यू.जी.सी. एनटीए नेट जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2020/जून-2021 (विधि)

Total Questions: 100

71. यह किसका कथन है कि "प्रत्येक व्यक्ति के पास स्वत्व होता है, उसे अपने स्वत्व अर्थात् अपने जीवन, स्वतंत्रता और सम्पदा की रक्षा करने का अधिकार है।

Correct Answer: (c) लॉक
Solution:हॉब्स की सामाजिक संविदा की आलोचना करते हुए लॉक ने कहा-"मनुष्य के आजीविका, स्वाधीनता, तथा सम्पत्ति के अधिकारों को उससे पृथक् नहीं किया जा सकता।

अतः ये अधिकार किसी भी संविदा द्वारा राज्य को अन्तरित नहीं किये जा सकते हैं।" वस्तुतः इन अधिकारों को सुरक्षित रखने की दृष्टि से ही वे अपनी संविदा करते हैं और राज्य की जन्म देते हैं।

72. निम्नलिखित पैरा को ध्यानपूर्वक पढ़ें और अनुवर्ती प्रश्नों के उत्तर दें:

अंतरराष्ट्रीय विधि को विधि के रूप में स्वीकार किया जाना इसकी बाध्यकारिक शक्तियों को स्पष्ट करने में समस्या उत्पन्न करता है और इसके फलस्वरूप सभी विधियों की प्राधिकारिता पर प्रश्न चिह्न लग जाता है।

कुछ लेखकों ने, अंतरराष्ट्रीय विधि की बाध्यकारी प्रवृत्ति प्राकृतिक विधि से व्युत्पत्तित होती है, के द्वारा इस दर्शाने का प्रयास |किया है। किन्तु हमने देखा है कि प्राकृतिक विधि नैतिकता से अधिक कुछ भी नहीं है

और नैतिक नियमों की विद्यमानता सदृश विधिक नियमों की विद्यमानता की कोई गारंटी नहीं है। इस प्रकार का तर्क अधिक से अधिक यह दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय विधि के नियम नैतिक रूप से बाध्यकारी हैं,

न कि विधिक रूप से बाध्यकारी। तथापि बहुत से विधिक नियम नैतिक रूप से विरक्त है, नैतिकता में कतिपय नियम आदर्शवादिता से परे भी हो सकते हैं।

इसी प्रकार का मामला वसीयत, संविदा और हस्तातरण पत्र इत्यादि राष्ट्रीय विधियों संबंधी औपचारिकताओं के मामले में है, और अंतरराष्ट्रीय विधि में सीमाक्षेत्र का टाइटल और कार्यक्षेत्र की सीमा संबंधी कतिपय नियमों में भी है।

इस प्रकार के नियमों की बाध्यकारिता का शायद ही किसी नैतिक मानदण्ड पर गुणारोपित किया जा सकता है।

ऑस्टिन के अनुसार, सकारात्मक विधि की निम्नलिखित विशेषताएँ है:

Correct Answer: (b) आदेश, संप्रभु, शस्ति
Solution:जॉन ऑस्टिन को विश्लेषणवादी शाखा (Analytical School) का प्रवर्तक माना गया है। ऑस्टिन ने विधि के प्रति विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाकर विधि की व्यवहारिक रूप दिलाया है।

सुस्पष्ट या निश्चययात्मक विधि (Positive Law) की परिभाषा देते हुए ऑस्टिन कहते हैं कि यह विधि ऐसे आदेशों का समूह है जो एक सम्प्रभुताधारी द्वारा किसी स्वतंत्र राजनयिक समाज में प्रजा के व्यवहारों को निर्धारित करने के लिए तैयार किये गये हैं।

अतः ऑस्टिन का निश्चित मत था कि विधि का आधार सम्प्रभुताधारी व्यक्ति या व्यक्तियों की शक्ति में निहित है। इसी सिद्धान्त को उन्होंने 'विधि का आदेशात्मक सिद्धान्त' (Imperative theory of Law) कहा है।

इस सिद्धान्त के मुख्य तत्त्व है :-
1. सम्प्रभु शक्ति (Soverign Power)
2. समादेश (Command)
3. शास्ति (Sanction)

73. यह मत किसके द्वारा प्रतिपादित है कि अंतरराष्ट्रीय विधि ऐसे आज्ञापत्रों का समूह है जो राज्यों को प्राकृतिक विधि द्वारा अधिदेशित किया जाता है?

Correct Answer: (b) वाट्टल
Solution:वाट्टल ने यह मत प्रतिपादित किया है कि अन्तर्राष्ट्रीय विधि ऐसे आज्ञापत्रों का समूह है जो राज्यों को प्राकृतिक विधि द्वारा अधिदेशित किया जाता है।

74. परक्राम्य लिखित पर पृष्ठांकन के उपरांत सुपुदर्गीः

(1)  लिखत में संपत्ति पृष्ठांकिती को हंस्तांतरित हो जाती है।
(2)  पृष्ठांकिती को और आगे के परक्रामण का अधिकार अंतरित स्थानांतरित हो जाता है।
(3) पृष्ठांकिती द्वारा आगे के परक्रामण के अधिकार को समाप्त या प्रतिबंधित कर सकता है।
(4) पृष्ठांकिती को पृष्ठांकन करने हेतु केवल अभिकर्ता बना सकता है, मात्र एक एंजेन्ट के रूप में समझता है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (d) (1), (2), (3) और (4)
Solution:परक्राम्य लिखित अधिनियम, 1881 की धारा 50 के अनुसार, परक्राम्य लिखत का पृष्ठांकन तत्पश्चात् परिदान होने पर, उसमें की सम्पत्ति पृष्ठांकिती को आगे के परक्रामण के अधिकार सहित अन्तरित कर देता है,

किन्तु पृष्ठांकन अभिव्यक्त शब्दों द्वारा ऐसा अधिकार निर्बन्धित या अपवर्जित कर सकेगा अथवा पृष्ठांकिती को लिखत का पृष्ठांकन करने का या पृष्ठांकक के लिए या किसी अन्य विनिर्दिष्ट व्यक्ति के लिए उसकी अन्तर्वस्तुएँ प्राप्त करने को केवल अभिकर्ता बना सकेगा।

75. हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के उपबंधों के अंतर्गतः

(1) पूर्वमृत पुत्री का पुत्र वर्ग-एक का उत्तराधिकारी है।
(2) पूर्वमृत पुत्र के पूर्वमृत पुत्र की विधवा वर्ग-दो की उत्तराधिकारी है।
(3)  माता की माता वर्ग-एक की उत्तराधिकारी है।
(4)  माता का पिता वर्ग-दो का उत्तराधिकारी है।

नीचे दिए गये विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल (1) और (4)
Solution:हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की अनुसूची के अनुसार, पूर्वमृत पुत्री का पुत्र तथा पूर्वमृत पुत्र के पूर्वमृत पुत्र की विधवा प्रथम वर्ग के उत्तराधिकारी है जबकि माता का पिता तथा माता की माता द्वितीय वर्ग के उत्तराधिकारी हैं।

76. हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के अंतर्गत विवाहविच्छेद मूलतः निम्नलिखित पर आधारित थाः

Correct Answer: (c) दोष सिद्धान्त (फालट थ्योरी)
Solution:हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के अनुसार जहाँ विवाह का एक पक्ष किसी निर्धारित वैवाहिक अपराध का दोषी है, वहाँ दूसरा पक्ष धारा 13 के तहत तलाक का अधिकार अर्जित कर लेता है।

आम तौर पर तलाक का पूरा ढाँचा दोष सिद्धान्त (Fault theory) पर बनाया गया है। विवाह विच्छेद से संबंधित विधि तीन सिद्धांत पर आधरित है-
(1) दोष सिद्धांत - धारा 13 (1)
(2) सहमति का सिद्धांत - धारा 13B
(3) ब्रेकडाउन थ्योरी- धारा 13(1A)

77. कार्य करने वाली सरकार और इसके परिणामस्वरूप प्रशासनिक प्रक्रिया में वृद्धि के अतिरिक्त संविधान में व्यापक नियंत्रण तंत्र का उपबंध किया गया है ताकि पानी तटबन्धों को तोड़ कर ऊपर न जा सकें। इसे संविधान के निम्नलिखित किस अनुच्छेद में सुनिश्चित किया गया है?

Correct Answer: (a) अनुच्छेद 32, 226, 227
Solution:एल. चन्द्रकुमार बनाम भारत संघ, (1997 SC) के मामले में सात जजों की संविधान पीठ ने कहा कि न्यायिक समीक्षा भारतीय संविधान का बुनियादा ढाँचा है। उच्चतम न्यायालय पर अनुच्छेद 32 के तहत और उच्च न्यायालय पर अनुच्छेद 226 और 227 के तहत प्रदत्त अधिकार क्षेत्र भी बुनियादी ढाँचे का हिस्सा है।

78. अनभिनिश्चित माल में माल की संपत्ति स्थानांतरित होती है -

Correct Answer: (a) जब माल अभिनिश्चित हो जाय
Solution:माल विक्रय अधिनियम, 1930 के धारा 18 के अनुसार, जहाँ कि संविदा अभिनिश्चित माल के विक्रय के लिए है, वहाँ यदि और जब तक माल अभिनिश्चित नहीं कर लिया जाता. माल में की कोई सम्पत्ति क्रेता को अन्तरित नहीं होगी।

79. दोषपूर्ण कार्य करते समय दोषकर्ता की मनः स्थिति होती है :

Correct Answer: (b) अपकृत्यों में दोष के आधार पर सुसंगत
Solution:अपकृत्य विधि में किसी व्यक्ति की मन स्थिति उसके दायित्व का पता लगाने के लिए प्रासंगिक है। अपराध के अधिकांश रूपों में मनः स्थिति एक आवश्यक तत्व है।

आम तौर पर, आपराधिक कानून के तहत, केवल एक व्यक्ति का कार्य उसके दायित्व को बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। मनः स्थिति दूसरे तरीके से भी प्रासंगिक हो सकता है।

यदि प्रतिवादी का आचरण इस हद तक निर्दोष है कि, किया गया कार्य एक अपरिहार्य दुर्घटना के कारण हुआ था, तो उसे दायित्व से मुक्त किया जा सकता है।

80. निम्नलिखित में से कौन सा कौन से कथन सही हैं?

(1) जब कोई देश पराजित हो जाता है अथवा विजयी कर लिया जाता है तो उसके सभी नागरिकों को विजेता देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है। इसे 'राष्ट्रीयता प्राप्त करने का अस्तित्वहीनता स्वरूप' कहा जाता है।
(2) जब कोई व्यक्ति एक राष्ट्र की राष्ट्रीयता के स्थान पर अन्य राष्ट्र की राष्ट्रीयता प्राप्त करता है तो इसे 'राष्ट्रीयता हानि का प्रतिस्थापित स्वरूप' कहा जाता है।
(3) पब्लिक ट्रस्टी' मामला राष्ट्रहीनता से संबंधित है।
(4) महासभा ने राष्ट्रहीनता में कमी संबंधी अभिसमय के समापन हेतु 1961 में एक अभिसमय आयोजित करने का निर्णय लिया।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) केवल (2) और (3)
Solution:अन्तर्राष्ट्रीय विधि में राष्ट्रीयता के अर्जन का एक ढंग अध्यर्पण या अस्तित्वहीनता स्वरूप भी है। इसके अनुसार जब कोई देश पराजित हो जाता है तो उसके सभी नगरिकों को विजेता देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है।

स्टोएक बनाम द पब्लिक ट्रस्टी (1921) (Stoeck V. The Public Trustee) में यह माना गया था कि यदि कोई व्यक्ति किसी राज्य का नागरिक नहीं है, तो उसे राष्ट्रहीनता कहा जाएगा। अतः कथन (B) तथा (C) सही है।