Solution:विनायक दामोदर सावरकर (1883-1966 ई.): इनका जन्म महाराष्ट्र के नासिक जिले में हुआ था। इन्हें प्रायः 'स्वातंत्र्यवीर' एवं वीर सावरकर' के नाम से संबोधित किया जाता है। यह स्वाधीनता संग्राम के एक सेनानी के साथ-साथ महान क्रान्तिकारी, चिन्तक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता, दूरदर्शी राजनेता तथा इतिहासकार थे। उन्होंने '1905 ई. के स्वदेशी आन्दोलन' में अग्रणी भूमिका निभायी थी।इनके लेख 'इण्डियन सोशियोलॉजिस्ट' और 'तलवार' नामक पत्रिकाओं में प्रकाशित होते थे, जो बाद में कलकत्ता के 'युगान्तर' पत्र में भी छपे। 1907 ई. में इन्होंने 'इण्डिया हाउस' लन्दन में प्रथम भारतीय स्वतन्वता संग्राम की स्वर्ण जयन्ती, मनायी और 1857 ई. के संग्राम को "भारत का प्रथम स्वतन्यता संग्राम" सिद्ध किया। इन्होंने 1908 ई. में मराठी में एक पुस्तक की रचना की जिसका बाद में अंग्रेजी भाषा में अनुवाद किया गया। वी.डी. सावरकर जी के विषय में कुछ अन्य बातें जो निम्नलिखित है-
(A) वी.डी. सावरकर फर्ग्युसन कालेज से स्नातक थे।
(B) वी.डी. सावरकर ने कृष्ण वर्मा, के छात्रवृत्ति की पेशकश को स्वीकार किया और जून 1906 ई. में लन्दन चले गए।
(C) वी.डी. सावरकर ने नासिक में मित्र मेला की स्थापना 1899 में तरुण इटली के आधार पर किया था बाद में इसे अभिनव भारत समाज (1904 ई.) नाम दिया।
(D) वी.डी. सावरकर ने 'द इण्डियन वार ऑफ इंडिपेंडेस, 1857' नामक पुस्तक लिखी थी।
(E) वी.डी. सावरकर इण्डिया हाउस के सदस्य बने।
Note:- वी.डी. सावरकर रूसी क्रान्तिकारियों से अत्यधिक प्रभावित थे। इन्हें अपने जीवन में 24 दिसम्बर, 1910 ई. तथा 31 जनवरी, 1911 ई. को अर्थात् दो बार आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। जो विश्व के इतिहास में अनोखी सजा थी।