यू.जी.सी. एनटीए नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021/जून-2022 (विधि)

Total Questions: 100

11. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची–Iसूची–II
A.बॉन अभिसमयI. ओजोन परत का संरक्षण
B.  वियना अभिसमयII. खतरनाक अपशिष्ट और उनके निपटान संबंधी सीमा-पार संचलन का नियंत्रण
C.  बेसल अभिसमयIII.  जंगली जानवरों की प्रवासी प्रजातियों का संरक्षण
D.  रॉटरडम अभिसमयIV.  अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कतिपय खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों के लिए पूर्व-सूचित सहमति की प्रक्रिया

नीचे दिये गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) A - III, В - І, С- II, D - IV
Solution:सही सुमेलन निम्न है-
A. बोन अभिसमय (1979) - जंगली जानवरों की प्रवजक प्रजातियों का सरंक्षण
B. वियना अभिसमय (1985) - ओजोन परत का संरक्षण
C. बेसल अभिसमय (1989) खतरनाक अपशिष्ट और उनके निपटान संबंधी सीमा पार संचलन का नियंत्रण
D. रोटरडैम अभिसमय (1998) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मे कतिपय खतरनाक रसायनो और कीटनाशकों के लिए पूर्व-सूचित सहमति की प्रक्रिया।

12. नीचे दो कथन दिये गए हैं :

कथन-I: हिन्दू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के अंतर्गत एक निःसंतान सौतेली माँ निर्वाहभत्ते का दावा करने की हकदार है।

कथन-II: हिन्दू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 के अंतर्गत यदि पुत्र को गोद लिया जाता है तो दत्तक पिता या माता का हिन्दू पुत्र, पुत्र का पुत्र, पुत्र के पुत्र का पुत्र (चाहे विधिमान्य रक्त संबंध या गोद लेने के द्वारा) गोद लेने के समय पर नहीं होना

उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सही हैं।
Solution:हिन्दू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम 1950 की धारा 20(1) में प्रावधान किया गया है कि कोई हिन्दू अपने जीवनकाल के दौरान अपने वृद्ध या शिथिलांग जनकों का भरणपोषण करने के लिए आबद्ध है।

धारा 20 के स्पष्टीकरण के अनुसार जनक के अन्तर्गत निःसंतान सौतेली माता भी आती है। अधिनियम की धारा 11 में प्रावधान किया गया है कि यदि पुत्र को दत्तक लिया जाता है

तो दत्तक लेने वाले पिता या माता का कोई हिन्दू पुत्र, पुत्र का पुत्र या पुत्र के पुत्र का पुत्र (चाहे धर्मज रक्त नातेदारी से हो या दत्तक से) दत्तक लेते समय जीवित न हो।

13. दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन की किसके अंतर्गत उत्पत्ति हुई है?

Correct Answer: (e) (a&c)
Solution:दाम्पत्य अधिकारों के प्रत्यास्थापन की उत्पत्ति इंग्लिश तथा यहूदी विधि के अन्तर्गत हुई है तथा इसे भारतीय विधि में हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 9 के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया है।

14. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची–Iसूची–II
A.  एसिड के प्रयोग द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करनाI. 354-A, IPC
B.  एसिड स्वेच्छया फेंकना अथवा फेंकने का प्रयास करनाII. 326-B, IPC
C. यौन-उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न हेतु दंडIII. 354-D, IPC
D.  पीछा करनाIV. 326-A, IPC

नीचे दिये गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (a) A-IV, B - II, C-I, D - III
Solution:सूची-1 के साथ सूची-II का सही मिलान निम्न है-

A. एसिड के प्रयोग द्वारा स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना - धारा 326 A IPС.
B. एसिड स्वेच्छया फेंकना अथवा फेंकने का प्रयास करना धारा 326 В ІРС.
C. यौन उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न हेतु दण्ड धारा 354 A IPC.
D. पीछा करना धारा 354 D IPC.

15. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए :

सूची–Iसूची–II
A. इलेक्ट्रॉनिक चेक और विक्षिप्त चेक से प्रति अधिनियम का अनुप्रयोगI.  धारा 3ए
B. इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरII.  धारा 81ए
C.  सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखIII.  धारा 15
D.  इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से की गई संविदा की वैधताIV.धारा 10ए

नीचे दिये गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) A- II, B - I, C- III, D - IV
Solution:सूची-1 के साथ सूची-II का सही मिलान निम्न है-

A. इलेक्ट्रॉनिक चेक और विरुपित चेक से अधिनियम का लागू होना - धारा 81 A IT Act 2000
B. इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर धारा 3A IT Act 2000
C. सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख धारा 14 IT Act 2000
D. इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से की गई संविदा की वैधता धारा 10A IT Act 2000

16. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन I : किसी उच्च न्यायालय में भारत के प्रादेशिक क्षेत्र में किसी आपराधिक कार्यवाही में एक निर्णय, अंतिम आदेश या सजा पर सर्वोच्च न्यायालयों में अपील रहेगी, यदि उच्चन्यायालय ने अपील पर किसी आरोपी व्यक्ति को दोषमुक्त करने के आदेश को उलट दिया है और उसे मृत्यु दंड दिया है।

कथन II: किसी उच्च न्यायालय में भारत के प्रादेशिक क्षेत्र में किसी आपराधिक कार्यवाही में एक निर्णय, अंतिम आदेश या सजा पर सर्वोच्च न्यायालय में अपील रहेगी, यदि उच्च न्यायालय ने अपने प्राधिकार के अधीनस्थ किसी न्यायालय से किसी मामले को हटा दिया है और ऐसी सुनवाई में आरोपी व्यक्ति को उसके किए गए कृत्य के लिए मृत्यु दंड दिया है।

उपयुक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सत्य हैं।
Solution:संविधान के अनु. 134 (1) में प्रावधान किया गया है कि भारत के राज्य क्षेत्र में उच्च न्यायालय की आपराधिक कार्यवाही में किसी भी निर्णय, अंतिम आदेश या सजा से उच्चतम न्यायालय में अपील होगी

यदि उच्च न्यायालय ने अपील पर एक आरोपी व्यक्ति को बरी करने के आदेश को उलट दिया है और उसे मौत की सजा सुनाई है या अपने अधिकार के अधीनस्थ किसी न्यायालय से किसी मामले को विचारण के लिए वापस ले लिया है और इस तरह के परीक्षण में अभियुक्त व्यक्ति को दोषी ठहराया है और उसे मृत्युदण्ड दिया है।

17. निम्नलिखित मामलों (केसेज) को कालक्रमानुसार (पूर्व से आरंभ करते हुए नवीनतम तक) व्यवस्थित कीजिए:

(A) राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम यू.ओ.आई
(B) नाज फाउंडेशन बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार
(C) नवतेज सिंह जोहर बनाम यू.ओ.आई.
(D) सुरेश कौशल बनाम नाज़ फाउंडेशन
(E) नवतेज सिंह जोहर और सुरेश कौशल के फैसले एक ही वर्ष में आए

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (c) B, D, А, C
Solution:मामलों का कालानुक्रम निम्न है-

A.नाज फाउंडेशन बनाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार (2009 SC)
B.सुरेश कौशल बनाम नाज फाउंडेशन (2013 SC)
C. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ (2013 SC)
D. नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ (2016 SC)

18. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 (5) के अन्तर्गत, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का अधिकार क्षेत्र है:-

Correct Answer: (d) न तो उसके पास जाति प्रमाण पत्र को जारी करने, रद्द करने का अधिकार है और न ही जाति प्रमाण पत्र की वैधता विनिश्चय करने का अधिकार है।
Solution::भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की व्यवस्था की गई है।

अनुच्छेद 338 (5) के तहत आयोग के कार्यों का वर्णन किया गया है, जिसके अंतर्गत आयोग को जाति प्रमाण पत्र को जारी करने, रद्द करने या उसकी वैधता की जांच करने की शक्ति नहीं है।

19. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए:

सूची–I (प्रावधान)सूची–II (धारा)
A. शून्य विवाहI.  हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा-27
B.  पारस्परिक सहमति से विवाह-विच्छेदII.  हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा-24
C.  मामले के लंबित होने के दौरान भरण-पोषण भत्ताIII.  हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा-13 B
D.  सम्पत्ति का निपटाराIV.  हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा-11

नीचे दिये गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) A- IV, B - III, C- II, D - I
Solution:सूची-1 के साथ सूची-IIका मिलान निम्न है-

A. शून्य विवाह धारा 11, हिन्दू विवाह अधिनियम 1955
B. पारस्परिक सहमति से विवाह विच्छेद धारा 13B, हिन्दू विवाह अधिनियम 1955
C. मामले के लंबित रहने के दौरान भरण-पोषण धारा 24, हिन्दू विवाह अधिनियम 1955
D. सम्पत्ति का निपटारा धारा 27, हिन्दू विवाह अधिनियम 1955

20. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन 1: सभी मानव विधिक व्यक्ति नहीं हैं।
" कथन II : राज्य विधिक व्यक्ति है

उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सही हैं
Solution:सभी मानव विधिक व्यक्ति नहीं हैं। जैसे कि एक साधु संन्यासी को मानव होते हुए भी विधिक व्यक्ति नहीं माना जाता क्योंकि ये विधिक अधिकार एवं कर्तव्य को धारण नहीं करते है। संविधान के अनु. 300 के अलावा अन्य प्रावधान भी हैं जो यह स्पष्ट करते हैं कि संघ और राज्य कानूनी (विधिक) व्यक्ति हैं।