"इंग्लैंड में न्याय लोगों के पास पहुंचता है; भारत में लोग न्याय की याचना करते हैं (मुवक्किल) को अपनी सर्वोत्तम क्षमता का उपयोग करते हुए अस अनभिज्ञ न्यायाधिकरण का मार्ग ढूँढ़ना पड़ा था जब वह उस पुलिसकर्मी की अभिरक्षा में था
जिसकी विभीषिका की दया का वह पात्र था या अकेले। यदि वह अकेले जाता तो यह अधिक दूर नहीं था। न्यायालय के इर्द-गिर्द बहुत से छुटभैये वकीलों का तांता लगा हुआ था जिनके दलाल सड़कों पर और गांवों में फैले हुए थे।
उसमें न्यायालय परिसर से होकर न्याय-कक्ष तक पहुंचने के क्रम में इनमें से बहुत से दलालों ने उन्हें घेरा और उससे अनुनय किया कि प्रकरण (वाद) में सफलता प्राप्त करने का एक मात्र मौका यह है कि वह स्वयं को उनके हाथों में सौंप दे: वही बोले जो उससे ककहा जाए और उनके बताए गए अनुसार ही कितनी संदायगी करनी है
किस समय संदाय करना है, किसे संदाय करना है, इन सभी बाकों का पालन करे और इस बात के प्रति सचेत रहे कि उसे सत्य नहीं उद्भासित करना है; सत्य पर कभी भी विश्वास नहीं किया जाएगा। उन विचित्र प्रकरणों में कोई साझा आधार नहीं था।
जो कुछ भी एक पत्रकार की ओर से कहा जाता था, दूसरा पक्ष उससे इंकार करता था, सभी साक्षियों को सिखाया जाता था और भले ही सही हो या गलत दोनों पक्षकारों की ओर से प्रस्तुत मामला निरपवादतः अपमिश्रित था।
उदाहरण के तौर पर मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि कुछेक अपेक्षाकृत अधिक गंभीर मामलों के सिवाय किसी विवाद के घटनाक्रम न्यायालय के समक्ष नहीं थे। पक्षकार वस्तुतः पक्षकार नहीं थे बल्कि अन्य व्यक्तियों के हाथों की कठपुतली थे जो नेपथ्य में रहकर कार्यकारी के लिए संदायगी करते थे और इसके निमित्त निर्देश देते थे।
अधिकांश वास्तविक विवाद कभी भी न्यायालय तक नहीं लाए जाते थे बल्कि इन विवादों के न्यायालय तक आने से पूर्व ही अन्य तरीके से इनका निपटान हो जाता था। जबकि हम अपनी सर्वोत्तम क्षमता का प्रयोग करते हुए उन्हें न्याय देते थे जो हमारे समक्ष आते थे, हमें ज्ञात था कि भारी संख्या में पीड़ित व्यक्ति कभी भी हमारे पास नहीं आते थे।
बहुत से लोगों के मार्ग में कठिनाइयां उत्पन्न कर उन्हें न्यायालय पहुंचने से रोका जाता था, बहुत से लोग स्थानीय स्तर पर निरंकुश व्यक्ति के अप्रसन्न होने के भय से न्यायालय तक आने का साहस नहीं जुटा पाते थे। ये स्थानीय निरंकुश व्यक्ति चोट पहुंचाने की धमकी खतरा जिसे वह उन्हें शिकायत करने से रोकने के लिए उत्पन्न कर सकता था और साक्षियों का मुंह बंद करने के लिए इसका प्रयोग कर सकता था।
बहुत से पीड़ित व्यक्ति निम्नांकित में से किस कारण कभी भी न्यायालय नहीं आते थे।
Correct Answer: (a) उन्हें मार्गस्थ कठिनाइयां उत्पन्न कर न्यायालय पहुंचने से रोका जाता था।
Solution:भारत में बहुत से पीड़ित व्यक्ति कभी भी न्यायालय नहीं आते थे क्योंकि उन्हें न्यायालय परिसर से होकर न्याय कक्ष तक पहुंचने में मार्गस्थ कठिनाइयों से होकर गुजरना पड़ता था।