यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2021/जून 2022 (इतिहास) Shift- I

Total Questions: 100

31. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिएः

(A) नयनिका
(B) दिद्दा
(C) प्रभावती
(D) रुद्राम्बा
(E) अक्कादेवी
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (A), (C), (B), (E) और (D)
Solution:

सही कालक्रम इस प्रकार है-

(I) नयनिका (नागनिका) सातवाहन शासक शातकर्णि प्रथम (प्रथम, द्वितीय शताब्दी ई. पू.) का विवाह अंगीय कुल के महारठी बनकचिरों की पुत्री नयनिका से हुआ था। नयनिका भागवत धर्म की अनुयायी थी एवं इसके नानाघाट अभिलेख से ज्ञात होता है कि शातकर्णि प्रथम ने दो अश्वमेध तथा एक राजसूय यज्ञ सहित कुल 18 यज्ञ सम्पन्न किया था।

(II) प्रभावती यह गुप्त सम्म्राट चन्द्रगुप्त द्वितीय की पुत्री थी। प्रभावती गुप्ता का विवाह वाकाटक नरेश रूद्रसेन द्वितीय के साथ 380 ई. के आस-पास हुआ था। रूद्रसेन की मृत्यु के बाद प्रभावती ने 13 वर्ष तक अने अल्पवयस्क पुत्रों दिवाकर सेन तथा दामोदर सेन की संरक्षिका के रूप में शासन किया।

(III) दिद्दा या दिदा (958-1003 ई.) दिद्दा कश्मीर की शासिका थी। संस्कृत कवि कल्हण ने कश्मीर के इतिहास में सबसे शक्तिशाली महिला शासिका दिद्दा का उल्लेख किया है।

(IV) अक्का देवी (1010-1064 ई.) यह कर्नाटक के चालुक्य वंश की राजकुमारी और किशुकाडु नामक क्षेत्र की राज्यपाल थी।

(V) रूद्राम्बा देवी रूद्राम्बा काकतीय वंश की रानी थी। रूद्राम्बा देवी ने संभवतः 1261-1262 ई. तक अपने सह-प्रतिनिधि के रूप में अपने पिता गणपतिदेव के साथ संयुक्त रूप से काकतीय राज्य का शासन शुरू किया तथा 1263 ई. में पूर्ण संप्रभुता ग्रहण की।

32. सिंह सभा आंदोलन के बारे में कौन-सा/से सही है/हैं?

(A)  इसकी स्थापना 1873 में हुई थी।
(B) इसकी स्थापना जालंधर में हुई थी।
(C) इसकी योजना सिख समुदाय में आधुनिक शिक्षा के माध्यम से पश्चिमी प्रबोधन के लाभों को प्राप्त करवाना था।
(D)  इसने ईसाई मिशनरियों और हिंदू पुनरुत्थानवादियों के धर्मातरणकारी गतिविधियों का सामना किया।
(E)  इसने संपूर्ण पंजाब में खालसा स्कूलों और कालेजों का एक संजाल (नेटवर्क) बनाया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल (A), (C), (D), (E)
Solution:

सिक्खों के सुधारवादी संगठन के रूप में सिंह सभा की स्थापना 1873 ई. में अमृतसर में हुई थी। इसकी योजना सिख समुदाय में आधुनिक शिक्षा के माध्यम से पश्चिमी प्रबोधन के लाभों को प्राप्त करवाना था। यह आंदोलन इसाइयों, ब्रह्मसमाजियों, आर्य समाजियों, अलीगढ़ आंदोलन के समर्थकों और अहमदिया मुसलमानों के धर्म परिवर्तन कार्रवाईयों के विरूद्ध एक प्रतिक्रिया के रूप में आरम्भ हुआ जबकि मुख्यधारा के सिख बड़ी तेजी से दूसरे धर्मों में चले जा रहे थे।

इस आंदोलन से जुड़े लोगों का मानना था कि सिख समुदाय में बहुत सी कुरीतियाँ एवं अशिक्षाएँ हैं, इसलिए धार्मिक और सामाजिक सुधार होना जरूरी है। सिंह सभा द्वारा पंजाब में खालसा कॉलेज और विद्यालय अलग-अलग क्षेत्रों में एक श्रृंखला बनाकर खोलने की शुरूआत हुई। लाहौर में खालसा दीवान की स्थापना की गयी तथा कई केन्द्रीय कॉलेज बनाए गये।

33. 'बौद्ध कृति मणिमेगलाई' निम्नलिखित में से किस दार्शनिक की तार्किक प्रणाली से प्रेरित थी?

Correct Answer: (b) दिन्नग
Solution:

बौद्ध कृति 'मणिमेगलाई' दार्शनिक दिन्नग तार्किक प्रणाली से प्रेरित थी। दिन्नग 6 वीं शताब्दी के शुरूआती भारतीय बौद्ध भिक्षु थे और भारतीय तर्कशास्त्र हेतु विद्या के संस्थापक भी थे। इनका जन्म कांचीपुरम के पास सिंहवक्ता में हुआ था।

दिन्नग का कार्य भारत में निगमनात्मक तर्क के विकास की नींव रखना था। उन्होंने बौद्ध तर्क और ज्ञानमीमांसा की पहली प्रणाली बनाई। उनकी प्रभावशाली रचनाएँ भाषा, अनुमानात्मक तर्क और धारणा पर थी।

34. निम्नलिखित स्मारकों के निर्माण के कालक्रमानुसार सही अनुक्रम को चुनिए :

(A)  बंदा नवाज की दरगाह का प्रवेश
(B) इब्राहिम रोजा
(C) चारमीनार
(D) मेहतार महल
(E) गोल गुंबज
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (e) (*)
Solution:

निम्नलिखित स्मारकों के निर्माण के कालक्रमानुसार सही अनुक्रम इस प्रकार है-

(I) बंदा नवाज की दरगाह का प्रवेश मुहम्मद बिन युसूफ अल-हुसैनी जिन्हें आमतौर पर बंदा नवाज या गेसूदराज (1321-1422) के नाम से जाना जाता है। 1398 ई. में दिल्ली पर तैमूर के आक्रमण के बाद चिश्ती संत गेसूदराज दौलताबाद आ गये थे एवं गुलबर्गा में बस गए। गुलबर्गा में बंदा नवाज की दरगाह है जहाँ पर विभिन्न धर्मों के लोग आशीर्वाद लेने के लिए इकट्ठा होते हैं।

(II) चार मीनार मुहम्मद कुली (1580-1612 ई.) हैदराबाद का संस्थापक था तथा इसने हैदराबाद में चार मीनार का निर्माण 1591 ई. में करवाया था।

(III) मेहतार महल मेहतार महल (बीजापुर) का निर्माण 1620 ई. में किया गया था जिसका द्वार इंडो-सरसेनिक शैली में बनाया गया है।

(IV) इब्राहिम रोजा या इब्राहिम आदिलशाह का मकबरा इन्नाहिम रोजा (बीजापुर) 1627 ई. में बनाया गया था और इसमें आदिलशाह द्वितीय एवं उनकी पत्नी रानी ताज सुल्ताना की कब्रें है। इस मकबरे के वास्तुकार मलिक संदल को भी यहीं दफनाया गया है।

(V) गोल गुंबज मुहम्मद आदिलशाह (1627-56 ई.) बीजापुर के आदिलशाही वंश का सातवाँ शासक था। इसके शासनकाल में गोल गुंबज का निर्माण फारसी वास्तुकार दाबुल के याकूत की देख-रेख में 1656 ई. में बनवाया गया था। नोट: NTA UGC ने इस प्रश्न को निरस्त कर दिया है क्योंकि इसका क्रम विकल्प में नहीं है।

35. नीचे दो कथन दिए गए हैं एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में;

अभिकथन (A): चौरी-चौरा घटना 1920 के वर्ष में विचारित स्वराज प्राप्ति में विलंब के लिए उत्तरदायी ठहरायी जाती है।
तर्क (R) : स्वराज का विचार स्पष्टतया परिभाषित नहीं था जैसा कि बहुत से समकालीनों द्वारा इसका दावा किया जाता है।
उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है
Solution:

महात्मा गाँधी ने सर्वप्रथम 1920 ई. में कहा था कि मेरा स्वराज भारत के लिए संसदीय शासन की माँग है, जो वयस्क मताधिकार पर आधारित होगा अर्थात जनप्रतिनिधियों द्वारा संचालित ऐसी व्यवस्था जो जन-आवश्यकताओं तथा जन आकांक्षाओं के अनुरूप हो। वर्ष 1920 के बाद से गाँधी जी के नेतृत्व में अधिकांश भारतीय एक राष्ट्रव्यापी असहयोग आंदोलन में भाग ले रहे थे।

स्वराज (होमरूल) प्राप्त करने के अंतिम लक्ष्य के साथ रॉलेट एक्ट जैसे दमनकारी सरकारी नियामक उपायों को चुनौती देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा विरोध प्रदर्शन आयोजित किये जा रहे थे। चौरी-चौरा घटना असहयोग आंदोलन के दौरान 5 फरवरी 1922 ई. को हुई जिसका एक कारण यह भी था कि स्वराज प्राप्ति में विलंब होना। जबकि बहुत से समकालीनों द्वारा दावा किया जाता है कि स्वराज का विचार स्पष्ट नहीं था। अतः कथन (A) और तर्क (R) दोनों सही है तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।

36. चोल काल के मंदिर अपनी शिल्पकारी और भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं। मंदिर की देवी देवता की प्रतिमा के प्रधान मूर्तिकार को निम्नलिखित में से किस रूप में जाना जाता था?

Correct Answer: (c) स्तापथी
Solution:

चोल काल के मंदिर अपनी शिल्पकारी और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की देवी देवता की प्रतिमा के प्रधान मूर्तिकार को स्तापथी (स्थपति) के रूप में जाना जाता था। चोलयुगीन कलाकारों ने अपनी कुशलता का प्रदर्शन पाषाण-मंदिर एवं मूर्तियाँ बनाने में किया है।

कलाविद् फर्गुसन के अनुसार चोल कलाकारों ने दैत्यों के समान कल्पना की तथा जौहरियों के समान उसे पूरा किया। तंजौर तथा गंगैकोंडचोलपुरम् के मंदिर चोल स्थापत्य के चरमोत्कर्ष को व्यक्त करते हैं।

37. निम्नलिखित पर विचार कीजिए

(A)  बहलोल लोदी के बारे में माना जाता था कि सैयद अफ्फन ने उसे समाना में दिल्ली गद्दी का आशीर्वाद दिया था।
(B) बहलोल लोदी ने अफगान नेताओं को रोह ई कुद से दिल्ली आमंत्रित किया।
(C)  अपनी सर्वोच्चता पर बल देने के लिए, बहलोल लोदी ने अपने शासनकाल के अंत में पैबोस की शुरुआत की।
(D) बहलोल ने शर्की राज्य को जीतकर दिल्ली सल्तनत में शामिल किया।
(E)  बहलोल ने अपने शासन को सुदृढ़ करने के लिए सूरी के प्रति सामंजस्य की नीति अपनाई।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल (A), (B)
Solution:

बहलोल लोदी (1451-1489 ई.) ने दिल्ली में लोदी राजवंश की स्थापना की थी। वह अफगानों की एक महत्वपूर्ण शाखा शाहूखेल से सम्बन्धित था। बहलोल लोदी ने अफगान सरदारों को सन्तुष्ट करने की नीति अपनायी तथा उन्हें बड़ी-बड़ी जागीरें प्रदान की। सैयद अफ्फन ने बहलोल लोदी को समाना में दिल्ली गद्दी का आशीर्वाद दिया था।

बहलोल लोदी ने अफगान नेताओं को रोह-ई-कुद से दिल्ली आमंत्रित किया था। बलबन ने अपनी सर्वोच्चता पर बल देने के लिए ईरानी प्रथा सिजदा और पैबोस (सुल्तान के सिंहासन के निकट आकर उसके चरणों को चूमना) की शुरूआत की। बहलोल लोदी ने शर्की राज्य (जौनपुर) को जीता था लेकिन दिल्ली सल्तनत में सिकन्दर शाह लोदी ने शामिल किया था। बहलोल लोदी ने अपने शासन को सुदृढ़ करने के लिए अफगान सरदारों के प्रति सामंजस्य की नीति अपनाई थी।

38. सूची-I के साथ सूची-II सूची का मिलान कीजिए:

सूची-Iसूची-II
(A) नानादेशी(I) व्यापारिक श्रेणी जिसका विस्तार दक्षिण भारत से सुमात्रा तक था।
(B) उत्तरमेरूर(II) दक्षिण भारत में मंदिर से संबद्ध कॉलेज।
(C) मणिग्रामम(III) ब्राह्मणों का गाँव।
(D) घटिका(IV) व्यापारिक श्रेणी जो कि व्यवसाय को नियंत्रित करता था।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

ABCD
(a)(III)(I)(IV)(II)
(b)(I)(III)(IV)(II)
(c)(II)(IV)(III)(I)
(d)(I)(II)(IV)(III)
Correct Answer: (b)
Solution:सही सुमेलित इस प्रकार है-
सूची-Iसूची-II
(A) नानादेशीव्यापारिक श्रेणी जिसका विस्तार दक्षिण भारत से सुमात्रा तक था।
(B) उत्तरमेरूरब्राह्मणों का गाँव।
(C) मणिग्राममव्यापारिक श्रेणी जो कि व्यवसाय को नियंत्रित करता था।
(D) घटिकादक्षिण भारत में मंदिर संबद्ध कॉलेज।

39. नीचे दिये गये विकल्प में कौन सा कथन सही हैः

(A) मौर्य पश्चात काल में सिक्कों की ढलाई में वृद्धि हुई।
(B)  उत्तर पश्चिम के राजाओं ने यूनानी, रोमन और ईरानी सिक्कों की नकल की।
(C) मौर्य पश्चात काल में मुद्रा के अधिकाधिक प्रयोग से, विशेष कर ग्रामीण क्षेत्रों में वस्तु विनिमय प्रणाली समाप्त नहीं हुई
(D)  मौर्य पश्चात काल में सिक्कों के विविध प्रयोग से विभिन्न प्रकार की कारोबारी अर्थव्यवस्थाओं का संकेत मिलता है।
(E) मौर्य पश्चात काल में निष्क और स्वर्ण नामक सोने के सिक्के और शतमान चांदी के सिक्के प्रयोग में थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) केवल (A), (B), (C), (D) और (E)
Solution:

मौर्य साम्राज्य के पतन के पश्चात भारत का इतिहास दो भागों में बंट जाता है। जहाँ एक तरफ मध्य एशिया से विदेशी आक्रमण हुए और इन आक्रमणकारियों ने उत्तर-पश्चिमी सीमा प्रांत तथा मध्य भारत के एक बड़े क्षेत्र पर अपना अधिकार कायम कर लिया। वहीं दूसरी तरफ क्रमशः शुंग, कण्व, आंध्र सातवाहन एवं वाकाटक आदि वंश स्थापित हुए।

व्यापार एवं विनिमय में मुद्राओं का प्रयोग मौर्योत्तर युग की सबसे बड़ी देन है। इस समय सिक्कों की ढलाई में वृद्धि हुई। उत्तर पश्चिम के राजाओं ने विदेशी यूनानी, रोमन और ईरानी सिक्कों की नकल करके सिक्कों को ढलवना शुरू किया। सिक्कों की अधिकता के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में वस्तु-विनिमय प्रणाली चलती रहीं। सिक्कों के प्रयोग से विभिन्न प्रकार की कारोबारी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिला। उत्तर मौर्य काल में निष्क और स्वर्ण नामक सोने तथा शतमान चाँदी के सिक्कें प्रयोग में लाये जाते रहें।

40. भीमबेटका शैल चित्रों में निम्नलिखित में से कौन सी विषय वस्तु चित्रित नहीं की गई है?

Correct Answer: (c) खाद्यान्न पर निर्भर पक्षियों का बसेरा
Solution:

भीमबेटका मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है जिसका उत्खनन कार्य 1958 ई. वी.एस. वाकणकर ने किया था। भीमबेटका शैलचित्रों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के चित्रों में दो स्तर मिलते है। पहले स्तर के चित्रों में शिकार नृत्य, हिरण, पक्षियों, बारहसिंगा, सुअर, रीछ, जंगली भैंसे, घोड़े, हाथी एवं अस्त्रधारी घुड़सवार है।

दूसरें स्तर पर मानवों को जानवरों के साथ अन्तरंग मित्र के रूप में दिखाया गया है। यहाँ पर आखेटक, कृषक, ग्वाले आदि चित्रित है जबकि खाद्यान पर निर्भर पक्षियों का बसेरा का कोई चित्रित साक्ष्य नहीं मिला है।