यू.जी.सी. एनटीए नेट /जेआरएफ परीक्षा, जून-2023 (विधि)

Total Questions: 100

61. जस कोजेन्स का सिद्धांत वियना कन्वेशन ऑन लॉ ऑफ ट्रीटीज 1969 के किस अनुच्छेद से समाहित किया गया है?

Correct Answer: (c) अनुच्छेद 53
Solution:जस कोजेन्स का अर्थ होता है सम्मोहक कानून (Compelling law)। ये अंतर्राष्ट्रीय कानून में ऐसे नियमों को संदर्भित करते हैं

जो बाध्यकारी या आधिकारिक हैं और कोई भी देश इनके अनुपालन से इनकार नहीं कर सकता है। वियना कन्वेंशन आन लॉ ऑफ ट्रीटीज 1969 के अनुच्छेद 53 में 'जस कोजेन्स' का सिद्धांत समाहित किया गया है।

62. निम्नांकित में से कौन सा कथन गलत है?

Correct Answer: (d) पेटेंट के लिए आवेदन करने से पूर्व आविष्कार को प्रकाशित कर इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
Solution:पेटेंट अधिनियम 1970 के अध्याय 4 के तहत पेटेंट आवेदन को प्रकाशित करने की अपेक्षा की गई है किन्तु ऐसा प्रकाशन पेटेंट के लिए आवेदन करने के पश्चात् किया जायेगा।

अतः यह कथन कि पेटेंट के लिए आवदेन करने से पूर्व आविष्कार को प्रकाशित कर इसका प्रचार-प्रसार किया जायेगा धारा 11A के तहत गलत है।

63. भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 28 में उपबंध है :

Correct Answer: (c) ग्राम्य वन
Solution:भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 28 में ग्राम्य वन उपबंधित है।

वन बन्दोबस्त अधिकारी की शक्ति - धारा 8
आरक्षित वन - धारा 20
संरक्षित वन/ क्षेत्र - धारा 29

64. हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 के अधीन क्रूरता के संबंध में निम्नांकित में से कौन से कथन सही हैं।

A. सभी परिस्थितियों के लिए उपयुक्त क्रूरता की परिभाषा देना अत्यंत कठिन है।
B. क्रूरता शारीरिक और मानसिक दोनों हो सकती है।
C. क्रूरता के मामलों में आशय
की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
D.  क्रूरता का लक्ष्य याचिकाकर्ता पर होना चाहिए।
E. शिकायत किया गया कार्य प्रतिदायी द्वारा किया गया होना चाहिए।

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A, B
Solution:हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के अन्तर्गत क्रूरता को न्यायिक पृथक्करण तथा विवाह विच्छेद दोनों के आधार के रूप में उल्लेख किया गया है। क्रूरता शारीरिक या मानसिक हो सकती है लेकिन सभी परिस्थितियों में क्रूरता की एक सार्वभौमिक परिभाषा देना अत्यन्त कठिन है।

65. नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

A.  अन्तर्राष्ट्रीय विधि में प्रत्यर्पण के मामले में राज्यों के सामान्य कर्तव्य को मान्यता दी गई है।
B. अन्तर्राष्ट्रीय विधि में प्रत्यर्पण के मामले में राज्यों के सामान्य कर्तव्य को मान्यता नहीं दी गई है।
C. प्रत्यर्पण विद्यमान प्रत्यर्पण संधियों के उपबन्धों पर निर्भर होता है।
D. देश बिना किसी संधि के प्रत्यर्पण की अनुमति दे सकते हैं।
E. प्रत्यर्पण परंपरागत रूढ़िगत अन्तरराष्ट्रीय विधि से शासित होता है।

Correct Answer: (d) केवल B, C, D
Solution:अन्तर्राष्ट्रीय विधि में प्रत्यर्पण से सम्बन्धित नियम मुख्य रूप से इस कारण सुस्थापित नहीं हैं क्योंकि प्रत्यर्पण एक ऐसा विषय है जो पूर्ण रुप से अन्तर्राष्ट्रीय विधि के अधिकार क्षेत्र के अन्तर्गत नहीं आता है। प्रत्यर्पण विधि दोहरी विधि है।

इसका प्रभाव राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय विधि दोनों में होता है। किसी व्यक्ति के प्रत्यर्पण करने या न करने का निर्णय राष्ट्रीय न्यायालयों द्वारा किया जाता है।

वर्तमान समय में किसी बहुपक्षीय संधि या अभिसमय के अभाव में राज्यों द्वारा प्रत्यर्पण द्विपक्षीय संधियों के आधार पर किया जाता है। जिसमें राष्ट्रीय विधि के अनुसार प्रावधान किये जाते हैं।

66. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में:

अभिकथन A: विधि न्यायसंगत नहीं हो सकते हैं यद्यपि शाश्वत कल्याण के विरुद्ध होने के कारण ऐसी विधियाँ अत्याचारियों की विधियाँ हैं, इस प्रकार की विधियों का किसी भी प्रकार से पालन नहीं किया जाना चाहिए।
कारण R: एकस्टर्नमेंट ऑडेर का कोई प्रभाव नहीं होता है और इसका उल्लंघन कोई अपराध नहीं है।

उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (e) *
Solution:विधि न्यायसंगत तथा अन्यायपूर्ण हो सकती है। सेंट थामस एक्वीनास ने अवधारित किया है कि अन्यायपूर्ण विधि शाश्वत कल्याण के विरुद्ध होने के कारण ऐसी विधियाँ अत्याचारियों की विधि कहलाती है तथा इस तरह की विधियों का किसी भी प्रकार से पालन नहीं किया जाना चाहिए।

एकस्टर्नमेट आर्डर (निर्वासन आदेश) कोई सामान्य उपाय नहीं है और इसका संयम से और असाधारण परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। निर्वासन आदेश का विधिक प्रभाव होता है और इसका उल्लंघन दण्डनीय है। नोट- NTA ने उपर्युक्त प्रश्न को हटा दिया है।

67. 'कन्सेप्ट ऑफ लॉ' पुस्तक के लेखक हैं:

Correct Answer: (d) एच.एल.ए. हार्ट
Solution:कन्सेप्ट ऑफ लॉ पुस्तक के लेखक एच. एल. ए. हार्ट हैं।

68. नीचे दो कथन दिए गए हैं: एक अभिकथन (A) के रूप में लिखित है तो दूसरा उसके कारण (R) के रूप में :

अभिकथन A: देवदत्त बनाम भारत संघ (2008) के वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर बल दिया है कि नैसर्गिक न्याय में पारदर्शिता और सुशासन को नये आयाम के रूप में जोड़ा गया है जिसमें तर्क देने हेतु कर्तव्य शामिल है।
कारण R: तर्क इस बात की पुष्टि करते हैं कि निर्देश प्रासंगिक आधारों पर निर्णयकर्ता द्वारा और असंबद्ध प्रतिफलों की अवहेलना करने द्वारा संपादित किए जाते हैं।

उपरोक्त कथन के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर का चयन कीजिए।

Correct Answer: (a) A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
Solution:देवदत्त बनाम भारत संघ (2008) के मामले में उच्चतम न्यायालय ने इस पर बल दिया है कि नैसर्गिक न्याय में पारदर्शिता और सुशासन को नये आयाम के रूप में जोड़ा गया है। जिसमें तर्क देने हेतु कर्तव्य शामिल है।

तर्क इस बात की पुष्टि करते हैं कि निर्देश प्रासंगिक आधारों पर निर्णयकर्ता द्वारा और असंबद्ध प्रतिफलों की अवहेलना करने द्वारा संपादित किये जाते हैं।

69. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 के अधीन राज्य को निम्नलिखित का प्रयास करने का निर्देश दिया गया हैः

A. अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा की अभिवृद्धि करने
B. राष्ट्रों के मध्य न्यायोचित और सम्मानजनक संबंध बनाए रखना
C. अंतर्राष्ट्रीय विधि और संधि के बाध्यताओं (दायित्वों) के लिए सम्मान को प्रोत्साहित करना
D. पर्यावरण का संरक्षण और सुधार करना तथा वनों का संरक्षण
E. माध्यस्थम के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विवादों के निस्तारण को बढ़ावा देना

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (b) केवल A, B, C, E
Solution:भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 के अधीन राज्य को निम्नलिखित प्रयास करने का निदेश दिया गया है-
A. अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा की अभिवृद्धि करना,
B. राष्ट्रों के मध्य न्यायोचित और सम्मानजनक संबंध बनाए रखना,
C. अन्तर्राष्ट्रीय विधि और संधि की बाध्यताओं के लिए सम्मान को प्रोत्साहित करना,
D. माध्यस्थम के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विवादों के निस्तारण को बढ़ावा देना।

70. सूची I का सूची II से मिलान कीजिए

सूची Iसूची II
A. कठोर दायित्वI. अपमान वचन (अपवाद)
B. मानहानिकारक कथन का प्रकाशनII. राइलैंड्स बनाम फ्लेचर
C. कुछ स्थायी रूप में दिया गया मानहानि-कारक कथन का प्रतिनिधित्वIII. देव कृत्य
D. विस मेजरIV. अपमान लेख (अपलेख)

निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

Correct Answer: (c) A-II, B-I, C-IV, D-III
Solution:सूची I का सूची II के साथ मिलान निम्न है-
A. कठोर दायित्व - राइलैण्ड्स बनाम फ्लेचर
B. मानहानिकारक कथन का प्रकाशन - अपमान वचन (अपवचन)
C. कुछ स्थायी रूप में दिया मानहानिकारक कथन का प्रतिनिधित्व - अपमान लेख (अपलेख)
D.विस मेजर - दैव कृत्य