यू.जी.सी. एनटीए नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020/जून-2021 (विधि)

Total Questions: 100

21. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के उपबंधों (धाराओं) को कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित करें :

(1) संविदा करने के लिए कौन सक्षम होता है
(2)  विधि के प्रति त्रुटियों का प्रभाव
(3)  कौन-से करार संविदा हो होते हैं
(4) विवाह का अवरोधक करार शून्य है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (c) (3), (1), (2), (4)
Solution:भारतीय संविदा अधिनियम 1872 की धाराओं का कालक्रम के अनुसार व्यवस्था निम्न है-
(1) धारा 10- कौन से करार संविदायें हैं।
(2) धारा 11- कौन संविदा करने के लिए सक्षम है।
(3) धारा 21- विधि के बारे में भूल का प्रभाव ।
(4) धारा 26 - विवाह अवरोधक करार शून्य है।

22. भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के अंतर्गत गारंटी की संविदा में निम्नलिखित शामिल हैं :

Correct Answer: (b) तीन पक्षकार और तीन संविदाएँ
Solution:भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 126 में प्रत्याभूति की संविदा (Contract of guarantee) का उल्लेख है। "प्रत्याभूति की संविदा" किसी पर व्यक्ति द्वारा व्यतिक्रम की दशा में उसके वचन का पालन या उसके दायित्व का निर्वहन करने की संविदा है।

वह व्यक्ति जो प्रत्याभूति देता है "प्रतिभू (Surety)" कहलाता है। वह व्यक्ति, जिसके व्यतिक्रम के बारे में प्रत्याभूति दी जाती है, 'मूल ऋणी' (Principal debtor) कहलाता है,

और वह व्यक्ति जिसको प्रत्याभूति दी जाती है, 'लेनदार' (Creditor) कहलाता है। इस प्रकार प्रत्याभूति की संविदा में तीन पक्षकार तथा तीन विवक्षित संविदाएँ भी होती है-
1. ऋणदाता तथा ऋणी के मध्य,
2.ऋणदाता तथा प्रतिभू के मध्य,
3. ऋणी तथा प्रतिभू के मध्य।

23. निम्नलिखित में से सही कथन/कथनों का चयन करें:

(A)  'राजद्रोह' के अपराध को आई पी सी की धारा 124ए के अधीन परिभाषित किया गया है।
(B) उच्चतम न्यायालय ने केदार नाथ सिंह बनाम बिहार राज्य मामले में कहा कि IPC की धारा 124ए असंवैधानिक नहीं है।
(C)  राज्य (एन.सी.टी. ऑफ दिल्ली) बनाम नवजोत संधु अफसान गुरु राजद्रोह से संबंधित मामला है।
(d) मोहम्मद आरिफ बनाम दिल्ली राज्य को मुंबई आतंकी हमला केस के नाम से भी जाना जाता है
(E) भारत सरकार के विरूद्ध युद्ध छेड़ेना या छेड़ना का प्रयास करना या युद्ध का दुष्प्रेरण आई पी सी की धारा 121 के अधीन अपराध है।

नीचे दिये गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (A), (B), (E)
Solution:भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 124A में राजद्रोह को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार, जो कोई बोले गए या लिखे गये शब्दों द्वारा या संकेतों द्वारा या दृश्यरूपण द्वारा या अन्यथा भारत में विधि द्वारा स्थापित सरकार के प्रति घृणा या अवमान पैदा करेगा, या पैदा करने का प्रयत्न करेगा,

अप्रीति प्रदीप्त करेगा, या प्रदीप्त करने का प्रयत्न करेगा, वह आजीवन कारावास से, जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकेगा या तीन वर्ष तक के कारावास से जिसमें जुर्माना जोड़ा जा सकेगा, या जुर्माने से दण्डित किया जाएगा।

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 121 के अनुसार, जो कोई भारत सरकार के विरूद्ध युद्ध करेगा या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरण करेगा

वहवह मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा। केदारनाथ सिंह बनाम बिहार राज्य (1962 SC) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 124A को बनाए रखा तथा उसे असंवैधानिक घोषित करने से मना कर दिया।

लेकिन इस धारा की सीमा तय कर दी, न्यायालय ने कहा कि सिर्फ सरकार की आलोचना करना राजद्रोह नहीं माना जा सकता।

24. 'बलवा करने' की प्रमुख विशेषताओं में निम्नलिखित में से क्या शामिल है?

Correct Answer: (a) बल और हिंसा का प्रयोग
Solution:भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 146 में बल्वा (Rioting) को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार, जब कभी विधि विरूद्ध जमाव द्वारा या उसके किसी सदस्य द्वारा ऐसे जमाव के सामान्य उद्देश्य को अग्रसर करने में बल या हिंसा का प्रयोग किया जाता है,

तब ऐसे जमाव का हर सदस्य बल्वा करने के अपराध का दोषी होगा। धारा 147 के अनुसार, जो कोई बल्वा करने का दोषी होगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माना से, या दोनों से, दण्डित किया जाएगा।

25. निम्नलिखित कथन/कथनों में सही का चयन करें:

(A) आई पी सी की धारा 378 के अंतर्गत 'चोरी' को किसी व्यक्ति की सहमति के बिना बेईमानी से उसके कब्जे वाली चल सम्पत्ति के अपसारण के रूप में परिभाषित किया गया है।
(B) उद्दापन के अपराध में आई पी सी की धारा 384 के अधीन 3 वर्ष तक का दण्ड है।
(C) लूट' के अपराध को आईपीसी की धारा 391 के अधीन परिभाषित किया गया है।
(D)  डकैती' पाँच या इससे अधिक व्यक्तियों द्वारा की गई लूट है।
(E) डकैती' का दण्ड आई पी सी की धारा 392 के अधीन विहित है।

नीचे दिये गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल (A), (B), (D)
Solution::भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 378 में चोरी को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार, जो कोई किसी व्यक्ति के कब्जे में से, उस व्यक्ति की सम्मति के बिना कोई जंगम (चल) सम्पत्ति बेईमानी से ले लेने का आशय रखते हुए वह सम्पत्ति ऐसे लेने के लिए हटाता है, वह चोरी करता है।

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 383 में उद्दापन को परिभाषित किया गया है। धारा 384 में इसके लिये दण्ड का प्रावधान है, जिसके अनुसार, जो कोई उद्दापन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी,

या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा। भारतीय दण्ड संहिता. 1860 की धारा 391 में डकैती को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार, जब कि पाँच या अधिक व्यक्ति संयुक्त होकर लूट करते हैं या करने का प्रयत्न करते हैं या जहाँ कि वे व्यक्ति, जो संयुक्त होकर लूट करते हैं,

या करने का प्रयत्न करते हैं और वे व्यक्ति जो उपस्थित हैं और ऐसे लूट के किये जाने या ऐसे प्रयत्न में मदद करते हैं, कुल मिलाकर पाँच या अधिक है, तब हर व्यक्ति जो इस प्रकार लूट करता है, या उसका प्रयत्न करता है।

या उसमें मदद करता है, कहा जाता है कि वह "डकैती" करता है। डकैती के लिए दण्ड धारा 395 में प्रावधानित है। लूट को धारा-390 में परिभाषित तथा धारा 392 में दण्ड का प्रावधान किया गया है। अतः कथन (A), (B) तथा (D) सही है।

26. भारतीय दण्ड संहिता के निम्नलिखित किस प्रावधान के अन्तर्गत 'पीछा करना' (किसी स्त्री का उसकी अरूचि के विरूद्ध पीछा करना, जासूसी करना आदि) एक अपराध है?

Correct Answer: (d) धारा 354 D IPC
Solution:भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 354D में पीछा करने (Stalking) को परिभाषित किया गया है। धारा 354D (1) के अनुसार, ऐसा कोई पुरूष, जो- (1) किसी स्त्री का उससे व्यक्तिगत अन्योन्यक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए, उस स्त्री द्वारा स्पष्ट रूप से अनिच्छा उपदर्शित किए जाने के बावजूद, बारम्बार पीछा करता है

और सम्पर्क करता है या सम्पर्क करने का प्रयत्न करता है, अथवा (2) जो कोई किसी स्त्री द्वारा इण्टरनेट, ई-मेल या किसी अन्य प्ररूप की इलेक्ट्रॉनिक संसूचना का प्रयोग किए जाने को मानीटर करता है, पीछा करने का अपराध करता है।

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 354 में स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या बल प्रयोग करने सम्बन्धी प्रावधान तथा उसके लिए दण्ड का उल्लेख है। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 354A में लैंगिक उत्पीड़न और लैंगिक उत्पीड़न के लिए दण्ड का प्रावधान है।

354A (1) (iii) के अनुसार, किसी स्त्री की इच्छा के विरूद्ध बलात् अश्लील साहित्य दिखाने वाला पुरूष लैंगिक उत्पीड़न के अपराध का दोषी होगा। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 354B में, विवस्त्र करने के आशय से स्त्री पर हमला या आपराधिक बल के प्रयोग का उल्लेख एवं उसके लिए दण्ड का प्रावधान है।

27. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची-I (परिभाषाएं)सूची-II (भारतीय दंड संहिता की धारा)
A. एकांत कारावास(I) धारा 95
B. सात वर्ष से कम के बालक का कृत्य(II) धारा 93
C. सद्भावना में किया गया संवाद(III) धारा 73
D. आंशिक हानि पहुँचाने का कृत्य(IV) धारा 82

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) (A) (III), B-(IV), C-(II), D-(I)/र
Solution:भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 73 में एकान्त परिरोध से सम्बन्धित प्रावधान उल्लिखित है। एकान्त परिरोध की अवधि तीन माह से अधिक की नहीं हो सकती है। यदि कारावास की अवधि छह मास से अधिक न हो तो अधिकतम एक मास, यदि कारावास की अवधि छह मास से एक वर्ष तक की है

तो अधिकतम दो मास, यदि कारावास की अवधि एक वर्ष से अधिक है तो अधिकतम तीन मास तक का एकान्त परिरोध दिया जा सकता है। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 82 के अनुसार, कोई बात अपराध नहीं है, जो सात वर्ष से कम आयु के शिशु द्वारा की जाती है।

अंग्रेजी विधि में सात वर्ष से कम आयु के शिशु को 'अपराध करने में अक्षम' (doli incapax) माना जाता है। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 93 के अनुसार, सद्भावपूर्वक दी गई संसूचना उस अपहानि के कारण अपराध नहीं है,

जो उस व्यक्ति को जिसे वह दी गई है, यदि वह उस व्यक्ति के फायदे के लिए दी गई हो। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 95 के अनुसार, कोई बात इस कारण से अपराध नहीं है

कि उससे कोई अपहानि कारित होती है या कारित की जानी आशयित है या कारित होने की सम्भाव्यता ज्ञात है, यदि वह इतनी तुच्छ है कि मामूली समझ और स्वभाव वाला कोई व्यक्ति उसकी शिकायत न करेगा।

28. नीचे दो कथन दिए गए हैं। एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में :

अभिकथन A: शरीर के निजी सुरक्षा का अधिकार तेजाब फेकने या देने या तेजाब फेकने या देने के प्रयास की स्थिति में हमलावर की मृत्यु, जो कि इस आशंका का तर्कपूर्ण कारण हो सकता है कि खतरनाक चोट अन्य रूप से इस कृत्य के दुष्परिणाम होगा, पर लागू होता है।

कारण B:  भारत में लड़कियों और महिलाओं पर तेजाब फेकने के बढ़ते मामलों के दृष्टिगत 2013 के अधिनियम 13 द्वारा आई पी सी की धारा 100 के खण्ड 7 के अधीन उपबंध अंतः स्थापित किया गया था।

उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (a) A और R दोनों सही है R, A और की सही व्याख्या है।
Solution:भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 100 शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार को मृत्यु कारित करने तक विस्तारित करती है। धारा 100 के खण्ड सात को दण्ड विधि (संशोधन) अधिनियम, 2013 द्वारा अन्तः स्थापित (3-2-2013 से प्रभावी) किया गया है।

धारा 100 के खण्ड सात के अनुसार, शरीर की प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार, हमलावर की स्वेच्छया मृत्यु कारित करने या कोई अन्य अपहानि कारित करने तक है, यदि वह अपराध, तेजाब फेंकने या देने का कृत्य, या तेजाब फेंकने या देने का प्रयास करना

जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि ऐसे कृत्य के परिणामस्वरूप अन्यथा घोर उपहति कारित होगी।

2012 की दिल्ली गैंगरेप केश के बाद न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जे.एस. वर्मा की अध्यक्षता में महिला अपराधों के परिप्रेक्ष्य में एक समिति का गठन किया गया। इसी की सिफारिश पर दण्ड विधि (संशोधन) अधिनियम, 2013 पारित किया गया।

29. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची-Iसूची-II
A. सी.पी.सी. की धारा 13(I) विदेशी न्यायालय
B. सी.पी.सी. की धारा 2(5)(II) विदेशी निर्णयों के बारे में उपधारणा
C. सी.पी.सी. की धारा 2(6)(III) विदेशी निर्णय कब निश्चायक नहीं होगा
D. सी.पी.सी. की धारा 14(IV) विदेशी न्यायालयों का निर्णय

नीचे दिए गए विकल्पों में सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) (A)-(III), (B)-(I), (C)-(IV), D-(II)
Solution:सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के अनुसार सूची-I का सूची-II के साथ मिलान निम्न है-

(A) धारा 13 -विदेशी निर्णय कब निश्चायक नहीं होगा।
(B) धारा 2(5)- "विदेशी न्यायालय" से ऐसा न्यायालय अभिप्रेत है जो भारत के बाहर स्थित है और केन्द्रीय सरकार के प्राधिकार से न तो स्थापित किया गया है और न चालू रखा गया है।
(C) धारा 2(6) - "विदेशी निर्णय" से किसी विदेशी न्यायालय का निर्णय अभिप्रेत है।
(D) धारा 14 -विदेशी निर्णय के बारे में उपधारणा।

30. निम्नलिखित कथन/कथनों में सही का चयन करें :

(A) दुष्प्रेरण के अपराध को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 107 में परिभाषित किया गया है।
(B) किसी अपराध को कारित करने का करार षडयंत्र के अपराध का आवश्यक तत्व है।
(C)  भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120 के अंतर्गत आपराधिक षडयन्त्र का दण्ड दिया गया है।
(D) पुलिस अधीक्षक, सी बी आई/एस आई टी के माध्यम से तमिलनाडु राज्य बनाम नलिनी का मामला अपराध के दुष्प्रेरण से संबंधित है।
(E) भारत के बाहर किए गए अपराध का भारत में दुष्प्रेरण भारतीय दण्ड संहिता की धारा 108ए के अधीन दण्डनीय है।

नीचे दिये गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) केवल (A), (B), (E)
Solution:भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 107 में दुष्प्रेरण को परिभाषित किया गया है। निम्नलिखित रीति से दुष्प्रेरण गठित होता है-

(1) व्यक्ति को अपराध कारित करने के लिये उकसाने द्वारा, या
(2) अपराध कारित करने के लिये किसी षड्यन्त्र में सम्मिलित होने द्वारा, या
(3) अपराध कारित करने के लिये जानबूझ कर एक व्यक्ति की सहायता द्वारा ।

धारा 108A के अनुसार, वह व्यक्ति इस संहिता के अर्थ के अन्तर्गत अपराध का दुष्प्रेरण करता है, जो भारत से बाहर और उससे परे किसी ऐसे कार्य के किए जाने का भारत में दुष्प्रेरण करता है,

जो अपराध होगा, यदि भारत में किया जाए। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 120A में आपराधिक षड्यन्त्र को परिभाषित किया गया है। आपराधिक षड्यन्त्र के निम्नलिखित अवयव हैं-

(1) दो या अधिक व्यक्तियों के बीच एक समझौता जिन पर षड्यन्त्र करने का आरोप हो,
(2) समझौता; (i) कोई अवैध कार्य,या (ii) कोई कार्य जो अवैध नहीं है, अवैध साधनों द्वारा, करने या करवाने के लिये किया जाए।

आपराधिक षडयन्त्र के लिये दण्ड का प्रावधान धारा 120B के अन्तर्गत है। पुलिस अधीक्षक, सी.बी.आई एस.आई.टी. के माध्यम से तमिलनाडु राज्य बनाम नलिनी का मामला आपराधिक षडयंत्र से सम्बोधित है।