Solution:जैसे -जैसे तरंगें तट की ओर बढ़ती हैं, उनके रूप में आमूल परिवर्तन होता जाता है। सागरी तरंगों के परिवर्तनों का सही क्रम क्रमशः कम, अन्तराल वाले श्रृंग, तरंग रोधक, उद्धावन तथा पश्च धावन है।
सागरीय तरंगें प्रायः सागरीय तट की ओर अग्रसर| होती हैं। जैसे-जैसे तट के निकट होती जाती हैं, जल की गहराई कम होती जाती है। इस कारण निचले जल में तरंग का निचला भाग तली से रगड़ खाकर आगे चलता है,
परन्तु इस अग्रिम गति में रगड़ के कारण रुकावट होती है। इस कारण लहरों की ऊँचाई अधिक तथा लम्बाई कम होने लगती है। तरंग श्रृंग की ऊँचाई अधिक हो जाने से वह टूट कर आगे गिरता है तथा तट की ओर चलता है।
इस टूटी हुई जल की तरंग को सर्फ, ब्रेकर या स्वाश कहते हैं तथा जब तट से टकराकर जल पीछे की ओर लौटता है, तो उसे अधः प्रवाह (Back wash) कहते हैं। अतः विकल्प (d) सबसे उपयुक्त उत्तर है।