यू.जी.सी. एनटीए नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021/जून-2022 (विधि)

Total Questions: 100

91. निम्नांकित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और प्रश्न के उत्तर दीजिए :

अंतर्राष्ट्रीय विधि का आसंजक तत्व सर्वोच्च मूलभूत प्रतिमान या सिद्धांत पर आधारित है जिसे पैक्टा संट सर्वेडा कहा जाता है। इसका तात्पर्य यह है कि राज्यों द्वारा किए गए करारों की पुनरावृत्ति उनके सद्भाव के आधार पर की जाती है।

यह अंतर्राष्ट्रीय विधि की सुस्थापित और मान्य प्रथा है। अंतर्राष्ट्रीय विधि के प्रथागत सिद्धांत को अब कूटबद्ध (संहिताबद्ध) किया गया है और इसका उल्लेख वियना अभिसमय संधि विधि, 1969 के अनुच्छेद 26 में है।

पैक्टा संट सर्वेडा राज्यों की वास्तविक प्रक्रिया पर भी आधारित है। इसमें राज्यों द्वारा किए गए करार के महत्त्व पर बल दिया जाता है और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय विधि का आधार माना जाता है। एक मत है कि अंतर्राष्ट्रीय विधि की बंध्यकारी प्रबलता को केवल पैक्टा संट सर्वेडा के सिद्धांत पर ही आधारित होने की बात सत्य से परे है।

इसमें अंतर्राष्ट्रीय विधि के उन प्रथागत नियमों के बंध्यकारी प्रबलता की व्याख्या नहीं होती है जो राज्यों के मध्य किए गए करार पर आधारित नहीं हैं। इस बात की अनुमति कि अंतर्राष्ट्रीय प्रथागत विधि करारों पर निर्भर नहीं करती है

और यह कि पैक्टा संट सर्वेडा सिद्धांत अपने आप में प्रथागत विधि का नियम है, के फलस्वरूप मूलभूत प्रतिमान के नए आधार प्रोद्भूत हुए। केल्सन ने एक सूत्र अभिनिश्चित किया है जिसमें प्रयोग को तथ्य माना गया है जो अंतर्राष्ट्रीय विधि के शासन का उद्‌गम है- "राज्यों को अपने प्रथागत व्यवहार के अनुरूप ही व्यवहार करना चाहिए।"

इस गद्यांश में पैक्टा संट सर्वेडा को प्राथमिकता दी गई है या प्रथागत अंतर्राष्ट्रीय विधि को ?

 

Correct Answer: (b) प्रथागत अंतर्राष्ट्रीय विधि के सिद्धांत को अपेक्षाकृत अधिक महत्व दिया गया है।
Solution:पैक्टा संट सर्वेडा तथा अन्तरराष्ट्रीय प्रथा दोनों का अन्तराष्ट्रीय विधि में महत्वपूर्ण स्थान है। प्रस्तुत गद्यांश में प्रथागत अन्तराराष्ट्रीय विधि को प्राथमिकता दी गई है।

अन्तराष्ट्रीय प्रथा जो कि अन्तराष्ट्रीय विधि का प्रमुख स्त्रोत है का उल्लेख अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय की संविधि के अनु. 38 (1) (b) में संहिताबद्ध किया गया है।

92. पैक्टा संट सर्वेडा का शाब्दिक अर्थ हैः

Correct Answer: (d) करारों का निरपवादतः (अनिवार्य रूप से) अनुपालन किया जाना चाहिए।
Solution:पैक्टा संट सर्वेडा का शाब्दिक अर्थ है करारों का अनिवार्य रूप से अनुपालन किया जाना चाहिए। अन्तरराष्ट्रीय विधि सर्वोच्च सिद्धान्त पर आधारित है जिसे पैक्टा संट सर्वेडा कहा जाता है। जिसका तात्पर्य यह है कि राज्यों द्वारा किए गये करारों की पुनरावृत्ति उनके सद्भाव के आधार पर की जाती है।

93. केल्सन ने निम्नांकित में से किस पर बल दिया है?

Correct Answer: (b) राज्य का व्यवहार प्रथागत अंतर्राष्ट्रीय विधि के अनुरूप होना
Solution:केल्सन ने इस बात पर बल दिया कि राज्य का व्यवहार प्रथागत अतरराष्ट्रीय विधि के अनुरूप होना चाहिए।

94. पैक्टा संट सर्वेडा को संहिताबद्ध करने का उल्लेख वियना अभिसमय संधि विधि, 1969 के किस अनुच्छेद में है?

Correct Answer: (b) अनुच्छेद 26
Solution:पैक्टा संट सर्वेडा को संहिताबद्ध करने का उल्लेख वियना अभिसमय संधि विधि 1969 के अनुच्छेद 26 में है।

95. निम्नांकित में से कौन सा कथन सही है?

Correct Answer: (c) पैक्टा संट सर्वेडा निरपेक्ष सिद्धांत नहीं है क्योंकि इसमें अंतर्राष्ट्रीय विधि के प्रथागत नियमों के बंध्यकारी बल की व्याख्या नहीं की गई है।
Solution:पैक्टा संट सर्वेडा में अन्तरराष्ट्रीय विधि के उन प्रथागत नियमों के बाध्यकारी प्रबलता की व्याख्या नहीं होती है जो राज्यों के मध्य किए गए करार पर आधारित नही है। अतः पैक्टा संट सर्वेडा निरपेक्ष सिद्धान्त नहीं है क्योंकि इसमें अन्तरराष्ट्रीय विधि के प्रथागत नियमों के बाध्यकारी बल की व्याख्या नहीं की गई है।

96. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान में पढ़िए और प्रश्न के उत्तर दीजिए:

"इंग्लैंड में न्याय लोगों के पास पहुंचता है; भारत में लोग न्याय की याचना करते हैं (मुवक्किल) को अपनी सर्वोत्तम क्षमता का उपयोग करते हुए अस अनभिज्ञ न्यायाधिकरण का मार्ग ढूँढ़ना पड़ा था जब वह उस पुलिसकर्मी की अभिरक्षा में था

जिसकी विभीषिका की दया का वह पात्र था या अकेले। यदि वह अकेले जाता तो यह अधिक दूर नहीं था। न्यायालय के इर्द-गिर्द बहुत से छुटभैये वकीलों का तांता लगा हुआ था जिनके दलाल सड़कों पर और गांवों में फैले हुए थे।

उसमें न्यायालय परिसर से होकर न्याय-कक्ष तक पहुंचने के क्रम में इनमें से बहुत से दलालों ने उन्हें घेरा और उससे अनुनय किया कि प्रकरण (वाद) में सफलता प्राप्त करने का एक मात्र मौका यह है कि वह स्वयं को उनके हाथों में सौंप दे: वही बोले जो उससे ककहा जाए और उनके बताए गए अनुसार ही कितनी संदायगी करनी है

किस समय संदाय करना है, किसे संदाय करना है, इन सभी बाकों का पालन करे और इस बात के प्रति सचेत रहे कि उसे सत्य नहीं उद्भासित करना है; सत्य पर कभी भी विश्वास नहीं किया जाएगा। उन विचित्र प्रकरणों में कोई साझा आधार नहीं था।

जो कुछ भी एक पत्रकार की ओर से कहा जाता था, दूसरा पक्ष उससे इंकार करता था, सभी साक्षियों को सिखाया जाता था और भले ही सही हो या गलत दोनों पक्षकारों की ओर से प्रस्तुत मामला निरपवादतः अपमिश्रित था।

उदाहरण के तौर पर मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि कुछेक अपेक्षाकृत अधिक गंभीर मामलों के सिवाय किसी विवाद के घटनाक्रम न्यायालय के समक्ष नहीं थे। पक्षकार वस्तुतः पक्षकार नहीं थे बल्कि अन्य व्यक्तियों के हाथों की कठपुतली थे जो नेपथ्य में रहकर कार्यकारी के लिए संदायगी करते थे और इसके निमित्त निर्देश देते थे।

अधिकांश वास्तविक विवाद कभी भी न्यायालय तक नहीं लाए जाते थे बल्कि इन विवादों के न्यायालय तक आने से पूर्व ही अन्य तरीके से इनका निपटान हो जाता था। जबकि हम अपनी सर्वोत्तम क्षमता का प्रयोग करते हुए उन्हें न्याय देते थे जो हमारे समक्ष आते थे, हमें ज्ञात था कि भारी संख्या में पीड़ित व्यक्ति कभी भी हमारे पास नहीं आते थे।

बहुत से लोगों के मार्ग में कठिनाइयां उत्पन्न कर उन्हें न्यायालय पहुंचने से रोका जाता था, बहुत से लोग स्थानीय स्तर पर निरंकुश व्यक्ति के अप्रसन्न होने के भय से न्यायालय तक आने का साहस नहीं जुटा पाते थे। ये स्थानीय निरंकुश व्यक्ति चोट पहुंचाने की धमकी खतरा जिसे वह उन्हें शिकायत करने से रोकने के लिए उत्पन्न कर सकता था और साक्षियों का मुंह बंद करने के लिए इसका प्रयोग कर सकता था।

बहुत से पीड़ित व्यक्ति निम्नांकित में से किस कारण कभी भी न्यायालय नहीं आते थे।

Correct Answer: (a) उन्हें मार्गस्थ कठिनाइयां उत्पन्न कर न्यायालय पहुंचने से रोका जाता था।
Solution:भारत में बहुत से पीड़ित व्यक्ति कभी भी न्यायालय नहीं आते थे क्योंकि उन्हें न्यायालय परिसर से होकर न्याय कक्ष तक पहुंचने में मार्गस्थ कठिनाइयों से होकर गुजरना पड़ता था।

97. क्या अनभिज्ञ प्रकरणों में कोई उभयनिष्ठ आधार था या नहीं?

Correct Answer: (a) कोई उभयनिष्ठ आधार नहीं था
Solution:अनभिज्ञ प्रकरणो में कोई उभयनिष्ठ आधार नहीं था। जो कुछ भी एक पक्षकार की ओर से कहा जाता था, दूसरा पक्ष उसे इन्कार करता था। सभी साक्षियो को सिखाया जाता था और भले ही सही हो या गलत दोनों पक्षकारों की ओर से प्रस्तुत निरपवादतः अपमिश्रित था।

98. किसी मुवक्किल के सफलता प्राप्त करने के क्या आसार हैं? सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर चुनें

Correct Answer: (a) सफलता की संभावना तभी कार्य करती है जब मुवक्किल स्वयं को छुटभैये वकीलों और दलालों के हाथों में सौंप दे।
Solution::किसी मुवक्किल को सफलता प्राप्त करने की संभावना तभी कार्य करती है जब मुवक्किल स्वयं को छुटभैये वकीलों और दलालो के हाथों में सौंप दे।

99. /गद्यांश में उल्लेख है कि सभी वास्तविक विवाद कभी भी न्यायालय नहीं पहुंचते थे। इसके आलोक में सही उत्तर चुनिए

Correct Answer: (a) ज्यादातर वास्तविक विवाद न्यायालयों में कभी नहीं आ पाते थे
Solution:गद्यांश में उल्लेखित है कि सभी वास्तविक विवाद कभी भी न्यायालय नहीं पहुंचते थे, के आलोक में सही उत्तर यह है कि ज्यादातर वास्तविक विवाद न्यायालयों में कभी नहीं आ पाते थे।

100. भारत में और इंग्लैंड में न्याय प्राप्त करने के क्रम में मुवक्किल को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? निम्नांकित में से सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनेः

Correct Answer: (c) इंग्लैंड में न्याय लोगों के पास पहुंचता है। भारत में मुवक्किल को न्याय की याचना करने के लिए अनभिज्ञ अधिकरण का उपागम लेने में बहुत सी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।
Solution:इंग्लैंड में न्याय लोगों के पास पहुँचता है। भारत में मुवक्किल को न्याय की याचना करने के लिए अनभिज्ञ अधिकरण का उपागम लेने में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।