ब्रुकनर ने यूरोप महाद्वीप में हिम चादर के चार क्रमिक प्रसारों का उल्लेख किया है,

जो गुंज,मिण्डल, रिस तथा दुर्म के नाम से जाना जाता है। इसी प्रकार उत्तरीअमेरिका में भी हिमचादर के चार क्रमिक प्रसारों के प्रमाण मिले हैं,जैसे- नेब्रास्कन, कन्सान, इलीनोइन तथा आयोवा एवं विस्कान्सिनं ।अतः विकल्प (b) सही है।

15. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए -

सूची-I (उच्चावच्च के स्वरूप)सूची-II (महासागरों के नाम)
(A) प्युअर्टो रिको डीप(I) प्रशांत महासागर
(B) सुंडा खाई(II) अटलांटिक महासागर
(C) फिलीपीन खाई(III) हिन्द महासागर
(D) पॉइंट बैरो(IV) आर्कटिक महासागर

नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिये -

ABCD
(a)IIIIIIIV
(b)IVIIIIII
(c)IIIIIIIV
(d)IIIIVIII
Correct Answer: (c)
Solution:

सही सुमेलित युग्म इस प्रकार हैं-

सूची-I (उच्चावच्च के स्वरूप)सूची-II (महासागरों के नाम)
पोटोँरिको डीपअटलांटिक महासागर
सुंडा खाईहिन्द महासागर
फिलीपीन खाईप्रशांत महासागर
पॉइंट बैरोआर्कटिक महासागर

अतः विकल्प (c) सही सुमेलित है।

16. जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार निम्नलिखित में से किस राज्य संघ राज्य क्षेत्र समूह ने 35 प्रतिशत से अधिक नगरीय जनसंख्या दर्ज किया?

Correct Answer: (b) गुजरात, तमिलनाडु, केरल, पंजाब
Solution:

जनगणना 2011 के आँकड़ों के अनुसार- गुजरात, तमिलनाडु, केरल तथा पंजाब राज्यों में 35 प्रतिशत से अधिक नगरीय जनसंख्या दर्ज किया गया है, जबकि शीर्ष शहरी जनसंख्या प्रतिशत वाले राज्य इस प्रकार हैं-

(1) गोवा - 62.2%, (2) मिजोरम 52.1%, (3) तमिलनाडु 48.45%, (4) केरल - 47.7%, (5) गुजरात 42.60%
अतः विकल्प (b) सही है।

17. पर्वतीय क्षेत्रों में उत्तरोन्मुख ढाल निम्नलिखित में से किसकी वजह से वनाच्छादित बना रहता है?

Correct Answer: (a) विकिरण तीव्रता
Solution:

पर्वतीय क्षेत्रों में उत्तरोन्मुख ढाल विकिरण तीव्रता के कारण वनाच्छादित बना रहता है। लार्ड रेले (1842-1919) ने सौर्थिक विकिरण के प्रकीर्णन की प्रक्रिया तथा उसके बहुआयामी प्रभाव का गहन अध्ययन किया। इसी कारण से प्रकीर्णन की प्रक्रिया को रेले प्रकीर्णन कहते हैं।

वह ऊर्जा जो किसी पदार्थ का ताप बढ़ा देती है। उसे तर्क संवेद्य ऊष्मा (Sensible Heat) कहा जाता है। जो पदार्थ की भौतिक अवस्था के परिवर्तन में बदल जाता है। (उल्लेखनीय जल) अप्रकट ताप (Latent heat) कहलाती है।

ऊर्जा स्थानान्तरण प्रक्रियायें मिलकर भूपृष्ठ और वायुमण्डल के बीच जटिल विनिमय प्रभाव डालते हैं। आसक्ति (Addictive) संवेद्य ऊष्मा और अदृश्य ताप के स्थानान्तरण द्वारा स्थानीय और प्रादेशिक ऊर्जा संतुलन बनाये रखा जा सकता है।

18. किसके द्वारा पर्यावरणीय निश्चयवाद की आलोचना और विरोध किया गया-

(A) हटिंगटन और सेम्पल
(B) विडाल डी ला ब्लाश और एल फैब्रे
(C) हम्बोल्ड और रेटजेल
(D) रिटर और एल फेब्बर
(E) ब्लाश और रेकलस
नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिये -

Correct Answer: (d) केवल (B) और (E)
Solution:

डी ला ब्लाश, एल फैब्रे तथा एलिस रेकलस ने पर्यावरणीय निश्चयवाद की आलोचना और विरोध किया। फ्रांसीसी भूगोलवेत्ताओं ने सम्भववाद, भौगोलिक एकता, प्रादेशिक अध्ययन तथा सांस्कृतिक भूदृश्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा माना कि मनुष्य स्वयं समस्या और हल दोनों है और प्रकृति उसकी उपदेशिका मात्र है,

जबकि नियतिवादी विचारकों के अनुसार मनुष्य पर्यावरण की विशिष्ट देन है और समस्त मानवीय क्रियाएँ भौतिक दशाओं (पर्यावरण) द्वारा नियंत्रित होता है। इस विचारधारा का सर्वाधिक विकास 19वीं तथा आरम्भिक 20वीं शताब्दी में जर्मनी में हुआ। इस विचारधारा के प्रमुख समर्थक रेटजेल, ई.सी. सेम्पुल तथा एल्सवर्थ हंटिंगटन हैं। अतः विकल्प (d) सही उत्तर का चयन है।

19. निम्नलिखित में किस अवधि में पुरातत्वविद स्थायी मानव अधिवासों के साक्ष्य पाते हैं?

Correct Answer: (c) नवपाषाणिक अवधि
Solution:

नवपाषाणिक अवधि में पुरातत्वविद स्थायी मानव अधिवासों के साक्ष्य पाये जाते हैं। नवपाषाणिक संस्कृति अपनी पूर्वगामी संस्कृतियों की अपेक्षा अधिक विकसित थी। इस काल का मानव न केवल खाद्य पदार्थों का उपभोक्ता था, वरन् उत्पादक भी था।

यह कृषि कार्य और पशुपालन से पूर्णतः परिचित हो चुका था। भारतीय पुरापाषाण काल को मानव द्वारा इस्तेमाल किये जाने वाले पत्थर के औजारों के स्वरूप और जलवायु में होने वाले परिवर्तन के आधार पर तीन अवस्थाओं में बाँटा जाता है

निम्न पुरापाषाण काल (प्रारम्भ से 1 लाख ई.पू.)
मध्य पुरापाषाण काल (1 लाख ई.पू. से 40,000 ई.पू.)
उच्च पुरापाषाण काल (40,000 ई.पू. से 10,000 ई.पू.)

20. निम्नलिखित में कौन-सा सहसम्बन्ध गुणांक की विशेषता नहीं है?

(A)  r (आर) चयन के उद्भव से स्वतंत्र है
(B) r (आर) मापक से स्वतंत्र हैं।
(C) r (आर) - 1 और +1 के बीच में स्थित है।
(D) r = + 1.0 पूर्णतया नकारात्मक सहसम्बन्ध का संकेत देता है।
(E) r = - 1.0 पूर्णतया धनात्मक सहसम्बन्ध का संकेत देता है।
नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिये-

Correct Answer: (d) केवल (D) और (E)
Solution:

दो या दो से अधिक चरों के बीच पाये जाने वाले साहचर्य के स्तर को सहसम्बन्ध कहते हैं। दूसरे शब्दों में दो आँकड़ों के समुच्चयों या दो चरों के बीच के सम्बन्धों के परिमाप या सूचक को सहसम्बन्ध गुणांक कहते हैं। सहसम्बन्ध गुणांक का मान +1 एवं - 1 के बीच पाया जाता है। यदि सहसम्बन्ध अधिक (± 0.5 से अधिक) है, तो सम्बन्धित चरों का सहसम्बन्ध महत्त्वपूर्ण होता है। सहसम्बन्ध गुणांक इस प्रकार हैं-

सहसम्बन्ध गुणांकसहसम्बन्ध की गहनता
+ 1.00पूर्ण धनात्मक
- 1.00पूर्ण ऋणात्मक
+ 0.90 से 1.00अत्यधिक धनात्मक
+ 0.90 से -1.00अत्यधिक ऋणात्मक
+ 0.20 से कमअल्प धनात्मक
- 0.20 से कमअल्प ऋणात्मक
0 (शून्य)पूर्ण अभाव