यू.जी.सी. एनटीए नेट /जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 (विधि)

Total Questions: 100

91. निम्नलिखित गद्यांश को सावधानीपूर्वक पढ़ें और प्रश्न के उत्तर दीजिए :

एक यह है कि, शक्ति का मनमाने ढंग से प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि उसका उस प्रयोजन के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए, जिसके लिए यह प्रदत्त किया गया है। इसका यह भी अर्थ है कि शक्ति का संविधिक क्षेत्र के भीतर प्रयोग किया जाना चाहिए,

और उसका तात्पर्यतः प्रयोग न सिर्फ अधिकारातीत होगा, बल्कि 'मनमाने शब्द के अर्थ में भी सही होगा। लेकिन, माध्यस्थन की साधारण रूप से अस्वीकृति विधि के शासन के मूल्यों के संरक्षण के लिए पर्याप्त नहीं है।

भारतीय न्यायालयों ने इससे आगे बढ़ कर विधि के शासन की विशिष्ट सकारात्मक विषयवस्तु पर बल दिया है। इसमें नैसर्गिक न्याय के नियम शामिल हैं, जिनका न सिर्फ अर्द्ध न्यायिक कार्यवाई, बल्कि विशुद्ध रूप से प्रशासनिक कार्यवाई में भी पालन किया जाना चाहिए।

न्यायिक व्याख्या के अनुसार नैसर्गिक न्याय की आवश्यकताओं का कार्य क्षेत्र और विषयवस्तु समय-समय पर भिन्न-भिन्न रही हैं, लेकिन इन पर व्यापक रूप से बल बना रहता हैं। इसके अतिरिक्त, निर्णय के आधार के रूप में सूचना तक पहुँच भारतीय न्यायपालिका की पहले से ही एक महत्त्वपूर्ण व्यस्तता रही है

क्योंकि इसमें किसी भी विध्न की प्रशासनिक कार्यवाई की न्यायिक समीक्षा में बाधा डालने की प्रवृत्ति होती है। इसका अर्थ है कि न्यायालयों ने समय-समय पर बल दिया है। कि प्रशासनिक शक्ति का प्रयोग कारण के साथ देना चाहिए,

यद्यपि इस दायित्व की ठीक-ठीक स्थिति का कारण देना अभी भी अनवधार्य है। साथ ही राज्य ने अपने आर्थिक क्रियाकलापों की प्राप्ति लिए विधि के शासन की धारणा का निरंतर विस्तार किया है।

विधि शासन हैं :

Correct Answer: (a) मनमानेपन की अस्वीकृति
Solution:विधि शासन का अर्थ है मनमानेपन की अस्वीकृति । अर्थात् शक्ति का मनमाने ढंग से प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। विधि शासन का अर्थ है कि कानून सर्वोपरि है तथा वह सभी लोगों पर समान रूप से लागू होती है।

92. 'विधि के शासन' की धारणा का किसकी प्राप्ति के लिए विस्तार किया गया है?

Correct Answer: (b) राज्य द्वारा सभी क्रियाकलापों में उचित संव्यवहार
Solution:विधि के शासन की धारणा का विस्तार राज्य द्वारा सभी क्रियाकलापों में उचित संव्यवहार के लिए किया गया है। राज्य ने अपने आर्थिक क्रियाकलापों की प्राप्ति के लिए विधि के शासन की धारणा का निरंतर विस्तार किया है।

93. 'विधि शासन' में अंतर्निहित है :

Correct Answer: (a) कोई भी विधि के ऊपर नहीं है
Solution:विधि शासन का अर्थ है कि कानून विधि सर्वोपरि है, कोई भी विधि के ऊपर नहीं है तथा यह समान रूप से सभी लोगों पर लागू होती है।

94. किन परिस्थितियों में शक्ति का मनमाने ढंग से प्रयोग किया जाना चाहिए?

Correct Answer: (c) किसी भी परिस्थिति में नहीं
Solution:किसी भी परिस्थिति में शक्ति का मनमाने ढंग से प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए इसका अर्थ यह है कि उसका उस प्रयोजन के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए जिसके लिए वह प्रदत्त किया गया है।

95. 'विधि शासन' की विशिष्ट विषयवस्तुः

Correct Answer: (a) का अनिवार्यतः पालन किया जाना चाहिए
Solution:विधि शासन की विशिष्ट विषयवस्तु का अनिवार्यतः पालन किया जाना चाहिए। इसमें नैसर्गिक न्याय के नियम भी शामिल हैं जिनका न सिर्फ अर्द्ध न्यायिक बल्कि विशुद्ध रूप से प्रशासनिक कार्यवाही में भी पालन किया जाना चाहिए।

96. निम्नलिखित गद्यांश को सावधानीपूर्वक पढ़े और दिए गए वस्तु-वस्तु से संबंधित तथ्य के आधार पर प्रश्न (96-100) के उत्तर दीजिए :

जहां किसी व्यक्ति अथवा किसी व्यक्ति पर्यवासित समूह को कोई विधिक त्रुटि होती है या उन्हें कोई विधिक क्षति पहुंचती है और इसका कारण किसी संवैधानिक अथवा विधिक अधिकार का उल्लंघन है और ऐसा व्यक्ति अथवा व्यक्तियों का पर्यवासित समूह निर्धनता, बेबसी या निःशक्तता या सामाजिक अथवा आर्थिक दृष्टि से उपेक्षित दशा में है

और राहत के लिए न्यायालय तक नहीं पहुंच सकता है तो ऐसी दशा में तो उस समूह में से कोई भी व्यक्ति किसी समुपयुक्त निदेश या आदेश अथवा अनुच्छेद 226 के अधीन रिट के निमित्त उच्च न्यायालय में आवेदन (प्रार्थना पत्र) प्रस्तुत कर सकता है

अथवा किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन होने की दशा में अनुच्छेद 32 के अधीन उच्चतम न्यायालय का उपागम ले सकती है। जहां समुदाय के कमजोर तबके यथा बिना विचारण के जेलों में पड़े पैरवी, आगार स्थित संरक्षण गृह में अभिरक्षा में रखे गए

व्यक्तियों अथवा गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहे अजमेर जिले के सड़क निर्माण में कार्यरत हरिजन कर्मकार जो अपना खून पसीना बहाकर किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं, जो शोषणकारी समाज के निस्सहाय पीड़ित हैं और जिन्हें न्याय प्राप्त करने का साधन सुलभतापूर्वक उपलब्ध नहीं है, का संबंध है,

उच्चतम न्यायालय जनहित में कार्य करने वाले व्यक्ति द्वारा इन दुर्बल, निःसहाय और कमजोर तबके को राहत देने के आशय से नियमित रिट याचिका दायर करने पर बल नहीं देगा। उच्चतम न्यायालय जनहित में कार्य करने वाले ऐसे व्यक्ति द्वारा प्रेषित पत्र का तत्काल प्रत्योत्तर देगा।

यह सत्य है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा नियम बनाए गए हैं जिसमें अनुच्छेद 32 के अधीन राहत के लिए जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया विहित भी की गई है और याचिका दायर करने वाले व्यक्ति को विभिन्न औपचारिकताओं से गुजरने की भी अपेक्षा की गई है।

किन्तु इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि प्रक्रिया (कार्यविधि) निश्चित तौर पर निर्धारित है, किन्तु यह केवल न्याय प्राप्ति का साधन मात्र है और न्याय प्राप्त के मार्ग में किसी भी प्रक्रियात्मक तकनीकी संबंधी अवयवों को प्रबाधक बनने की अनुमति नहीं दी जायेगी।

अतएव न्यायालय अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए बिना किसी झिझक के कार्य संचालन संबंधी तकनीकी प्रक्रियात्मक नियमों को शामिल करता है और जन हितैषी व्यक्ति द्वारा प्रेषित पत्र का रिट याचिका मानेगा और इस पर कार्रवाई करेगा।

भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत कोई व्यक्ति पी. आई. एल. के मामलों में किस उपयुक्त उपचार के लिए सर्वोच्च न्यायालय को एक आवेदन दे सकता है

Correct Answer: (d) अनुच्छेद-32
Solution:भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के अन्तर्गत कोई भी व्यक्ति पी. आई. एल. के माध्यम से उपयुक्त उपचार के लिए सर्वोच्च न्यायालय को आवेदन कर सकता है।

97. उस सर्वप्रथम मामले को चुनिए, जिसमें जनहित याचिका (पी.आई.एल.) को लागू किया गया थाः

Correct Answer: (d) मुंबई कामगार सभा बनाम अब्दुल भाई
Solution:मुंबई कामगार सभा बनाम अब्दुल भाई (1976 SC) के मामले में सर्वप्रथम जनहित याचिका (PIL) को लागू किया गया था।

98. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत आवश्यक है कि सर्वोच्च न्यायालय में न्याय पाने का इच्छुक व्यक्ति विभिन्न प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं से गुजरे । सही विकल्प चुनिए :

A.  पी.आई.एल. में भी सभी तकनीकी औपचारिकताओं का पालन करना आवश्यक है।
B. ऐसे मामलों में तकनीकी औपचारिकताओं का पालन करना आवश्यक नहीं है।
C.  सर्वोच्च न्यायालय एक संबोधित किए गए पत्र को भी समादेश याचिका के रूप में मान सकता है।
D. ऐसे मामलों में सुने जाने के अधिकार के नियम में ढील नहीं दी जाती है।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :

Correct Answer: (b) केवल B और C
Solution:अनुच्छेद 32 के अधीन राहत के लिए जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया विहित की गई है लेकिन ऐसे मामलों में तकनीकी औपचारिकताओं का पालन करना आवश्यक नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय पत्र को भी समादेश याचिका के रूप में मान सकता है।

99. पी.आई.एल. मामले हैं :

Correct Answer: (c) जन-हित के मामले
Solution:पी. आई. एल. के मामले जन-हित के मामले हैं। कानून की दृष्टि से PIL का मतलब जनहित की सुरक्षा के लिए याचिका दर्ज करना है। यह पीड़ित पक्ष द्वारा नहीं बल्कि स्वयं न्यायालय या किसी अन्य निजी व्यक्ति द्वारा विधिक अदालत में पेश किया गया मुकदमा है।

100. जनहित याचिका के मामलों में उच्चत्तम न्यायालय नियमित तौर पर इस बात पर जोर दिया है कि यह जन हितार्थ की भावना से कार्य करने वाले व्यक्ति द्वारा दायर किया जाना चाहिए। इस संदर्भ में सही विकल्प चुनिएः

Correct Answer: (e) *
Solution:उच्चतम न्यायालय ने सदैव इस बात पर जोर दिया है कि जनहित याचिका जन हितार्थ की भावना से कार्य करने वाले व्यक्ति द्वारा दायर किया जाना चाहिए।

नोट- NTA ने उपर्युक्त प्रश्न को हटा दिया है।