यू.जी.सी. एनटीए नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020/जून-2021 (विधि)

Total Questions: 100

61. निम्नलिखित मामलों को उनके लिए गए निर्णय के वर्ष के आधार पर कालक्रमानुसार व्यवस्थित करें:-

(1) प्रीह व्हीयर मंदिर से संबंधित मामला
(2) फ्रन्टीयर विवाद (बुरकीन फासो बनाम माली)
(3) कैरोलिन मामला
(4) आर. वी. बनाम केयन
(5) चोरजो कारखाना (क्षतिपूर्ति) मामला

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) (3), (4), (5), (1), (2)
Solution:मामलो का निर्णय वर्ष के अनुसार कालक्रम निम्न है-

कैरोलिन टेस्ट- 1842
आर. बनाम केयन- 1878
चोरजो कारखाना (क्षतिपूर्ति) केश- 1927
प्रीह विहार मंदिर विवाद- 1961
बुरकिन फासो बनाम माली- 1986

62. निम्नलिखित में से किन मामलों में कर्त्तव्यों को किए गए कार्य के संबंध में विशिष्ट रूप से लागू नहीं किया जाता है?

(1) परिसीमा संविधि द्वारा वर्जित ऋण का पुनर्भुगतान करने की उधारकर्ता की जिम्मेदारी
(2) किसी उधारकर्ता की उसके द्वारा उधार लिए गए धन का पुनर्भुगतान करने की जिम्मेदारी
(3) किसी निन्दापत्र के छपजाने के पश्चात् गलत कार्य करने वाले को प्रकाशन से मना करना
(4) किसी गलत कार्य करने वाले व्यक्ति को उत्पात जारी रखने से मना करना

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल (1) और (3)
Solution:परिसीमा विधि द्वारा वर्जित ऋण के पुनभुर्गतान करने की उधारकर्ता (ऋणी) का दायित्व ऐसा दायित्व है जो किये गये कार्य के संबंध में विशिष्ट रूप से लागू नहीं किया जाता है

इस सम्बन्ध में भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 25 (3) के अन्तर्गत यह उपबन्ध किया गया है कि काल बाधित (Time barred debt) के भुगतान के लिए की गयी प्रतिज्ञा बिना प्रतिफल के विधिमान्य होगा जब वह लिखित एवं हस्ताक्षरित हो एवं वचन अभिव्यक्ति हो।

किसी निन्दा पत्र के प्रकाशन के पश्चात् गलत कार्य करने वाले को प्रकाशन से मना करना ऐसा कार्य है जो किये गये कार्य के संबंध में विशिष्ट से लागू नहीं किया जाताा है।

63. TRIPS एग्रीमेंट, 1995 के कोई भी प्रावधान वर्तमान दायित्वों का अवमूल्यन नहीं करेंगे, जो वर्णित हैं-

(1) पेरिस अभिसमय, 1967 में
(2) रोम अभिसमय, 1961 में
(3) बर्न अभिसमय, 1971 में
(4) जैव विविधता अभिसमय, 1992 में
(5) 1989 एकीकृत परिपथ संधि, 1989 में

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) केवल (1), (2), (3), (5)
Solution:TRIPS एग्रीमेंट, 1995 के प्रावधान पेरिस अभिसमय 1967, रोम अभिसमय 1961, बर्न अभिसमय, 1971 तथा एकीकृत परिपथ संधि (वाशिंगटन संधि), 1989 के दायित्वों के अधीन है।

अतः विकल्प (3) सही है। जबकि जैव विविधता कन्वेंशन 1992 का उद्देश्य जैविक विविधता के संरक्षण और सतत् उपयोग के लिए राष्ट्रीय रणनीति विकसित करना है। इस सम्मेलन के तीन मुख्य लक्ष्य हैः

1. जैव विविधता का संरक्षण,
2. इसके घटकों का सतत उपयोग, और
3. आनुवंशिक संसाधनों से होने वाले लाभों का उचित और न्यायसंगत बंटवारा।

64. सूची I के साथ सूची II का मिलान कीजिए:

सूची–Iसूची–II
A.  ग्रोथ ऑफ द लॉ(I)  एच केर्न्स
B. व्याखी ऑफ लीगल साइंस(II)  कार्डोजो
C. एन इंट्रोडक्शन टू द प्रिंसिपल्स ऑफ मोरल्स एंड लेजिस्लेशन(III) जॉन रॉल्स
D. द लॉ ऑफ पीपल्स(IV)  जेरेमी बेंथम

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) (A)-(II), (B)-(I), C-(IV), D-(III)
Solution:विविधताओं द्वारा रचित पुस्तकों का सही मिलान निम्न है-

(A) द ग्रोथ ऑफ द ला-बेंजामिन एन. कारडोजो
(B) द थ्योरी ऑफ लीगल साईंस-एच. केर्नस्
(C) एन इंट्रोडक्शन टू द प्रिंसपल्स ऑफ मोरल्स एण्ड लेजिस्लेशन-जेरमी बेंथम
(D) द ला ऑफ पीपल्स जॉन रॉल्स

65. क्रूरता, तलाक का एक आधार के संबंध में निम्नलिखित निर्णयों को कालानुक्रम ढंग से व्यस्थित करें :

(1) ए. जया चंद्रा बनाम अनिल कौर
(2) नवीन कोहली बनाम नीलू कोहली
(3) दास्ताने बनाम दास्ताने
(4) भगत बनाम भगत

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (c) (3), (4), (1), (2)
Solution:निर्णयों का सही कालानुक्रम निम्न है-

दास्ताने बनाम दास्ताने, SC 1973
भगत बनाम भगत, SC 1993
ए. जया चन्द्रा बनाम अनिल कौर, SC 2004
नवीन कोहली बनाम नीलू कोहली, SC 2006

66. नीचे दो कथन दिए गए हैं।

अभिकथन : उच्चतम न्यायालय द्वारा न्यायालय के प्रक्रिया तथा कार्यसंचालन को विनियमित करने हेतु नियम बनाने की शक्तियाँ भारतीय संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अधीन नहीं है।

कारण R: केवल एक निष्पक्ष और स्वतंत्र न्यायपालिका ही बिना किसी भय या पक्ष के नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा कर सकती है।

एक अभिकथन (Assertion A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (Reason R) के रूप में :

Correct Answer: (d) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
Solution:भारतीय संविधान के अनुच्छेद 145 (1) के अनुसार, संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उच्चतम न्यायालय समय-समय पर, राष्ट्रपति के अनुमोदन से न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया के, साधारणयतया, विनियमन के लिए नियम बना सकेगा।

स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका ही बिना किसी भय तथानागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा कर सकती है। अतः अभिकथन गलत है, जबकि कारण सही है।

67. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची–Iसूची–II
A.  उपेक्षा(I) रायलैंड बनाम फ्लेचर
B.  कड़ा दायित्व(II) एम. सी. मेहता बनाम भारत संघ
C. आर्थिक दायित्व(III)  ग्लासगो कॉर्पोरेशन बनाम मुइर
D. तंत्रिकीय आघात(IV) बोरहिल बनाम यंग

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) (A)-(III), (B)-(I), (C)-(II), (D)-(IV)
Solution:सूची-1 का सूची-IIके साथ सही मिलान निम्न है-

(A) उपेक्षा (Law of negligence) ग्लासगो कॉर्पोरेशन बनाम मुईर
(B) कठोर दायित्व (Strict liability)- रायलैण्ड बनाम फ्लैचर
(C) आत्यंतिक दायित्व (Principle of absolute liability) एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ
(D) तंत्रिकीय आघात बौरहिल बनाम यंग (लापरवाहीपूर्ण वाहन चलाने से सम्बन्धित वाद)

68. निम्नलिखित में से सही कथन का चयन करें :

(1) कनाडा में परिसंघ स्वैच्छिक संघ नहीं था अपितु अधिनियम द्वारा लागू किया गया था।
(2)  भारत में, 1935 के अधिनियम ने स्वायत्त ईकाइयां सृजत की तथा उनको एक परिसंघ में समेकित किया।
(3)  अमेरिकन यूनियन बहुत से संप्रभू राज्यों के बीच स्वैच्छिक करार के द्वारा सृजित किया गया।
(4) भारतीय संविधान को राज्यों द्वारा बनाया गया है न कि भारत के लोगों द्वारा।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल (1), (2) और (3)
Solution::कनाडा एक संघ है और यह सम्प्रभु राज्यों का संघ नहीं है। कनाडा में, शक्तियों का विभाजन संविधान अधिनियम, 1867 (मूल रूप में ब्रिटिश उत्तरी अमेरिका अधिनियम, 1867) में निर्धारित किया गया है,

जो कनाडा के संविधान में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। शक्तियों के विभाजन में कुछ संशोधन पिछली डेढ़ सदी में किए गए हैं, लेकिन 1867 का अधिनियम अभी भी संघीय और प्रांतीय विधायी क्षेत्राधिकारों के बुनियादी ढाँचे को निर्धारित करता है।

दी आर्टिकल ऑफ कन्फ्रेंडरेशन एण्ड परपेचुअल यूनियन, संयुक्त राज्य अमेरिका के 13 मूल राज्यों के बीच एक समझौता था। 15 नवम्बर, 1777 को दूसरी महाद्वीपीय क्राँग्रेस द्वारा बहस के बाद इसे मंजूरी दी गई

और राज्यों को अनुसमर्थन के लिए भेजा गया। भारत सरकार अधिनियम, 1935, 1919 के अधिनियम के बाद, उत्तरदायित्वपूर्ण शासन की स्थापना के मार्ग में महत्वपूर्ण कदम था।

|इसके द्वारा भारत में संघात्मक सरकार की स्थापना की गयी। 1935 के अधिनियम के मुख्य उपबन्ध निम्नलिखित थे-
1. संघात्मक सरकार की स्थापना।
2. केन्द्र में द्वैध शासन की स्थापना।
3. प्रान्तों में स्वायत्त शासन की स्थापना।
4. केन्द्रीय विधान मण्डल
5. प्रान्तीय विधान मण्डल
6. केन्द्र एवं प्रान्तों में शक्तियों का विभाजन
7. फेडरल न्यायालय की स्थापना

69. पाउण्ड के अनुसार, विधि है :

Correct Answer: (b) सामाजिक जरूरतों को पूरा करने वाली एक सामाजिक संस्था
Solution:रास्को पाउण्ड ने इहरिंग के विचारों के आधार पर समाजशास्त्रीय विधिशास्त्र के कार्यक्रम को क्रियात्मक स्वरूप दिया। इस कार्यक्रम को पाउण्ड ने 'सोशल इंजीनियरिंग' की संज्ञा दी।

पाउण्ड ने विधि द्वारा संरक्षित विभिन्न हितों को तीन श्रेणियों में विभाजित करते हुए कहा कि विधि का कार्य केवल यह है कि वह मनुष्यों के हितों की रक्षा करें। उनके अनुसार विधि एक ऐसा ज्ञान ओर अनुभव है जिसके माध्यम से सामाजिक नियंत्रण किया जा सकता है।

70. निम्नलिखित में से किस वाद में भारत के उच्चतम न्यायालय ने अंतर पीढ़ीगत साम्यता के महत्व को स्वीकार किया और यह निर्णय लिया कि कतिपय सरकारी विभाग का वन आधारित उद्योग स्थापित करने का अनुमोदन अविधिमान्य हो जाएगा?

Correct Answer: (a) हिमाचल प्रदेश राज्य बनाम गणेश वुड प्रोडक्टस
Solution:हिमाचल प्रदेश बनाम गणेश वुड प्रोडक्टस, (1996 SC) के मामले में गणेश वुड प्रोडक्ट्स द्वारा हिमाचल प्रदेश राज्य में कत्था कारखानों की स्थापना से इंकार करने के निर्णय के खिलाफ एक रिट याचिका दायर की गई थी।

न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि 1992 और 1993 के वर्षों के दौरान खैट पेड़ों का उपयोग करने वाले प्रत्येक प्रस्तावित कारखाने को राज्य के प्रभारी प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित किया गया था।

यह वन सम्पदा के संरक्षण, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के रख रखाव और सतत विकास और अन्तर पीढ़ीगत साम्यता के विचारों में शामिल सार्वजनिक हित के विपरीत था।

आखिरकार, वर्तमान पीढ़ी को सभी मौजूदा जंगलों को खत्म करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ भी नहीं छोड़ने का कोई अधिकार नहीं था।