Solution:ब्रिटिश सरकार ने 1933 में श्वेतपत्र के माध्यम से नये संविधान की रूपरेखा प्रस्तुत किया था। जिस पर विचार करने के लिए 'लॉर्ड लिनलिथगो' की अध्यक्षता में एक संयुक्त समिति का गठन किया गया। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर तैयार विधेयक संसद से पास होने के बाद 4 अगस्त 1935 को ब्रिटिश सम्म्राट की अनुमति से 'भारत शासन अधिनियम-1935' बना।
भारत के लिए तैयार संवैधानिक प्रस्तावों में यह अन्तिम तथा सबसे बड़ा और जटिल दस्तावेज था। इसमें कुल 321 अनुच्छेद, 10 अनुसूचियाँ व 14 भाग थे। वर्तमान भारतीय संविधान पर इस अधिनियम का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है। इसके प्रमुख उपवन्ध अधोलिखित थे-
1. एक अखिल भारतीय संघ हेतु प्रावधान।.
2. रक्षोपायों वाले उत्तरदायी शासन हेतु प्रावधान (केन्द्र में द्वैध शासन)।
3. सांप्रदायिक और अन्य समूहों के पृथक प्रतिनिधित्व का प्रावधान।
4. एक संघीय न्यायालय हेतु प्रावधान (1) अक्टूबर 1937 में यह न्यायालय स्थापित हुआ)।
5. प्रान्तीय स्वायत्तता हेतु प्रावधान (प्रान्तों में स्वायत्त शासन की स्थापना)।
6. भारत शासन अधिनियम-1935 के अधीन फरवरी, 1937 में 11 प्रान्तों में प्रान्तीय विधान मण्डलों के चुनाव कराए गए।