यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2021/जून 2022 (इतिहास) Shift-II

Total Questions: 100

41. सम्मति की आयु अधिनियम (1891) द्वारा महिलाओं के लिए विवाह निष्पादन हेतु आयु सीमा को किस वर्ष तक बढ़ा दिया गया?

Correct Answer: (d) 12 वर्ष
Solution:

सहमति (सम्मति) आयु अधिनियम (1891) के द्वारा महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 12 वर्ष कर दी गई। यह अधिनियम प्रसिद्ध भारतीय समाज सुधारक एवं बम्बई के पारसी बहराम जी मालाबारी के प्रयत्नों से पारित हुआ। इसके लिए उन्होंने एक लघु पुस्तिका 15 अगस्त, 1884 ई. को प्रकाशित की तथा उसे अंग्रेजों एवं प्रतिष्ठित व्यक्तियों को दिया।

1891 ई. में इनका प्रस्ताव वायसराय के विधान परिषद में विचारार्थ रखा गया और 19 मार्च, 1891 ई. को यह सम्मति आयु अधिनियम कौंसिल द्वारा पारित कर दिया गया। बाल गंगाधर तिलक ने इस अधिनियम का विरोध किया था।

42. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में:

अभिकथन : शेख अहमद सरहिन्दी ने भारतीयों के बीच इस्लाम के प्रति रुचि कम होने के बारे में इत्हवा- त-अल-नुबावा में अफसोस जाहिर किया था।
कारण R : भारतीयों के बीच इस्लाम के प्रति रूचि कम होने के बारे में पैगंबर काल, दर्शनशास्त्र के विज्ञान और भारतीय संतों के अध्ययन के बीच के समय अंतराल को इसका कारण बताया गया है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नकिंत विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) की सही व्याख्या है
Solution: अभिकथन A- शेख अहमद सरहिन्दी ने भारतीयों के बीच इस्लाम के प्रति रूचि कम होने के बारे में इत्हबा-त-अल-बावा में अफसोस जाहिर किया था। शेख अहमद सरहिन्दी एक ऐसे सूफी थे जो कट्टर मुसलमान होने के साथ 'तहदत-उल-बुजूद के सिद्धान्त, गैर-सूफी मुसलमानों और हिन्दुओं के विरूद्ध थे। वे नक्शबंदी सिलसिला के अनुयायी होने के साथ-साथ चिश्ती और कादिरी सिलसिलों में भी आस्था रखते थे।

कारण R - उन्होंने भारतीयों के बीच इस्लाम के प्रति रूचि कम होने के बारे में पैगंबर काल, दर्शनशास्त्र के विज्ञान और भारतीय संतो के अध्ययन के बीच का समय अंतराल को इसका कारण बताया गया है।

अतः A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।

43. मुगल कालीन भारत में यातायात से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं सही कथन को चिह्नित कीजिए

A. माल / की आवाजाही को बड़े काफिले संरक्षण प्रदान करते थे।
B. काफिलों में आन्तरिक झगड़े भी होते थे जो कभी-कभी प्राणघातक होते थे।
C. बंजारों के कैंप टांडा कहलाते थे
D. जल परिवहन बहुत सारे समकालिन स्त्रोतो से कम खर्चीले प्रतीत होते थे।
E.  माल की आवाजाही के दौरान प्रयुक्त होने वाले जानवरों की क्षति की भरपाई व्यापारियों द्वारा की जाती थी।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A, B, C, D
Solution:

मुगलकालीन भारत में व्यापार एवं वाणिज्य के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ थी। शेरशाह सूरी ने अनेक राजमार्गों का निर्माण करवाया। राजमार्गो पर निर्मित सरायों में व्यापारी रुकते थे तथा माल की आवाजाही को बड़े काफिले संरक्षण प्रदान करते थे। काफिले में आन्तरिक झगड़े भी होते थे जो कभी-कभी प्राण घातक होते थे। छोटे व्यापारी वर्ग में बंजारों का एक अपना अलग वर्ग था। यह वर्ग चार जनजातियों में बंटा था। जो चावल, दाल एवं नमक का व्यापार करती थी।

बंजारे तंबुओं (टांडों) में रहते थे किंतु अधिकांशतः ये बंजारे स्वयं व्यापारी थे। जहाँ उन्हें अनाज सस्ता मिल जाता था, वहाँ से उसे खरीदकर वे उन स्थानों में बेच देते थे जहाँ उन्हें उसका अधिक मूल्य मिल जाता था। मध्यकाल में जल परिवहन बहुत सारे समकालीन स्रोतों से कम खर्चीले प्रतीत होते थे। समुद्री व्यापार मुख्यतः गुजराती व्यापारियों के हाथों में था ये व्यापारी मुख्य रूप से हिन्दमहासागर में व्यापार करते थे और खम्भात से लेकर मलक्का तक सभी समुद्री मार्गों पर उनका अधिपत्य था। मुगलकालीन प्रमुख उल्लेखनीय व्यापारी-विरजी वोहरा, मलय चेट्टी और अब्दुल गफूर वोहरा आदि थे।

44. विजयनगर साम्राज्य में अश्व व्यापार के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

A.  विजयनगर के शासक अश्वपति भी कहलाते थे
B. अश्व व्यापारियों द्वारा जिन्दा घोड़े की पूरी कीमत के बराबर यहाँ तक कि मरे घोड़े की पूंछ भी खरीदी जाती थी।
C. नूनिज ने दर्ज किया कि विजय नगर के शासकों द्वारा प्रति वर्ष 30,000 युद्ध के घोड़े खरीदे जाते थे।
D. विजयनगर के शासकों ने अश्व प्रजनन एवं उनके रखरखाव को संरक्षण प्रदान किया।
E.  कृष्णदेवराय के अल्बुकर्क को अश्व व्यापार पर नियंत्रण के बदले यहाँ तक कि ढेर सारा धन प्रदान किया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल A, B और E
Solution:

विजयनगर के शासक अश्वपति भी कहलाते थे। युद्ध में घुड़सवार सैनिको की महत्ता अधिक थी। सर्वप्रथम देवराय प्रथम ने ही सेना में घोड़ों के महत्व को समझा। उसने अरब एवं फ्रांस से घोड़ो का आयात किया। विजयनगर के द्वितीय राजवंश के संस्थापक सालुव नरसिंह ने कर्नाटक में तुलुव प्रदेश को हरा कर विजयनगर की सेना को शक्तिशाली बनाने के लिए अरब व्यापारियों को अधिक से अधिक घोड़े आयात करने के लिए प्रलोभन एवं प्रोत्साहन दिया।

अश्व व्यापारियों द्वारा जिन्दा घोड़े की पूरी कीमत के बराबर यहाँ तक कि मरे घोड़े की पूछ भी खरीदी जाती थी। कृष्णदेव राय ने पुर्तगाली शासक अल्बुकर्क को अश्व व्यापार पर नियन्त्रण के बदले यहाँ तक कि ढेर सारा धन प्रदान किया था, क्योंकि जमोरिन के विरूद्ध विजय के पुर्तगालियों ने गोवा पर अधिकार कर लिया तथा फारस की खाड़ी के महत्वपूर्ण बंदरगाह पहले ही पुर्तगालियों के अधिकार में आ गये थे और अरबी एवं फारसी घोड़ों का व्यापार अब पूर्णतः पुर्तगालियों के हाथो में आ गया था।

45. नीचे दो कथन दिए गए हैं : एक अभिकथन के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण के रूप में:

अभिकथन A: दक्षिण भारत में मलिक कापूर की सफलता ने इस क्षेत्र में इस्लामी राजनीति की शुरुआत की।
कथन R : दक्षिण भारत में सूफीवाद का चयन स्थानीय आबादी के इस्लाम धर्म अपनाने का एक प्रमुख कारण बन गया।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) (A) और (R) दोनों सही है परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है
Solution:

दक्षिण भारत में मलिक कापूर की सफलता ने इस क्षेत्र में इस्लामी राजनीति की शुरूआत की। मलिक काफूर को हजार दीनारी भी कहा जाता है क्योंकि नुसरत खाँ उसे गुजरात में 1000 स्वर्ण दीनार मूल्य में खरीदा था। इसी के नेतृत्व में अलाउद्दीन खिलजी का दक्षिण भारत अभियान पूर्ण हुआ था। मलिक कापूर ने दक्षिण में देवगिरी को अपना मुख्यालय बनाया। इसामी के अनुसार "देवगिरी के निवासियों ने काफूर के संरक्षण में स्वतंत्रता का अनुभव किया।

शासक का किसी प्रदेश पर न्याय ऐसा होता है-जैसे बगीचे पर मानसून वर्षा" जबकि फरिश्ता के अनुसार "जब कापूर ने दक्षिण में प्रवेश किया तो उसने जनता को अपने कृपालु सुरक्षा में ले लिया और एक चींटी को भी हानि न पहुँचने दी।" इन्हीं कारणों से उसने दक्षिण में इस्लामी राजनीति की शुरुआत की। सूफी संत अरब बुरहानुउद्दीन गरीब, गेसूदराज आदि ने ग्रामीण जनता में इस्लाम धर्म के प्रति आकर्षण पैदा किया जिसके कारण से दक्षिण भारत में सूफीवाद का चलन स्थानीय आबादी के इस्लाम धर्म अपनाने का एक प्रमुख कारण बनना सही है लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।

46. निम्नलिखित में से किस के अनुसार बहुधा बोधिसत्व के पार्श्व में स्त्री, विशेषकर स्त्री परिचारिकाओं की प्रतिमावली की प्रधानता तांत्रिक अथवा वज्रयान प्रभाव का प्रतिबिंबन हो सकता है।

Correct Answer: (a) हटिंग्टन
Solution:'हटिंग्टन' के अनुसार "बहुधा बोधिसत्य के पार्श्व में स्त्री विशेषकर स्त्री परिचारिकाओं की प्रतिमावली की प्रधानता तांत्रिक अथवा वज्रयान प्रभाव का प्रतिबिंबन हो सकता है।" ईसा की पाँचवी या छठी शताब्दी से बौद्ध धर्म के ऊपर तंत्र मंत्रों का प्रभाव बढ़ने लगा जिसके फलस्वरूप वज्रयान नामक नये सम्प्रदाय का जन्म हुआ। इसमें मंत्रो तथा तांत्रिक क्रियाओं द्वारा मोक्ष प्राप्त करने का विधान प्रस्तुत किया गया है। वज्रयानी 'वज्र' को एक अलौकिक तत्व के रूप में मानते है।

इसका तादात्म्य 'धर्म' के साथ स्थापित किया गया है। इसकी प्राप्ति के लिए भिक्षा, तप आदि के स्थान पर मैथुन, मांस आदि के सेवन पर जोर दिया गया है। वज्रयानियों की क्रियायें शक्ति मतावलम्बियों से मिलती-जुलती है। जिसमें तारा आदि देवियों का महत्व प्रदान किया गया है। यह नेपादित किया गया है कि रूप, शब्द, स्पर्श आदि भोगों से बुद्ध की पूजा की जानी चाहिए। रागचर्या को सर्वोत्तम बताया गया है। वज्रयान का सबसे अधिक विकास आठवीं शताब्दी में हुआ, इसके सिद्धान्त मंजुश्रीमूलकल्प तथा गुह्यसमाज नामक ग्रन्थों में मिलता है। वज्रयान ने भारत से बौद्धधर्म के पतन का मार्ग प्रशस्त कर दिया।

47. अकबर द्वारा किस समस्या के संबंध में करोड़ी प्रयोग अपनाया गया था?

Correct Answer: (d) जमा और हासिल के मध्य अंतराल के निदान हेतु
Solution:

अकबर ने जमा और हासिल के मध्य अंतराल के निदान के लिए करोड़ी (आमिल) का प्रयोग अपनाया। अकबर ने गुजरात विजय (1573) के पश्चात भूमि व्यवस्था में स्वयं रूचि लेना प्रारम्भ किया। साम्राज्य की खालसा भूमि पर 182 करोड़ी नियुक्त किये गये। प्रत्येक करोड़ी के अन्तर्गत इतना क्षेत्र होता था जिससे एक करोड़ दाम अर्थात दो लाख पचास हजार रूपये राजस्व के रूप में प्राप्त हो सके।

उसका कार्य अपने क्षेत्र की सीमायें निर्धारित करना, भू-राजस्व के विभिन्न साधनों का लेखा तैयार करना तथा प्रत्येक साधन से प्राप्त धनराशि और प्रत्येक फसल का ब्यौरा रखना था। उसकी सहायता के लिए कारकून तथा फोतदार नियुक्त थे। 1580 ई. तक राजस्व विभाग के पास पर्याप्त आँकड़े तथा सूचनायें एकत्रित हो गयी थी। यद्यपि इस समय दीवान के पद पर राजा टोडरमल नियुक्त था, तथा उनके सहयोगी ख्वाजा शाह मंसूर को नियुक्त किया गया था।

48. निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही है?

A. भारतीय चलचित्र अधिनियम 1918 में पारित हुआ था।
B. विजय भट्ट ने 1943 में राम राज्य फिल्म का निर्देशन किया।
C.फिल्म 'भक्त विदुर' (1921) महाभारत महाकाव्य से संबंधित थी।
D.नील दर्पण' का लेखन देशबंधु चट्टोपाध्याय ने किया था।
E. डी.डब्ल्यू ग्रिफिथ ने 'बर्थ ऑफ ए नेशन' फिल्म का निर्देशन किया था।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A, B, C और E
Solution:

सही कथन निम्न है-

A.' भारतीय चलचित्र अधिनियम 1918 में पारित हुआ था। इस अधिनियम का केन्द्रीय उद्देश्य था (1) दर्शकों की सुरक्षा प्रदान करना (2) आपत्तिजनक फिल्मों में सेंसरशिप लागू करना।

B. विजयभट्ट ने 1943 में 'राम राज्य' फिल्म निर्देशन किया। जिसमें प्रेम अदीब और शोभना समर्थ ने राम-सीता की मुख्य भूमिकाएँ निभाई थी। यह 1943 की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म थी।

C. फिल्म 'भक्त विदुर' (1921) महाभारत महाकाव्य से संबंधित थी। फिल्म कांजीभाई राठौड़ द्वारा निर्देशित और कोहिनूर फिल्म कम्पनी के बैनर तले बनी 1921 की मूक भारतीय फिल्म है। इस फिल्म में पौराणिक चरित्र विदुर को मोहनदास करमचंद गाँधी के व्यक्तित्व पर ढाला गया था।

E. डी.डब्ल्यू.ग्रिफिथ ने बर्थ ऑफ ए नेशन फिल्म का निर्देशन किया था। यह लिलियन गिश अभिनीत 1915 की एक अमेरिकी मूक महाकाव्य नाटक फिल्म है। पटकथा थॉमस डिक्सन जूनियर के 1905 के उपन्यास और नाटक 'द क्लैन्समैन' से सम्बन्धित है।

नोट-नील दर्पण का लेखक 'दीन बन्धु मित्र' है। यह बांग्ला का प्रसिद्ध नाटक है। यह बंगाल में नील विद्रोह आंदोलन का प्रमुख कारण बना।

49. 1892 का वह भारतीय परिषद संशोधन जिसे इस नाम से भी जाना जाता था?

Correct Answer: (c) लॉर्ड क्रॉस का अधिनियम
Solution:1892 का वह भारतीय परिषद् संशोधन जिसे लॉर्ड क्रॉस का अधिनियम के नाम से भी जाना जाता है। 1890 में इंग्लैण्ड के रूढ़िवादी दल की सरकार ने भारत सचिव लॉर्ड क्रॉस के इन सुझाव के आधार पर लॉज सभा में एक विधेयक रखा। यह विधेयक 1892 में संसद द्वारा पारित किया गया। इसे भारतीय परिषद् अधिनियम की संज्ञा दी गई। इसके प्रमुख उपबन्ध अधोलिखित है। यथा-
  • इस अधिनियम द्वारा कार्यकारिणी के सदस्यों की संख्या कम से कम-10 और अधिक से अधिक 16 निश्चित की गई तथा 40% लोग गैर-सरकारी होने चाहिए।
  • प्रान्तों में भी कार्यकारिणी के सदस्यों (विधानमण्डल) गैर-सरकारी तथा कुल सदस्यों की संख्या में वृद्धि कर दी गयी। बम्बई और मद्रास में न्यूनतम 8 और अधिकतम 20, बंगाल में अधिकतम 20, और उत्तर पश्चिम प्रान्त में यह संख्या-15 निश्चित की गयी थी।
  • निर्वाचन पद्धति का आरम्भ किया जाना इस अधिनियम की एक प्रमुख विशेषता है। यद्यपि इसमें निर्वाचन शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था।
  • परिषद् के अधिकारों में वृद्धि की गई तथा भारतीय सदस्यों को बजट पर बहस करने और प्रश्न पूछने का अधिकार दिया गया।

50. विजयनगर साम्राज्य के अंतर्गत कितने ग्राम पदाधिकारी आयंगार अनुदान से संबद्ध थे?

Correct Answer: (a) 12
Solution:

विजयनगर साम्राज्य में बारह शासकीय अधिकारियों के समूह को 'आयंगार' कहा जाता था। इस व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक ग्राम को एक स्वतंत्र इकाई के रूप में संगठित किया जाता था और इस ग्रामीण शासकीय इकाई पर शासन के लिए बारह व्यक्तियों को नियुक्त किया जाता था। इन अधिकारियों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती थी। इन आयंगारों के पद आनुवंशिक होते थे।

आयंगार अपने पदों को बेच या गिरवी भी रख सकते थे। उन्हें वेतन के बदले | लगान और करमुक्त भूमि भी प्रदान की जाती थी। इनका अपने अधिकारक्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखना सर्वप्रमुख उत्तरदायित्व था। इनकी जानकारी के बिना न तो सम्पत्ति को स्थानांतरित किया जा सकता था और न ही दान दिया जा सकता था। कर्णिक (एकाउंटेंट) नामक आयंगार भूमि की खरीद या बिक्री की लिखा-पढ़ी तथा तत्संबंधी दस्तावेजों को तैयार करता था।