यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2021/जून 2022 (इतिहास) Shift-II

Total Questions: 100

51. अप्रैल 1947 में किसने भारत राज्य सचिव (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) के तौर पर पैथिक लॉरेंस का स्थान ग्रहण किया?

Correct Answer: (b) लॉर्ड लिस्टोवेल
Solution:अप्रैल 1947 में लॉर्ड लिस्टोवेल भारत राज्य सचिव (सेक्रेटरी ऑफ स्टेट) के तौर पर पैथिक लॉरेंस का स्थान ग्रहण किया। महारानी विक्टोरिया का घोषणा पत्र, जिसे लॉर्ड कैनिंग ने 1 नवम्बर 1858 को इलाहाबाद के मिण्टो पार्क में पढ़ा था- जिसमें भारत की देखभाल के लिए एक नए अधिकारी भारतीय राज्य सचिव की नियुक्ति का प्रावधान था तथा इसकी सहायता के लिए 15 सदस्यों की एक मंत्री परिषद् बनायी गई। इनमें 8 सदस्यों की नियुक्ति सरकार द्वारा तथा 7 सदस्यों की नियुक्ति कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा होनी थी। लॉर्ड लिस्टोवेल भारत के अंतिम राज्य सचिव और घाना के अंतिम गवर्नर जनरल भी थे। 1945 में लेबर पार्टी की सत्ता आई तब क्लेमेंट एटली की सरकार ने इन्हें अप्रैल 1947 में भारत और बर्मा के राज्य सचिव के रूप में नियुक्त किया था।

नोट :-

(1) सर सिरील रेडक्लिक की अध्यक्षता में सीमा आयोग का गठन किया गया। वे भारत तथा पाकिस्तान के मध्य सीमा रेखा के निर्धारक थे।

(2) लॉर्ड एचिनलेक को 1941 में सेना के मध्य पूर्वी क्षेत्र का कमान्डर-इन-चीफ नियुक्त किया गया था।

(3) लॉर्ड इस्मे ब्रिटिश भारतीय सेना में राजनयिक और जनरल तथा नाटो के पहले महासचिव थे।

52. निम्नलिखित में से किस विदेशी यात्री ने लिखा कि विजयनगर साम्राज्य में लगभग 90000 लोग हथियार उठाने में सक्षम हैं?

Correct Answer: (d) निकोलो कोन्टी
Solution:

इटली का विदेशी यात्री निकोलो कोन्टी ने लिखा हैं कि विजयनगर साम्राज्य में लगभग 90,000 लोग हथियार उठाने में सक्षम है। वह 1420-22 में सपरिवार देवराय प्रथम के काल में विजय नगर पहुँचा था। विजयनगर आने वाला वह पहला यूरोपीय यात्री था। वह विजय नगर के बारे में लिखता है कि विजयनगर 60 मील की परिधि में है यहाँ के राजा भारत के अन्य सभी राजाओं में शक्तिशाली है।

सर्वप्रथम निकोलो कोन्टी ही विजय नगर में सती प्रथा का वर्णन करता है तथा उसके अनुसार "राजा 12,000 पत्नियाँ रखता था जिसमें से 3000 इस शर्त पर चुनी हुई पत्नियाँ है जो कि राजा के मृत्यु के बाद सती होगी' सर्वाधिक महत्वपूर्ण जानकारी जो हमें कोन्टी से मिलती है, वह यह हैं कि 1420 ई. में भारत में कागजी मुद्रा भी धातु मुद्रा व सिक्कों के साथ प्रचलित थी।

53. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए इनमें से सही कथनों को चिह्नित कीजिए :

A.  बलबन राजा को नियाबती खुदाई मानता था और उसने जिलुल्लाह की पदवी अपनाई।
B.  बलबन का मानना था कि सुल्तान को तमाम तरह की मर्यादा और शिष्टाचार से छूट होती है।
C. बलबन ने अपने पुत्र के नाम बसाया में अपने राजनीतिक प्रज्ञान को रिकार्ड किया।
D. बलबन ने अपनी वंशावली को महान अरबी नायक अफरासियाब तक खोजा ।
E. बलबन न्याय को किसी भी सुल्तान के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण शक्ति मानता था।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए इनमें से सही कथनों को चिह्नित कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल A, C और E
Solution:बलबन (1265-1287 ई.) एक इल्बारी तुर्क तथा इल्तुतमिश का गुलाम था। सुल्तान नासिरूद्दीन के पश्चात बलबन शासक बनता है। उसने राजत्व के सिद्धान्त एवं सुल्तान की प्रतिष्ठा की स्थापना के लिए सुल्तान के पद और अधिकारों के बारे में विस्तृत विचार व्यक्त किया। बलबन के राजत्त्व सिद्धान्त की दो मुख्य विशेषतायें थी।

प्रथम सुल्तान का पद ईश्वर के द्वारा प्रदान किया गया है तथा द्वितीय सुल्तान का निरंकुश होना आवश्यक है। उसके अनुसार, सुल्तान पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि (नियामत-एखुदाई) है और उसका स्थान केवल पैगम्बर के बाद है। उसने स्वयं को 'जिल्ले अल्लाह' (ईश्वर का प्रतिबिम्ब) कहा है। उसने अपने विचारों को व्यवहार में लागू करने के उद्देश्य से स्वयं को 'शाहनामा के शूरवीर पात्र अफरासियाब (ईरान का निवासी) के वंश से जोड़ा। उसने अपने पुत्र का नाम वसाया (वसीयत) में अपने राजनीतिक प्रज्ञान को रिकार्ड किया है। बलबन एक न्यायप्रिय शासक था तथा न्याय को किसी भी सुल्तान के लिए महत्वपूर्ण शक्ति मानता था। उसका मानना था कि सुल्तान के पद की महत्ता को बनाए रखने के लिए किसी भी प्रकार से मर्यादा एवं शिष्टाचार में छूट नहीं दी जा सकती है। उसने दरबार के नियम बनाये और उसे कठोरता से लागू किया। उसने ईरानी बादशाह के अनुरूप दरबार में 'सिजदा' एवं 'पैबोस' जैसे शिष्टाचार आरंभ किये।

54. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

List I/सूची-IList II/सूची-II
A. गोलाकार घेराबंदी नीति (रिंग फेंस)I. 1857-1935
B. अधीनस्थ संघ नीतिII. 1765-1813
C. अधीनस्थ अलगाव नीतिIII. 1935-1947
D. समान परिसंघ नीतिIV. 1813-1857

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) A-II, B-I, C-IV, D-III
Solution:सही सुमेलन इस प्रकार है-
सूची-Iसूची-II
(A) गोलाकार घेरा बंदी नीति (रिंग फेंस)– वारेन हेस्टिंग्स (1765-1813)
(B) अधीनस्थ संघ नीति– लॉर्ड कैनिंग (1857-1935)
(C) अधीनस्थ अलगाव नीति– लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813-1857)
(D) समान परिसंघ नीति– लॉर्ड विलिंगटन (1935-1947)

55. निम्नलिखित में से कौन से मुगल राजपूत मैत्री के भाग नहीं थे?

(A) विवाह
(B) मंसबदारी
(C) वतन जागीर
(D)  ईनाम जागीर
(E) सुल्ह-ए-कुल
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल B और D
Solution:

मुगल शासक अकबर ने राजस्थान को अपनी अधीनता में लाने के लिए राजपूतों से मैत्री सम्बन्ध स्थापित किया। मुगलराजपूत मैत्री सम्बन्ध के निम्न भाग थे-

1. वैवाहिक सम्बन्ध बनाकर (जैस कछवाह राजा भारमल, बीकानेर के राजा कल्याण सिंह आदि)।

2. राजपूतों को मुगल सेवा में लेकर उनके राज्य उन्हीं को वापस कर देना (वतन जागीर)। 3. सुलह-ए-कुल की नीति अपनाकर।

नोट:- 

राजपूतों को मनसबदारी में ऊँचा पद देना (जैसे-भारमल को 5000 का मनसब, भगवान दास एवं मानसिंह को मुगल सेना में ऊँचा पद प्रदान किया। मनसबदारी व्यवस्था एक प्रशासनिक व्यवस्था थी जिसमें शासकीय अधिकारियों तथा सेनापतियों का पद निर्धारित किया जाता था। इसमें किसी एक व्यक्ति विशेष की भूमिका नहीं होनी थी। यह मुगल राजपूत की मित्रता का द्योतक न होकर मुगल सैन्य व्यवस्था की मुख्य विशेषता थी। जिसमें अकबर ने अंतिम समय में जात और सवार पद भी जोड़ दिया था। इनाम जागीर पंडितों, विद्वानों, पुरोहितों, कवियों आदि को दी जाती थी।

56. निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

A. आर.जी.कॉलिंगवुड ने कहा, 'कल्पना की कृतियों के रूप में इतिहासकारों की कृतियों और उपन्यासकारों की रचनाओं में कोई अंतर नही होता है। जो अंतर होता है वह यह है कि इतिहासकार का चित्र का आशय सच होता है।"
B.  विलेन द कूनिंग ने कहा, 'वर्तमान मुझे प्रभावित नहीं करता है, मैं इसे प्रभावित करता हूँ।'
C. " मार्क ब्लोच ने कहा, 'परन्तु इतिहास न तो घड़ी निर्माण है और न ही कैबिनेट गठन। यह बेहतर समझदारी की दिशा में एक प्रयास है।'
D. डेविड शेनन ने कहा, 'जीवन सरल नहीं है और इसलिए इतिहास, जो कि विगत जीवन है, सरल नहीं है।"
E. एम्ब्रोज वियर्स ने कहा, "केवल ईश्वर ही भविष्य को जानता है परन्तु केवल एक इतिहासकार ही अतीत को बदल सकता है।"
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A, C, D और E
Solution:इतिहास-दर्शन अतीत तथा उसके इतिहास की दार्शनिक व्याख्या करता है। इतिहास दर्शन से सम्बन्धित प्रमुख विचारA. आर.जी. कॉलिंगवुड ने कहा, "कल्पना की कृतियों के रूप में इतिहासकारों की कृतियों और उपन्यासकारों की रचनाओं में कोई अंतर नहीं होता है। जो अंतर होता है वह यह है कि इतिहासकार का चित्र का आशय सच होता है।"

B. विलेन द कूनिंग ने कहा कि, "भूतकाल मुझे प्रभावित नहीं करता है, मैं इसे प्रभावित करता हूँ।"

C. मॉर्क ब्लोच के अनुसार, "परन्तु इतिहास न तो घड़ी निर्माण है और न ही कैबिनेट गठन । यह बेहतर समझदारी की दिशा में एक प्रयास है।"

D. डेविड शेनन के अनुसार, "जीवन सरल नहीं है और इसलिए इतिहास, जो कि विगत जीवन है, सरल नहीं है।"

E. एम्ब्रोज वियर्स ने कहा, “केवल ईश्वर ही भविष्य को जानता परन्तु केवल एक इतिहासकार ही अतीत को बदल सकता है।"

57. निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?

A. प्राथमिक स्रोत वह साक्ष्य है जो अन्वेषण अधीन काल में लिखा या रचित हो।
B. प्राथमिक स्रोत वे साक्ष्य हैं जो अध्ययन अधीन घटनाओं में भाग लेने वाले, उन्हें देखने वाले अथवा उन पर टिप्पणी करने वाले समकालिक के अभिलेख हों।
C.  प्राथमिक स्रोतों में समाचार पत्र शामिल नहीं होते हैं।
D. घटना के होने के बाद उस काल के बारे में लिखे वृत्तांत को द्वितीयक स्रोत कहते हैं।
E.  प्राथमिक और द्वितीयक स्रोतों के बीच की भिन्नता सदैव अत्यधिक स्पष्ट होती है।
नीचे दिए गव विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल A, B, और D
Solution:

अनुसंधान गतिविधियों में, प्राथमिक स्रोत ऐतिहासिक दस्तावेजों, साहित्यिक ग्रंथों, कलात्मक कार्यों, प्रयोगों, सर्वेक्षणों और साक्षात्कार जैसे स्रोतों से पहले एकत्र की गयी जानकारी को संदर्भित करता है। इसे 'प्राथमिक डाटा' भी कहते हैं। इसके अन्तर्गत - समाचार पत्र, सरकारी आँकड़े, ऐतिहासिक प्रलेख अन्य अप्रकाशित रिकार्ड आदि आते हैं। इस प्रकार प्राथमिक स्रोत वे साक्ष्य हैं जो अध्ययन अधीन घटनाओं में भाग लेने वाले या उन पर टिप्पणी करने वाले समकालिक के अभिलेख होते हैं तथा इनकी रचना अन्वेषण अधीन काल में किया जाता है।

द्वितीयक स्रोत प्राथमिक स्रोत की व्याख्या या मूल्यांकन करते है। ये प्राथमिक स्रोत से अटूट रूप से जुड़े होते हैं, इनमें कोई भिन्नता नहीं होती है। इन स्रोतों में प्राथमिक स्रोतों को अक्सर वर्णित, सामान्यीकृत और संश्लेषित किया जाता है। जर्नल लेख, पाठ्य पुस्तक, विश्वकोश आदि द्वितीयक स्रोत के उदाहरण है।

58. सूची-I के साथ सूची- II का मिलान कीजिए:

सूची-Iसूची-II
A.  भवभूतिI. सिंहविष्णु
B.  भारविII. महिपाल
C.  राजशेखरIII. पुलकेशिन- II
D.  रविकीर्तिIV. यशोवर्मन

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) A-IV, B-I, C-II, D-III
Solution:सही सुमेलन इस प्रकार है-
सूची-I (कवि)-सूची-II (शासक)
(A) भवभूति-यशोवर्मन (1930-950 ई.)
(B) भारवि-सिंहविष्णु (575-600 ई.)
(C) राजशेखर-महिपाल (912-943 ई.)
(D) रविकीर्ति-पुकेशिन-II (610-642 ई.)

59. निम्नलिखित में से किसने 'पुष्टिमार्ग' का सिद्धांतप्रस्तुत किया था?

Correct Answer: (c) वल्लभ
Solution:'पुष्टिमार्ग' का सिद्धान्त वल्लभाचार्य ने प्रस्तुत किया था। उनका जन्म 1479 ई. में तैलंग ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनके व्यक्तित्व पर विष्णुस्वामी के 'रूद्र सम्प्रदाय' का अत्यधिक प्रभाव पड़ा। इन्होंने दक्षिण के विजय नगर राज्य सभा में शंकराचार्य के अद्वैतवादी सिद्धान्तों, वेदान्त तथा मायावाद का खण्डन करके ईश्वर की भक्ति पर विशेष बल दिया था। अतः इन्हें 'जगतगुरू महाप्रभु श्रीमदाचार्य' की उपाधि से विभूषित किया गया। 1530 ई. में इन्होंने काशी में जलसमाधि ले लिया था।
नोट -

चैतन्य - गौड़ीय वैष्णववाद
रामानुज - विशिष्टाद्वैत
रामानन्द - इन्होंने उत्साही 'विरक्त दल' को संगठित किया, जो 'वैरागी' के नाम से प्रसिद्ध थे।

60. निम्नलिखित में से किस भारतीय राजा ने स्वर्णद्वीप में हिन्दू साम्राज्य का विस्तार किया था?

Correct Answer: (a) राजेन्द्र-I
Solution:चोल शासक राजेन्द्र प्रथम (1015-1044 ई.) ने भारतीय उपमहाद्वीप को जीतने के पश्चात् दक्षिण-पूर्व एशिया में सैन्य अभियान किया। उसने श्री विजय (शैलेन्द्र) राज्य को जीतने के लिए एक शक्तिशाली नौसेना का गठन किया था। शैलेन्द्र राज्य के अधीन मलय प्रायद्वीप, जावा, सुमात्रा (स्वर्णद्वीप) तथा अन्य द्वीप सम्मिलित थे। उसने अपनी शक्तिशाली नौ सेना के माध्यम में दक्षिण-पूर्व एशिया पर आक्रमण कर दिया और विजयी रहा। इस प्रकार उसने हिन्दू साम्राज्य का विस्तार स्वर्णद्वीप तक किया। शैलेन्द्र वंशी राजा विजयोतुंगवर्मन पराजित हुआ और बन्दी बना लिया गया। उसके सैन्य अभियान का विवरण तिरूवालंगाडु ताम्रपत्र में मिलता है, जिसके अनुसार, 'राजेन्द्र ने शक्तिशाली नौसेना के साथ समुद्र पार करके कटाह को जीत लिया था।'

नोट:-

(1)  राजराम प्रथम (985-1015 ई.):- चोल साम्राज्य को विस्तृत किया। उसने केरल के राजा को पराजित करके उसने 'काण्डलूर शालैकलमरुत्त' की उपाधि धारण किया। उसके साम्राज्य में सम्पूर्ण दक्षिण भारत सिंहल तथा मालद्वीप का कुछ भाग शामिल था। इसका वास्तवित नाम 'अरिमोलिवर्मन' था।

(2) दन्तिदुर्ग :- राष्ट्रकूट वंश की सवतंत्रता का जन्मदाता था। प्रारम्भ में वह चालुक्य शासक विक्रमादित्य द्वितीय का सामंत था। मालवा के प्रतिहार राजा को पराजित करके उसने उज्जैन में 'हिरण्य गर्भदान' यज्ञ किया।

(3) मयूरशर्मणः- कदम्ब वंश का संस्थापक था। उसने वनवासी को मुख्य राजधानी तथा पालासिका को उप-राजधानी बनाकर दक्षिण भारत में पश्चिमी समुद्र तथा तुंगभद्रा नदी के मध्य स्थित भू-भाग पर शासन किया।