यू.जी.सी./एनटीए नेट जेआरएफ परीक्षा,दिसम्बर 2019 (विधि)

Total Questions: 100

81. भारतीय दण्ड संहिता में वर्ष 2018 के अधिनियम 22 द्वारा निम्नलिखित में से कौन सा उपबंध अंतः स्थापित किया गया?

Correct Answer: (b) बारह वर्ष से कम आयु की महिला के साथ दुष्कर्म करने पर दण्ड
Solution:भारतीय दण्ड संहिता 1860 में दण्ड विधि (संशोधन) अधिनिय, 2018 द्वारा धारा 376-AB को अन्तःस्थापित किया गया, जो 21 अप्रैल, 2018 से प्रभावी है। धारा 376-AB में प्रावधान किया गया है कि जो कोई 12 वर्ष से कम आयु की किसी स्त्री से बलात्संग करेगा,

वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि 20 वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो आजीवन कारावास, जिसका अभिप्राय इस व्यक्ति के शेष प्रकृत जीवनकाल के लिए कारावास होगा, तक की हो सकेगी और जुर्माने से, अथवा मृत्युदण्ड से दण्डित किया जायेगा।

82. ला ऑफ नेशन्स नीतियों का एक संग्रह है, जिन्हें सभ्य राज्यों द्वारा एक दूसरे के साथ अपने व्यवहार में अपनाया गया है। अंतर्राष्ट्रीय कानून की यह परिभाषा लार्ड कॉलरिज द्वारा निम्नलिखित किस मामले में दी गई है?

Correct Answer: (a) क्वीन बनाम केन
Solution:लार्ड कॉलरिज ने क्वीन बनाम केन के वाद में अन्तर्राष्ट्रीय कानून की यह परिभाषा दिया कि लॉ आफ नेशन्स नीतियो का एक संग्रह है, जिन्हें सभ्य राज्यों द्वारा एक दूसरे के साथ अपने व्यवहार में अपनाया गया है।

83. नीचे अभिकथन (A) तथा कारण (R) के रूप में दो कथन दिए गए हैं:

अभिकथन (A): प्रत्येक हिन्दू को अपनी धर्मज या अधर्मज अवयस्क हिन्दु संतान का भरण-पोशण करना होगा।

तर्क (R):   हिन्दू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 20 (2) के अंतर्गत धर्मज या अधर्मज

उपरोक्त कथनों के अलोक में सही विकल्प चुनिएः 

Correct Answer: (c) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) का सही व्याख्या है
Solution:हिन्दू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम 1956 की धारा 20 के अनुसार इस धारा के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए यह है कि कोई हिन्दू अपने जीवन काल के दौरान अपने धर्मज या अधर्मज अपव्यों और वृद्ध या शिथिलांग जनकों का भरण-पोषण करने के लिए आबद्ध है।

धारा 10 (2) के अनुसार जब तक कि कोई धर्मज या अधर्मज अप्राप्तवय रहे वह अपने पिता या माता से भरण-पोषण पाने के लिए दावा कर सकेगा। अतः A और R दोनो सही है तथा 'R' A की सही व्याख्या है।

84. सिविल और आपराधिक दायितव के मध्य विभेद के सम्बन्ध में से कौन सा कथन सही नहीं है?

Correct Answer: (b) सिविल दायित्व में दण्ड दिया जाता है जबकि आपराधिक दायित्व के परिणामस्वरूप प्रतिकर दिया जाता है
Solution:सिविल और आपराधिक दायित्व के मध्य विभेद के सम्बन्ध में यह कथन की सिविल दायित्व में दण्ड दिया जाता है। जबकि आपराधिक मामलों में प्रतिकर दिया जाता है गलत है क्योंकि सिविल मामलों में प्रतिकर तथा दाण्डिक मामलों में दण्ड दिया जाता है।

85. भारत के उच्चतम न्यायालय ने निम्नलिखित में से किस मामले में विशेष रूप से कहा है कि 'संघीय ढाचा' संविधान की मुख्य विशेषत है?

Correct Answer: (b) एस.आर. बोमई बनाम भारत संघ
Solution:एस. आर. बोमई बनाम भारत संघ के मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह अभिनिर्धारित किया कि 'संघीय ढाचा' संविधान की मुख्य विशेषता है। दूसरे शब्दों में 'संघीय ढाचा' संविधान का मूल संरचना है।

86. नीचे अभिकथन (A) तथा कारण (R) के रूप में दो कथन दिए गए हैं:

अभिकथन (A): जब भी डकैती के प्रयास हेतु किसी अवधि के साथ कठोर दण्ड दिया जाता है, जिस अवधि को बढ़ाकर सात वर्ष किया जा सकता है और जिस हेतु अर्थदण्ड भी दिया जा सकता है।

तर्क (R):  भारतीय दण्ड संहिता की धारा 393 के  अनुसार, कठोर दण्ड का प्रावधान है यह अवधि सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। और डकैती के अपराध हेतु अर्थदण्ड भी दिया जा सकता है

उपरोक्त कथनों के अलोक में सही विकल्प चुनिए

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) का सही व्याख्या है
Solution:भारतीय दण्ड संहिता की धारा 391 में डकैती तथा धारा 393 लूट करने के प्रयत्न से सम्बन्धित है।

यह सत्य है कि जब भी डकैती के प्रयास हेतु किसी अवधि के साथ कठोर दण्ड दिया जाता है जिस अवधि को बढ़ाकर सात वर्ष किया जा सकता है या अर्थदण्ड दिया जा सकता है। धारा 393 में भी कठोर दण्ड के प्रावधान को 7 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। और डकैती के अपराध हेतु अर्थदण्ड भी दिया जा सकता है।

अतः A तथा R दोनों सही है 'R' A की सही व्याख्या है।

87. सूक्ति 'डेमनम साइन इनजुरिया' का अर्थ है:

Correct Answer: (b) क्षति या हानि, बिना विधिक अधिकार के उल्लंघन के,
Solution:डेमनम साइन इनजुरिया का अर्थ होता है, विधिक अधिकार के उल्लंघन के बिना हानि। इससे संबंधित प्रमुख वाद है-

1. ग्लूसेस्टर ग्रामर स्कूल वाद
2. उषावेन बनाम भाग्यलक्ष्मी चित्र मंदिर।

88. उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिश्चत निम्नलिखित वादों को संबंधित विषय के साथ सुमेलित कीजिए:

सूची-Iसूची-II
A.  हुसैनारा खातून बनाम बिहार राज्य1.  सार्वजनिक स्थलों में धूम्रपान पर प्रतिबंध
B.  मुरली एस. देओरा बनाम भारत संघ2. जेल में अमानवीय व्यवहार से संरक्षण
C. लक्ष्मी कांत पांडे बनाम भारत संघ3.  त्वरित विचारण
D.  सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन4. बाल कल्याण

सही विकल्प चुनिएः

ABCD
(a)1234
(b)1342
(c)3142
(d)2431
Correct Answer: (c)
Solution:सुमेलित

(1) हुस्न आरा खातून बनाम बिहार राज्य का मामला त्वरित विचारण से सम्बन्धित है।
(2) मुरली एस. देवड़ा बनाम भारत संघ का मामला सार्वजनिक स्थलों में धूम्रपान पर प्रतिबंध से सम्बन्धित है।
(3) लक्ष्मीकांत पाण्डेय बनाम भारत संघ का मामला बाल कल्याण से सम्बन्धित है।
(4) सुनील बत्रा बनाम दिल्ली प्रशासन का मामला जेल में अमानवीय व्यवहार से संरक्षण से सम्बन्धित है।

89. नीचे अभिकथन (A) तथा कारण (R) के रूप में दो कथन दिए गए हैं:

अभिकथन (A): प्रतिभू की देयता सह-विस्तृत है और यह गारंटी की शर्तों से परे नहीं हो सकती।

तर्क (R): प्रतिभू और ऋणी के अधिकार और देयताएं भिन्न एवं विशिष्ट हैं तथा यह सब गारंटी की शर्तों पर निर्भर करता है।

उपरोक्त कथनों के अलोक में सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (a) (A) और (R) दोनों सही है और (R), (A) का सही व्याख्या ह
Solution:भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 128 प्रतिभू के दायित्व से सम्बन्धित है। जिसके अनुसार प्रतिभू का दायित्व मूलऋणी के दायित्व के समविस्तीर्ण है जब तक कि संविदा द्वारा अन्यथा उपबंधित न हो। अतः A तथा R दोनो सही है तघ्या 'R' A की सही व्याख्या है।

90. शिक्षा का अधिकार अधिनियम का आशय 6 से 14 वर्ष तक की आयु के सभी बालकों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना है, किन्तु बाल श्रम अधिनियम में किए गए उपाँतरण में शून्य से 14 वर्ष के बालकों की कुटुम्ब उद्यमों में नियुक्ति को औपचारिक बनाया गया है। इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के किस अभिसमय का उल्लंघन हुआ है?

1. अभिसमय 138
2. अभिसमय 182
3. अभिसमय 126
4. अभिसमय 141

सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (a) 1 और 2
Solution:भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21क के अनुसार राज्य, छः वर्ष से चौदह वर्ष के सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेगा।

किन्तु बालश्रम अधिनियम में 0 से 14 वर्ष तक के बालक को कुटुम्ब उद्यमों में नियुक्ति को औपचारिक बनाने से अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अभिसमय 138 तथा अभिसमय 182 का उल्लंघन होता है।