परीक्षण के मदों का दो प्रकार से विश्लेषण किया गया। एक मद-बाकी मद सह-सम्बन्ध तथा दूसरा मद विभेदीकरण सूचकांक। मद-विभेदीकरण सूचकांक प्राप्त करने के लिए उसने 27 से नीचे वालों को नित्न अंकगणक तथा 73 से ऊपर वालों को उच्च अंकगणक विषयी (पी. 27 तथा पी. 73 के मूल्य पूरी संख्या में हो)।
विभेदीकरण सूचकांक की सांख्यिकी सार्थकता का निर्धारण किया गया। अन्ततः मद विश्लेषण में 90 मद रखे गए। फिर इस नयें संस्करण को नये 400 विषयियों के प्रतिदर्श पर प्रशासित किया गया। क्रोनबैक एल्फा का निर्धारण किया
परन्तु उसने यह भी सोचा कि परीक्षण की के. आर. विश्वसनीयता की भी जांच की जाए क्योंकि क्रोनबैक एल्फा उच्च 947 था तथा परीक्षण काफी लम्बा है तो उसने परीक्षण के दो समानान्तर प्रारूप तैयार करने का निर्णय लिया जिसमें प्रत्येक में 45 मद होंगे प्रारूप (A) और (B) में यादृच्छित रूप से 45-45 मद रखें।
प्रत्येक प्रारूप के लिए उसने औसत अन्तमद सहसम्बन्ध, मध्यमान, मानक विचलन तथा क्रोनबैक एल्फा की गणना की गई। दोनों प्रारूपों ने समानान्तर प्रारूप के आधारभूत मानदण्ड प्राप्त किए।
निम्न गणक समूह में 30 विद्यार्थियों ने प्रथम मद पास किया तथा उच्चगणक समूह में 56 विद्यार्थियों ने पास किया। इस आधार पर मद न. I का विभेदीकरण सूचकांक क्या होगा?