यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2021/जून 2022 (इतिहास) Shift- I

Total Questions: 100

21. महाराजा रणजीत सिंह की नयी सेना में निम्नलिखित में से किस-एक को शामिल नहीं किया गया था :

Correct Answer: (d) गुजराती
Solution:

महाराजा रणजीत सिंह (1780-1839 ई.) सुकरचकिया मिसल के मुखिया महासिंह के पुत्र थे। 1792 ई. में इनके पिता की मृत्यु के बाद इनकी माता राजकौर एवं सास सदाकौर और दीवान लखपत राय के नेतृत्व में एक प्रतिशासन परिषद के माध्यम से 1797 ई. तक शासन के कार्यों का संचालन किया गया।

रणजीत सिंह ने 1797 ई. में शासन की समस्त बागडोर स्वयं अपने हाथ में ले लिया एवं अपना सर्वाधिक ध्यान सेना पर केन्द्रित किया। इन्होंने अपनी सेना जातिगत आधार पर न संगठित कर सैन्य कुशलता के आधार पर सृजित किया जो इस प्रकार थी सिक्ख, बिहारी, डोगरा, गोरखा, मुस्लिम, डच, अमरीकी, यूनानी, रूसी, अंग्रेज, स्पेनी, एंग्लो इंडियन तथा फ्रांसीसी आदि।
अतः इस प्रकार रणजीत सिंह की सेना में गुजराती शामिल नहीं थे।
कुछ प्रमुख तथ्य-
हंटर महोदय ने रणजीत सिंह की फौज के बारे में कहा था
"धार्मिक जोश एवं कुशलता में एक अद्वितीय सेना है जो एशिया में दूसरे स्थान पर गिनी जाती है।"
रणजीत सिंह को 'राजा' की उपाधि काबुल के शासक जमानशाह ने प्रदान की थी। रणजीत सिंह ने लाहौर को पंजाब की राजनीतिक राजधानी एवं अमृतसर को धार्मिक राजधानी घोषित किया था।

22. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

 कथन (I): चौरी-चौरा की घटना 14 फरवरी, 1922 को घटित हुई
कथन (II): चौरी-चौरा की घटना 05, फरवरी, 1922 को घटित हुई
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) कथन (I) गलत है, लेकिन कथन (II) सही है
Solution:

चौरी-चौरा की घटना 5 फरवरी, 1922 ई. को ब्रिटिश भारत में संयुक्त प्रांत (आधुनिक उत्तर प्रदेश) के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा नामक स्थान पर हुई थी। असहयोग आंदोलन में भाग लेने के दौरान प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह जिसमें भगवान अहीर के नेतृत्व में पुलिस से झड़प हो गई एवं जवाबी कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों द्वारा एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया गया और उनके द्वारा थाने में आग लगा दी गई। इस घटना में तीन नागरिकों और 23 पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी।

महात्मा गाँधी जो कि हिंसा के सख्त खिलाफ थे तथा उन्होंने इस घटना के परिणाम स्वरूप 12 फरवरी, 1922 ई. को राष्ट्रीय स्तर पर असहयोग आंदोलन को स्थगित कर दिये।

नोट: ऐतिहासिक चौरी-चौरा की घटना के 100 साल (4 फरवरी, 2022) पूरे होने पर केंद्र सरकार द्वारा 'शताब्दी समारोह' मनाया गया। इस तरह भारत सरकार द्वारा चौरी-चौरा एक्सन की तिथि 4 फरवरी, 1922 मानी गई है। अब हर वर्ष भारत में 4 फरवरी को 'शहादत दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

23. निम्नलिखित घटनाओं को सर्वप्रथम से शुरू कर कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए:

(A)  दिल्ली उर्दू अखबार, दिल्ली
(B) वर्नाकुलर प्रेस एक्ट
(C)  हिक्कीज़ गजेट, कलकत्ता
(D) बांबे समाचार
(E) दादा भाई नौरोजी का निबन्ध 'पावर्टी ऑफ इंडिया'
नीचे दिए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल (C), (D), (A), (E) और (B)
Solution:

नोट: 'कलकत्ता गजट' 1784 ई. में एक औपनिवेशिक अधिकारी फ्रांसिस ग्लैडविन द्वारा स्थापित बंगाल में एक अंग्रेजी समाचार पत्र था।

24. गुप्त साम्राज्य में ग्राम स्तर पर बहुत विस्तृत प्रशासनिक व्यवस्था थी। नीचे दिये निकायों में से उस काल के शिलालेखों में वर्णित निकाय कौन से हैं:

(A) घाटिका
(B) पंचमंडली
(C) अष्टकुल-अधिकरण
(D) सभामंडल
(E)  त्रिमंडली
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल (B) और (C)
Solution:गुप्त साम्राज्य में ग्राम स्तर पर बहुत विस्तृत प्रशासनिक व्यवस्था थी जो उस समय के शिलालेखों में वर्णित निकाय मिलते हैं। 'ग्राम' शासन की सबसे छोटी ईकाई होती थी जिसका प्रशासन ग्रामसभा द्वारा चलाया जाता था। ग्रामसभा को मध्य भारत में पंचमंडली तथा बिहार में आम जनपद कहा जाता था।

ग्रामसभा सरकार के सभी कार्यों को करती थी। देवराज (चन्द्रगुप्त द्वितीय) के साँची अभिलेख (412-13 ई.) में पंचमंडली का उल्लेख मिलता है। दामोदरपुर से प्राप्त तीसरे ताम्रपत्र में ग्रामसभा के कुछ पदाधिकारियों के नाम इस प्रकार मिलते हैं-

  • अष्टकुल-अधिकरण (अष्ट कुलाधिकारी) भूमि सम्बन्धी क्रय-विक्रय का अधिकारी था एवं यह ग्रामीण प्रशासन तथा वीथि के प्रशासन के माध्यम से सम्बन्ध स्थापित करने का कार्य भी करता था।
  • महत्तर- ग्राम पंचायत के वृद्ध सदस्य।
  • ग्रमिक गाँव का मुखिया।
  • कुटुम्बिन परिवारों का सदस्य।

25. किसने अपनी अपूर्ण जीवनी के दस अध्याय लिखा जिसके लिए वे "एन इण्डियन पिलग्रिम" नामक शीर्षक देना चाहते थे?

Correct Answer: (c) सुभाष चन्द्र बोस
Solution:

सुभाष चन्द्र बोस ने अपनी अपूर्ण जीवनी के दस अध्याय लिखे जिसके लिए वे 'एन इण्डियन पिलग्रिम' (एक भारतीय तीर्थयात्री) नामक शीर्षक देना चाहते थे। नेताजी के नाम से प्रसिद्ध सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 ई. में ओडिसा के कटक शहर में हुआ था।

इन्होंने 1920 ई. में आई.सी.एस. परीक्षा में चौथी रैंक प्राप्त की थी, परंतु देश भक्ति के कारण अप्रैल 1921 ई. में त्याग पत्र देकर देश की अविस्मरणीय सेवा की। 'एक भारतीय तीर्थयात्री' पुस्तक में सुभाष चन्द्र बोस के जीवन की कहानी को जन्म से लेकर भारतीय सिविल सेर्वा से उनके इस्तीफे तक के बारे में बताया गया है।

इस पुस्तक में सुभाष चन्द्र बोस ने लिखा है कि "मैं मुश्किल से पंद्रह वर्ष का था जब स्वामी विवेकानंद ने मेरे जीवन में प्रवेश किया, फिर भीतर एक क्रांति हुई और सब कुछ उल्टा हो गया।" यह पुस्तक राष्ट्रीय मुक्ति के लिए सेवा, बलिदान और उत्साह की भावना के विकास को याद कराती है, जो उनके जीवन की प्रेरक शक्तियाँ थीं।

26. नीचे दो कथन दिए गए हैं एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में;

अभिकथन (A): 712 ई. में मुहम्मद बिन कासिम ने सिन्ध पर आक्रमण किया जिसके परिणामस्वरूप दाहिर की पराजय हुई।
तर्क (R) : अल बावर्जी सिन्ध के खतरनाक समुद्री लुटेरे थे जो खलीफा की ओर जाने वाले जलपोतों को लूट लेते थे और बावर्जियों को दंडित करने में दाहिर असमर्थ था।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
Solution:

8वीं शताब्दी ई. में सिंध में हिन्दूशाही वंश का शासन था जिसका संस्थापक चच या चाच था। चाच का पुत्र दाहिर था। दाहिर के समय लंका से आने वाले कुछ अरब जहाजों को सिन्ध (देवल) के अल बावर्जी जो खतरनाक समुद्री लुटेरे थे ये लुटेरे खलीफा की ओर जाने वाले जलपोतों को लूट लेते थे और बावर्जियों को दंडित करने में दाहिर असमर्थ था। यही घटना सिन्ध पर अरबों के आक्रमण का तात्कालिक कारण बनी।

कालांतर में ईराक के सूबेदार हज्जाज ने 17 वर्षीय मुहम्मद बिन कासिम को सिन्ध विजय हेतु भेजा। 712 ई. में मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर आक्रमण किया जिसके परिणामस्वरूप दाहिर की पराजय हुई। कासिम की सेना में ऊँट, अश्वारोही एवं शिला (पत्थर) फेंकने वाले मंजानिक या मैगनल तथा नौफथा या नॉफता खतरनाक मशीनें थीं। इस विजय अभियान के दौरान कासिम की सहायता जाटों, मेड़ों और विद्रोही बौद्धों ने की थी।

नोट: चचनामा मूलतः अरबी भाषा में लिखा गया ग्रंथ था जिसका 'अबूबकर कूफी' ने फारसी में अनुवाद किया। इसमें अरबों की सिन्ध विजय का उल्लेख है। अतः अभिकथन (A) तथा तर्क (R) दोनों सही है और तर्क (R) अभिकथन (A) की सही व्याख्या भी कर रहा है।

27. उत्तरवर्ती चोल शासकों के शासन के निम्नलिखित घटनाओं को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए :

(A)  कंडलूर एवं विलिनम् पर हमला
(B)  पश्चिमी चालुक्यों के शासन कोलीपाक्कई (कुल पाक) के पतन का ध्वंस
(C) तंजौर पर कब्जा
(D)  सीलोन पर हमला एवं अनुराधापुर का ध्वंस
(E)  श्री विजय का नौसैनिक हमला
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उतर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल (C), (A), (D), (E) और (B)
Solution:

उत्तरवर्ती चोल शासकों के शासन से सम्बन्धित निम्नलिखित घटनाओं का सही क्रम इस प्रकार है- चोल शासक विजयालय ने पाण्ड्‌यों की निर्बल स्थिति का लाभउठाकर तंजौर पर अधिकार जमा लिया तथा वहाँ उसने दुर्गा देवी का एक मंदिर बनवाया।

राजराज प्रथम (985-1014 ई.) ने केरल के राजा रविवर्मा को त्रिवेन्द्रम में पराजित किया एवं इस विजय के उपलक्ष्य में 'काण्डलूर शालैकलमरू' की उपाधि ग्रहण की। राजराज ने कंडलूर एवं विलिनम् (विलिन्द के दुर्ग), कोल्लम तथा कोल्लदेश के राजाओं को पराजित किया। राजराज प्रथम ने ही एक नौसैनिक दल के साथ सीलोन पर हमला किया एवं अनुराधापुर को ध्वस्त कर दिया तथा सिंहल द्वीप के उत्तरी भाग पर उसका अधिकार हो गया।

चोलो ने अनुराधापुर के स्थान पर पोलोन्नरूव को अपनी राजधानी बनाई तथा इसका नाम 'जननाथ मंगलम्' रख दिया। राजेन्द्र प्रथम (1014-1044 ई.) ने श्रीविजय (शैलेन्द्र) राज्य को जीतने के लिए एक शक्तिशाली नौसेना भेजी थी तथा उसने शैलेन्द्र शासक संग्राम विजयोतुंगवर्मन को बन्दी बना लिया था। राजाधिराज प्रथम (1044-1052 ई.) ने पश्चिमी चालुक्यों के शासन में कोलीपाक्कई (कुलपाक) या कुल्पक के दुर्ग पर अधिकार कर उसमें आग लगा दिया तथा पून्दूर के युद्ध में इसने चालुक्य-सेना को बुरी तरह परास्त किया था।

28. क्षेमेन्द्र के 'समय मातृका' में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में से किसके साहसिक कार्यों का वर्णन मिलता है?

Correct Answer: (a) स्त्री
Solution:

11वीं सदी के कश्मीरी कवि क्षेमेन्द्र (1000-86 ई.) द्वारा लिखित 'समय मातृका (वेश्या की आत्मकथा) में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में से स्त्री के साहसिक कार्यों का वर्णन मिलता है। क्षेमेन्द्र राजा अनन्त व कलश के समकालीन थे।

संस्कृत में जितना साहित्य क्षेमेन्द्र ने लिखा है उतना वेदव्यास के अतिरिक्त किसी ने नहीं लिखा है। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- वृहत्कथा मंजरी, रामायण मंजरी, भारत मंजरी और कला विलास आदि।

29. अपनी प्रतिष्ठा के पतन को वर्णित करती निम्नलिखित पंक्तियाँ किसने लिखी :

आरंभ में ईश्वर ने मुझे सम्मानित किया और मेरे जीवन के अंत में मुझे अपमानित कर दिया।'

Correct Answer: (d) बरनी
Solution:

अपनी प्रतिष्ठा के पतन को वर्णित करते हुए जियाउद्दीन बरनी ने लिखा है कि 'आरंभ में ईश्वर ने मुझे सम्मानित किया और मेरे जीवन के अंत में मुझे अपमानित कर दिया।' सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक ने बरनी को दरबार में सम्मानित पद दिया और मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में नदीम (जिन्दादिल साथी) के पद पर रहा।

केवल फिरोजशाह तुगलक के समय में उसे राज्य सम्मान से वंचित कर दिया गया जिसके कारण उसके जीवन का अंतिम समय निर्धनता और कष्ट में व्यतीत हुआ। फिरोजशाह के काल में बरनी 5 माह भटनेर के जेल में रहा और यहीं पर तारीख-ए-फिरोजशाही की रचना की। इसकी एक अन्य रचना 'फतवा-ए-जहाँदारी' भी है।

इसामी मुहम्मद बिन तुगलक का समकालीन था तथा इनकी प्रमुख रचना 'फुतूह-उस-सलातीन' है। अमीर खुसरो का जन्म उत्तर प्रदेश के पटियाली गाँव में 1253 ई. में हुआ था। इनकी प्रमुख रचनाएँ-किरान-उस-सादेन, मिफ्ताह-उल-फुतूह, नूह सिपिहर, आशिका, तुगलकनामा और तारीख-ए-अलाई है।

30. इनमें से कौन 1917 में महात्मा गाँधी के साथ चम्पारण नहीं गया था?

Correct Answer: (d) एनी बेसेन्ट
Solution:

बिहार के चम्पारण जिले के किसानों को अपनी जमीन के 3/20वें हिस्से में नील की खेती करना अनिवार्य था अर्थात् यूरोपीय नील बागान मालिकों ने तिनकठिया पद्धति लागू कर रखी थी। 1917 ई. में राजकुमार शुक्ल के आग्रह पर महात्मा गाँधी अपने सहयोगियों-बाबू राजेन्द्र प्रसाद, मजहर-उल-हक, जे.बी. कृपलानी, ब्रज किशोर, सी.एफ. एंडूज, डॉ. अनुग्रह नारायण सिंह, महादेव देसाई आदि के साथ गाँवों का दौरा किया।

सरकार ने एक जाँच आयोग गठित किया, जिसमें गाँधी जी को भी शामिल किया गया था। आयोग के सुझाव पर तिनकठिया पद्धति को समाप्त कर दिया गया तथा त्यागान मालिक अवैध वसूली का 25 फीसदी वापस करने पर राजी हो गये। इसी दौरान रवीन्द्रनाथ टैगोर ने गाँधी जी को 'महात्मा' की उपाधि से विभूषित किया। गाँधी जी के साथ चम्पारण एनी बेसेंट नहीं गईं थीं। एनी बेसेंट ने भारत में स्वशासन के उद्देश्य से 1916 ई. में होमरूल लीग आंदोलन की शुरुआत की थी।