Solution::भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 378 में चोरी को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार, जो कोई किसी व्यक्ति के कब्जे में से, उस व्यक्ति की सम्मति के बिना कोई जंगम (चल) सम्पत्ति बेईमानी से ले लेने का आशय रखते हुए वह सम्पत्ति ऐसे लेने के लिए हटाता है, वह चोरी करता है।भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 383 में उद्दापन को परिभाषित किया गया है। धारा 384 में इसके लिये दण्ड का प्रावधान है, जिसके अनुसार, जो कोई उद्दापन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी,
या जुर्माने से, या दोनों से, दण्डित किया जायेगा। भारतीय दण्ड संहिता. 1860 की धारा 391 में डकैती को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार, जब कि पाँच या अधिक व्यक्ति संयुक्त होकर लूट करते हैं या करने का प्रयत्न करते हैं या जहाँ कि वे व्यक्ति, जो संयुक्त होकर लूट करते हैं,
या करने का प्रयत्न करते हैं और वे व्यक्ति जो उपस्थित हैं और ऐसे लूट के किये जाने या ऐसे प्रयत्न में मदद करते हैं, कुल मिलाकर पाँच या अधिक है, तब हर व्यक्ति जो इस प्रकार लूट करता है, या उसका प्रयत्न करता है।
या उसमें मदद करता है, कहा जाता है कि वह "डकैती" करता है। डकैती के लिए दण्ड धारा 395 में प्रावधानित है। लूट को धारा-390 में परिभाषित तथा धारा 392 में दण्ड का प्रावधान किया गया है। अतः कथन (A), (B) तथा (D) सही है।