यू.जी.सी./एनटीए नेट जेआरएफ परीक्षा, दिस. 2020-जून 2021 (मनोविज्ञान)

Total Questions: 100

1. त्वचा, आँखों और कानों से संवेदी सूचनाओं से संचार को केंद्रीय स्नायु तंत्र तक ले जाने वाले स्नायु निम्नलिखित में कौन से है?

Correct Answer: (b) अभिवाही
Solution:

त्वचा आँखों और कानों से संवेदी सूचनाओं के संचार को केन्द्रीय स्नायु तन्त्र तक ले जाने वाले अभिवाही है क्यों कि इनमें संवेदी तन्तु होते हैं। ये तन्त्रिकाएँ आवेगों के संवेद ग्राही अंगों (संवेदी अंगों) में मस्तिष्क तथा मेरू रज्जु तक ले जाती है।

2. किसी महिला को पता चलता है कि कंपनी में उच्च पद पर प्रोन्नति से वंचित किया गया है, वह शीघ्र ही अपने बॉस के कार्यालय में जाती है और क्रोध प्रदर्शित करती है; यह निम्नलिखित में से किसका उदाहरण है?

Correct Answer: (d) प्रतिशमन
Solution:

प्रतिशमन एक रक्षा तन्त्र है जो अस्वीकार आवेगों को अधिक अनुकूल रूप से संमालने के बजाय विकास के पहले चरण में अस्थायी या दीर्घकालिक रूप से वापस ले जाता है।

3. फेरोमोन्स के संबंध में निम्नलिखित में से क्या सही है?

Correct Answer: (d) व्यक्ति द्वारा पर्यावरण में उत्सर्जित रासायलिक पदार्थ जिनसे दूसरों का व्यवहार प्रभावित होता है।
Solution:

फेरोमोन्स, व्यक्ति द्वारा पर्यावरण में उत्सर्जित रासायनिक पदार्थ जिनसे दूसरों का व्यवहार प्रभावित होता है। अर्थात फेरोमोन्स एक रासायनिक पदार्थ होता हे जिसका मकसद उन पौधों को कीड़ों से बचाना है, जिनकी बाजार में बहुत अधिक कीमत होती है।

4. उच्च प्रबलता और तीव्र आवृत्ति वाले उद्दीपन के पूर्व अंतर्ग्रथी तंत्रिका कोशिकाओं के क्रियाशीलन के पश्चात् होने वाली अंतर्ग्रथी संचरण की स्थायी सुसाध्यता का वर्णन निम्नलिखित में से कौन सा करता है?

Correct Answer: (d) दीर्घावधिक प्रभावकरण
Solution:

दीर्घावधिक प्रभावकरण एक ऐसी प्रक्रिया है, जो उच्च प्रबलता और दीर्घ आवृत्ति वाले उद्दीपन से पूर्व अंतग्रन्थी तन्त्रिका कोशिकाओं के क्रिया शीलन के सुसा धाता का वर्णन करता है।

5. यदि किसी व्यक्ति की विशिष्ट सामाजिक कोटि उस पुरुष या महिला को रूढ़धारणा अपनाने के लिए सहज रूप से प्रवृत्त करता है तो इसे कहा जाता है:

Correct Answer: (a) सांकेतिक एकीकरण
Solution:

यदि किसी व्यक्ति की विशिष्ट सामाजिक कोटि उस पुरूष या महिला को रूढधारणा अपनाने के लिए सहज रूप से प्रवृत्त करता है, तो उसे सांकेतिक एकीकरण कहा जाता है

6. निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?

Correct Answer: (b) तृतीयक निवारण एसी प्रक्रिया है, जो समस्या को रोकने अथवा विपर्यित करने के उद्देश्य से किसी बीमारी अथवा चोट की पहचान करने और उसका उपचार करने हेतु की जाती है।
Solution:

निवारण प्रायः तीन प्रकार के होते है- प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक option - (b) में तृतीयक निवारण नहीं है क्योंकि इसमें केवल बिमारी अथवा चोट का उपचार ही किया जाता है न कि उसकी पहचाल करता है पहचान प्राथमिक निवारण करता है।

7. वर्थीमर द्वारा बताई गयी सोचने के टाईप 'a' प्रक्रिया में निम्नलिखित में से कौन से शामिल है?

Correct Answer: (a) समूहीकरण और पुनर्गठन
Solution:

वर्थीमर द्वारा बताई गई सोचने के टाईप 'a' प्रक्रिया में सामूहिकरण और पुर्नगठन की व्यवस्था शामिल है। 1924 में गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिक की सैद्धांतिक नीव पर वर्थीमर ने कहा कि जब एक साथ होते हैं, जैसे कि वे काम पर होते हैं, तो सबसे अप्राकृतिक व्यवहार करते हैं, परन्तु जब वे सामान्य परिस्थितियों में होते हैं तो वे सामान्य रूप से काम करते हैं।

8. यदि किसी व्यक्ति की कालक्रमिक आयु 20 वर्ष और उसकी मानसिक आयु 16 वर्ष है तो उसकी बुद्धि लब्धि क्या होगी?

Correct Answer: (e) (*)
Solution:

कालक्रमिक आयु (Cronical Age) = 20 वर्ष
मानसिक आयु(Mental Age) = 16 वर्ष
बुद्धि-लब्धि = ?
Note : NTA ने इस प्रश्न के उत्तर को (b) माना है

9. कोलबर्ग के अनुसार निम्न वक्तव्य नैतिक विकास की किस अवस्था को परिलक्षित करता है?

"जब व्यक्तियों की ऐसी मान्यता होती है कि नैतिक विकल्प अन्य व्यक्तियों के साथ निकट संबंध पर आश्रित नहीं है और यह कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए समान रूप से नियमों को प्रवर्तन में लाया जाना चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति को इन्हें अक्षुण्ण बनाए रखना चाहिए।"

Correct Answer: (c) सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने का परिबोधन
Solution:

कोलबर्ग के अनुसार सामाजिक व्यवस्था बनाए रखने का परिबोधन नैतिक विकास की अवस्था को परिलक्षित करता है। सामाजिक व्यवस्था अभिविन्यास से आशय किसी कार्य के भौतिक परिणाम से है।

10. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन 'उत्तरदायित्व का विसरल' सप्रत्य की व्याख्या करता है?

Correct Answer: (b) किसी आकस्मिक स्थिति का जितनी अधिक संख्या में साक्ष्य होता है, प्रभावित लोगों को सहायता मिलने की संभावना उतनी ही कम होती है।
Solution:

किसी आकस्मिक स्थिति का जितनी अधिक संख्या में साक्ष्य होता है, प्रभावित लोगों को सहायता मिलने की संभावना उतनी ही कम होती है। यह कथन 'उत्तरदायित्व का विसरल' संप्रत्य की व्याख्या करता है।