Solution:हड़प्पा सभ्यता की खोज प्रसिद्ध पुरातत्वशास्त्री दयाराम साहनी तथा राखालदास बनर्जी ने हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो से प्राप्त पुरावस्तुओं के आधार पर की। पिग्गट महोदय ने दोनों को 'एक विस्तृत साम्राज्य की जुड़वा राजधानियाँ' कहा है। इसके अतिरिक्त के. एन. दीक्षित, मैके, ऑरेल स्टाइन, ए. घोष, जे.पी. जोशी आदि पुरातत्वशास्त्रियों ने इस सभ्यता के विस्तृत खोज में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। प्राप्त पुरावस्तुओं जैसे मुहरे, मृदभाण्ड, मूर्तियाँ आदि से हड़प्पा सभ्यता की सामाजिक, आर्थिक एवं धार्मिक गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।
सैंधव नगरों के उत्खनन से किसी भी प्रकार के मंदिर या समाधि के साक्ष्य प्राप्त नहीं होते हैं। सैंधव वासियों के धार्मिक ज्ञान के लिए हमें मुद्राओं, मूर्तियों, पाषाण प्रतिमाओं पर ही निर्भर रहना पड़ता है। हड़प्पा से प्राप्त एक मुहर पर मानव बलि का चित्र बना हुआ है तो दूसरी मुहर पर पीपल वृक्ष के नीचे एक मनुष्य बलि के लिए एक बकरा लेकर खड़ा है।
मातृदेवी तथा शिव पूजा के अतिरिक्त सैन्धववासी पशुओं (जैसे-गैंडा, बैल, कूबड़दार बैल, भैंसा आदि), पक्षियों, 'वृक्षों आदि की उपासना करते थे। सम्भवतः यह हड़प्पा वासियों का जीवात्मवाद में विश्वास ही था। कालान्तर में विभिन्न पशु-पक्षियों को हिन्दू देवी-देवताओं के वाहन के रूप में स्वीकार कर लिया गया। अतः कथन (I) असत्य है लेकिन कथन (II) सत्य है।