कथन-I: सी के बैंक में एक प्रबंधक के रूप में ए, बी के आचरण के लिए सी का प्रतिभू (श्योरिटी) बनता है। इसके बाद, ए की सहमति के बिना बी और सी संविदा करते हैं कि बी के वेतन में वृद्धि की जाएगी और वह ओवरड्राफ्ट पर हानि के लिए एक चौथाई दायी होगा। बी एक ग्राहक को अध्यादान (अधिक धनराशि लेना) करता है और बैंक को एक धनराशि की हानि होती है।
कथन - II: ए हानि की पूर्ति के लिए दायी है क्योंकि वह बी के आचरण के लिए सी का प्रतिभू है।
उपर्युक्त कथनों के आलोक में निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
Correct Answer: (c) कथन I सत्य हैं, लेकिन कथन II असत्य हैं
Solution::भारतीय संविदा अधिनियम 1872 की धारा 133 के दृष्टांत (a) के अनुसार कथन-1 सही है परन्तु कथन-II गलत है। धारा 133 मे उपबंध किया गया है कि जो भी फेरफार मूल ऋणी और लेनदार के बीच की संविदा के निबन्धनों में प्रतिभू की सम्मति के बिना किया जाये, वह उस फेरफार के पश्चातवर्ती संव्यवहारों के बारे में प्रतिभू का उन्मोचन कर देता है।