Solution:प्रचण्ड पचासा एवं रॉसबी तरंग पछुआ पवन से सम्बन्धित है। पछुआ हवाएँ उपोष्ण उच्च वायुदाब (300-35) अक्षांशों से उप वीय निम्न वायुदाब (600-650) अक्षांशोंके बीच दोनों गोलाद्धों में चलने वाली स्थायी पवन को 'पछुआ हवा' कहते हैं।
इनकी प्रचण्डता के कारण ही दक्षिण गोलार्द्ध में इन्हें 400-50° अक्षांशों पर गरजती चालीसा, 50° दक्षिण अक्षांश के पास भयंकर पचासा तथा 60° के पास चीखती साठा आदि नामों से पुकारते हैं। विशिष्ट पूर्व-पश्चिम पवन संचरण को वाकर संचरण कहते हैं।
जेट स्ट्रीम की स्थिति तथा विस्तार (ध्रुवों से भूमध्य रेखा की ओर) में प्रायः परिवर्तन होता रहता है जिसके अन्तर्गत जेट स्ट्रीम का पारूप लगभग पश्चिम से पूर्व दिशा में प्रवाह से लेकर विसर्जित तक हो जाता है। लहरनुमा जेट स्ट्रीम को रासबी तरंग कहते हैं।
वाकर परिसंचरण तथा एल निनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) से सम्बन्धित है तथा इसका नामकरण वैज्ञानिक जी.टी. वाकर के नाम के आधार पर किया गया है। अतः विकल्प (d) सही है।