Solution:महाराजा रणजीत सिंह (1780-1839 ई.) सुकरचकिया मिसल के मुखिया महासिंह के पुत्र थे। 1792 ई. में इनके पिता की मृत्यु के बाद इनकी माता राजकौर एवं सास सदाकौर और दीवान लखपत राय के नेतृत्व में एक प्रतिशासन परिषद के माध्यम से 1797 ई. तक शासन के कार्यों का संचालन किया गया।
रणजीत सिंह ने 1797 ई. में शासन की समस्त बागडोर स्वयं अपने हाथ में ले लिया एवं अपना सर्वाधिक ध्यान सेना पर केन्द्रित किया। इन्होंने अपनी सेना जातिगत आधार पर न संगठित कर सैन्य कुशलता के आधार पर सृजित किया जो इस प्रकार थी सिक्ख, बिहारी, डोगरा, गोरखा, मुस्लिम, डच, अमरीकी, यूनानी, रूसी, अंग्रेज, स्पेनी, एंग्लो इंडियन तथा फ्रांसीसी आदि।
अतः इस प्रकार रणजीत सिंह की सेना में गुजराती शामिल नहीं थे।
कुछ प्रमुख तथ्य-
हंटर महोदय ने रणजीत सिंह की फौज के बारे में कहा था
"धार्मिक जोश एवं कुशलता में एक अद्वितीय सेना है जो एशिया में दूसरे स्थान पर गिनी जाती है।"
रणजीत सिंह को 'राजा' की उपाधि काबुल के शासक जमानशाह ने प्रदान की थी। रणजीत सिंह ने लाहौर को पंजाब की राजनीतिक राजधानी एवं अमृतसर को धार्मिक राजधानी घोषित किया था।