Correct Answer: (a) सी. लेवी- स्ट्रॉस
Solution:क्लाड लेवी स्ट्रास ने आदिम समाजों में अविवाहित व्यक्तियों की दयनीय स्थिति का सुस्पष्ट वर्णन किया है। वे कहते हैं। कि सरल समाजों में विवाह के सकारात्मक नियम होते हैं, अर्थात् एक व्यक्ति नातेदारी के किस वर्ग में विवाह कर सकता है। इस दृष्टि से आदिवासी समाजों में 'विलिंग सहोदरज विवाह' (ममेरे फुफेरे भाई-बहिन) की अनुमति दी गई है। उन्होंने विवाह-विनिमय के दो रूपों की चर्चा की है-सीमित या प्रत्यक्ष विनिमय और सामान्यीकृत विनिमय । सीमित या प्रत्यक्ष विनिमय नियम के अनुसार, एक समूह जिस समूह से पत्नियों के रूप में स्त्रियाँ प्राप्त करता है, उसी समूह को वह पत्नियों के रूप में स्त्रियाँ देता है। इस प्रकार की विनिमय प्रणाली में पुरुष अपनी बहिनों का विनिमय एक-दूसरे के साथ (आटा-साटा विवाह) करते हैं। जैसे एक व्यक्ति अपने मामा की लड़की या बुआ की लड़की से विवाह कर सकता है। परन्तु सामान्यीकृत विनिमय प्रणाली में स्त्रियों का विनिमय केवल एक तरफा होता है, अर्थात् ऐसा विनिमय जिसमें पिता की भाँति पुत्र भी उसी नातेदारी समूह में विवाह करता है जिसमें पिता ने किया था, किन्तु पुत्री उस समूह में विवाह नहीं कर सकती है।