यू.जी.सी. एनटीए नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020/जून-2021 (विधि)

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित किस विधिवेत्ता समूह ने यह विचार किया कि विधि संप्रभु का आदेश है जिसे वरिष्ठ राजनैतिक प्राधिकार द्वारा लागू किया जाता है और तदनुसार उनका विचार यह था कि अंतर्राष्ट्रीय विधि सही मायनों में एक विधि नहीं है जिसे जैसा कि 'तथाकथित रूप से उचित' कहा जाता है:

Correct Answer: (d) होब्ज, पुफेन्डोर्फ, आस्टिन
Solution:हॉब्स, पुफेंडॉर्फ और ऑस्टिन इस विचार को ग्रहण करते हैं, कि कानून उचित रूप से तथाकथित सम्प्रभु का आदेश है और एक वरिष्ठ राजनीतिक प्राधिकरण द्वारा लागू किया जाता है क्योंकि कानून एक निर्धारित श्रेष्ठ की आज्ञा है, कोई कानून अस्तित्व में नहीं हो सकता जहाँ कोई सर्वोच्च कानून नहीं है।

92. अपकृत्य हेतु दायित्व के संदर्भ में निम्नलिखित को सही क्रम में लगाएं :

(1) नुकसानी
(2) कर्तव्य भंग
(3) सावधानी बरतने का दायित्व
(4) करणीय संबंध

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (c) (3), (2), (4), (1)
Solution:हेवेन बनाम पेण्डर (1883) 11 Q.B.D. 503, के वाद में धारित किया गया है, “कार्यवाही योग्य उपेक्षा किसी ऐसे व्यक्ति के प्रति सामान्य सावधानी अथवा कौशल के प्रयोग में उपेक्षा का बरतना है

जिसके प्रति प्रतिवादी सामान्य सावधानी और कौशल के आचरण का कर्त्तव्य धारण करता है और जिस उपेक्षा के परिणामस्वरूप वादी को अपने शरीर अथवा सम्पत्ति की क्षति भोगनी पड़ी।” उपेक्षा की कार्यवाही में वादी को निम्न संघटन सिद्ध करने पड़ते हैं-

1. प्रतिवादी वादी के प्रति सावधानी बरतने का कर्तव्य
2. कर्तव्य का उल्लंघन, प्रतिवादी द्वारा
3. करणीय सम्बन्ध
4. वादी को क्षति अथवा हानि

93. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने निम्नलिखित में से किस मामले में अपना परामर्शी मत देने से इंकार कर दिया था?

Correct Answer: (b) सशस्त्र संघर्ष में परमाणु हथियार देश द्वारा इनके प्रयोग की वैधता का मामला
Solution:स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभावों के मद्देनजर, क्या युद्ध या अन्य सशस्त्र संघर्ष में किसी राज्य द्वारा परमाणु हथियारों का प्रयोग WHO के संविधान सहित अन्तर्राष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन होगा?

इण्टरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने प्रश्न के परिप्रेक्ष्य में कहा कि WHO का अनुरोध उस प्रश्न से सम्बन्धित नहीं है जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 96, पैरा 2 के अनुसार उस संगठन की गतिविधियों के दायरे में उठता है

और इस प्रकार इस मामले में न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को स्थापित करने की आवश्यक शर्त अनुपस्थित है और इसीलिए अनुरोधित राय नहीं दे सकता है।

94. राष्ट्रीय महिला आयोग कतिपय निम्नलिखित कार्यों का निष्पादन करेगाः

(1) बड़ी संख्या में प्रभावित महिलाओं के मुद्दों के मुकदमों का वित्तपोषण करेगा
(2) स्व-रोजगारियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा।
(3) विशेष समस्याओं में विशिष्ट अध्ययन अथवा जाँच की माँग करेगा।
(4)  महिलाओं के भेदभाव करने में लिप्त पाए गए व्यक्तियों को दण्डित करेगा।
(5) संविधान तथा अन्य कानूनों के अंतर्गत महिलाओं को प्रदत्त सुरक्षाएं के संबंध में सभी मामलों की जाँच व इनका परीक्षण करेगा।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल (1), (3), (5)
Solution:राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम 1990 के धारा 10 (1) के अनुसार, आयोग निम्नलिखित सभी या किन्हीं कृत्यों का पालन करेगा,

अर्थात् :- (क) महिलाओं के लिए संविधान और अन्य विधियों के अधीन उपबंधित विषयों का अन्वेषण और परीक्षा (ख) उन रक्षोपायों के कार्यकरण के बारे में प्रति वर्ष केन्द्रीय सरकार को रिपोर्ट देना
(ग) महिलाओं की दशा सुधारने के लिए, रक्षोपायों के प्रभावी क्रियान्वयन की सिफारिश,
(घ) विद्यमान उपबंधों का समय-समय पर पुनर्विलोकन करना और उसके संशोधनों की सिफारिश
(ङ) महिलाओं से सम्बन्धित अतिक्रमण के मामलों को समुचित प्राधिकारियों के समक्ष उठाना
(च) शिकायतों की जाँच करना और स्वप्रेरणा से ध्यान देना
(छ) महिलाओं से सम्बन्धित विषयों का अध्ययन और अन्वेषण, उनको दूर करने की योजनाओं की सिफारिश
(ज) शिक्षा सम्बन्धी अनुसंधान
(झ) महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग लेना और उन पर सलाह देना।
(ञ) महिलाओं के विकास की प्रगति का मूल्यांकन,
(ट) जेल, सुधार गृह, महिलाओं की संस्था या अभिरक्षा के अन्य स्थान का निरीक्षण,
(ठ) बहुसंख्यक महिलाओं को प्रभावित करने वाले प्रश्नों से सम्बन्धित मुकदमों के लिए धन उपलब्ध कराना।
(ङ) कोई अन्य विषय जिसे केन्द्रीय सरकार उसे निर्दिष्ट करे

95. "न्यायालयों ने क्रमिक रूप से तथा कदाचित पुरातन अपकृत्य के लगभग अगोचर विस्तार से नवीन अपकृत्यों का सृजन किया है"

Correct Answer: (a) प्रौफेसर गुड हार्ट
Solution:अपकृत्य विधि अभी भी विकसित हो रही है, इसलिए इसकी सर्वमान्य परिभाषा नहीं दी जा सकती है। प्रोफेसर गुड हार्ट ने कहा है कि न्यायालयों ने क्रमिक रूप से तथा कदाचित पुरातन अपकृत्य के लगभग अगोचर विस्तार से नवीन अपकृत्यों का सृजन किया है।

इस सामान्य सिद्धान्त का उत्कृष्ट गुण इस तथ्य पर जोर देना है कि अपकृत्य का नियम न तो खण्डित है न ही स्थिर । कानून एक परिधान की तरह है, जो समय के साथ बदलता है और परिवर्तन न केवल विचारों के बदलते तरीकों से बल्कि जीव की बढ़ती जटिलता से भी तय होता है।

96. निम्नलिखित किस क्रम में प्रो. विलियम फिशर ने बौद्धिक संपदा सिद्धान्त के चार विश्लेषणात्मक रूपरेखा की पहचान कीः

(1) व्यक्तित्व सिद्धान्त
(2) श्रम सिद्धान्त
(3) सामाजिक विन्यास सिद्धान्त
(4) उपयोगितावादी सिद्धान्त

नीचे  दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) (4), (2), (1), (3)
Solution:हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विलियम फिशर ने "बौद्धिक सम्पदा के सिद्धान्त" (Theories of Intellectual property) नामक पुस्तक में चार विश्लेषणात्मक निर्माणों की पहचान करते हैं।

ये हैं- (1) शुद्ध सामाजिक मूल्य को अधिकतम करने के लिए उपयोगितावादी (उपयोगितावादी सिद्धान्त)
(2) अपने बौद्धिक श्रम के फल का अधिकार (श्रम सिद्धान्त)
(3) कार्यों में व्यक्तित्व की सुरक्षा (व्यक्तित्व सिद्धान्त)
(4) एक न्यायसंगत और आकर्षक संस्कृति को बढ़ावा देना (सामाजिक विन्यास सिद्धान्त)

97. निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य हैं?

(1) वैश्विक न्यास इस पहलू की जांच करता है कि मनुष्यों के बीच किस प्रकार की न्याय-व्यवस्था मौजूद है।
(2) वैश्विक न्याय के क्षेत्र परीक्षण में प्राथमिक चिन्ता के रूप में व्यक्ति को रखा जाता है और इसमें इस बात पर जोर होता है कि किस प्रकार से उसे न्याय प्राप्त हो।
(3) Iवैश्विक न्याय के क्षेत्र के अंतर्गत, सिद्धान्तकार प्राथमिक रूप से राष्ट्रों के बीच न्याय को परिभाषित करते हैं।
(4) याय में राष्ट्र को प्राथमिक चिन्ता के विषय के रूप में लिया जाता है तथा राष्ट्रों के बीच न्याय पर बल दिया जाता है।

नीचे दिये गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल (1), (2) और (4)
Solution:क्सर वैश्विक और अन्तर्राष्ट्रीय न्याय के बीच अंतर किया जाता है। इन दो धारणाओं के बीच अंतर के मुख्य बिन्दु में उन संस्थाओं को स्पष्ट करना शामिल है जिनके बीच न्याय मांगा गया है।

अंतर्राष्ट्रीय न्याय में राष्ट्र या राज्य विषय की केन्द्रीय इकाई के रूप में लिया जाता है और राष्ट्रों या राज्यों के बीच न्याय केन्द्रित होता है।

वैश्विक न्याय के क्षेत्र में, इसके विपरीत, सिद्धान्तवादी मुख्य रूप से राज्यों या राष्ट्रों के बीच न्याय को परिभाषित करने के बजाय, वे इस बारे में पूछताछ करते हैं, कि मनुष्यों के बीच न्याय में क्या शामिल है। वैश्विक न्याय व्यक्तिगत मनुष्यों को प्राथमिक विषय के रूप में लेती है।

98. भारत सरकार की प्रदूषण में उपशमन संबंधी नीति के अंतर्गत वर्ष 1992 में कतिपय मार्गदर्शी सिद्धान्त अंगीकृत किए गए थे। कथित मार्गदर्शी सिद्धान्तों में निम्नलिखित कौन सा सिद्धान्त शामिल नहीं है-

Correct Answer: (c) सभी उद्देश्यों हेतु एन.जी.ओ. की भागीदारी
Solution:भारत सरकार की प्रदूषण में उपशमन सम्बन्धी नीति के अन्तर्गत वर्ष 1992 में कतिपय मार्गदर्शी सिद्धान्त अंगीकृत किया गया था। इसका उद्देश्य सभी स्तरों पर निर्णय लेने में पर्यावरणीय विचारों को एकीकृत करना है। इसे प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित मार्गदर्शी कदम है-

* स्रोत पर प्रदूषण को रोकना
* सर्वोत्तम उपलब्ध व्यावहारिक तकनीकी साधनों को प्रोत्साहित, विकसित और लागू करना।
* सुनिश्चित करें कि प्रदूषक प्रदूषण और नियंत्रण व्यवस्था (polluter pays) के लिए भुगतान करता है।
* अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों और नदी के हिस्सों पर सुरक्षा पर ध्यान केन्द्रित करना.
* निर्णय लेने में जनता को शामिल करना

99. निम्नलिखित पैरा को ध्यानपूर्वक पढ़ें और अनुवर्ती प्रश्नों के उत्तर दें :

की बाध्यकारिकारक शक्तियों को स्पष्ट करने में समस्या उत्पन्न करता है और इसके फलस्वरूप सभी विधियों की प्राधिकारिता पर प्रश्न चिह्न लग जाता है। कुछ लेखकों ने, अंतरराष्ट्रीय विधि की बाध्यकारी प्रवृत्ति प्राकृतिक विधि से व्युत्पत्तित होती है,

के द्वारा इस दर्शाने का प्रयास किया है। किन्तु हमने देखा है कि प्राकृतिक विधि नैतिकता से अधिक कुछ भी नहीं है और नैतिक नियमों की विद्यमानता सदृश विधिक नियमों की विद्यमानता की कोई गारंटी नहीं है।

इस प्रकार का तर्क अधिक से अधिक यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय विधि के नियम नैतिक रूप से बाध्यकारी हैं, न कि विधिक रूप से बाध्यकारी। तथापि बहुत से विधिक नियम नैतिक रूप से विरक्त है, नैतिकता में कतिपय नियम आदर्शवादिता से परे भी हो सकते हैं।

इसी प्रकार का मामला वसीयत, संविदा और हस्तातरण पत्र इत्यादि राष्ट्रीय विधियों संबंधी औपचारिकताओं के मामले में है, और अंतरराष्ट्रीय विधि में सीमाक्षेत्र का टाइटल और कार्यक्षेत्र की सीमा संबंधी कतिपय नियमों में भी है।

इस प्रकार के नियमों की बाध्यकारिता का शायद ही किसी नैतिक मानदण्ड पर गुणारोपित किया जा सकता है।

निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है : 

Correct Answer: (d) सकारात्मक विचारधारा के अनुसार संधियों और स्वयं सहायता को विधायन एवं विधिप्रवर्तन के रूप में रखा जा सकता है।
Solution:केल्सन के दृष्टिकोण से, कानून की विशिष्ट विशेषता यह है कि यह एक बल युक्त आदेश है जो विधि की शास्ति से जुड़ा हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में युद्ध और प्रतिशोध के रूप में शास्ति मौजूद है।

स्टार्क के अनुसार, अन्तर्राष्ट्रीय कानून के प्रथागत नियमों को संधियों और सम्मेलनों द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है। अन्तर्राष्ट्रीय विधि की संधिया बनाने की प्रक्रिया, राज्य विधान के समकक्ष है। इस पर अन्तर्राष्ट्रीय विधि अस्तित्व में है तथा अब यह कहना गलत है कि अन्तर्राष्ट्रीय प्रणाली में कोई विधान नहीं है।

100. निम्नलिखित में से सही कथन का चयन करें:

(1)  16 जून, 1987 को दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय देशों के विदेश सचिवों ने प्रत्यार्पण सम्बन्धी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
(2) भारत के साथ प्रत्यार्पण संबंधी हांगकोंग समझौते पर जून, 1980 के मध्य में हस्ताक्षर हुए।
(3) भारत तथा जर्मनी ने 27 जून, 2001 को प्रत्यार्पण संधि पर हस्ताक्षर किए।
(4) भारत तथा फ्रांस ने 24 जून, 2002 को प्रत्यार्पण संधि पर हस्ताक्षर किए।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (1), (3)
Solution:सही कथन निम्न है-

(1) 16 जून 1987 को दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय देशों के विदेश सचिवों ने प्रत्यर्पण संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
(2) भारत तथा जर्मनी ने 27 जून 2001 को प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए।