Solution:सबाल्टर्न अध्ययन, औपनिवेशिक कालखण्ड में अभिजात्य, आधिकारिक स्रोत से इतर जनता द्वारा, जनता के लिए जनता का इतिहास विनिर्मित करने की प्रविधि है। सबाल्टर्न इतिहासकारों ने यह धारणा प्रस्तुत की है। कि औपनिवेशिक दासता से ग्रस्त या उबर चुके राष्ट्र में राष्ट्रवादी इतिहास का लिखा जाना जातीय गौरव का प्रतीक बन जाता है।राष्ट्रवादी इतिहासकारों द्वारा उपनिवेश विरोधी चेतना के निर्माण हेतु समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने का ही प्रयास किया जाता है। इस विचारधारा ने जातीयता और राष्ट्र की मूलभूत अवधारणा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। इन्होंने समस्त राष्ट्रवादी इतिहास लेखन को अभिजनवादी कहकर अपर्याप्त घोषित कर दिया, साथ ही स्वातंत्र्योत्तर भारत के इतिहासकारों के समक्ष चुनौती रखी कि वे औपनिवेशिक भारत और स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास को सबाल्टर्न इतिहास के रूप में अर्थात उस साधारण जनता के दृष्टिकोण से प्रस्तुत करें जिनकी राष्ट्रीय चेतना और प्रतिरोध का नेतृत्व हमेशा अभिजात प्रभावशाली राष्ट्रीय नेताओं द्वारा किया गया।
नोट - प्रमुख सबाल्टर्न इतिहासकार - रणजीत गुहा, पार्थ चटर्जी, गौतम भद्र, डेविड अर्नाल्ड, ज्ञानेन्द्र पाण्डेय, डेविड हार्डिमन, सुसी थारू, गायत्री चक्रवर्ती स्पीवाल, शाहिद अमीन, सुदीप्त, कविराज, ज्ञान प्रकाश, सुमित सरकार (बाद में समूह से असहमत) हैं।