यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2021/जून 2022 (इतिहास) Shift- I

Total Questions: 100

41. ऋग्वेद में उल्लिखित मृधर वाच का निम्नलिखित में से किस की ओर संकेत है?

Correct Answer: (b) वह जो बलि नहीं देता है
Solution:

ऋग्वेद में उल्लेखित मृधर वाच (मृध्रवाचः) (कृनु-वाणी वाले इसका प्रयोग आर्यों के एक अन्य शत्रु अर्थात पणियों के लिए भी किया गया है) का संकेत यह लोग ओ बलि नहीं देते थे।

ऋग्वेद में दस्यु को अकर्मन (वैदिक क्रियाओं को न करने वाले) 'अदेवयुः' (वैदिक देवताओं को न मानने वाला) 'अयज्वन' (यज्ञ न करने वाले) मृद्धवाक (अपरिचित भाषा बोलने वाले) कहा गया। दस्यु को आयर्यों से भिन्न जाति एवं सांस्कृतिक पृष्ठ भूमि का बताया गया है। कुल मिलाकर ऋग्वेद में दासों की तुलना में दस्युओं को आर्यों का बड़ा शत्रु बताया गया है।

42. "शिवाजी के बाद गुरिल्ला रणनीत के सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादक" के तौर पर किसे जाना जाता है?

Correct Answer: (c) बाजी राव ।
Solution:

गुरिल्ला पद्धति एक प्रकार की छापामार युद्ध नीति था। मोटे तौर पर यह अनियमित सैनिकों द्वारा शत्रुसेना के पीछे या पार्श्व में आक्रमण करके लड़े जाते थे। इसका सिद्धान्त था-'मारो और भाग जाओं'।

गुरिल्ला पद्धति के कारण ही शिवाजी को अनेक युद्धों में सफलता प्राप्त हुई थी। उनके बाद पेशवा बाजीराव प्रथम ने गुरिल्ला (छापामार) युद्ध प्रणाली को आगे बढ़ाया। वह इसके सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादक थे।

नोट :- बालाजी विश्वनाथ पहला पेशवा हुआ, जिन्होंने पूना को केन्द्र बनाकर मराठा शक्ति का विस्तार किया। 1708 ई. में शाहू ने बालाजी विश्वनाथ को सेनाकर्ते के पद पर नियुक्त किया था।

43. निम्नलिखित में से कौन से सही हैं:

(A) अहिंसा और भक्ति भागवत परंपरा की दो महत्त्वपूर्ण विशेषताएँ हैं।
(B)  महाभारत यह स्थापित करता है कि कृष्ण और विष्णु अपने दैवत्व में एक हैं।
(C) बौद्ध धर्म का थेरवाद बुद्ध को पूजे जाने वाले ईश्वर के रूप में मानता है।
(D)  धम्मपद यह बताता है कि भिक्ष (भिक्खु) को बौद्ध विहार में अपना जीवन कैसे व्यतीत करना चाहिए।
(E) धर्मचक्र प्रवर्तन बुद्ध का मुख्य उद्देश्य था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
Correct Answer: (c) केवल (A), (B) और (E)
Solution:

भारतीय संस्कृति में धर्म का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान रहा है वास्तव में यदि देखा जाए तो यह भारतीय संस्कृति का प्राण है। अति प्रचचीन काल से धर्म को एक पवित्र प्रेरक तत्व के रूप में स्वीकार किया गया है। भारत अनेक धर्मों तथा सम्प्रदायों की क्रीडास्थली रही हैं। वैष्णव धर्म का विकास भागवत धर्म से हुआ है।

अहिंसा और भक्ति भागवत परंपरा की दो महत्वपूर्ण विशेषताएँ है। महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी। महाभारत, कृष्ण और विष्णु को देवताओं की श्रेणी में रखता है। महाभारत कथा से स्पष्ट होता है कि कृष्ण और विष्णु देवत्व में एक थे अर्थात कृष्ण ही विष्णु हैं और विष्णु ही कृष्ण हैं।

बौद्ध धर्म का प्रर्वतक गौतम बुद्ध को माना जाता है। बुद्ध के शिक्षाओं में चार आर्य सत्य एवं अष्टांगिक मार्ग और प्रथम उपदेश का वर्णन 'धर्म चक्र प्रवर्तक सूत्र' में मिलता है जो गौतम बुद्ध का मुख्य उद्देश्य था। बौद्ध धर्म का थेरवाद गौतम बुद्ध को महापुरुष के रूप मानता है जबकि महायान में उन्हें देवता माना गया है। धम्मपद बौद्ध साहित्य का सर्वोत्कृष्ट लोकप्रिय ग्रन्थ है इसमें बुद्ध के नैतिक उपदेशों का संग्रह मिलता है।

44. भारतीय राष्ट्रीय इण्डियन नेशनल आर्मी (आई.एन.ए.) के बारे में कौन सा/से सही है/हैं?

(A)  आई.एन.ए. के आधारभूत रूप से संगठित करने का श्रेय रास बिहारी बोस को दिया जाता है।
(B) कैप्टन मोहन सिंह ब्रिटिश भारतीय सेना में एक अधिकारी थे।
(C)  सुभाष चन्द्र बोस ने आई.एन.ए. को पुनर्गठित किया।
(D)  सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद सरकार (स्वतंत्र भारत के लिए अस्थायी सरकार) का गठन किया।
(E) भारत की ब्रिटिश सरकार ने पकड़े गए आई.एन.ए. सिपाहियों पर सम्म्राट के विरुद्ध युद्ध छेड़ने को मुकदमा चलाया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल (A), (B), (C), (D), (E)
Solution:

इण्डियन नेशनल आर्मी (आजाद हिन्द फौज) का गठन मार्च 1942 ई. में जापान के टोक्यो में कैप्टन मोहन सिंह, रास बिहारी बोस, एवं निरंजन सिंह गिल के सहयोग से हुआ था। कैप्टन मोहन सिंह ब्रिटिश भारतीय सेना में एक अधिकारी थे। रास बिहारी बोस ने सेना की पुनगर्ठन की बागडोर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को सौंपी जो 13 जून 1943 को टोक्यो और 3 जुलाई 1943 ई. को सिंगापुर पहुँचे।

सुभाष चन्द्र बोस आजाद हिन्द फौज के सेनापति बने और इसी समय उन्होंने ने 'दिल्ली चलो' और 'जय हिन्द' का नारा दिया। 5 July 1943 ई. को बोस ने आजाद हिन्द फौज का पुनर्गठन करके 25 अक्टूबर, 1943 को स्वतन्त्र भारत की अस्थायी सरकार का गठन सिंगापुर में किया था।

नोटः- भारत की ब्रिटिश सरकार ने पकड़े गए I.N.A सिपाहियों पर सम्राट के विरुद्ध युद्ध छेड़ने का मुकदमा नवम्बर 1945 में चलाया था।

45. बाँबे योजना (प्लान) के बारे में कौन-सा/से सही है/हैं?

(A)  इसमें तीव्र आर्थिक विकास के प्रश्न को उठाया गया।
(B) इसमें न्यायसंगत वितरण के प्रश्न को उठाया गया।
(C) इसमें आंशिक राष्ट्रीयकरण की आवश्यकता को प्रस्तुत किया गया।
(D) इसमें श्रमिकों के कल्याण योजनाओं की एक श्रृंखला को प्रस्तुत किया गया।
(E) इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की आवश्यकता का विरोध किया गया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल (A), (B), (C) और (D)
Solution:

बॉम्बे (प्लान) योजना पहली बार जनवरी, 1944 ई. प्रकाशित हुई थी। बॉम्बे प्लान के सम्पादक पुरुषोत्तम दास ठाकुरदास थे। यह प्लान 1944-45 ई. में भारत के आठ बड़े उद्योगपतियों द्वारा स्वतन्त्रता के बाद भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बनाया गया था।

इस योजना में तीव्र आर्थिक विकास के प्रश्न को उठाया गया, इसमें आंशिक राष्ट्रीयकरण की आवश्यकता को प्रस्तुत किया गया। इस योजना में न्याय संगत वितरण के प्रश्न को उठाया तथा इसमें श्रमिकों के कल्याण योजनाओं की एक श्रृंखला को प्रस्तुत किया गया और सार्वजनिक क्षेत्र की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

46. निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

(A)  योगिक क्रियाएँ जिसमें श्वास पर नियंत्रण का उद्देश्य हो, प्राणायाम कहलाता है।
(B) Nagarjuna mentions that transformation of prakrti (substance) by use of Osadhi and Samadhi/नागार्जुन का मानना है कि प्रकृति (द्रव्य) का रूपान्तरण औषधि एवं समाधि के प्रयोग द्वारा होता है।
(C)  योगसूत्र में पतंजलि कहते हैं कि सिद्धि जड़ी-बूटी के प्रयोग द्वारा प्राप्त की जा सकती है।
(D)  मेगास्थनीज का भी मानना है कि कुछ प्रकार की औषधियों का प्रयोग तपस्वी संप्रदाय द्वारा किया जाता था।
(E)  सुश्रुत खगोलशास्त्र से संबंधित थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उतर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (A), (B), (C) और (D)
Solution:

यौगिक क्रियाओं में प्राणायाम का तात्पर्य श्वास नियंत्रण से है, जिसमें श्वास भीतर खींच कर कुछ देर तक रोका जाता है तथा फिर नियमित विधि से बाहर निकाला जाता है। यह शरीर तथा मस्तिष्क के लिए स्वास्थ्यकर है।

शून्यवाद के प्रतिपादक नागार्जुन का मानना है कि प्रकृति (द्रव्य) का रूपान्तरण औषधि एवं समाधि के प्रयोग द्वारा होता है। पतंजलि का योगसूत्र योग दर्शन का मूल ग्रन्थ है। योगसूत्र में पतंजलि कहते हैं कि सिद्धि जड़ी-बूटी के प्रयोग द्वारा प्राप्त की जा सकती है।

नोटः- आयुर्वेद के महान ग्रन्थ सुश्रुतसंहिता के प्रणेता सुश्रुत है जो भारत के महान चिकित्साशास्त्री एवं शल्यचिकित्सक थे। इण्डिका पुस्तक के लेखक मेगस्थनीज का भी मानना हैं कि कुछ प्रकार की औषधियों का प्रयोग तपस्वी सम्प्रदाय द्वारा किया जाता था।

47. इनमें से कौन-सा/से सही है/हैं?

(A)  गुरु गोविंद सिंह की मृत्यु के बाद बंदा बहादुर को नेता चुना गया।
(B)  बंदा बहादुर-1709 में समाना पर धावा किया।
(C) बंदा बहादुर ने हिसार से राजस्व संग्रहित किया।
(D) दिसंबर 1710 तक बंदा बहादुर ने संपूर्ण सरहिंद सरकार और हिसार सरकार के कुछ परगनों पर कब्जा कर लिया।
(E) बंदाबहादुर मुगलों द्वारा 1716 में मौत के घाट उतार दिया गया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल (A), (B), (C), (D) और (E)
Solution:

सिक्ख सम्प्रदाय के दसवें व अन्तिम गुरू गोविन्द सिंह के मृत्यु के पश्चात् सिक्खों का नेतृत्व बन्दा बहादुर ने संभाला। बन्दा बहादुर का बचपन का नाम लक्ष्मण देव था। बन्दा बहादुर ने सिक्खों एवं किसानों के सहयोग से एक सेना बनाई तथा 1709 ई. में समाना पर धावा बोल दिया।

दिसम्बर 1710 ई. में बन्दा बहादुर की सबसे महत्वपूर्ण विजय सरहिन्द की थी इस युद्ध में बन्दा बहादुर ने मुगल गवर्नर वजीर खां को मार कर हिसार के कुछ परगनों पर कब्जा कर लिया और हिसार से राजस्व संग्रहित किया। बन्दा बहादुर को 1716 ई. में फर्रुखशियर (मुगल शासक) ने दिल्ली में हाथी के पैरों के नीचे कुचलवा दिया, जिससे उनकी मृत्यु हो गयी।

48. कौटिल्य के अर्थशास्त्र में प्रयुक्त 'उपवास' शब्दावली निम्नलिखित में से किस की ओर संकेत करती है

Correct Answer: (c) काश्तकार
Solution:

कौटिल्य को इतिहास में विष्णुगुप्त तथा चाणक्य नाम से भी जाना जाता है। कौटिल्य वेदों का ज्ञाता और तक्षशिला शिक्षा केन्द्र का प्रमुख आचार्य था तथा राजनीति शास्त्र का प्रकाण्ड पंडित था। उसने राजशासन के ऊपर लिखी गई प्रसिद्ध पुस्तक 'अर्थशास्त्र' में भू-स्वामी को 'क्षेत्रक' कहा है तथा काश्तकार के लिए 'उपवास' शब्दावली का प्रयोग किया है। अर्थशास्त्र में शूद्रों को 'कृषक' कहा गया है।

49. 1871 में किसने कहा था "मेरे विचार में इंग्लैंड के भारत से चले जाने और उसके स्वयं के हाल पर छोड़ देने से बड़ा संकट भारत के लिए कुछ और नहीं होगा"?

Correct Answer: (b) दादा भाई नौरोजी
Solution:

दादा भाई नौरोजी का जन्म 1825 ई. में महाराष्ट्र में एक निर्धन पारसी परिवार में हुआ था। जीवन के आरम्भिक काल से दादा भाई देश के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय थे। 1852 में 'बम्बई एसोसिएशन', जो बम्बई की पहली राजनीतिक संस्था थी, की स्थापना की।

उन्होंने अपने लन्दन प्रवास (1855-69) के दिनों में अंग्रेजों को भारतीय समस्याओं से अवगत कराने का प्रयत्न किया और इन दिनों 'लन्दन इण्डियन एसोसिएशन' और फिर 'ईस्ट इण्डिया एसोसिएशन' इत्यादि संस्थाएं स्थापित की।

1871 ई. में दादा भाई नौरोजी ने कहा था कि "मेरे विचार से इंग्लैण्ड के भारत से चले जाने और उसके स्वयं के हाल पर छोड़ देने से बड़ा संकट भारत के लिए कुछ और नहीं होगा" राजनैतिक विचारों से दादा भाई नौरोजी पूर्व राजभक्त थे, वह समझते थे कि भारत में अंग्रेजी राज्य से बहुत लाभ हुए हैं और वह इस साहचर्य के लिए सदा बने रहने में अभिरुचि रखते थे।

50. निम्नलिखित में से कौन से कथन सही है?

(A) शक प्रशासन मोटे तौर पर ईरान में एकेमेनिड और सेल्युसिड प्रणाली के अनुसार ही चलता रहा।
(B) शक शासन काल में राज्य प्रांतों में विभाजित था और प्रत्येक प्रांत एक सैन्य गवर्नर के अधीन होता था जिसे महाक्षत्रप कहा जाता था।
(C)  एक अन्य अधिकारी पद था मेरीड्रो जो शक प्रशासन में एक निर्दिष्ट क्षेत्र का प्रभारी होता था।
(D)  शक शासक में कतिपय ऐसे सिक्कों की इलाई हुई जिन पर दो शासकों के नाम थे। इसका अर्थ था कि राजा स्वयं को निचली हैसियन के शासक से संबद्ध करता था।
(E) शक राजाओं ने सामन्त जैसे निचले पद अपनाए।

Correct Answer: (b) केवल (A), (B), (C) और (D)
Solution:

शक शासन प्रणाली सुव्यवस्थित थी। शक शासन प्रणाली में राजा का पद सर्वोच्च होता था तथा राजा के पास समस्त प्रशासनिक अधिकार होते थे। उसके अधीन सामंत तथा महासामंत होते थे, राजा के पास एक मंत्रिमण्डल होता था जिसका प्रमुख अमात्य (प्रधानमंत्री) कहा जाता था।

शक साम्राज्य कई प्रान्तों में विभाजित था तथा प्रत्येक प्रान्त एक सैन्य गर्वनर के अधीन होता था जिसे 'महाक्षत्रप' कहा जाता था। 'मेरीड्राक' नामक अधिकारी को क्षेत्र के प्रभारी का अधिकार प्राप्त होता था। भारत में सर्वप्रथम संस्कृत व तिथि लेख युक्त सिक्कें शक शासक रुद्रदामन ने चलाए।

शक शासकों के समय ऐसे सिक्कों की ढलाई हुई जिस पर दो शासकों के नाम थे। इसका अर्थ था कि राजा स्वयं को निचली हैसियत के शासक से संबद्ध करता था। नोटः शकों का प्रशासन मोटे तौर पर ईरान में एकेमेनिड और सेल्युसिड प्रणाली के अनुसार ही चलाता रहा।