यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2021/जून 2022 (इतिहास) Shift- I

Total Questions: 100

61. किस अधिनियम द्वारा गवर्नर जनरल परिषद को भारत के सभी ब्रिटिश राज्यक्षेत्रों हेतु कानून बनाने (लेजिस्लेट) की शक्ति प्राप्त हुई?

Correct Answer: (c) चार्टर एक्ट 1833
Solution:

1833 का राजलेख (1833 का चार्टर एक्ट) द्वारा गवर्नर जनरल परिषद को भारत के सभी ब्रिटिश राज्यक्षेत्रों हेतु कानून बनाने (लेजिस्लेट) की शक्ति प्राप्त हुई। अब बंगाल के गर्वनर जनरल को सम्पूर्ण भारत का गवर्नर जनरल बना दिया गया। इस प्रकार इस राजलेख द्वारा देश की शासन प्रणाली का केन्द्रीयकरण कर दिया गया।

इसमें सपरिषद गवर्नर जनरल को पूरे भारत के लिए कानून बनाने का अधिकार प्रदान किया गया, किन्तु नियंत्रक मण्डल इस कानून को अस्वीकृत कर स्वयं कानून बना सकता था। गवर्नर जनरल की परिषद द्वारा पारित कानून को अधिनियम कहा जाने लगा। अंग्रेजों को इस अधिनियम के तहत बिना लाइसेन्स भारत आने-जाने, बसने तथा व्यापार करने की स्वतंत्रता प्रदान की गयी।

बम्बई तथा मद्रास की परिषदों की विधि-निर्माण की शक्तियों को वापस ले लिया गया। विधिक परामर्श हेतु गवर्नर जनरल की परिषद में 'विधि सदस्य' के रूप में चौथे सदस्य को शामिल किया गया उसे परिषद की बैठकों में भाग लेने का अधिकार था, लेकिन मतदान का नहीं।

नोटः- 1833 के चार्टर एक्ट के द्वारा ही सम्पूर्ण व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया था।

62. निम्नलिखित में से कौन सी पुस्तक नाथमुनि की है?

Correct Answer: (b) न्यायतत्व
Solution:

आचार्य नाथमुनि या रंगनाथाचार्य ने 'श्री वैष्णव सम्प्रदाय' की स्थापना किया था। इनका जन्म वीरनारायणपुर में हुआ था तथा इनका जीवन श्रीरंगम में बीता। नीलकण्ठ शास्त्री ने इनका समय 824ई.-924ई. (मुख्यतः 10वीं शताब्दी) के मध्य निर्धारित किया है।

नाथमुनि ने श्रीरंगम मन्दिर में 'नालियार प्रबन्धम्' के पाठ का श्री गणेश किया था। नाथमुनि की प्रसिद्ध पुस्तक 'न्यायतत्व' है, इस पुस्तक में इन्होंने 'प्रपत्ति' (ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण) की अवधारणा का प्रतिपादन किया, जिसे व्यावहारिक रूप से उनके गुरू 'नाम्मालवार' ने विकसित किया था। 'नालियार प्रबन्धम्' तथा 'योग रहस्य' इनकी अन्य कृतियाँ थी।

63. द इंडियन सँडहर्स्ट कमेटी किस अन्य नाम से भी जानी जाती थी?

Correct Answer: (c) स्कीन कमेटी
Solution:

लम्बे समय तक पत्राचार के बाद, जनरल रॉलिन्सन ने विधानसभा में एक भाषण के दौरान सरकार की आठ इकाइयों का भारतीयकरण करने की मंशा की घोषणा की। वायसराय की कार्यकारी परिषद के भारतीय सदस्य ने आठ इकाई योजना, को 'असंतोषजनक' और 'अपमानजनक' बताया था। जून 1925 में, भारतीय सैंडहर्स्ट समिति या स्कीन समिति नामक एक नई समिति नियुक्त की गई थी।

इस समिति ने सिफारिस की कि सैंडहर्स्ट में रिक्तियों की संख्या 10 से बढ़ाकर 20 कर दी जाए। भारतीयों को आर्टिलरी, सिग्नल और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भी किंग्स कमीशन ऑफिसर, के रूप में योग्य बनाया जाए और भारत में एक सैन्य कॉलेज खोला जाए। सरकार ने स्कीन समिति की सिफारिशों को पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं किया, किन्तु सैंडहर्स्ट में भारतीयों के लिए आरक्षित रिक्तियों को प्रति वर्ष 10 से बढ़ाकर 20 करने पर सहमति व्यक्त की। सैंडहर्स्ट समिति/आयोग के अध्यक्ष 'एंड्रयू स्कीन' महोदय थे जिसके कारण इसे 'स्कीन कमेटी' भी कहा जाता है।

64. भारत शासन अधिनियम, 1935 के बारे में क्या सही है/हैं?

(A) भारत अखिल भारतीय संघ हेतु प्रावधान।
(B)  रक्षोपायों वाले उत्तरदायी शासन हेतु प्रावधान
(C)  साम्प्रदायिक एवं अन्य समूहों के लिए अलग प्रावधान
(D)  एक संघीय न्यायालय हेतु प्रावधान
(E)  प्रांतीय स्वायत्तता हेतु प्रावधान  नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल (A), (B), (C), (D) और (E)
Solution:

ब्रिटिश सरकार ने 1933 में श्वेतपत्र के माध्यम से नये संविधान की रूपरेखा प्रस्तुत किया था। जिस पर विचार करने के लिए 'लॉर्ड लिनलिथगो' की अध्यक्षता में एक संयुक्त समिति का गठन किया गया। इस समिति की रिपोर्ट के आधार पर तैयार विधेयक संसद से पास होने के बाद 4 अगस्त 1935 को ब्रिटिश सम्म्राट की अनुमति से 'भारत शासन अधिनियम-1935' बना।

भारत के लिए तैयार संवैधानिक प्रस्तावों में यह अन्तिम तथा सबसे बड़ा और जटिल दस्तावेज था। इसमें कुल 321 अनुच्छेद, 10 अनुसूचियाँ व 14 भाग थे। वर्तमान भारतीय संविधान पर इस अधिनियम का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है। इसके प्रमुख उपवन्ध अधोलिखित थे-

1. एक अखिल भारतीय संघ हेतु प्रावधान।.

2. रक्षोपायों वाले उत्तरदायी शासन हेतु प्रावधान (केन्द्र में द्वैध शासन)।

3. सांप्रदायिक और अन्य समूहों के पृथक प्रतिनिधित्व का प्रावधान।

4. एक संघीय न्यायालय हेतु प्रावधान (1) अक्टूबर 1937 में यह न्यायालय स्थापित हुआ)।

5. प्रान्तीय स्वायत्तता हेतु प्रावधान (प्रान्तों में स्वायत्त शासन की स्थापना)।

6. भारत शासन अधिनियम-1935 के अधीन फरवरी, 1937 में 11 प्रान्तों में प्रान्तीय विधान मण्डलों के चुनाव कराए गए।

65. सूची-I के साथ सूची-II सूची का मिलान कीजिए:

सूची-I सूची-II
(A) शिवाजी महोत्सव(I) 1914
(B) गोपाल कृष्ण गोखले की मृत्यु(II) 1895
(C) बाल गंगाधर तिलक की मांडले जेल से रिहाई(III) 1915
(D) बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना(IV) 1916

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

ABCD
(a)(I)(II)(III)(IV)
(b)(III)(II)(I)(IV)
(c)(II)(III)(IV)(I)
(d)(II)(III)(I)(IV)
Correct Answer: (d)
Solution:

सही सुमेलित इस प्रकार है-

सूची-Iसूची-II
(A) शिवाजी महोत्सव1895 ई.
(B) गोपाल कृष्ण गोखले की मृत्यु1915 ई.
(C) बाल गंगाधर तिलक की माण्डले जेल से रिहाई1914 ई.
(D) बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना1916 ई.

66. निम्नलिखित घटनाओं को सर्वप्रथम से शुरू कर कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए:

(a) श्रमिक संघ अधिनियम पारित हुआ
(b)  काकोरी ट्रेन डकैती
(c)  जालियाँवाला बाग जनसंहार
(d) स्वराज पार्टी का गठन
(e) हंटर कमेटी रिपोर्ट का प्रकाशन
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (C), (E), (D), (B) और (A)
Solution:घटनाओं का सही कालक्रम इस प्रकार है-
घटनावर्ष
(1) जलियाँवाला बाग जनसंहार13 अप्रैल, 1919 ई.
(2) हंटर कमेटी रिपोर्ट का प्रकाशनमार्च, 1920 ई.
(3) स्वराज पार्टी का गठन1 जनवरी, 1923 ई.
(4) काकोरी ट्रेन डकैती9 अगस्त, 1925 ई.
(5) श्रमिक संघ अधिनियम पारित हुआ1926 ई.

67. निम्नलिखित में से हैहय किस क्षेत्र की जनजाति थी?

Correct Answer: (d) अवंती
Solution:

'हैहय' जनजाति 'अवन्ति' क्षेत्र में पायी जाती थी। पश्चिमी तथा मध्य मालवा के क्षेत्र में अवन्ति महाजनपद बसा हुआ था। इसके दो भाग थे उत्तरी अवन्ति, जिसकी राजधानी 'उज्जयिनी थी तथा दक्षिणी अवन्ति, जिसकी राजधानी माहिष्मती थी। दोनों के बीच में वेत्रवती नदी बहती थी। पाली धर्मग्रन्थों से पता चलता है कि बुद्ध काल में अवन्ति की राजधानी उज्जयिनी थी और यहाँ का राजा प्रद्योत था।

उज्जयिनी की पहचान मध्य प्रदेश के आधुनिक उज्जैन नगर से की जाती है। राजनैतिक तथा आर्थिक दोनों ही दृष्टियों से उज्जयिनी प्राचीन भारत का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण नगर था। यहाँ लोहे की खानें थी तथा लुहार इस्पात के उत्कृष्ट अस्त्र-शस्र निर्मित करते थे। इसी कारण यह राज्य सैनिक दृष्टि से अत्यन्त सबल हो गया था। यह बौद्ध धर्म का भी प्रमुख केन्द्र था, जहाँ कुछ प्रसिद्ध बौद्ध भिक्षु निवास करते थे।

68. निम्नलिखित में से कौन सी उपाधियाँ अशोक के लिए प्रायः प्रयुक्त होती थी:

(A) देवनामप्रिय/देवानांपिय
(B) चक्रवर्ती
(C) आर्यपुत्र
(D) महासम्मत
(E) देवपुत्र

Correct Answer: (a) केवल (A), (B) और (D)
Solution:बिन्दुसार की मृत्यु के उपरान्त अशोक मौर्य साम्राज्य की गद्दी पर बैठा। उसके शासनकाल में मौर्य साम्राज्य उत्तर में हिन्दुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में कृष्णा नदी घाटी, मैसूर तथा कर्नाटक तक एवं पूर्व में पश्चिम बंगाल से लेकर पश्चिम में अफगानिस्तान तक विस्तृत था।

इस विस्तृत साम्राज्य के कारण अशोक को चक्रवर्ती की उपाधि दी जाती है। बौद्ध ग्रन्थ दीघनिकाय में महामात्रों को निर्देशित करने के सन्दर्भ में अशोक की उपाधि 'महासम्मत' प्राप्त होती है। इसी ग्रन्थ में इसकी दो अन्य उपाधियाँ 'मूर्धाभिषिक्त' एवं 'जनपदस्थामवीर्यप्राप्त' प्राप्त होती है जो अशोक के लिए प्रायः प्रयुक्त होने वाली उपाधियाँ हैं।

नोट:-अशोक के अभिलेखों में सर्वत्र उसे देवानांमपिय् या देवानांमपियदस् (देवताओं का प्रिय अथवा देखने में सुन्दर) तथा 'राजा' आदि जैसी उपाधियों से भी सम्बोधित किया गया है। यू.जी.सी. ने अपने अंतिम उत्तर कुंजी में इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (c) माना है, जो कि गलत है।

69. निम्नलिखित में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(A)  कल्हण की राजतरंगिणी में पश्चिमी भारत के शासकों के इतिहास का वर्णन मिलता है।
(B)  राजेन्द्र । चोल साम्राज्य के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण राजा थे।
(C)  आलवार दक्षिण भारत के शैव संत थे।
(D) नाथमुनि वैष्णव परंपरा के महान शिक्षक थे।
(E)  व्यास ने महाभारत लिखने के पूर्व भगवतगीता लिखा था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल (B) और (D)
Solution:राजेन्द्र-1 चोल साम्राज्य का सर्वाधिक महत्वपूर्ण राजा था, उसे 'दक्षिण का नेपोलियन' भी कहा जाता है। राजेन्द्र-1, राजराज-1 की मृत्यु के बाद 1014-15 ई. में चोल राज्य की गद्दी पर बैठा। वह अपने पिता के समान एक महत्वाकाँक्षी एवं साम्राज्यवादी शासक था। उसकी सैनिक उपलब्धियों की सूचना हमें उसके विभिन्न लेखों से मिलती है। उत्तर में उसने बंगाल के पाल शासक को पराजित कर राजेन्द्र-1 ने 'गंगैकोण्ड' की उपाधि धारण की तथा इसके उपलक्ष्य में उसने 'गंगैकोण्डचोलपुरम्' नामक नयी राजधानी की स्थापना की। राजेन्द्र-1 के तिरुवालंगाडु एवं करन्दै (तंजौर) अभिलेखों में उसकी उपलब्धियों की सबसे विश्वसनीय जानकारी प्राप्त होती है। नाथमुनि वैष्णव परंपरा के महान शिक्षक थे, इन्होंने श्रीरंगनाथ मन्दिर में 'नालियार दिव्य प्रबन्धम्' के पाठ का श्री गणेश किया। अपनी 'न्यायतत्व' नामक कृति में इन्होंने 'प्रपत्ति' (ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण) की अवधारणा का प्रतिपादन किया। इन्होंने 'योगरहस्य' की रचना की।

नोट -

  • कल्हण की राजतरंगिणी में कश्मीर के शासकों का इतिहास वर्णित है।
  • आलवर दक्षिण-भारत के वैण्वन संत थे जबकि नयनार शैव संत थे।
  • व्यास ने महाभारत की रचना की थी। भगवद्‌गीता इसके 6वें पर्व भीष्म पर्व का भाग है।

70. निम्नलिखित में से शिक्षा पर ध्यान देने हेतु वर्धा योजना (स्कीम) ने किन विचारों को प्रस्तुत किया?

Correct Answer: (a) ग्रामीण हस्तशिल्प में व्यवसायिक प्रशिक्षण को शामिल करते हुए ग्रामीण बच्चों के लिए सात वर्ष की बुनियादी शिक्षा।
Solution:

अक्टूबर 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा महाराष्ट्र के वर्धा में शिक्षा पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आहूत किया गया था। इसके पश्चात 1937 ई. में महात्मा गाँधी द्वारा अपने समाचार-पत्र 'हरिजन' में लेखों की एक श्रृंखला प्रकाशित की गई, जिसे वर्धा शिक्षा योजना (मौलिक शिक्षा योजना) कहा गया।

डॉ. जाकिर हुसैन (हुसैन समिति के अध्यक्ष) ने गाँधी जी के परामर्श से इस शिक्षा योजना को अन्तिम रूप दिया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य 'हस्त उत्पादन कार्य' था। इसमें शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों को व्यावसायिक एवं हस्तकला का ज्ञान दिया जाता था।

इससे शिक्षकों के वेतन का भी प्रबन्ध हो जाता था। समिति ने शिक्षकों के प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण, परीक्षण और प्रशासन के लिए भी सुझाव दिये थे। इस शिक्षा योजना में विद्यार्थियों को 7 वर्ष तक मातृभाषा में अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षा प्रस्तावित थी। 1939 ई. को द्वितीय विश्वयुद्ध के शुरू होने और कांग्रेस द्वारा अपने मंत्रिमण्डलों के त्यागपत्र दे देने से यह योजना कार्यान्वित न हो सकी। इस मौलिक (बेसिक) शिक्षा को 1947 ई. के पश्चात राष्ट्रीय सरकार ने अपने हाथों में ले लिया।