जहां किसी व्यक्ति अथवा किसी व्यक्ति पर्यवासित समूह को कोई विधिक त्रुटि होती है या उन्हें कोई विधिक क्षति पहुंचती है और इसका कारण किसी संवैधानिक अथवा विधिक अधिकार का उल्लंघन है और ऐसा व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का पर्यवासित समूह निर्धनता, बेबसी या निःशक्तता या सामाजिक अथवा आर्थिक दृष्टि से उपेक्षित दशा में है
और राहत के लिए न्यायालय तक नहीं पहुंच सकता है तो ऐसी दशा में तो उस समूह में से कोई भी व्यक्ति किसी समुपयुक्त निदेश या आदेश अथवा अनुच्छेद 226 के अधीन रिट के निमित्त उच्च न्यायालय में आवेदन (प्रार्थना पत्र) प्रस्तुत कर सकता है
अथवा किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन होने की दशा में अनुच्छेद 32 के अधीन उच्चतम न्यायालय का उपागम ले सकती है। जहां समुदाय के कमजोर तबके यथा बिना विचारण के जेलों में पड़े पैरवी, आगार स्थित संरक्षण गृह में अभिरक्षा में रखे गए
व्यक्तियों अथवा गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे अजमेर जिले के सड़क निर्माण में कार्यरत हरिजन कर्मकार जो अपना खून पसीना बहाकर किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं, जो शोषणकारी समाज के निस्सहाय पीड़ित हैं और जिन्हें न्याय प्राप्त करने का साधन सुलभतापूर्वक उपलब्ध नहीं है, का संबंध है,
उच्चतम न्यायालय जनहित में कार्य करने वाले व्यक्ति द्वारा इन दुर्बल, निःसहाय और कमजोर तबके को राहत देने के आशय से नियमित रिट याचिका दायर करने पर बल नहीं देगा। उच्चतम न्यायालय जनहित में कार्य करने वाले ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रेषित पत्र का तत्काल प्रत्योत्तर देगा।
यह सत्य है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा नियम बनाए गए हैं जिसमें अनुच्छेद 32 के अधीन राहत के लिए जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया विहित भी की गई है और याचिका दायर करने वाले व्यक्ति को विभिन्न औपचारिकताओं से गुजरने की भी अपेक्षा की गई है।
किन्तु इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि प्रक्रिया (कार्यविधि) निश्चित तौर पर निर्धारित है, किन्तु यह केवल न्याय प्राप्ति का साधन मात्र है और न्याय प्राप्त के मार्ग में किसी भी प्रक्रियात्मक तकनीकी संबंधी अवयवों को प्रबाधक बनने की अनुमति नहीं दी जायेगी।
अतएव न्यायालय अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिना किसी झिझक के कार्य संचालन संबंधी तकनीकी प्रक्रियात्मक नियमों को शामिल करता है और जन हितैषी व्यक्ति द्वारा प्रेषित पत्र का रिट याचिका मानेगा और इस पर कार्रवाई करेगा।
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत कोई व्यक्ति पी. आई. एल. के मामलों में किस उपयुक्त उपचार के लिए सर्वोच्च न्यायालय को एक आवेदन दे सकता है
Correct Answer: (d) अनुच्छेद-32
Solution:भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति पी. आई. एल. के माध्यम से उपयुक्त उपचार के लिए सर्वोच्च न्यायालय को आवेदन कर सकता है।