यूजीसी NTA नेट/जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2021/जून 2022 (इतिहास) Shift-II

Total Questions: 100

61. ऋग्वैदिक काल का व्यंजन कारंभ निम्नलिखित में से किससे बनता था?

Correct Answer: (d) उपर्युक्त में से सभी
Solution:

ऋग्वैदिक काल में जौ, अन्न तथा तिल के सत्तू को दही में मिलाकर 'कारंभ' नामक व्यंजन बनाया जाता था। इसके अतिरिक्त ऋग्वेद में 'यवागू' (जी की दलिया), क्षीर पाकौदन (दूध में पकी हुई खीर), अपूपं घृतवंतम् (घी में पके हुए मालपूर्व) आदि का उल्लेख मिलता है। वैदिक समाज में भोजन को मीठा बनाने के लिए 'शहद का प्रयोग करते थे।

62. निम्नलिखित में से कौन से कथन सही नहीं हैं?

A.  रविन्द्रनाथ टैगोर का जन्म कलकत्ता में हुआ था
B. 1912 में टैगोर ने जनगण मन (अब भारत के राष्ट्रगान) की रचना की
C. 1920 में टैगोर को साहित्य में नोबल पुरस्कार मिला
D. 1925 में ब्रिटिश नरेश जार्ज Vने टैगोर को नाइटहुड की उपाधि प्रदान की
E. टैगोर एक असामान्य योग्यतावाले चित्रकार थे और उन्होंने लगभग 3000 चित्र बनाए
दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन करें:

Correct Answer: (*)
Solution:

रविन्द्रनाथ टैगोर का जन्म कोलकाता में सन् 1861 ई.में हुआ था। इनके माता-पिता का नाम शारदा देवी तथा देवेन्द्र नाथ टैगोर था। उन्होंने वर्ष 1911 ई. में जन-गण-मन (भारत का राष्ट्रगान) लिखा तथा 1919 ई. में दि मॉर्निंग सांग ऑफ इण्डिया' के नाम से इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया। जन-गण-मन का प्रथम बार प्रकाशन 1912 ई. में 'तत्वबोधिनी पत्रिका' में किया गया था।

वर्ष 1913 ई. में टैगोर को प्रसिद्ध ग्रंथ 'गीतांजलि' के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया। वर्ष 1915 ई. में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पञ्चम ने टैगोर को 'नाइट ड' की उपाधि से विभूषित किया था, किन्तु उन्होंने जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड की वजह से 1919 ई. में इसे वापस कर दिया। टैगोर एक असामान्य योग्यता वाले व्यक्ति थे। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम दशक 1901 से 1941 के मध्य 3000 चित्र बनाये थे जो विश्व के विभिन्न संग्रहालयों में संरक्षित है।

नोट:- इस प्रकार उपर्युक्त में से कोई भी विकल्प सही नहीं होने के कारण आयोग ने इस प्रश्न को मूल्यांकन से बाहर (Drop) कर दिया है।

63. संगम परंपरा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण साहित्यिक लक्षण निम्नलिखित हैं:

A. तमिलकम्
B. पुरम्
C.  प्रबंधम्
D. एकम्
E. शोध
नीचे दिए गए विकल्पों में से उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल B और D
Solution:संगम परंपरा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण साहित्यिक लक्षण एकम् (अकम या अहम्) तथा 'पुरम्' थे। यह क्षेत्रों की अवधारणा में निहित था। संगम साहित्य में मानव जीवन के सभी पक्षों का समावेश अकम् तथा पुरम् में किया गया था।

अकम में लोगों के आंतरिक जीवन का संकेत मिलता है, जिसमें पुरूषों एवं स्त्रियों की प्रेम भावनाओं का समावेशन है। जबकि पुरम् में लोगों के बाह्य जीवन का विवरण होता है, जिसमें युद्ध, विजय और मानवीय मूल्यों पर बल दिया जाता है।

64. गुरु हरगोबिन्द ने मीरी और पीरी की स्थापना निम्नलिखित के लिए की:

Correct Answer: (c) सिख धर्म में सांसारिक एवं आध्यात्मिक दोनों प्रतिमानों को शामिल करने के लिए
Solution:

गुरू हरगोबिन्द (1606-44 ई.) ने मीरी और पीरी की स्थापना सिख धर्म में सांसारिक एवं आध्यात्मिक दोनों प्रतिमानों को शामिल करने के लिए किया था। इसकी महत्ता को स्थापित करने के लिए प्रतिवर्ष 26 जुलाई को मीरी-पीरी दिवस मनाया जाता है। गुरू हरगोबिन्द मात्र ग्यारह वर्ष की आयु में सिखों के छठें गुरू बने थे।

उन्होंने सिर पर दस्तार बांधकर कलगी सजाई और दो तलवारें धारण की तथा कहा कि एक तलवार आध्यात्मिक मंडल का नेतृत्व करेगी तथा दूसरी सांसारिक विषयों को दिशा देगीं। उन्होंने अकाल तख्त की स्थापना की तथा दरबार में नगाड़ा बजाने की व्यवस्था की। जहाँगीर ने अकबर द्वारा प्रदत्त 2.5 लाख का जुर्माना न देने के कारण ग्वालियर के किले में दो वर्ष तक बन्दी बनाकर रखा था।

65. दक्षिण भारत में शिल्पकारों की बस्तियों और उनके संगठन के बारे में निम्नलिखित में से कौन-कौन सही हैं?

A. कोरोमण्डल तट के साथ बसी शिल्पकारों की बस्तियांस्वायत्त थीं और किसी भी तरह के नियंत्रण से मुक्त थी।
B. शहरी केन्द्रों ने शिल्पकरों के बीच के जाति संक्रमण को तोड़ा था।
C. तमिलनाडु में कमलान जाति के गठन में लोहार, बढ़ई, ताम्रकार, राजमिस्त्रिी जैसे पांच अतःसामुदायिक विशेषज्ञ शामिल थे।
D. केन्द्र में एकजुटता से शिल्पकारों को अपनी दुकान बंद करने और प्रव्रजन जैसे अधिकारों के संरक्षण में मदद मिली।
E. कमलान और कैक्कोला जैसे जातियाँ मंदिरों के दानदाता भी थे।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल C, D और E
Solution:दक्षिण भारत में कृषि कार्य के साथ-साथ शिल्पकर्म एवं व्यापार वाणिज्य में प्रगति होती है। देश के विभिन्न भागों में उत्तम प्रकार के सूती वस्त्रों का निर्माण किया जाने लगा जिसमें उरैयूर प्रमुख केन्द्र था तथा पालनाड जैसे क्षेत्र उत्तम प्रकार के अस्त्र-शस (प्रमुखतः लोहे के) बनाने के लिए प्रसिद्ध थे। इस समय बढ़ गीरी, टोकरी बनाना, तेल पेरना, पत्थर काटना, चमड़े का काम, बर्तन बनाना आदि शिल्पों की प्रधानता था। इन्होंने 'श्रेणी' नामक संगठन बनाया जो एक ही प्रकार के व्यवसाय या उद्योग करने वाले व्यक्तियों की संस्था थी। दक्षिण भारत की बस्तियों और उनके संगठन की निम्न विशेषतायें थी-
  • कोरोमण्डल तट पर की बस्तिया स्वायत्त तो थी किन्तु नियंत्रण से मुक्त नहीं थी,उस पर श्रेणी संगठनों तथा राजा का नियंत्रण था।
  • शिल्प एवं उद्योग की प्रगति के कारण शहरी केंद्रों का उदय हुआ किन्तु जातिय भेद-भाव बने रहें।
  • तमिलनाडु में कमलान जाति के गठन में लोहार, बढ़ई, ताम्रकार, राजमिस्त्री (घरो या किलों को बनाने वाले) जैसे पाँच अतः सामुदायिक विशेषज्ञ शामिल थे।
  • केंद्र में संगठन बनाने के कारण शिल्पकारों को अपनी दुकान बंद करने और प्रव्रजन जैसे अधिकारों के संरक्षण में मदद मिलती थी।
  • शिल्प व्यवसाय से सम्बन्धित जातियाँ (जैसे-कमलान, कैक्कोला) मंदिरों को दान दिया करते थे।

66. ब्रिटिश शासन के प्रभाव के संदर्भ में कौन-सा से सही है हैं?

A. भारतीय विदेशी व्यापार में बुद्धि न तो स्वाभाविक न ही सामान्य थी, यह साम्राज्यवाद को बनाए रखने हेतु कृत्रिम रूप से विकसित की जा रही थी।
B. विदेशी व्यापार की संरचना और विशेषता असंतुलित थी
C. भारत से धन-निष्कासन हुआ
D. घरेलु उद्योगों का विनाश और रोजगार के अन्य मार्गों की अनुपस्थिति ने लाखों हस्तशिल्पियों को कृषक बनाने की ओर धकेल दिया।
E. नगरीय और ग्रामीण दस्तकारी उद्योगों का क्रमिक पतन और विनाश हुआ।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सहीं उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल A, B, C, D और E
Solution:आरम्भिक ग्रामीण कृषि प्रधान भारतीय अर्थव्यवस्था पर ब्रिटिश कालीन वाणिज्यवादी नीति ने बहुत ही गहरा प्रभाव छोड़ा जिसके परिणामस्वरूप आत्म-निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था पतन की ओर अग्रसर हुई जिसके निम्न प्रभाव परिलक्षित होते हैं-

1. भारतीय विदेशी व्यापार में बुद्धि न तो स्वाभाविक न ही सामान्य थी, यह साम्राज्यवाद को बनाए रखने हेतु कृत्रिम रूप से विकसित की जा रही थी।

2. विदेश व्यापार की संरचना और विशेषता असंतुलित थी।

3. भारत से धन निष्कासन हुआ। सर्वप्रथम दादाभाई नौरोजी ने अपनी पुस्तक 'द पॉवर्टी एण्ड अन-ब्रिटिश रूल इन इण्डिया' में इस सिद्धान्त को दिया था।

4. घरेलू उद्योगों का विनाश और रोजगार के अन्य मार्गों की अनुपस्थिति ने लाखों हस्तशिल्पियों को कृषक बनने की ओर धकेल दिया।

5. ब्रिटिश सरकार ने भारत से कच्चा माल ब्रिटेन भेजना प्रारम्भ कर दिया था क्योंकि वहाँ पर औद्योगिक क्रांति का तेजी से विकास हो रहा था। इसी समय आधुनिक मशीनों का निर्माण प्रारम्भ हो गया। जिसके कारण ब्रिटिश सरकार ने भारतीय लघु उद्योगों एवं कुटीर उद्योगों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। परिणाम स्वरूप नगरीय एवं ग्रामीण दस्तकारी उद्योगों का क्रमिक पतन और विनाश हुआ।

67. मध्यकालीन भारत में ददनी पद्धति प्रचलित हुई क्योंकि :

Correct Answer: (a) देशी एवं विदेशी दोनों व्यापारों में तेजी लाना
Solution:

मध्यकालीन भारत में ददनी पद्धति प्रचलित हुई क्योंकि देशी एवं विदेशी दोनों व्यापारों में तेजी लाना था। मुगल काल में ऋण की सुविधा व्यापारियों के लिए उपलब्ध थी। चूंकि व्यापारी देशी तथा विदेशी दोनों ही व्यापार में संलिप्त थे। इसलिए व्यापारियों को ऋण प्रदान करने के लिए ददनी पद्धति प्रचलित की गयी थी। इसके अन्तर्गत शिल्पियों को इसमें अग्रिम पैसा दे दिया जाता था और शिल्पियों को निश्चित अवधि तक व्यापारियों को माल तैयार कर देना होता था।

68. निम्नलिखित को कालक्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए:

(A) अशोक का राज्यकाल
(B) चन्द्रगुप्त मौर्य का पदारोहण
(C) मकदूनिया के सिकंदर का आक्रमण
(D) मौर्य साम्राज्य का अंत
(E)  मगध के शासकों द्वारा सत्ता का सुदृढीकरण
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) E, C, B, A, D
Solution:1. मगध के शासकों द्वारा सत्ता का सुदृढ़ीकरण (लगभग 500- 400 ई.पू.)
2. मकदूनिया के सिकन्दर का आक्रमण (लगभग 327-325 ई.पू.)
3. चन्द्रगुप्त मौर्य का पदारोहण (लगभग 322-21 ई.पू.)
4. अशोक का राज्यकाल (लगभग 272/268-231 ई.पू.)
5. मौर्य साम्राज्य का अन्त (लगभग 185 ई.पू.)

69. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए एवं सही को चिह्नित कीजिए।

A. कृष्णदेव राय ने मधुर विजयम की रचना की
B.  तेलुगु एवं कन्नड़ साहित्य दोनों को विजयनगर शासकों द्वारा संरक्षण प्राप्त था।
C.  देवराय II ने आमुक्तामलयदई की रचना की
D.  माधावचार्य ने पाराशर माधवीय की रचना विजयनगर शासन के दौरान की
E.  रानी गंगादेवी ने वरादंबिका परिणयम् की रचना की
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (*)
Solution:1. मधुर विजयम् (Madhur Vijayam) की रचना रानी गंगादेवी ने किया था। इसका अर्थ है 'मदुरै की विजय' । इसका अन्य नाम 'वीरा कम्पराय चरितम्' भी मिलता है।

2. विजयनगर शासकों ने संस्कृत, तेलुगू, तमिल और कन्नड़ साहित्य को संरक्षण दिया था। इसी समय वेदों के प्रसिद्ध टीकाकार सायण तथा माधव विद्यारण्य हुए। बुक्का प्रथम ने तेलुगू-साहित्य को प्रोत्साहन दिया था। कृष्णदेवराय ने तेलुगू को संस्कृत के प्रभाव से मुक्त करके 'प्रबन्ध' नामक तेलुगू की स्वतंत्र रचनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त किया। उनकी प्रसिद्ध रचनायें 'आमुक्त माल्यद' (तेलुगू), जाम्बवती कल्याणम् (संस्कृत), उषापरिणय आदि है।

3. वरादंबिका परिणयम् की रचना तिरूमलाम्बा ने अच्युतदेव राय के समय किया था।

4. माधवाचार्य विद्यारण्य ने विजयनगर शासन के दौरान पाराशर माधवीय, पाराशर स्मृति व्याख्यान, सर्वदर्शन संग्रह जैसे आदि ग्रंथों की रचना की।

नोट : कोई भी विकल्प सही नहीं होने के कारण आयोग ने इस प्रश्न को मूल्यांकन से बाहर (Drop) कर दिया है।

70. निम्नलिखित कथनों में से कौन से सही हैं?

A. भाषायी प्रांत के लिए पहली मांग आंध्र के तेलुगु भाषी लोगों ने उठाई थी।
B. 16 अगस्त 1951 के दिन स्वामी सीताराम ने पृथक आंध्र राज्य की मांग के समर्थन में आमरण अनशन शुरू किया था।
C. छप्पन दिनों तक उपवास रखने के बाद पोट्टी श्रीरामुलू की मृत्यु हो गई।
D. राज्य पुनर्गठन आयोग 1958 में बनाया गया था।
E.  में पंजाब को पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में पुनर्गठित किया गया।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (d) केवल A, B, C और E
Solution:

देशी राज्यों के विलय के पश्चात पुनर्गठन की समस्या उत्पन्न हो गयी। 1920 ई. में काँग्रेस ने नागपुर अधिवेशन में भाषा के आधार पर प्रांतों के गठन की माँग उठायी थी। अतः 1948 ई. में जे.बी.पी. समिति ने भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की संस्तुति नहीं की। अतएव भाषायी आधार पर प्रांतों के गठन के लिए देश में आंदोलन उत्पन्न हो गया।

जिसमें सर्वप्रथम आंध्र प्रदेश में तेलुगू भाषा के आधार पर प्रांत के गठन के लिए 16 अगस्त, 1951 को स्वामी सीताराम ने आमरण अनशन शुरू कर दिया था। विनोबा भावे तथा नेहरू ने जब पृथक आंध्र राज्य का आश्वासन दिया तब उन्होंने अपना अनशन तोड़ दिया। अक्टूबर, 1952 में पोट्टी श्रीरामालू ने आमरण अनशन प्रारम्भ कर दिया, किंतु 56 दिनों के उपवास के पश्चात उनकी मृत्यु हो गयी। अतः सरकार ने 1953 ई. में भाषायी आधार पर सर्वप्रथम आंध्र प्रदेश का गठन कर दिया।
नोट -
1. 1954 में फजल अली की अध्यक्षता में राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना की गयी तथा जुलाई 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित किया।
2. 1966 ई. में पंजाब को पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में पुनर्गठित किया गया।