यू.जी.सी. एनटीए नेट /जेआरएफ परीक्षा, दिसम्बर 2021/जून-2022 (विधि)

Total Questions: 71

61. पैक्टा टेरटिस नेक नोसेंट नेक प्रोजंट का तात्पर्य है:

Correct Answer: (c) केवल अंतर्राष्ट्रीय संधि के पक्षकार ही इससे आबद्ध होते हैं
Solution:पैक्टा टेरटिस नेक नोसेंट नेक प्रोजंट का अर्थ है कि एक संधि पक्षकारों और केवल पक्षकारों पर आबद्धकर होती है। इस प्रकार एक संधि की बाध्यकारी शक्ति केवल सहमति देने वाले पक्षकारों तक ही सीमित होती है। वियना कन्वेंशन के अनु. 34 के तहत इस सिद्धान्त को सम्मिलित किया गया है। पैक्टा टेरटिस नेक नोसेंट नेक प्रोजंट से सम्बन्धित मामला उत्तरी सागर महाद्वीपीय शेल्फ केस।

62. गैर-अंतर्राष्ट्रीय विशेषता वाले सैन्य संघर्षों से संबंधित कानून किस प्रोटोकॉल द्वारा शासित होता है?

Correct Answer: (b) जेनेवा अभिसमय के सामान्य अनुच्छेद 3 के अतिरिक्त प्रोटोकॉल II, 1977 से
Solution:गैर-अन्तर्राष्ट्रीय विशेषता वाले सैन्य संघर्षों से सम्बन्धित कानून जेनेवा अभिसमय के सामान्य अनुच्छेद के अतिरिक्त प्रोटोकाल II, 1977 से शासित होता है।

63. पर्यावरण और विकास पर रिओ घोषणापत्र (1992) के निम्नलिखित सिद्धांतों को पढ़ें और दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन करें:

(A) सिद्धांत1: मनुष्य सतत विकास के केंद्र में हैं।
(B) सिद्धांत -16: राज्यों द्वारा अपनी क्षमता के अनुसार पर्यावरण के संरक्षण के लिए एहतियाती उपागम का व्यापक रूप से अनुप्रयोग किया जाएगा।
(C) सिद्धांत-14: उन प्रस्तावित कार्यकलापों के लिए पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा, जिनका पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है।
(D) सिद्धांत-20: महिलाओं की पर्यावरण प्रबंधन और विकास में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका है।
(E) सिद्धांत-24: शांति, विकास और पर्यावरणीय संरक्षण अंतर निर्भर तथा अविभाज्य हैं।

नीचे दिये गये विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (a) केवल Aऔर D
Solution:पर्यावरण एव विकास पर रियो घोषणा 1992 संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विकास कार्यक्रम में निर्मित एक दस्तावेज है जिसे अनौपचारिक रूप में पृथ्वी सम्मेलन के रूप में जाना जाता है।

रियो घोषणा में 27 सिद्धांत शामिल हैं जिनका उद्देश्य भविष्य के सतत् विकास में देशों का मार्गदर्शन करना है। रियो घोषणापत्र के सिद्धान्त निम्न है-

सिद्धांत 1 - मनुष्य सतत् विकास के केन्द्र में है।
सिद्धांत 2 - राज्यों को अपने स्वयं के पर्यावरण और विकासात्मक नीतियों के अनुसार संसाधनों के दोहन का संप्रभु अधिकार है।
सिद्धांत 3 - विकास के अधिकार को वर्तमान एवं भावी  पीढ़ियों की आवश्यकताओं के अनुसार समान रूप से पूरा किया जाना।
सिद्धांत 4 - सतत् विकास को प्राप्त करने के लिए पर्यावरण संरक्षण विकास प्रक्रिया एक अभिन्न अंग होगा।
सिद्धांत 5 - सभी राज्य सतत विकास के लिए गरीबी उन्मूलन  कार्यक्रम में सहयोग करेंगे।
सिद्धांत 6 - विकासशील देशों द्वारा कमजोर देशों की जरूरतों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
सिद्धांत 7 - पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और अखंडता का संरक्षण
सिद्धांत 8 - सभी लोगों के लिए सतत् विकास और जीवन की उच्च गुणवत्ता प्राप्त करना।
सिद्धांत 9 - राज्यों को वैज्ञानिक और तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान ।
सिद्धांत 10 - नागरिकों की भागीदारी से पर्यावरणीय मुद्दों का संभाला जाना।
सिद्धांत 11 - राज्य प्रभावी पर्यावरणीय कानून बनाएंगे।
सिद्धांत 12 - राज्यों द्वारा खुली अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली को बढ़ावा देना।
सिद्धांत 13 - राज्य प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षति के पीड़ितों के मुआवजे के संबंध में कानून बनाए।
सिद्धांत 14 - राज्य किसी भी गतिविधि या पदार्थों के स्थानांतरण को रोके।
सिद्धांत 15 - पर्यावरण रक्षा संबंधी दृष्टिकोण को राज्यों द्वारा लागू किया जाए।
सिद्धांत 16 - राष्ट्रीय प्राधिकरणों द्वारा आर्थिक साधनों के उपयोग को बढ़ावा देना।सिद्धांत 17 - पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन एक राष्ट्रीय साधन के रूप में किया
जाएगा।
सिद्धांत 18 - राज्य तुरंत अन्य राज्यों को प्राकृतिक आपदा के बारे में सूचित करेंगे
सिद्धांत 19 - राज्य पर्यावरणीय महत्व की गतिविधियों को अन्य राज्यों को जानकारी देंगे।
सिद्धांत 20 - पर्यावरण प्रबंधन और विकास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सिद्धांत 21 - सतत विकास प्राप्त करने और सभी के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने हेतु वैश्विक साझेदारी।
सिद्धांत 22 - स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों का पर्यावरण प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका है।
सिद्धांत 23 - दमन, वर्चस्व और व्यवसाय के अधीन लोगों के पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा की जाएगी।
सिद्धांत 24 - युद्ध स्वाभाविक रूप से सतत् विकास का विनाशकारी कारण है।
सिद्धांत 25 - शांति, विकास और पर्यावरण संरक्षण अन्योन्यश्रित और अविभाज्य है।
सिद्धांत 26 - राज्य अपने सभी पर्यावरणीय विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार शांतिपूर्वक तरीके से हल करेंगे।
सिद्धांत 27 - राज्य और लोग इस घोषणा के सिद्धांतों की पूर्ति और सतत् विकास मे सहयोग करेंगे।

64. निम्नलिखित में से किसका एक ट्रेड मार्क के रूप में पंजीकरण किया जा सकता है

Correct Answer: (b) विभेदकारी चिन्ह
Solution:एक विभेदकारी चिन्ह को ट्रेड मार्क के रूप में पंजीकरण किया जा सकता है। ट्रेड मार्क एक्ट 1999 की धारा 2(2b) के अनुसार, ट्रेड मार्क से ऐसा मार्क अभिप्रेत है जो रूपित (विभेद) किए जाने मे समर्थ है

और जो एक व्यक्ति के माल या सेवाओं को अन्य दूसरे व्यक्तियों के माल या सेवाओं से सुभिन्न करने में समर्थ है और इसके अंतर्गत माल का आकार, उसकी पैकेजिंग और रंगों का संयोजन भी आ सकेगा।

65. नीचे दो कथन दिए गए हैं :

कथन-I : एक परक्राम्य लिखत का अर्थ एक प्रोमिसरी नोट विनिमय पत्र या चेक है, जो आदेश या धारक को देय होता है
कथन -II: धारक का अर्थ किसी उस व्यक्ति से है, जो प्रतिफलेन के लिए एक प्रोमिसरी नोट, विनिमय-पत्र या चेक का कब्जा रखने वाला बनता है, बशर्ते कि धारक, पाने वाले या पृष्ठांकिती को देय हो । उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (c) कथन I सत्य है लेकिन कथन II असत्य है।
Solution:परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 की धारा 13 के अनुसार परक्राम्य लिखत से या तो आदेशानुसार या वाहक को देय वचन पत्र, विनिमय पत्र या चेक अभिप्रेत है।

धारा 8 के अनुसार, वचन-पत्र, विनिमय पत्र या चेक के 'धारक' से कोई भी ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो स्वयं अपने नाम से उस पर कब्जा रखने का और उस पर शोध्य रकम उसके पक्षकारों से प्राप्त करने या वसूल करने का हकदार है।

66. किसी एक वस्तु पर सर्वांगीण नियंत्रण को किसके द्वारा परिभाषित किया गया है?

Correct Answer: (c) होलैंड
Solution:हालैण्ड ने स्वामित्व को एक वस्तु पर सर्वांगीण नियंत्रण के रूप में परिभाषित किया है। इनके अनुसार स्वामित्व न केवल भौतिक वस्तु पर बल्कि गैर-भौतिक वस्तु पर भी प्रयोग किया जा सकता है।

67. सूची-I के साथ सूची-II का मिलान कीजिए :

सूची–Iसूची–II
A. रामसर अभिसमयI. 1992
B.  जैव विविधता पर अभिसमयII. 1994
C. मिनामाटा अभिसमयIII. 1991
D. मरुभूमि से संघर्ष के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिसमयIV. 2013
Correct Answer: (e) *
Solution:सूची-1 का सूची-11 के साथ सही मिलान निम्न है-
(a) प्रथम रामसर अभिसमय 1971
(b) जैव विविधता पर अभिसमय - 1992
(c) मिनामाता अभिसमय - 2013
(d) अपसरण से संघर्ष के लिए संयुक्त राष्ट्र अभिसमय - 1994 नोट- NTA ने इस प्रश्न को हटा दिया है।

68. नीचे दो कथन दिए गए हैं:

कथन I : न्यायिक समीक्षा के लिए अविवेकी (इरेशनेलिटी) का अर्थ निर्णय तर्क की अवज्ञा में इतनी अन्यायपूर्ण है या नैतिक मानकों पर स्वीकार की जाती है कि कोई भी समझदार व्यक्ति इस प्रकार के निर्णय पर पहुँचा हुआ होता।

कथन II : न्यायिक समीक्षा के लिए अनुचित (अनरिजनेबलनेस) का अर्थ या तो तथ्य प्राधिकरण द्वारा निकाले गए निष्कर्ष के लिए आवश्यक नहीं है या निर्णय उसके परिचालन में आंशिक और असमान है।

उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नांकित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए

Correct Answer: (a) कथन I और II दोनों सही हैं
Solution:न्यायिक समीक्षा हेतु अविवेकीय का अर्थ निर्णय तर्क की अवज्ञा में इतना अन्यायपूर्ण है या नैतिक मानकों पर स्वीकार की जाती है कि कोई भी समझदार व्यक्ति इस प्रकार के निर्णय पर पहुँचा होता है।

न्यायिक समीक्षा हेतु अनुचित का अर्थ या तो तथ्य प्राधिकरण द्वारा निकाले गये निष्कर्ष के लिए आवश्यक नहीं है या उसके परिचालन में आंशिक और असमान है।

69. "विधिक व्यक्ति" मानव के अलावा कोई विषयवस्तु है, जिसे विधि व्यक्तित्व का स्वरूप देती है। उपरोक्त कथन किसका है:

Correct Answer: (a) सालमंड
Solution:सालमंड ने अभिकथित किया कि विधिक व्यक्ति मानव के अतिरिक्त कोई विषयवस्तु है जिसे विधि व्यक्तित्व का स्वरूप देती है।

70. निम्नलिखित में से किस मामले में विधिक सहायता को एक मौलिक अधिकार के रूप में माना गया था?

Correct Answer: (b) एम.एच. होस्कोट केस
Solution:एम. एच. होस्कोट बनाम महाराष्ट्र राज्य (1978 SC) के मामले में विधिक सहायता को एक मौलिक अधिकार के रूप में माना गया।