यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 समाजशास्त्र

Total Questions: 100

1. 'रन अवे............. वर्ल्ड' अवधारणा का प्रयोग किसने किया है?

Correct Answer: (a) एंथनी गिड्डेस
Solution:'रनवे वर्ल्ड' अवधारणा का प्रयोग एंथोनी गिड्डेन्स ने किया है। यह वैश्वीकरण को अप्रत्याशित, विनाशकारी प्रक्रिया मानता है। गिड्डेन्स ने दर्शाया है कि वैश्वीकरण के दो परिणाम, अर्थात् एक 'जोखिम चेतना' और 'अन्तर्विरोध' कैसे पैदा होते हैं, हमें सुरक्षा और स्थिरता की भावना प्रदान करने के लिए, राष्ट्र राज्य, परिवार और धर्म जैसे संस्थानों की क्षमता को कमजोर करते हैं। ये संस्थान अब हमें स्पष्ट रूप से परिभाषित मानदण्डों और मूल्यों की पेशकश करने में सक्षम नहीं हैं जो हमें बताते हैं कि हमें समाज में कैसे कार्य करना चाहिए।

2. आधुनिक औद्योगिकृत समाज में उद्योगों में महिलाओं की प्रस्थितिः

Correct Answer: (b) क्रमशः ऊपर उठी है।

3. किसका विचार है कि अगम्यगमन निषेध व्यापक समाज के साथ सम्बन्ध बनाने में सहायक होता है?

Correct Answer: (a) सी. लेविस् स्ट्रॉस
Solution:लेवी स्ट्रास का विचार है कि 'अगम्यगमन निषेध' (In cest Taboo) व्यापक समाज के साथ सम्बन्ध बनाने में सहायक होता है। उन्होंने अपनी पुस्तक द एलिमेन्ट्री स्ट्रक्चर्स ऑफ किनशिप' (1949) में 'अगम्यगमन निषेध' की प्रथा को सार्वभौमिक मानते हुए इसकी व्याख्या की है। उन्होंने इस निषेध को विवाह की संस्था को नियंत्रित करने वाले नियमों के रूप में देखा है। वे कहते हैं कि सरल समाजों में विवाह के सकारात्मक नियम होते हैं, अर्थात एक व्यक्ति नातेदारी के किस वर्ग में विवाह कर सकता है। इस दृष्टि से आदिवासी समाजों में 'विलिंग सहोदरज विवाह' (ममेरे फूफेरे भाई-बहिन विवाह) की अनुमति दी गई है। इसके विपरीत, जटिल समाजों (आधुनिक समाज) में विवाह के नकारात्मक नियमों की अधिकता होती है अर्थात् एक व्यक्ति को नातेदारी समूह के कुछ विशिष्ट वर्ग के व्यक्तियों के साथ विवाह करने की अनुमति नहीं होती। इस वर्ग में सामान्यतः निकटतम संबंधी अथवा अपने कुल (गोत्र) समूह के सदस्य होते हैं जिसके साथ विवाह करना निषेधित होता है। विवाह के ये नियम न केवल सामाजिक संरचना को प्रभावित करते हैं, अपितु ये सामाजिक संरचना का निर्माण भी करते हैं।

4. गॉफमैन के अनुसार जब गुजरने वाले व्यक्ति एक दूसरे पर शीघ्रता से नजर डालते हैं और फिर दूर कहीं पुनः देखते हैं, इसे कहा जाता है-

Correct Answer: (d) नागरिक उपेक्षा करना
Solution:गॉफमैन के अनुसार जब गुजरने वाले व्यक्ति एक-दूसरे पर शीघ्रता से नजर डालते हैं और फिर दूर कहीं पुनः देखते हैं तो इसे नागरिक उपेक्षा करना कहा जाता है। गॉफमैन की प्रमुख रूचि आमने-सामने की प्रत्यक्ष अन्तक्रिया के अध्ययन में रही है। इन अन्तक्रियाओं को उन्होंने रूपकों के माध्यम से समझाया है और इसके लिए उन्होंने रंगमंच की उपमाओं का प्रयोग किया है। सामाजिक अन्तक्रिया, आकस्मिक मिलन, समूहन की विधा, लघु समूह, भूमिका व्यवहार, विचलन और व्यक्तिगत पहचान, मानसिक संस्थाओं और लैंगिक विषमता में विज्ञापनों की भूमिका आदि गॉफमैन के अध्ययन के प्रमुख विषय रहे हैं।

5. किसे सांकेतिक नृ विज्ञान के प्रमुख विद्वान के रूप में जाना जाता है?

Correct Answer: (a) विलफ्रेड गार्ट्ज
Solution:क्लिफोर्ड गीज को सांकेतिक नृ विज्ञान के प्रमुख विद्वान के रूप में जाना जाता है। वर्ष 1960 के बाद गीज ने सांकेतिक व्यवस्थाओं को अपने अध्ययन का केन्द्र बनाया। उन्होंने संस्कृति के अध्ययन की तुलना ग्रंथों के अध्ययन से की और कहा कि एक उपन्यास के पढ़े जाने की भाँति सांस्कृतिक व्यवस्थाओं को भी पढ़ा जा सकता है।

6. मीड तीन अवस्थाओं का वर्णन करता है जिसमें स्व की अवधारणा पैदा होती है और उसका विकास होता है: प्रारंभिक क्रिया की अवस्था क्रीड़ा अवस्था व....

Correct Answer: (c) खेल अवस्था
Solution:मीड ने स्व की अवधारणा और उसके विकास की निम्न तीन अवस्थाओं का वर्णन किया है- प्रारम्भिक क्रिया की अवस्था, क्रीड़ा अवस्था व खेल अवस्था। मीड के 'स्व' सम्बन्धी विचार सी. एच. कूले से मिलते-जुलते हैं। जहाँ कूले ने इस प्रक्रिया को समझने के लिए 'स्व के आत्मदर्पण' की अवधारणा का प्रयोग किया है, वहाँ मीड ने इसके लिए 'मैं', 'मुझे', और 'मानस' की अवधारणाओं का प्रयोग किया है। व्यक्ति के समाजीकरण में मीड ने समाज की महती भूमिका को इंगित करते हुए लिखा है कि बालक को अपने बारे में सामाजिक अन्तक्रिया के द्वारा ही बोध होता है। इसी के द्वारा 'स्व' की उत्पत्ति होती है। स्व का ज्ञान उसे 'दूसरे व्यक्तियों' की भूमिकाओं को ग्रहण करने से ही होता है। मीड ने इन दूसरे व्यक्तियों को 'समान्यीकृत अन्य' कहा है।

7. सामाजिक विज्ञान शोध में निराकरणीय प्राक्कल्पना में | प्रारंभिक दार्शनिक पूर्वधारणा...........है:

Correct Answer: (c) गलत होंने योग्य
Solution:सामाजिक विज्ञान शोध में निराकरणीय प्राक्कल्पना में प्रारम्भिक दार्शनिक पूर्वधारणा गलत होने योग्य है।

8. आधुनिक समाज में कालातीत के रूप में समय के रूपांतरण पर किस विद्वान ने जोर दिया?

Correct Answer: (c) मैनुअल कैसल्स
Solution:आधुनिक समाज में कालातीत के रूप में समय के रूपान्तरण पर मैनुअल कैस्टेल्स ने जोर दिया। उनका विचार है कि, "हमारे समाज में संरचनात्मक परिवर्तनों की गति और आकार, सामाजिक संगठन के एक नए रूप की शुरुआत, सूचना नेटवर्क के व्यापक संगठनात्मक रूप के रूप में व्यापक परिचय से आते हैं।" नेटवर्क समाज एक ऐसा समाज है, जिसकी सामाजिक संरचना माइक्रो - इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित सूचना और संचार प्रौद्योगिकियों द्वारा संचालित नेटवर्क से बनी है। कैस्टेल्स के अनुसार, तीन प्रक्रियाओं ने 20वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इस नई सामाजिक संरचना के उदय के लिए नेतृत्व किया- • एक खुले बाजार के दृष्टिकोण को समायोजित करने के लिए औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं का पुनर्गठन, • नागरिक अधिकारों के आन्दोलन, नारीवादी आंदोलन और पर्यावरण आंदोलन सहित 1960 के दशक के अंत और 1970 के दशक की शुरूआत में स्वतंत्रता उन्मुख सांस्कृतिक आंदोलन, तथा • सूचना और संचार प्रौद्योगिकी में क्रान्ति ।

9. आर. के. मर्टन के अनुसार प्रकट प्रकार्य हैं:

Correct Answer: (b) अभिप्रेरित व स्वीकृत
Solution:आर. के. मर्टन के अनुसार प्रकट प्रकार्य अभिप्रेरित व स्वीकृत हैं। जो व्यवस्था में अंश ग्रहण करने वालों के द्वारा मान्य तथा इच्छित होते हैं, जबकि अन्तर्निहित प्रकार्य न तो मान्य होते है, न ही इच्छित। प्रकार्य वे वस्तुपरक परिणाम हैं जो समायोजन में वृद्धि करते हैं जबकि दुष्प्रकार्य ऐसे वस्तुपरक परिणाम हैं जिनसे व्यवस्था के अनुकूलन और समायोजन में कमी आती है। ऐसे परिणामों को उन्होंने अकार्य कहा है जो कि विचाराधीन व्यवस्था के लिए सर्वथा निरर्थक सिद्ध होते हैं।

10. मलिनोव्सकी के प्रकार्यवाद को बहुधा किस रूप में परिभाषित किया जाता है:

Correct Answer: (a) व्यक्तिवादी प्रकार्यवाद
Solution:मैलिनोवस्की के प्रकार्यवाद को व्यक्तिवादी प्रकार्यवाद के रूप में परिभाषित किया जाता है। उनका मानना है कि, समस्त मानव संस्कृति का कार्य मूलतः मानव की मौलिक एवं आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना है। सभी सांस्कृतिक तत्व किसी न किसी रूप में किसी समाज में व्यक्ति की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।