यूजीसी NTA नेट जेआरएफ परीक्षा, जून 2020 समाजशास्त्र

Total Questions: 100

21. कांत के दर्शन के संदर्भ में किसने निजवाचक आलोचना का प्रयोग किया?

Correct Answer: (c) हीगल
Solution:कांत के नैतिक दर्शन के संदर्भ में हीगल ने निजवाचक आलोचना (Reflexive Critique) का प्रयोग किया। हीगल के समस्त दर्शन का सार उनकी दो प्रमुख अवधारणाओं- 'द्वन्द्वात्मकता' और 'आदर्शवाद' में प्रतिबिम्बित होता है। द्वन्द्वात्मकता चिन्तन का एक तरीका है, एक विधि है, किन्तु साथ ही यह विश्व की प्रकृति को भी परिलक्षित करता है जबकि आदर्शवाद भौतिक विश्व की अपेक्षा मस्तिष्क और मानसिक उपज की महत्ता पर बल देता है। अपने चरम स्वरूप में, आदर्शवाद की यह मान्यता है कि केवल मानसिक और मनोवैज्ञानिक रचनाओं का ही अस्तित्व है।

22. विज्ञान के समाज शास्त्र के अपने अध्ययन में किसने |26. विज्ञान पर राजनीति के प्रभाव के विषय को सुव्यवस्थित रूप से लिया है?

Correct Answer: (c) आर.के. मर्टन
Solution:विज्ञान के समाजशास्त्र के अपने अध्ययन में आर. के. मर्टन ने विज्ञान पर राजनीति के प्रभाव के विषय को सुव्यवस्थित रूप से लिया है। 'विज्ञान का समाजशास्त्र' उनके शोध-लेखन के प्रिय विषयों में से एक प्रमुख विषय रहा है। इसी विषय पर उन्हें शोध उपाधि (पी.एच.डी.) प्राप्त हुई। इस विषय ने समाजशास्त्र में विज्ञान के प्रति नई सोच उत्पन्न की जिसने बाद में कई नये समाजशास्त्रीय उपागमों की नींव रखी।

23. समाज विज्ञान के संदर्भ में किसने "फाल्सिफाएबिलिटी' शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग किया?

Correct Answer: (d) कार्ल पॉपर
Solution:समाज विज्ञान के संदर्भ में 'फाल्सिफाएबिलिटी' (Falsifiability) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग कार्ल पॉपर ने किया। विज्ञान और वैज्ञानिक ज्ञान की मान्यताओं के विपरीत, पॉपर ने कहा कि 'वैज्ञानिक ज्ञान की कसौटी उसकी सत्यापनशीलता नहीं है, अपित् उसकी 'मिथ्यापनशीलता' है। अतः 'पराभौतिकीय ज्ञान अर्थहीन नहीं होता, वह बहुधा विज्ञान का पूर्व संकेत देता है।'

24. वाद-विवाद में भाष्य विज्ञान परियोजना यथार्थवाद और अन्य किससे संबंधित है?

Correct Answer: (b) यथार्थवाद-विरोधी
Solution:वाद-विवाद में भाग्य विज्ञान परियोजना यथार्थवाद और विरोधी यथार्थवाद से संबंधित है। मार्टिन हैडेगर ने अपनी प्रसिद्ध कृति 'Being and Time (1927) में कहा है कि शास्त्रार्थमीमांसा मानव विज्ञानों को तार्किक आधार देने के बारे में नहीं है बल्कि जगत में मनुष्य के अस्तित्व की मूलभूत स्थितियों के बारे में है। 'व्यक्ति कैसे जानता है? यह हैडेगर के लिए भाष्य वैज्ञानिक प्रश्न नहीं है बल्कि जिसके अस्तित्व को समझना है उसकी स्थिति या परिस्थितियां क्या है? है।

25. कूहनने किस शब्द के द्वारा बताया कि किसी भी दिये गये समय में विज्ञान पर उसका विशेष प्रभाव होता है........

Correct Answer: (a) प्रतिमान (पैराडइम)
Solution:थॉमस कूहन ने प्रतिमान (पैराडाइम) शब्द के द्वारा बताया है कि किसी भी दिये गये समय में विज्ञान पर उसका विशेष प्रभाव होता है। उनके अनुसार, पैराडाइम विश्व को देखने की एक विधि है जिसमें शोध के विषय, उससे सम्बन्धित प्रश्न तथा उनके विश्लेषण के नियमों को सम्मिलित किया जाता है। ये किसी विषय के बारे में वैज्ञानिकों को समुदायों के साझा अनुमानों को प्रकट करते हैं। पैराडाइम वैज्ञानिकों के कार्यकलापों को नियंत्रित करते हैं, उनकी शोध को निर्देशित करते हैं तथा उनकी शोध की सीमाबंदी भी करते हैं। जब कभी ये अपने कार्य में असफल होते हैं, तब विज्ञान में 'क्रांति' उत्पन्न होती है।

26. डॉ. अंबेडकर के डॉक्टरेट शोध प्रबंध का शीर्षक है..

Correct Answer: (d) द प्राब्लम आफ रूपीः इट्स ओरिजिन एंड उदय साल्यूशन
Solution:डॉ. अंबेडकर के डॉक्टरेट शोध प्रबंध का शीर्षक प्राब्लम आफ रूपीःइट्स ओरिजिन एंड इट्स साल्यूशन' (1923) है। वर्ष 1915 में उन्होंने अमेरिका के कोलम्बिया विश्वविद्यालय मानवशास्त्र में एम.ए. किया तत्पश्चात वर्ष 1924 में 'ब्रिटिश भारत में प्रान्तीय वित्त का उद्भव' विषय पर पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्ति की। वर्ष 1921 में लंदन से 'मास्टर ऑफ साइन्स' की उपाधि और वर्ष 1922 में 'बार एट लॉ' की डिग्री प्राप्त की।

27. निम्नलिखित में से कौन सी पुस्तक एम.एन. श्रीनिवास द्वारा नहीं लिखी गई है?

Correct Answer: (a) इंडियाज चेंजिंग विलेजिज़
Solution:'India's changing villages' पुस्तक एस.सी. दुबे की है जबकि एम. एन. श्रीनिवास की प्रमुख पुस्तकें हैं-
- India's Village, (1955)
- Social change in Modern India, (1966)
- The Remembered Village, (1976)
- Village, Caste, Gender and Method, (1996)
- Caste in Modern India and other Essays, (1962)
-Religion and Society Among the coorgs of South India, 1952)

28. किसने यह कहा था आदिवासियों का हिन्दू जातियों में आत्मसातकरण किया जाना चाहिए?

Correct Answer: (b) जी.एस. पुर्ये
Solution:जी. एस. घुर्ये ने कहा था कि आदिवासियों का हिन्दू जातियों में आत्मसातकरण किया जाना चाहिए। उनकी दृष्टि में भारतीय जनजातियों की स्थिति हिन्दुओं के पिछड़े दलित वर्ग जैसी ही है। उनके पिछड़ेपन का कारण उनका हिन्दू समाज से पूरी तरह एकीकृत न होना रहा है। भारतीय जनजातियों की समस्याओं के समाधान के रूप में धुर्ये ने 'आत्मसात की नीति' प्रस्तावित की जो एल्विन के 'नेशनल पार्क की नीति' और जवाहरलाल नेहरू की 'एकीकरण की नीति' से सर्वथा भिन्न है।

29. “युगांत द एंड ऑफ एन इपोक" का लेखक लेखिका कौन है?

Correct Answer: (c) इरावती कर्वे
Solution:जी. एस. घुर्ये ने कहा था कि आदिवासियों का हिन्दू जातियों में आत्मसातकरण किया जाना चाहिए। उनकी दृष्टि में भारतीय जनजातियों की स्थिति हिन्दुओं के पिछड़े दलित वर्ग जैसी ही है। उनके पिछड़ेपन का कारण उनका हिन्दू समाज से पूरी तरह एकीकृत न होना रहा है। भारतीय जनजातियों की समस्याओं के समाधान के रूप में धुर्ये ने 'आत्मसात की नीति' प्रस्तावित की जो एल्विन के 'नेशनल पार्क की नीति' और जवाहरलाल नेहरू की 'एकीकरण की नीति' से सर्वथा भिन्न है।

30. “युगांत द एंड ऑफ एन इपोक" का लेखक लेखिका कौन है?

Correct Answer: (c) इरावती कर्वे
Solution:'yuganta: The End of an Epoch' की लेखिका इरवर्ती करें हैं। इनकी अन्य प्रमुख पुस्तकें हैं-
- Kinship Organisation in India, (1968)
- Hindu Society, (1960)